Home Tags कमलनाथ

Tag: कमलनाथ

कमलनाथ का बड़ा बयान,23 को राजभवन का घेराव करेगी कांग्रेस

0

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने आज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा ऐलान किया है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने देश के किसानों पर जबरजस्ती तीन काले कानून थोपने का काम किया है किसानों की लड़ाई में कांग्रेस उनके साथ है।

कमलनाथ ने कहा कि हम किसानों के साथ डटकर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं इसी क्रम में हम 15 से 23 तारीख तक प्रदेश और देश की गूंगी बहरी सरकार को जगाने के उद्देश्य पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन करेंगे।

कमलनाथ के अनुसार 7 तारीख से 15 तारीख तक ब्लॉक कांग्रेस कमेटी जिला कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन करेगी।

15 तारीख को पूरे प्रदेश में चक्का जाम का आयोजन किया गया है,20 तारीख को मुरैना में किसान महापंचायत बुलाई जाएगी जहां पूरे प्रदेश के किसान नेता और किसानों के प्रतिनिधि एक साथ एक मंच पर रहेंगे।

23 तारीख को कांग्रेस पार्टी,किसानों और पूरे प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के राजभवन का शांति पूर्वक घेराव करेगी।

इस दौरान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह,पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी,अरुण यादव,पूर्व मंत्री जीतू पटवारी,पीसी शर्मा उपस्थित रहे।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कमलनाथ के बंगले पर दिया धरना

0

भोपाल: रतलाम से आये कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी जताते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के बंगले के बाहर धरना दिया। सोमवार शाम करीब 5 बजे अपनी ही पार्टी के विधायक से नाराज रतलाम कांग्रेस जिला अध्यक्ष योगेंद्र सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कमलनाथ के बंगले के बाहर अपना विरोध प्रदर्शन किया।

नाराज कार्यकर्ताओं ने अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपनी बात अपने पार्टी प्रमुख को बताने आये हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा बनाये गए नियम कानून और सिस्टेम का पालन नही किया जा रहा हूं। ऐसे में प्रदेश में पार्टी का अस्तित्व खत्म हो जाएगा और इतना ही नही बल्कि अन्य जगहों से आये छोटी एवं क्षेत्रीय पार्टी प्रदेश में अपने आप स्थापित कर लेंगी।

कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी के रतलाम के आलोट से विधायक मनोज चावला के कार्य प्रणाली से नाराज चल रहे हैं और यही कारण है कि उनका आक्रोश पीसीसी चीफ के बंगले तक पहुच गया। रतलाम के कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यह आरोप है कि  विधायक अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज करा रहे है।

पार्टी संगठन बिना किसी जांच के विधायक की शिकायत पर पार्टी के कार्यकर्ताओं पर कार्यवाही कर रही है।

निष्काषित जिला कार्यवाहक कांग्रेस अध्यक्ष योगेंद्र सिंह का कहना है कि पार्टी उनके कार्य को समझ नही रही है। जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी उनकी तारीफ करते हैं परंतु प्रदेश में उनके कार्यों को सराहा नही जा रहा है।

कोविड केयर सेंटर बन्द करने पर गरमाई प्रदेश की राजनीति: कमलनाथ बोले मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रही है सरकार

0

प्रदेश में कोविड केयर सेंटर बन्द करने पर प्रदेश की राजनीति गर्मा गयी है सेंटर बन्द करने पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने सरकार पर जुबानी हमला करते हुए सरकार को मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाला बताया है।

सेंटर बन्द करने पर सरकार का तर्क है कि पूरे प्रदेश में संचालित कोविड केयर सेंटर अब खाली हो चुके हैं ऐसे में पूरे प्रदेश में इन्हें चालू किये रहना फिजूलखर्ची है क्योंकि अब सिर्फ मामूली लक्षण वाले संदिग्ध मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय मध्यप्रदेश शासन ने 31 दिसंबर को जारी एक आदेश में बताया है कि राजधानी भोपाल को छोड़कर अन्‍य सभी जगहों पर कोविड केयर सेंटरों को बंद कर दिया है। ये वास्तव में ऐसे सेंटर थे, जिन्हें मामूली लक्षण वाले संदिग्ध मरीजों को भर्ती करने के लिए बनाया गया था।


MP स्वास्थ्य संचालनालय के अपर संचालक आईडीएसपी ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर जरूरत पड़ी तो इन सेंटरों को दोबारा चालू किया जा सकता है लेकिन इसके लिए राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी।

इस निर्णय के पीछे सरकार का तर्क है कि इन सेंटरों में मरीजों की संख्या न के बराबर थी और कुछ केंद्र तो खाली पड़े हुए थे। हालांकि भोपाल में किसी भी कोविड केयर सेंटर को प्रोटोकॉल के तहत संचालित रखने के निर्देश भी दिए हैं।

शिवराज सरकार अजब गजब है- कमलनाथ

इधर सरकार के इस निर्णय पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में कोरोना से मौतें जारी हैं, संक्रमण का आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।


सरकार ने विधानसभा का सत्र तक कोरोना के भय से निरस्त कर दिया इसके बाबजूद शिवराज सरकार ने भोपाल को छोड़कर प्रदेश के सभी कोविड केयर सेंटर क्यों बंद किये ये समझ के बाहर है।

इसपर प्रतिक्रिया देते हुए युवक कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी ने कहा कि सरकार को सिर्फ अपनी जेब भरने से मतलब है उसे आमजनता से कोई सरोकार नहीं है यही कारण है कि पूरे प्रदेश में कोरोना सेंटर बन्द करके यह सरकार मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है।

40 दिन 40 सवाल- कमल नाथ ने स्वास्थ सेवाएं को लेकर पूछा दूसरा सवाल

0

 

भाजपा सरकार से 40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने प्रदेश की स्वाथ्य घोषणाओं और उनकी जमीनी स्तर की सच्चाई को उठाते हुए शिवराज सरकार से दूसरा सवाल पूछा है। कमलनाथ ने केंद्र सरकार के आकड़ों को पेश करते हुए मध्यप्रदेश को बीमारियों का अड्डा बताया है। साथ ही सरकार पर स्वाथ्य सेवाओं का बेड़ा गर्क करने का आरोप भी लगाया है। 

सवाल नंबर दो

मामा , क्या यही है तुम्हारी घोषणा और सच्चाई का फ़र्क ?
क्यों मप्र को बना दिया बीमारियों का नर्क ?’
कल मोदी सरकार ने बताया था कैसे हुआ मप्र की स्वास्थ्य सुविधाओं का बेड़ा गर्क ;


आज उन्हीं से सुनिये प्रदेश कैसे बन गया बीमारियों का नर्क:-


1) मप्र में पिछले 2 सालों में (2016-2017) एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन से 35 लाख 81 हजार 936 लोग पीड़ित हुए।
2) पिछले 2 सालों में (2016-2017) एक्यूट डायरिया से 14 लाख 80 हजार 817 लोग पीड़ित हुए।
3) पिछले 5 सालों में गंभीर संक्रामक बीमारियों से 3 लाख़ 91 हजार 18 लोग पीड़ित हुए।
4) पिछले 2 सालों में टाइफाॅइड से 2,29,532 लोग पीड़ित हुए ।
5) मप्र में 1आदमी के ग्रामीण क्षेत्र में अस्पताल में 1बार भर्ती होने पर औसत खर्च 25961रु आता है,जो बड़े राज्यों में सबसे अधिक की श्रेणी में है।जो बिहार जैसे राज्य में 15237रु,तमिलनाडु में 16042रु,उप्र में 15393 रु है।
6) पूरे देश में मप्र में सर्वाधिक 42.8% अर्थात 48 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हैं ।
7) मप्र के 68.9 % बच्चे खून की कमी के शिकार और 15 से 49 साल की 52.4% महिलाएं खून की कमी की शिकार हैं ।
8) मप्र में एक साल तक के बच्चों की मृत्यु दर देश में सबसे अधिक 47 अर्थात 90 हज़ार बच्चे अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते और मौत की आगोश में समा जाते हैं ।
9) बिहार, उत्तर प्रदेश के बाद तीसरा राज्य मप्र है,जहाँ कुल प्रजनन दर सर्वाधिक (टोटल फर्टिलिटी रेट ) 3.1 है।
10) मध्यप्रदेश में 89.6% महिलाओं की पूरी गर्भावस्था के दौरान पूरी जाँच नहीं होती ।
11) मध्यप्रदेश में 46% बच्चों का सम्पूर्ण टीकाकरण नहीं होता।
सोर्स :- NFHS – 4, NHP – 2018 केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”
“हार की कगार पर, मामा सरकार”

राहुल गांधी काट रहे है मंदिर-मस्जिद और गुरुद्वारे के चक्कर,दूसरी और दिग्विजय ने पार्टी से बनाई दूरियां

0

मध्यप्रदेश दौरे के दूसरे दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को ग्वालियर किले में स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेकने पहुंचे। वे यहां करीब 10 मिनट रहे। उन्हें यहां सरोपा भेंट किया गया। उनके साथ कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पहुंचे। वे मुरैना में शाम को करीब 46 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे। राहुल ने सोमवार को दतिया में पीताम्बरा पीठ, ग्वालियर के अचलेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने शाम को यहां की मोती मस्जिद में इबादत भी की थी। राहुल मंगलवार को ही श्योपुर में मेला मैदान पर आम सभा को संबोधित करेंगे।

पीताम्बरा पीठ में राहुल ने पीली धोती पहनकर प्रवेश किया। ग्वालियर के अचलेश्वर मंदिर में भी अभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने रोड शो किया। अचलेश्वर मंदिर में अभिषेक के दौरान पंडित ने उन्हें जल से भरा लौटा दिया तो राहुल ने तपाक से कहा- इसमें दूध नहीं है। इसके बाद उसमें दूध डाला गया। पूजा के दौरान पंडित ने राहुल के माथे पर चंदन से त्रिपुंड बनाया। जामा मस्जिद में मसाजिद कमेटी के नाजिम खान ने राहुल को मक्का-मदीना से लाई गई चादर भेंट की। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके साथ थे।

दिग्विजय कांग्रेस की रैलियों में नहीं आएंगे नज़र,नहीं करेंगे कोई प्रचार

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पार्टी की किसी भी रैली में ज्यादा नहीं दिखाई देते है। इससे कांग्रेस में गुटबाज़ी साफ़ दिखाई दे रही है। हाल ही में दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस वीडियों में वो पार्टी के कार्यकर्ताओं से बात करते नजर आ रहे हैं और साफ तौर पर कह रहे हैं, मेरे भाषणों से कांग्रेस के वोट कटते हैं, इसलिए मैं रैलियों में नहीं जाता।

बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह का यह वीडियो उस वक्त का है जब वो मध्य प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी के सरकारी बंगले पर पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात पार्टी के कार्यकर्ताओं से हो गई और दिग्विजय सिंह अपनी व्यथा सुनाने लगे। वीडियो में दिग्विजय सिंह ने साफ़ तौर पर यह भी कहा कि देखते रह जाओगे,ऐसे सरकार नहीं बनेगी। जिसको टिकट मिले, चाहे दुश्मन को टिकट मिले, जिताओ। उन्होंने आगे कहा, मेरा काम सिर्फ एक है- कोई प्रचार नहीं, कोई भाषण नहीं। मेरे भाषण देने से तो कांग्रेस के वोट कटते हैं, इसलिए मैं कहीं जाता ही नहीं। इससे साफ़ दिखता है कि दिग्विजय सिंह पार्टी से कटे-कटे नज़र आ रहे है।

बता दें कि राहुल गांधी हाल ही में भोपाल दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान पार्टी के सभी बड़े नेताओं के पोस्टर मौजूद थे लेकिन दिग्विजय सिंह के पोस्टर नजर नहीं आए। हालांकि इसके लिए प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने माफी भी मांगी थी। पार्टी में अपनी स्थिति का एहसास हो जाने के बाद दिग्विजय सिंह ने कार्यकर्ताओं को साफ तौर पर कह दिया है कि पार्टी को जीताने में लग जाओ। इसके साथ ही उन्होंने अपनी स्थित भी साफ कर दी है।

मुख्यमंत्री पद की लड़ाई कहीं मध्यप्रदेश में सत्ता से चूक न जाए कांग्रेस

0

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के पद को लेकर चल रही खींचतान कांग्रेस कहीं सत्ता में आने से चूक न जाए। कांग्रेस में उठ रहीं इस तरह की आशंकाओं को भारतीय जनता पार्टी के नेता लगातार हवा दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी अपने मध्यप्रदेश के दौरे में लगातार चेहरे को लेकर हवा दे रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह चुनाव करो या मरो का चुनाव है। इस चुनाव कांग्रेस यदि सत्ता बनाने से चूक गई तो स्थितियां उत्तरप्रदेश और बिहार जैसी हो जाएंगीं।

पंद्रह साल की भाजपा सरकार से नाराज है वोटर

राज्य में कांग्रेस अब तक चुनाव कोई ऐसा मुद्दा तैयार नहीं कर पाई है, जिसके नारे के सहारे उसका सत्ता से वनवास समाप्त हो जाए। लगातार पंद्रह साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ कमजोर कर चुकी है। पिछले दो विधानसभा चुनाव में नेतृत्व को लेकर जो प्रयोग कांग्रेस पार्टी द्वारा किए गए थे, वे असफल साबित हुए हैं। वर्ष 2008 में पार्टी ने सुरेश पचौरी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में कांग्रेस की सत्ता में वापसी की सबसे ज्यादा संभावनाएं थीं। पांच साल की अवधि में शिवराज सिंह चौहान भारतीय जनता पार्टी के तीसरे मुख्यमंत्री थे। पार्टी में चौहान का नेतृत्व स्वीकार करने वाले लोगों की भी कमी थी।

कांग्रेस की रणनीतिक कमजोरी ने उसे सत्ता से वंचित कर दिया था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कांतिलाल भूरिया के जरिए आदिवासी कार्ड खेल था। पार्टी को इस कार्ड से आदिवासी क्षेत्रों में ही सफलता नहीं मिली। पिछले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के बड़े नेताओं के बीच निपटाओ का भाव उसी तरह देखने को मिला था, जिस तरह वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में मिला था। लोकसभा चुनाव में केन्द्र की सरकार जाने के बाद अरूण यादव को प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व सौंपा गया था। तीन साल से भी अधिक समय तक अध्यक्ष रहने के बाद भी वे अपना और पार्टी का जनाधार मजबूत नहीं कर पाए थे। पार्टी ने उन्हें हटाए जाने के फैसले में भी काफी देरी कर दी थी। उनके स्थान पर अध्यक्ष बनाए गए कमलनाथ राज्य की राजनीति के तौर-तरीके से भी परिचित नहीं है।

उनके व्यवहार को लेकर कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं की यह शिकायत हमेशा रहते है कि वे इस तरह पेश आते हैं जैसे कि केन्द्रीय मंत्री अथवा मुख्यमंत्री हैं। कमलनाथ ने राज्य में अपनी भूमिका को किंग मेकर की तरह पेश किया था। पहली बार वे किंग बनने के लिए उतावले दिखाई दे रहे हैं। सत्तर की उम्र पार कर चुके कमलनाथ का राज्य की राजनीति में नोसिखियापन कई मौकों पर देखने को मिला। मीडिया विभाग में परिवर्तन से लेकर उनके चुनावी मुद्दे तक में इस नौसिखिएपन को समझा जा सकता है। कमलनाथ छिंदवाड़ा के विकास मॉडल से राज्य की पंद्रह साल पुरानी भाजपा सरकार को उखाडना चाहते हैं। छिंदवाड़ा के विकास मॉडल को उभारने के पीछे उनकी सोच पार्टी में मुख्यमंत्री पद के दावेदार दूसरे नेताओं को पीछे करने की है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सार्वजनिक मंचों से दी गई नसीहतों के बाद भी कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया से तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं। राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में चुनाव जीतने की जो रणनीति बनाई है उसमें सिर्फ दो ही चेहरों को केन्द्र में रखा गया है। कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की पंद्रह साल की सरकार को लेकर लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। कांग्रेस इस नाराजगी को अपने पक्ष में मोड़ने का कोई रास्ता हीं ढूंढ पाई है।

सपाक्स और जयस भी बन सकते हैं राह में रोड़ा

कांग्रेस की राह में बड़ी रूकावट सपाक्स और जयस उभर कर सामने आ रही है। दोनों ही वर्ग विशेष की राजनीति कर रहे हैं। सपाक्स संगठन विशेष रूप से ठाकुर, ब्राह्मण एवं वैश्य वर्ग के वोटों की राजनीति कर रहा है। जबकि जयस संगठन आदिवासी वर्ग पर आधारित है। वैसे तो आदिवासी कांग्रेस का प्रतिबद्ध वोटर माना जाता है लेकिन , पिछले दो चुनावों से इसकी कांग्रेस से दूरी साफ दिखाई दे रही है। इस दूरी के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग कारण हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जबलपुर संभाग की कुछ विधानसभा सीटों तक प्रभाव रखती है। इससे मिलने वाले कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त माने जाते हैं।

जयस चुनाव मैदान में कहां और कितने उम्मीदवार उतारता है यह अभी कहना मुश्किल है। सपाक्स जरूर यह दावा कर रहा है कि वह राज्य की सभी 230 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा। स्वभाविक है कि अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटें भी इसमें शामिल हैं। इन आरक्षित सीटों पर संबंधित वर्ग के ही लोगों को उम्मीदवार बनाना होगा। ऐसा होने पर सपाक्स के मूल उद्देश्य पर ही स्वभाविक तौर पर सवाल खड़े हांगे। सपाक्स का जन्म आरक्षण विरोध से हुआ है। सामान्य वर्ग के वोटर के बारे में यह माना जाता है कि वह भाजपा का प्रतिबद्ध वोटर है।

सपाक्स के मैदान में होने से नुकसान भाजपा को होगा ऐसा माना जाना स्वभाविक है। यह वोटर भी चुनाव के वक्त विभाजित होगा। इसका फायदा कितना कांग्रेस को मिलेगा यह कहना मुश्किल है। कांग्रेस वर्तमान राजनीतिक हालात अपने अनुकूल मान रही है। यही वजह है कि पार्टी में अभी से नेता एक-दूसरे के समर्थकों के टिकट कटवाने में लगे हुए हैं। कहा यह जा रहा है कि कांग्रेस के सारे नेता मिलकर सिंधिया की राह को रोकना चाहते हैं। राज्य में एक मात्र सिंधिया का चेहरा ही ऐसा है,जिस पर कोई दाग नहीं है। वोटर के बीच भी लोकप्रिय है।

क्या नरसिंहपुर में आमने-सामने होंगे पचौरी-विवेक तन्खा

0

पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का प्रभाव क्षेत्र माने जाने वाले नरसिंहपुर जिले में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य एवं सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा का दखल बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। तन्खा की पहल पर ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने रविवार को जबलपुर एवं नरसिंहपुर जिले के टिकट के दावेदार नेताओं को बुलाकर चर्चा की है। यह माना जा रहा है कि कांग्रेस नरसिंहपुर सीट से तन्खा को विधानसभा का चुनाव लड़ा सकती है। तन्खा ने इस बात से इंकार किया है कि उनके पुत्र विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

तन्खा ने लड़ा था जबलपुर से लोकसभा का चुनाव

सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा ने लोकसभा का पिछला चुनाव जबलपुर से लड़ा था। वे भारतीय जनता पार्टी के राकेश सिंह के खिलाफ चुनाव हार गए थे। राकेश सिंह वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस में बने नए राजनीतिक समीकरणों में विवेक तन्खा ताकतवर रूप में उभरकर सामने आए हैं। माना यह जाता है कि कमलनाथ,ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह को एक करने में विवेक तन्खा की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। विवेक तन्खा, कमलनाथ के ज्यादा करीबी माने जाते हैं।

कमलनाथ करीबियों में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी माने जाते हैं। सुरेश पचौरी की सलाह पर ही कमलनाथ ने शोभा ओझा को मीडिया विभाग का अध्यक्ष और राजीव सिंह को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रशासन और संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। सुरेश पचौरी के नरसिंहपुर-होशंगाबाद संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं हमेशा ही रहतीं हैं। सुरेश पचौरी नरसिंहपुर और होशंगाबाद की राजनीति में लगातार दिलचस्पी भी दिखाते हैं।

नरसिंहपुर के किसान आंदोलन में भी सुरेश पचौरी ने मुख्यमंत्री के समक्ष किसानों की मांगे रखीं थीं। ऐसे में नरसिंहपुर जिले में टिकट के दावेदारों को विवेक तन्खा के जरिए चर्चा के लिए कमलनाथ द्वारा बुलाया जाना नए राजनीतिक समीकरणों के बनने का संकेत दे रहा है।

कमलनाथ और सीएम शिवराज की ट्विटर पर हुई नोकझोंक,फिर चर्चा में एमपी की सड़क

0

मध्य प्रदेश की सड़क एक बार फिर चर्चा में हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने खराब सड़क की एक फोटो के साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा। इसके बाद उस पर रिप्लाई करते हुए सीएम शिवराज ने उस सड़क की फोटो को बांग्लादेश का बता दिया।

कमलनाथ ने ट्विटर पर लिखा, ‘मामा जी के राज में भ्रष्टाचारी रास्तों की लगी है झड़ी, और वाशिंगटन से अच्छी मख़मली सड़क कर लो घड़ी, भाजपा के सामने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड लजाते हैं, मामाजी जाते जाते तथाकथित विकास को घड़ी कर साथ लिए जाते हैं।

इसके बाद सीएम शिवराज ने रिप्लाई करते हुए लिखा कि, हमारे कांग्रेसी मित्रों का क्या कहना, पहले दिग्विजय जी पाकिस्तान के पुल को भोपाल ले आए, और अब कमलनाथ जी बांग्लादेश की सड़क को मध्य प्रदेश ले आए।

कमलनाथ और सीएम शिवराज की ट्विटर पर इस नोकझोंक के बाद मध्य प्रदेश की सड़कें फिर से चर्चा में आ गईं। साथ ही सीएम शिवराज के उस बयान की याद दिलाने लगी जब उन्होंने अमेरिका में कहा था कि मध्य प्रदेश की सड़कें वॉशिंगटन से भी अच्छी हैं।

राहुल गाँधी ने दतिया मे सभा को संबोधित करते हुए कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों का अपमान किया

0

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 2 दिन के चुनावी दौरे के लिए सोमवार को ग्वालियर पहुंच चुके हैं। राहुल गांधी ने अपने दौरे की शुरुआत मां पीतांबरा देवी के दर्शन से की। शक्तिपीठ में उन्होंने पूजा-अर्चना की,जहाँ उनके साथ मंदिर में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ भी मौजूद हैं।

राहुल अगले दो दिनों तक मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले इलाकों में रोड शो और रैली के जरिए चुनाव प्रचार करेंगे। वहीं सोमवार शाम राहुल गांधी ग्वालियर में रोड शो करेंगे। इस दौरान वह एक दरगाह में जियारत भी करेंगे।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर क्षेत्र में विधानसभा की कुल 34 सीटें हैं। साल 2013 के चुनाव में बीजेपी ने इन 34 सीटों में से 20 सीटों पर कब्जा जमाया था। इससे साफ है कि मध्य प्रदेश में सत्ता में वापसी का सपना देख रही कांग्रेस को इस इलाके में इस बार बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा जिसके लिए पार्टी राहुल गांधी को मैदान में उतारकर उसी की तैयारी कर रही है।

लाइव अपडेट्स

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों का अपमान किया :राहुल गाँधी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाया :राहुल गाँधी

प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों का कर्ज माफ़ नहीं किया:राहुल गाँधी

कांग्रेस की सरकार ने किसानों का क़र्ज़ माफ़ किया है: राहुल गाँधी

सपा का टिकट लौटाकर अर्जुन आर्य कांग्रेस में शामिल,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ लड़ सकते है चुनाव

0

समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अर्जुन आर्य तथा पूर्व विधायक शेखर चौधरी कांग्रेस में शामिल हो गए है। शनिवार को अर्जुन आर्य और शेखर चौधरी कांग्रेस कार्यालय पहुंचे जहाँ उन्होंने कमलनाथ की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ली। बता दें कि सपा आर्य को बुदनी विधानसभा सीट से खड़ा करना चाहती थी, जो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का विधानसभा क्षेत्र है।

ऐसा माना जा रहा है कि अगर अर्जुन आर्य कांग्रेस के टिकट पर बुदनी विधानसभा सीट से खड़े होते हैं तो वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। अर्जुन आर्य ने कहा कि वे मुख्यमंत्री चौहान को सबक सिखाने के लिए कांग्रेस में शामिल हुए है वहीँ पूर्व विधायक शेखर चौधरी ने कहा कि वे अपने घर वापसी से सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।