वरिष्ठ नेता और इंदिरा गांधी की सरकार में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री रहे गुजरात के मोरबी जिले की बाँकानेर रियासत के महाराजा दिग्विजय सिंह का आज निधन हो गया वो 88 वर्ष के थे।
उनके निधार पर शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा “पूर्व केंद्रीय मंत्री, श्री दिग्विजयसिंह ज़ला जी के निधन से नाराज़। उन्होंने गुजरात और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्हें उनकी सामुदायिक सेवा और पर्यावरण के प्रति जुनून के लिए याद किया जाएगा। उनके परिवार के प्रति संवेदना। शांति।”
वही मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त लड़ते हुए लिखा “महाराजा वांकानेर के निधन के बारे में सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ। इंदिराजी की कैबिनेट में एक पर्यावरणविद् और पूर्व मंत्री। उसकी आत्मा को शांति मिलें।”
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वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का निधन,पीएम ने जताया शोक
वैक्सीनेशन लॉन्चिंग में भावुक हुए पीएम, बोले कई हेल्थ वर्कर लौटकर घर नहीं आए उसी का कर्ज उतार रहे हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना वैक्सीनेशन की लॉन्चिंग के दौरान भावुक हो गए भावुक होते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कई हेल्थ वर्कर इस भयंकर महामारी के दौर में लौट के घर नहीं आए हम उसी का कर्ज उतार रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कई हेल्थ वर्कर, डॉक्टर, सफाईकर्मी,नर्सेज जो देश की सेवा में इस भयंकर महामारी से सीधे तौर पर लड़ रहे थे जिन्होंने देश के लिए अपने घर वार छोड़ दिए थे ऐसे लोगों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम प्राथमिकता के आधार पर उन्हें टीके मुहैया करवाएं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में कई विपदाएँ आई कई युद्ध लड़े गए लेकिन यह महामारी एक अदृश्य शत्रु के रूप में हमारे सामने आई थी जिसका अंदाजा ना तो हमारे वैज्ञानिकों को था और न ही हमारे डॉक्टर और सोसाइटी को लेकिन उसके बाद भी हमने इसका डटकर मुकाबला किया और कमजोरी को ही मजबूती में बदलने का काम हमारे डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने किया है
प्रधानमंत्री के अनुसार भारत में 30 जनवरी को पहला को कोरोना का पहला मामला आया था और तभी से देश अलर्ट हो गया था इसी का नतीजा है कि देश में उस स्तर की महामारी नहीं फैल पाई जैसे अन्य देशों में फैल रही थी।
किसान आंदोलन को लेकर जगजीत सिंह दल्लेवाल का बड़ा बयान,कृषि मंत्री को लेकर बोले….
किसान आंदोलन को लेकर किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने बड़ा बयान दिया है। दल्लेवाल ने कहा कि अब यह आंदोलन पंजाब और हरियाणा का नहीं बल्कि देश का आंदोलन बन गया है।
दल्लेवाल के अनुसार अब दिल्ली में एमपी और यूपी के किसानों ने भी डेरा जमाना शुरू कर दिए है और बहुत जल्द यहाँ पूरे देश के किसान आकर हमे अपना समर्थन देने वाले हैं।
एक दूसरे के पूरक है तीनों कानून
किसान नेता के अनुसार पहला कानून किसान की कमर तोड़ेगा दूसरा कानून कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग से किसानों को थोड़ी रोशनी दिखायेगा लेकिन एक समय के बाद किसान खुद को ठगा हुआ महसूस करेगा और तीसरा कानून किसान और उपभोक्ता दोनों वर्ग के लिए हानिकारक होगा।
किसानों के हाथ से जमीन निकलकर कारपोरेट के हाथों में चली जायेगी
किसान नेता ने कहा कि मोदी सरकार किसानों की जमीन किसान के हाथ से निकालकर कॉरपोरेट के हाथों में देने की पूरी योजना बना चुकी है लेकिन हम सभी किसानों का एकमात्र मकसद इस तीनो काले कानूनों को वापस करवाना है।
एमएसपी पर लिखित गारंटी देकर कानून बनाए सरकार
एमएसपी पर सरकार की गारंटी के सवाल पर दल्लेवाल ने कहा कि सरकार किसानों और किसान नेताओं को मूर्ख समझती है अगर मोदी जी और उनकी सरकार को किसानों और एमएसपी की इतनी ही चिंता है तो क्यों सरकार लिखित गारंटी नहीं दे रही? हम चाहते हैं कि सरकार इसपर लिखित गारंटी देकर इसका कानून बनाये।
दल्लेवाल ने कहा अब हमारी लड़ाई किसान के अस्मिता को बचाने की है और हमे इसमे पंजाब के अलावा अन्य राज्यो के लोग सहयोग भी कर रहे है।
पंजाब और हरियाणा के लोग ही आंदोलन में शामिल हैं बाकी देश के किसानों को इससे दिक्कत नही है भाजपा नेताओं के इस आरोप पर जवाब देते हुए दल्लेवाल ने कहा कि आंदोलन से पंजाब का पुराना नाता रहा है। चाहे वो देश के लिए मर मिटने की बात हो या देश को आजाद करवाने की बात हर जगह बागडोर पंजाबियों ने ही संभाली है यही वजह है कि कृषि बिल को लेकर पंजाब के किसानों ने मोर्चा संभाल लिया है।
आंदोलन में पंजाब और हरियाणा के लोग इसलिए ज्यादा दिखाई दे रहे क्योंकि दोनों राज्य दिल्ली के पास है। लेकिन इसके बावजूद भी अन्य राज्य के किसान भी दिल्ली आने लगे है।
चतुर सुजान हैं नरेंद्र सिंह तोमर
केंद्रीय कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के एमएससी और तीनों कृषि कानूनों पर दिए गए बयानों पर दल्लेवाल ने कहा तोमर पुराने राजनीतिज्ञ और चतुर सुजान हैं लेकिन हम उनकी किसी भी चाल में फसने वाले नही हैं।
गंगा के लिए अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल का निधन
गंगा को बचाने के लिये हरिद्वार के मातृसदन में उपवास पर बैठे प्रो जी डी अग्रवाल का गुरुवार को निधन हो गया। स्वामी सानंद पिछली 22 जून से अनशन पर थे और मंगलवार को उन्होंने जल भी त्याग दिया था। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने ऋषिकेश एम्स में भरती करा दिया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनसे अनशन खत्म करने को कहा था। लेकिन प्रो अग्रवाल (जिन्हें स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से भी जाना जाता है) गंगा के लिये अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं थे।

आईआईटी के प्रमुख भी थे जीडी अग्रवाल
जीडी अग्रवाल आईआईटी कानपुर में सिविल एवं पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख थे। उन्होंने राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण का काम किया। इसके बाद केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पहले सचिव भी रहे।
2012 में छोड़ दिया था राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण
2012 में राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण को निराधार कहते हुए उन्होंने इसकी सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया। साथ ही, अन्य सदस्यों को भी यही करने के लिए प्रेरित किया। पर्यावरण के क्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए उनके हर उपवास को गंभीरता से लिया गया।

नदियों का प्रदूषण रोकना थी मांग
2014 में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्धता दिखाई थी। हालांकि, सरकार बनने के बाद से अब तक ‘नमामि गंगे’ परियोजना का सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। ऐसे में जीडी अग्रवाल ने 22 जून, 2018 को हरिद्वार में अनशन शुरू कर दिया।
अग्रवाल की मांग थी कि नदियों को प्रदूषण से रोकने लिए उनका पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखा जाए। साथ ही, नदियों के किनारे से अतिक्रमण हटाया जाए। इसके लिए एक प्रभावी कानून भी बने।
अमेरिका के प्रतिबंध लगाने के बावजूद भारत और रूस के बीच हुई एस-400 मिसाइल सिस्टम डील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत भारत को रूस से सतह से हवा में मार करने वाली आधुनिक ट्रायम्फ मिसाइल स्क्वॉड्रन मिलेगी। इसके तहत भारत का एक मॉनिटरिंग स्टेशन रूस के साइबेरिया स्थित नोवोसिबिर्स्क में स्थापित किया जाएगा। अमेरिका की प्रतिबंध लगाने की धमकी के बावजूद भारत और रूस के बीच 40 हजार करोड़ के एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का समझौता हुआ।

मोदी को पुतिन का न्योता
पुतिन ने कहा- दोनों देश दोस्ती के अटूट धागे से जुड़े हैं। भारत ने हमेशा रूस के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता दी है। मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मैं मोदी को अगले व्लादिवोस्तोक फोरम में एक बार फिर मुख्य अतिथि के तौर पर न्योता दे रहा हूं।

भारत और रूस के प्रयासों से लोगों के बीच संबंध होंगे मजबूत : मोदी
भारत और रूस के बीच सहयोग का विस्तार अतीत के दायरों के पार ले जाएगा। भारत की विकास यात्रा में रूस हमेशा साथ रहा है। हमारा अंतरिक्ष में अगला लक्ष्य गगनयान में भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेजना है। रूस ने पूरे सहयोग का आश्वासन दिया है। भारत और रूस के प्रतिभा संपन्न बच्चे अपने इनोवेटिव आइडिया बताएंगे। हमने ऐसे प्रयासों पर विचार किया है, जिससे लोगों के बीच संबंध मजबूत हों। मैं विश्वास से कह सकता हूं की भारत और रूस की दोस्ती अनूठी है। इस रिश्ते के लिए पुतिन की प्रतिबंद्धता से ये दोस्ती और मजबूत होगी। हम नई बुलंदियों पर पहुंचेंगे।

अमेरिका की प्रतिबंध लगाने की धमकी के बावजूद हुई डील,कानून का उल्लंघन
ये डील काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) का उल्लंघन मानी जाएगी। इसके तहत अमेरिकी संसद (कांग्रेस) ने रूस से हथियार खरीदने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। हालांकि, कुछ अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इस मामले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से विशेष छूट मिल सकती है।
क्या है एस-400
एस-400 मिसाइल सिस्टम, एस-300 का अपडेटेड वर्जन है। जमीन से हवा में मार करने वाला यह सिस्टम दुश्मन देशों के लड़ाकू जहाजों, मिसाइलों और ड्रोन को पलक झपकते ही खत्म कर देता है। रूस ने इस सिस्टम को सीरिया में तैनात कर रखा है। एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइलों और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी 400 किलोमीटर के दायरे में आते ही खत्म कर देगा।

क्यों माना जा रहा है एस-400 सौदा महत्वपूर्ण
डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का काम करेगा। यह पाकिस्तान और चीन की एटमी क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देगा। यह सिस्टम अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को भी गिरा सकता है। यह सिस्टम 36 परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों को एकसाथ नष्ट कर सकता है। अगर सौदा होता है तो चीन के बाद इस सिस्टम को खरीदने वाला भारत दूसरा देश होगा।
भारत-रूस में यह भी अन्य समझौते हुए
भारत और रूस के बीच में एस-400 मिसाइल के अलावा कुछ अन्य समझौते भी हुए है। इन समझौतों में रेलवे में सहयोग, एमएसएमई क्षेत्र में सहयोग,फर्टिलाइजर, क्टर में करार,गगनयान अभियान में सहयोग, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सहयोग, ऊर्जा के क्षेत्र में करार,परमाणु क्षेत्र में सहयोग शामिल है।
भारत का रूस के साथ S-400 रक्षा सौदे पर हो सकता है समझौता,बढ़ी अमेरिका की चिंता
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को दो दिन की यात्रा पर भारत आ रहे हैं। पुतिन अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दोनों नेता ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध के मद्देनजर कच्चे तेल की स्थिति समेत विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं अंतराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं। इस दौरान रूस के साथ एस-400 वायु प्रतिरक्षा प्रणाली सौदे पर समझौता हो सकता है। 19वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेता रूसी रक्षा कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध की पृष्टभूमि में द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की भी समीक्षा कर सकते हैं। पुतिन की भारत यात्रा के दौरान मुख्य जोर एस-400 वायु प्रतिरक्षा प्रणाली सौदे पर समझौते पर केंद्रित रहेगा।

5 अरब डॉलर से ज्यादा का है एस-400 सौदा
व्लादिमीर पुतिन की इस यात्रा की मुख्य विशेषता एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति के लिए समझौते पर दस्तखत करना होगा और यह करार पांच अरब डॉलर की राशि से ज्यादा का होगा। पुतिन के शीर्ष विदेश नीति सलाहकार युरी उशाकोव ने कहा कि राष्ट्रपति 4 अक्टूबर को भारत रवाना हो रहे हैं और इस दौरान एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति के लिए समझौते पर जोर होगा। इस खरीद से अमेरिका के काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट (सीएएटीएसए) का उल्लंघन होगा। हालांकि इससे छूट मिलने की संभावना है।

अमेरिका की भारत को चेतावनी,रूस से हथियारों का सौदा करने पर लग सकते हैं प्रतिबंध
पुतिन के दौरे का असर अमेरिका और भारत के संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है। अमेरिका ने पुतिन के दौरे से पहले भारत को चेतावनी दी है। उसने कहा है कि मॉस्को के साथ किसी भी तरह का रक्षा सौदा करने पर भारत को अप्रत्यक्ष प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिकी प्रतिबंध कॉउंटरिंग अमेरिकास एडवर्सरीज़ थ्रू सैंक्शन एक्ट (CAATSA) कानून का हिस्सा हैं। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में रूसी हस्तक्षेप, सीरियाई विद्रोह में रूस की भूमिका और क्रीमिया पर कब्जा करने के लिए रूस को सजा देने के लिए इस कानून को लाया गया है। हम अपने सभी साथियों और साझेदारों से आग्रह करते हैं कि वह रूस के साथ ऐसा कोई लेन-देन नहीं करे, जिससे उसके खिलाफ CAATSA लगाना पड़े। अमेरिकी राष्ट्रपति इसमें छूट दे सकते हैं यदि यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए कोई खतरा नहीं हो।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘चैम्पियंस ऑफ द अर्थ’अवॉर्ड से किया सम्मानित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ सम्मान से सम्मानित किया गया । प्रधानमंत्री को ये सम्मान राजधानी दिल्ली में प्रवासी भारतीय केंद्र में दिया गया । पीएम मोदी के अलावा ये अवॉर्ड फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो को भी दिया गया है। कुछ दिनों पहले ही संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस अवॉर्ड का ऐलान किया गया था।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों को यह सम्मान इंटरनेशनल सोलर अलायंस और पर्यावरण के मोर्चे पर कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दिया गया है। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी मौजूद हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को पर्यावरण के लिए वैश्विक समझौते करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2022 तक प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म करने की शपथ के लिए यह सम्मान दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की पैरवी के लिए अग्रणी कार्यों तथा 2022 तक एकल उपयोग वाली सभी तरह की प्लास्टिक को भारत से हटाने के संकल्प के कारण नेतृत्व श्रेणी में चुना गया है।

वार्षिक ‘‘चैम्पियंस आफ अर्थ’’ पुरस्कार सरकार, सिविल सोसाइटी एवं निजी क्षेत्र में ऐसे असाधारण नेताओं को दिया जाता है जिनके कदमों से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जन्मदिन पर करते थे ईश्वर से प्रार्थना,चरखा चलाते थे और रहते थे मौन
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 150वी जयंती है, जिसे जोरों-शोरों से देश मना रहा है। इस अवसर पर देश के हिस्सों में कार्यक्रम होंगे। भारतीय जनता पार्टी भी इस बार गांधी जयंती पर बड़ा आयोजन कर रही है। 15 दिन पहले शुरू किया गया BJP का ‘स्वच्छता ही सेवा’ कैंपेन आज खत्म होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी समेत कई अन्य बड़े नेताओं ने भी वहां पहुंच श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार भी दिया जाएगा। जिसके बाद शाम को गांधी स्मृति पर प्रार्थना का आयोजन किया जाएगा। आपको बता दें कि महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में एक हिंदू-गुजराती मोध बनिया वैश्य परिवार में हुआ था। उनके माता पिता ने उनका नाम मोहनदास करमचंद गांधी रखा था। उनके जन्म के 5 साल बाद उनका परिवार पोरबंदर से राजकोट आ गया। जब गांधी 9 साल के हुए तब राजकोट में उन्हें उनके घर के नजदीकी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा गया। जब वो 11 साल के हुए तब उन्होंने राजकोट के हाई स्कूल में जाना शुरू किया था।
जन्मदिवस पर ज्यादातर समय मौन रहते थे गाँधी जी

आज से 100 साल पहले, जब वर्ष 1918 में गांधीजी ने अपना जन्मदिन मनाने वालों से कहा था ‘मेरी मृत्यु के बाद मेरी कसौटी होगी कि मैं जन्मदिन मनाने लायक हूं कि नहीं’.” देशभर में फैलीं गांधीवादी संस्थाओं की मातृ संस्था, गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष, रामचंद्र राही ने कहा, “यह गंभीर दिन होता था, इस दिन वह ईश्वर से प्रार्थना करते थे, चरखा चलाते थे और ज्यादातर समय मौन रहते थे। किसी भी महत्वपूर्ण दिन को वह इसी तरह मनाते थे। लेकिन सरकार आज गांधी जयंती पर तरह-तरह के समारोह आयोजित कर रही है, चारों तरफ हंगामा है, पूरे सालभर कार्यक्रम चलने हैं।

इसपर राही ने कहा, ‘सरकार तो कोई भी आयोजन अपने मतलब से करती है। उसे गांधी के विचारों से कुछ लेना-देना नहीं है। सरकार अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए गांधी के नाम का इस्तेमाल करती है उन्होंने कहा, ‘अगर सरकार सचमुच गांधी का जन्मदिन मनाना चाहती है तो उसे गांधी के विचारों पर समाज को आगे ले जाने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन इसका लक्षण नहीं दिखता, वर्तमान सरकार गांधी को और गांधी के जन्मदिन को सफाई के साथ जोड़ती है।’

गांधी जयंती के उपलक्ष्य में सरकार की तरफ से स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। इस पर राही ने कहा, ‘अगर सफाई के बारे में सोचें तो पहला काम यह होना चाहिए कि देश में सफाई करने वालों को ऐसी सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए, जिससे उन्हें गटर में उतर कर सफाई न करनी पड़े। सफाईकर्मियों को मृत्यु के मुंह में धकेलना सरकार के लिए शर्म की बात है। उन्होंने कहा, ‘सफाई महत्वपूर्ण काम है, लेकिन जबतक भारत में सफाईकर्मी एक खास समूह में रहेगा, उसके जीवन को कोई सुरक्षा नहीं मिल सकेगी। यह समाज के माथे पर कलंक है, यह कलंक नहीं मिटेगा, तो गांधी जयंती मनाने से कुछ नहीं होगा।


