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नाव पर सवार होकर आ रहीं अंबे कांग्रेस की नाव पार लगाएगीं या हाथी पर जाने से होगा नुकसान

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इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि पर मां अंबे का आगमन नाव पर हो रहा है। नाव पर सवार मां अंबे मध्यप्रदेश सहित चार राज्यों में क्या कांग्रेस का सत्ता से वनवास समाप्त कर देगीं या फिर हाथी की उपेक्षा महंगी पड़ जाएगी। मां जगदंबा की वापसी भी इस बार हाथी पर बैठ कर हो रही है। मां अंबे का नाव पर आगमन पूरे देश के लिए अच्छे दिन आने का संकेत देने वाला है। क्या ये अच्छे दिन कांग्रेस की हिन्दी भाषी तीन राज्य मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार में वापसी से आएंगे? कांग्रेस को इस सवाल का जवाब अपनी भक्ति के जरिए वोटर को खुश करके मिल सकता है। कांग्रेस को इन तीन राज्यों में अपने हाथ के कमाल पर ही भरोसा है। कांग्रेस ने अपनी नाव किनारे लगाने के लिए न तो साइकल की सवारी की है और न ही हाथी पर बैठने की हिम्मत दिखाई है।

मायावती और अखिलेश यादव को कांग्रेस ने किया है निराश

वैसे तो पिछले पांच विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाने का काम शारदीय नवरात्रि के बाद ही होता है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार इस मौके का उपयोग अपने चुनाव प्रचार के लिए करते हैं। इस वार की नवरात्रि पर जगदंबा नाव पर सवार होकर आ रहीं हैं। इस कारण राजनीतिक दलों के लिए यह नवरात्रि ज्यादा खास हैं। चुनाव वाले तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होना तय माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी और मायावती मिलकर मुकाबला त्रिकोणीय बनाने का पूरा प्रयत्न कर रहे हैं। मायावती को अजीत जोगी का साथ कांग्रेस द्वारा हाथ आगे न बढ़ाए जाने के कारण लेना पड़ा है।

मायावती इस उम्मीद में थीं कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जो महागठबंधन तैयार करना चाहते हैं,वह तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में बसपा को साथ लिए बगैर नहीं बन सकता। मायावती इंतजार करतीं रहीं,कांग्रेस ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार ही नहीं किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ कहते हैं कि मायावती वो सीटें चाहतीं थीं, जिन पर उन्हें हजार-दो हजार वोट ही पिछले चुनाव में मिले थे। दरअसल मायावती कांग्रेस के वोट के जरिए अपनी नाव पार लगाना चाहतीं थीं। कांग्रेस को लग रहा था कि इस गठबंधन से सत्ता मिल भी गई तो उसका रिमोट मायावती के हाथ में चला जाएगा।

अखिलेश यादव की उम्मीद भरी निगाहों को कांग्रेस ने अनदेखा कर दिया। अखिलेश यादव से कांग्रेस ने समझौते के संकेत तो दिए लेकिन, सहमति का जवाब नहीं भेजा। नतीजा समाजवादी पार्टी को अपनी नाव को बचाने के लिए अकेले ही चुनाव का चप्पू चलाना पड़ रहा है।

कांग्रेस को उम्मीद कि आरक्षित वर्ग और मुस्लिम के साथ लगेगी नाव पार

बसपा प्रमुख मायावती के हाथी को नाराज करने के बाद यह माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस को नुकसान होगा। कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आने से चूक सकती है। इस तरह की अटकलों का आधार बसपा के प्रतिवद्ध वोट बैंक के कारण लगाया जा रहा है। राज्य में बसपा की ताकत निरंतर कम हो रही है। बसपा को पिछले चुनाव में सिर्फ चार सीटें ही मिलीं थीं। जबकि वह नौ सीटों पर दूसरे नंबर की पार्टी बनी थी। बसपा जिन सीटों पर नबंर दो पर रही थी ये श्योपुर,सुमावलीमुरैना,भिंड,महाराजपुर,पन्ना,रामपुर बघेलान,सेमरियादेबतालाव तथा रीवा विधानसभा सीट हैं।

पहले उत्तरप्रदेश के चुनाव फिर एट्रोसिटी एक्ट का सवर्णों द्वारा किए जा रहे विरोध के बाद कांग्रेस इस नतीजे पर पहुंची है कि अनुसूचित जाति वर्ग मायावती का साथ छोड़ रहा है। कांग्रेस का अनुमान है कि यह वर्ग भाजपा से नाराज है। इस कारण वह ऐसे दल को वोट देना चाहेगा जो सरकार बना सकता है। तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में बसपा अकेले अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।

राजस्थान में कांग्रेस को लग रहा है कि हर पांच साल में होने वाले सत्ता परिवर्तन में वोटर इस बार भाजपा को विपक्ष में बैठाएंगे। जबकि छत्तीसगढ़ में माया-जोगी के गठबंधन को अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के वोटर अभी विश्वास करने की स्थिति में नहीं है। वहीं सपा की स्थिति तीनों ही राज्यों में सिर्फ सांकेतिक ही मानी जा रही है। कांग्रेस में यह डर भी देखने को मिल रहा है कि कहीं हाथी सत्ता आने के सपने को कुचल न दे?

क्या अब कांग्रेस पर खीज उतार रहे हैं अखिलेश यादव,इच्छुक नेताओं को देंगे टिकट

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कांग्रेस से चुनावी समझौते की बात न बन पाने के बाद अब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। सोमवार को खजुराहो में हुई बैठक के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि जो भी मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव मैदान में उतरने की इच्छा के साथ उनके पास आता है तो वे जरूर टिकट देंगे। अखिलेश यादव के इस बयान को कोंग्रेसियों के लिए एक संदेश माना जा रहा है। राज्य में पिछले चुनावों में भी कांग्रेस के कई बागी समाजवादी पार्टी अथवा बहुजन समाज पार्टी का टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतरे थे। अखिलेश यादव की अपील के बाद यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि बसपा प्रमुख मायावती भी इस तरह का एलान कर सकतीं हैं।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस लगातार यह दावा करती रही है कि मध्यप्रदेश में वह बसपा और सपा के अलावा समान विचारधारा वाले दलों से मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कई बार कहा कि उनकी बसपा और सपा से समझौते की बातचीत चल रही है। लेकिन, कांग्रेस और सपा के बीच कोई अधिकृत टेबल टॉक नहीं हुई। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी का कोई बड़ा जनाधार राज्य में नहीं है। सपा ने अपना जनाधार बढ़ाने की गंभीर कोशिश भी कभी नहीं की। जबकि मध्यप्रदेश में तीसरे दल की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है। बहुजन समाज पार्टी में हमेशा ही विवाद के हालात रहे हैं। फूल सिंह बरैया के पार्टी छोड़ने के बाद बसपा की स्थिति कमजोर हुई है। बसपा ने भाजपा-कांग्रेस से नाराज नेताओं को टिकट देकर उनके निजी वोट बैंक का लाभ उठाया है।

कांग्रेस ने काफी इंजतार कराया है,बसपा और गोगपा के साथ मिलकर लड़गे चुनाव:अखिलेश यादव

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मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के बाद अब समाजवादी पार्टी ने भी कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से इंकार कर दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सपा मध्यप्रदेश में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी से गठबंधन करेगी।

कांग्रेस ने बहुत इंतजार कराया है

अखिलेश यादव ने कहा कि हम मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में थे। कांग्रेस अभी तक अपनी कोई योजना पर हमसे बात नहीं कर रही है। हमने बहुत इंतजार किया है, लेकिन अब नहीं करेंगे। मध्य प्रदेश में हम अकेले ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में हम कांग्रेस के साथ मैदान में नहीं उतरेंगे। हम गोंडवाना पार्टी से बात कर रहे हैं, हम वहां पर बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर भी चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं।

अखिलेश यादव के ट्वीट के बाद दबाव में आई योगी सरकार ने मारा यूटर्न !

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के ट्वीट और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दबाव में आई भाजपा सरकार अब आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर मोटरसाइकिल और दो पहिया वाहनों के लिए टोल टैक्स लगाने का फैसला वापस ले लिया है। 

इससे पहले  एक्सप्रेस वे पर मोटरसाइकिल के लिए एक तरफ का ₹285 टोल टैक्स टैक्स वसूलने का प्रस्ताव किया था। उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को यहां लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगरा एक्सप्रेस वे पर टोल टैक्स को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि सरकार गरीबों को एक्सप्रेस-वे पर नहीं चलने देना चाहती है ।
उन्होंने कहा था कि हमारी सरकार ने प्रस्ताव बनाया था कि 20लाख रुपए से कम की गाड़ियों पर एक्सप्रेस पेपर टोल टैक्स नहीं लगाया जाएगा ।श्री यादव ने यह भी कहा कि जब उनकी सरकार बनेगी तो वह दिल्ली से आगरा और आगरा से लखनऊ के साथ ही पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर बन जाने के बाद 20लाख रुपए से कम की गाड़ियों पर टोल टैक्स नहीं लगाएंगे।

 
अखिलेश यादव ने कहा कि यह एक्सप्रेस वे लोगों को सीधे दिल्ली से जोड़ने के लिए और कम समय में देश की राजधानी तक पहुंचाने के लिए बनाया गया था लेकिन सरकार इस पर भारी भरकम टोल टैक्स लगा कर जनता की उम्मीदों पर पानी फेरना चाहती है। अखिलेश यादव की प्रेस कान्फ्रेंस के बाद दबाव में आई सरकार ने आनन-फानन में दोपहिया वाहनों पर  टोल टैक्स लगाने का निर्णय वापस लेने कानून  फैसला किया है।

एक दंगे में मोदी बने दुश्मन तो 457 दंगे होने के बाद भी मुलायम सिंह मसीहा कैसे ..?

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Newbuzzindia: राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के चेयरमैन मौलाना आमिर रशादी मदनी ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों मुस्लिमों को सिर्फ अपना वोट बैंक समझते हैं।

आमिर रशादी ने कहा कि, गुजरात में एक दंगा कराने के बाद मोदी मुसलमानों के दुश्मन बन गए। जबकि मुलायम और उनके शाहबजादे (अखिलेश) के राज में 457 बड़े दंगे हुए फिर भी मुल्ला मुलायम मुस्लिमों के मसीहा बने हुए है।

उन्होंने राजनैतिक पार्टियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन लोगों ने सेकुलरिज्म और कम्युनलिज्म के नाम पर सिर्फ मुसलामानों को ठगा है। उन्होंने कहा कि कुछ दल बीजेपी के नाम का डर दिखाकर मुसलमानों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सालों से इन पार्टियों ने बीजेपी का डर दिखाकर मुस्लिमों को ठगने का काम किया है। रशादी ने आरोप लगाते हुए कहा कि वे मुसलमानों के सच्चे हमदर्द नहीं हैं। वे सिर्फ उनका इस्तेमाल अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिए करते हैं।

रशादी ने कहा कि अब ऐसा नहीं होगा अब मुसलमान इनका वोट बैंक नहीं बनेगा। उन्होंने नारा देते हुए कहा कि, ‘अब मुसलमान नहीं रहेगा दरबार में, वह रहेगा अब सरकार में. उन्होंने कहा कि अब हिंदू-मुस्लिम एकता का नारा नहीं मुस्लिम-हिंदू एकता का नारा चलेगा।

रशादी ने कहा कि अगर मुसलमान, ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत एक हो जाए तो उसे कोई नहीं हरा सकता। यह ऐसा वोट बैंक होगा जो यादवों पर बहुत भारी पड़ेगा।

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