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उत्तरप्रदेश निकाय चुनाव में कांग्रेस ने जीत के साथ खोला खाता, मैदान छोड़ भागी बीजेपी!

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उत्तरप्रदेश में बीजेपी के गढ़ मथुरा में कांग्रेस ने जीत के साथ निकाय चुनाव का बिगुल बजाया है। वहीं इस सीट पर चुनाव से पहले ही बीजपी ने मैदान खाली कर दिया। दरअसल मथुरा के वार्ड क्रमांक 64 में भाजपा ने अपना उम्मीदवार नही उतारा जिसके चलते कांग्रेस प्रत्याशी ने इस सीट से निर्विरोध जीत हासिल की। आपको बता दें कि बीजेपी के साथ ही समाजवादी पार्टी ने भी इस सीट से अपना उम्मीदवार वापिस ले लिया।

बीजेपी का गढ़ है मथुरा

आपको बता दें कि उत्तरप्रदेश में मथुरा को बीजेपी का गढ़ कहा जाता है। मथुरा से बीजेपी के 2 कैबिनेट मंत्री और 4 विधायक है। उत्तरप्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्रीकांत सिंह और चौधरी लक्ष्मी नारायण भी मथुरा से ही है।

बीजेपी को आपसी गुटबाजी का हुआ नुकसान

आपको बता दें कि मथुरा में बीजेपी की आपसी गुटबाजी के कारण यह हाल हुआ है। बताया जा रहा है कि मथुरा में निकाय चुनाव में टिकट बटवारे में काफी हाय तौबा हुई। सभी नेता अपने समर्थक को टिकट दिलवाने में लग गए। जिसका फायदा कांग्रेस ने उठाया।

कांग्रेस उम्मीदवार ध्रुवनारायण शर्मा की इस निर्विरोध जीत के साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक गजब का उत्साह है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव उपेंद्र सिंह ने भी इस जीत पर खुशी व्यक्त की।

मेरठ में अमित शाह का “रोड शो” हुआ रद्द, कारण जानकार खुश नही होगी भाजपा !

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Newbuzzindia : यूपी में 71 लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा विधानसभा चुनाव में अपने बुरे समय से गुजर रही है । भाजपा नेता रैली और रोड शो में भीड़ नही जुटा पा रहे है जिसके कारण स्टार प्रचारकों को खाली रैली या बेहद कम लोगों को संबोधित करना पड़ रहा है । 

देखने वाली बात तो यह है कि पीएम मोदी और अमित शाह जैसे दिग्गजों की रैली भी खाली जा रही है । इसी बीच अब खबर आ रही है कि अमित शाह का मेरठ का रोड शो रद्द कर दिया गया है । सूत्रों के मिली खबर के अनुसार पिछले रैलियों में भीड़ ना मिलने की वजह से भाजपा ने यूपी में अपनी सभी पद यात्राओं को रद्द कर दिया है । 

भाजपा के अनुसार मेरठ में डिकैतों द्वारा एक व्यापारी की हत्या किए जाने के बाद अमित शाह का रोड शो रद्द कर दिया गया है । लेकिन सच्चाई तो कुछ और ही मालूम पड़ रही है । 

बेज्जती से बचने के लिए बीजेपी ने अपने आगामी सभी रोड शो को रद्द कर दिए है । नाम ना बताने की शर्त पर एक भाजपा नेता ने बताया कि पिछली बार भीड़ ना मिल पाने की वजह से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का रोड शो रद्द किया गया था । एक भाजपा कार्यकर्ता के अनुसार ” हम 20 लोग भी नही जुटा पाए । हमने काफी मेहनत की थी पर जनता भाजपा के साथ नही है । जनता नोटबंदी के कारण सरकार से खुश नही है । ”

भाजपा के एक विरिष्ट नेता के अनुसार – सभी फैसले और रणनीति ऊपर से बनकर आती है वहीं जब कुछ गलत होता है तो उसका ठीकरा हमारे ऊपर फोड़ा जाता है । यह एकदम गलत है । 

कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमित शाह की रैली को सुरक्षा कारणों से रद्द किया गया है । जनता सरकार से खुश नही है और अमित शाह का विरोध कर सकती है । 

अमित शाह की रैली के रद्द होने पर सपा नेता आजम खान का कहना है की रोड शो करना और उसमें भारी भीड़ जुटाना भाजपा के बस की बात नही रही । भाजपा ने यूपी में अपनी जमीन खो दी है । 

चुनाव के बाद भगवान राम को वनवास पे भेज देती है , चुनाव के समय राम-राम जपने वाली भाजपा : शिवसेना

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Newbuzzindia : ​मुंबई महानगर पालिका में 25 साल पुराना गठबंधन टूटने के बाद भारतीय जनता पार्टी औऱ शिवसेना के रिश्तों में लगातार दरार बढ़ती जा रही है।लेकिन एनडीए औऱ महाराष्ट्र सरकार में अभी भी सहयोगी बनी हुई हैं।

शिवसेना नोटबंदी के बाद भाजपा पर एक के बाद एक बड़े आरोप लगा रही है। कभी नोटबंदी फैसले को तानाशाही करार देना तो कभी राम मंदिर के बार-बार राग अलापने पर तीखा जवाब देना।

आज शिवसेना सांसद संजय राउत ने राम मंदिर मुद्दे पर बीजेपी पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि, जब चुनाव नजदीक होते हैं तब बीजेपी को राम मंदिर की याद आती है लेकिन जैसे की चुनाव के बाद भाजपा राम को वनवास पर भेज देती है।

क्योंकि भाजपा की नीयत ही ठीक नहीं है। भाजपा नेता राम के नाम का इस्तेमाल सिर्फ चुनाव में वोट पाने के लिए करते हैं। चुनाव जीतने के बाद उन्हें भूल जाते हैं।

आपको बता दें कि, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में तमाम भाजपा नेता राम मंदिर का राग अलापने लगे हैं। नेताओं के साथ-साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी कल पार्टी के घोषणा पत्र में राम मंदिर का मुद्दा शामिल करा। जिसके बाद सहयोगी दल ने हमला बोला।

सपा और कांग्रेस के गठबंधन के बाद दिलचस्प हुए उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव !

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Newbuzzindia :समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के गठबन्धन से उत्तर प्रदेश राज्य विधानसभा का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है और ज्यादातर सीटों पर हार जीत का अन्तर काफी कम होने के आसार हो गये हैं।

सपा और कांग्रेस ने आज यहां संयुक्त संवाददाता सम्मेलन कर गठबंधन की औपचारिक घोषणा की। राज्य विधानसभा की कुल 403 सीटों में से 298 पर सपा उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे जबकि 105 पर कांग्रेस अपने प्रत्याशी उतारेगी।

सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने संवाददाताओं से कहा कि उनका गठबंधन साम्प्रदायिक तत्वों को सत्ता से बाहर रखेगा। अखिलेश यादव के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनेगी।

अभी यह तय नहीं है कि सरकार बनने की स्थिति में कांग्रेस उसमें शामिल होगी या नहीं। इस बारे में राजबब्बर ने ‘यूनीवार्ता’ से कहा, “अभी हमारे सामने 300 से अधिक सीटों को जीतने का लक्ष्य है। सरकार बनी तो कांग्रेस उसमें शामिल होगी।” मुख्यमंत्री अखिलेश ने भी कई बार कहा है कि कांग्रेस से गठबंधन होने पर 300 सीटें जीतेंगे ।

गठबन्धन के बारे में सभी राजनीतिक दल अपने अपने ढंग से व्याख्या कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई है कि चुनाव दिलचस्प होगा। कई सीटों पर हार जीत का अन्तर भी काफी कम रहेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार गठबन्धन होने से गैर भाजपा मतों में ज्यादा विभाजन नहीं होगा। इससे सपा और कांग्रेस दोनो को फायदा होगा, हालांकि इससे भाजपा को थोडा नुकसान होने की सम्भावना है।

उधर भाजपा का कहना है कि लडाई त्रिकोणात्मक होने पर ही उसके उम्मीदवारों को फायदा होगा। सीधी लडाई में उसके प्रत्याशी को हानि ही होगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि गठबन्धन की वजह से कांग्रेस और सपा दोनो की ताकत बढेगी और दोनो मिलकर सरकार बनाने में सफल होंगे।

भाजपा के प्रदेश महासचिव विजय बहादुर पाठक का कहना है कि अखिलेश यादव ने गठबन्धन कर चुनाव से पहले ही अपनी कमजोरी साबित कर दी। पूर्ण बहुमत की सरकार चला रहे थे तो गठबन्धन की बात क्यों की। क्या उन्हें अपने विकास कार्यों पर भरोसा नहीं रह गया। अब तो सपा अखिलेशमय है, फिर भी गठबन्धन कर मुख्यमंत्री ने यह साबित कर दिया कि सपा कमजोर हुई है और वह चुनाव अपने दम पर लडने में सक्षम नहीं है।

श्री पाठक ने कहा कि सपा और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) दोनों के नेता कहने लगे हैं कि गठबन्धन ही भाजपा को सत्ता में आने से रोक सकती हैं। इसका मतलब राज्य में चल रही सरकार पूरी तरह असफल साबित हुई है। राजनीतिक दृष्टि से जो पार्टी मजबूत होती है उसी के खिलाफ सारे दल बोलते हैं। वर्ष 2012 में बसपा के खिलाफ भाजपा और सपा बोलते थे और इस समय सपा ,कांग्रेस और बसपा तीनों ही भाजपा के खिलाफ बोल रहे हैं।

इसका मतलब है कि भाजपा की स्थिति मजबूत है और वह सत्ता में आ रही है। उनका दावा है कि भाजपा अपनी कार्यकर्ताओं के बल पर और जनता के समर्थन से 300 सीटों पर जीत हासिल करेगी ।

दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषक राघवेन्द्र का कहना है कि कांग्रेस की नजर 2017 पर कम 2019 पर ज्यादा है। इस चुनाव में गठबन्धन के जरिये वह अपनी ताकत बढाना चाहती है ताकि उसे 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में इसका फायदा मिले।

श्री राघवेन्द्र का कहना है कि गठबन्धन और बसपा उम्मीदवारों के मजबूती से लडने पर चुनावी लडाई त्रिकोणात्मक होगी। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है क्योंकि भाजपा विरोधी मत दो या दो से अधिक उम्मीदवारों में बटेंगे। शायद ही कोई सीट ऐसी होगी जिसपर चुनाव परिणाम आने से पहले निश्चित रूप से यह कहा जा सके कि ‘ फला’ उम्मीदवार ही जीतेगा।