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कफ़न से लिपटे बेटे के लाश को देख कर बोली एसपी की माँ, ‘एक बार तो माँ बोल दे मेरे लाल।’

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NewBuzzIndia:

जब SSP और सभी आला अफसर अपने एसी बंगले में आराम फरमा रहे थे तब उपद्रवियों से भिड़ने के लिए अकेले निकल पड़े थे SP । उपद्रवियों के हमले में शहीद हुए SP मुकुल द्विवेदी की लाश जब उनके सरकारी आवास पर पहुँची तो परिवार में कोहराम मच गया। जिस तरह से उनकी माँ उनके लाश से लिपट के रो रही थीं उसे देख वह खड़े लोगों ने भी अपने आंसू रोक ना सके।

उठ जा मेरे लाल। देख तेरी मम्मी आ गई है। बस! एक बार तो मम्मी कह दे। रुंधे गले से बस इतना निकला और बेटे की लाश से लिपटकर रोने लगीं शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की मां मनोरमा द्विवेदी। पत्नी और बच्चों का तो रो-रोकर बुरा हाल था। रोते जाते और कहते, अब परिवार की देखभाल कौन करेगा।
एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी मूल रूप से औरेया जिले के रहने वाले थे। इनके परिवार में पिता श्रीलचंद, मां मनोरमा देवी और पत्नी अर्चना देवी हैं। बेटे की मौत की खबर पाकर मां मनोरमा देवी शुक्रवार को मथुरा में उनके सरकारी आवास पर पहुंची। जैसे ही यहां मुकुल द्विवेदी का शव पहुंचा कोहराम मच गया।

मां मनोरमा देवी बेटे के शव से लिपटकर बिलखने लगीं। …बेटा उठ जा। देख तुझे तेरी मम्मी बुला रही है। एक बार सबसे बात तो कर लो। देख सारे परिवार वाले आ गए। मां का हर वाक्य वहां उपस्थित लोगों के हृदय में शूल सा लगा। लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि उन्हें सांत्वना दे। मां बिलखती हुई सवाल करती रहीं…पापा को दवा के बारे में कौन पूछेगा। मां से रोज बात कौन करेगा। छोटे-छोटे बच्चे हैं मेरे लाल के कौन रखेगा उनका ख्याल। पत्नी का भी रो-रोकर बुरा हाल था।

एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को उनके एक ज्योतिष मित्र ने बताया था कि उनकी गृह दशा ठीक नहीं चल रही है। कोई संकट आ सकता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराने की सलाह दी गई थी। बताया जाता है कि जाप शुरू भी हो गया था। मगर इससे पहले कि जाप पूरा होता उन पर संकट आ गया

मथुराकांड: संबित पात्रा के पांच सवालों ने की अखिलेश यादव की बोलती बंद

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NewBuzzIndia:  मथुरा में हुए सामाजिक अव्यवस्था पर संबित पात्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पांच तीखे प्रश्न पूछे हैं, जिसपर अभी तक अखिलेश यादव के तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

गौरतलब है कि, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ संबित पात्रा ने मथुरा काण्ड को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य्मंत्री अखिलेश यादव से काफी तीखे सवाल पूछे हैं। कल हुई इस घटना में दो पुलिस अफसरों समेत करीब 18 लोगों की मौत हो गयी है। इस घटना के बाद एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। संबित पात्रा ने भी आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अखिलेश यादव के ऊपर कई सवाल दागे –

पहले प्रश्न में उन्होंने अखिलेश यादव से पूछा कि जवाहर बाग़ में कब्ज़ा करके बैठे इस भू माफिया को किसका राजनैतिक संरक्षण प्राप्त था।

दूसरे सवाल में उन्होंने कहा कि मीडिया काफी तफ्शीश के साथ हर दिन इस पूरे मामले को उजागर कर रही है। मीडिया का श्पष्ट कहना है कि इस घटना का जो मास्टरमाइंड था वह किस प्रकार की करतूतों को अंजाम दे रहा था उससे सभी लोग भली भाँती परिचित थे, उसपर पहले भी 15 लोगों पर जानलेवा हमले करने का आरोप लगा था और जांच भी चल रही थी। इसके अलावा मथुरा और आस पास के लोग उस व्यक्ति और उस पूरे समूह के कार्यकलापों से परेशान थे। ऐसे में वह व्यक्ति ढाई-तीन साल तक मथुरा की गलियों में ढाई-तीन साल तक सीना चौड़ा करके घूमता रहा, यह सब कुछ प्लान करता रहा, प्रशासन और पुलिस शांत रही, यह ऐसे ही तो नहीं हो सकता है, सबकुछ जानते हुए उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई??

तीसरे प्रश्न में उन्होंने कहा – अभी हमारी प्रेस कांफ्रेंस के पहले हमने उत्तर प्रदेश के DGP की प्रेस कांफ्रेंस को सुना, उन्होंने बहुत ही श्पष्टता के साथ कहा कि जब पुलिस वहां पर पहुंची तो पहले से ही कुछ लोग बन्दूक लेकर पेड़ों के ऊपर बैठे हुए थे, पुलिस को देखते ही उन्होने ताबड़तोड़ गोलियां चलाना शुरू कर दिया जिसमें दो पुलिसकर्मी अपना जीवन खो बैठे। संबित पात्रा ने कहा कि ये तो बड़ा आश्चर्य का विषय है, इतना बड़ा पुलिस महकमा, पुलिस बिना तैयारी के वहां चली जाती है, पुलिस में किसी प्रकार का इंटेलिजेंस ही नहीं कि लोग पेड़ पर बन्दूक लेकर बैठे हुए हैं और गोली चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पुलिस में भर्ती होते हैं वो जनता की हिफाजत के लिए भर्ती होते हैं, वे मुस्तैदी के साथ काम करना चाहते हैं लेकिन अगर इंटेलिजेंस ही नहीं है कि पेड़ पर पहले से ही लोग बन्दूक लेकर बैठे हुए हैं तो हम उत्तर प्रदेश की सरकार और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछना चाहते हैं कि जाने से पहले पुलिस ने तैयारी क्यों नहीं की। ये इंटेलिजेंस कहाँ नदारद थी।

चौथे सवाल में संबित ने कहा – तमाम न्यूज चैनल्स दिखा रहे हैं कि किस प्रकार का असलहा और बारूद जवाहर बाग़ से  निकाला गया है, वहां पर बम, बारूद और बंदूकों का जमावड़ा था, यह कोई रातोंरात तो नहीं हो गया, जिस तादात में यह इकठ्ठे हुए हैं, ये खुद अपने आप में बयान करता है कि ये वर्षों का काम था, दो ढाई वर्ष में धीरे धीरे करके एक मिनी वार जोन, या एक मिनी युद्ध मैदान तैयार किया गया था, उसके अन्दर इतना असलहा, बम बारूद इत्यादि है, टीवी यह भी दिखा रही है कि आधुनिक हथियार भी वहां पर मौजूद था। प्रश्न यह है कि जब उत्तर प्रदेश के सेंटर यानी मथुरा में इतना बम बारूद इकठ्ठा हो रहा था यह छोटी बात नहीं है, मथुरा कोई छोटा शहर नहीं है, आखिर यह किसके बल पर हुआ, इतना असलहा ऐसे ही इकठ्ठा नहीं हो जाता है, संभव ही नहीं है बिना कि बिना पुलिस और प्रशासन की जानकारी के इतना असलहा वहां इकठ्ठा हो जाय, जब असलहा आता है तो कई चेक पोस्ट पर उनकी चेकिंग होती है, क्या उनकी कोई चेकिंग नहीं हुई? जिस लोगों ने यहाँ पर इतना असलहा और बम बारूद इकठ्ठा किया, उसने पूछताछ नहीं की गयी या भ्रष्टाचार के कारण हर चेकपोस्ट पर उन्हें छोड़ दिया गया। यह दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में प्रशासन की हालत क्या है।

संबित ने पांचवे सवाल में कहा – पुलिस का काम जनता की हिफाजत करना है, जब खुद पुलिस हताहत हो जाए, जब खुद पुलिस अपनी जान के लिए परेशान रहे तो जनता की हिफाजत कौन करेगा, मै NCRB का डेटा लेकर बैठा हूँ। उन्होंने कहा कि विगत कुछ वर्षों में यानी जब से सपा की सरकार बनी है, पुलिस से किस प्रकार का वर्ताव किया गया है, वह भी सोचनीय है।

उन्होंने बताया कि दो दिन पहले आजमगढ़ पुलिस थाने में कुछ लोगों की भीड़ एक थाने पर पथराव करती है, जबरजस्ती थाने में घुस जाती है और पुलिस एन जिस व्यक्ति को बंद किया होता है उसे छुड़ा लेती है।

प्रतापगढ़ के कुंडा पुलिस स्टेशन में एक होमगार्ड को गोली मार दी जाती है।, पीलीभीत में हेडकांस्टेबल को गोली मार दी जाती है।

बदायूं में दो पुलिसकर्मी जब साउंड की आवाज कम कराने जाते हैं तो उनकी गोली मारकर हत्या कर दी जाती है।

उन्होंने बताया कि NCRB का डेता बताता है कि जब से अखिलेश यादव की सरकार बनी है पुलिस पर इस प्रकार की वारदात बढ़ गयी हैं।

उन्होंने बताया कि 2014-15 में पुलिस वालों पर तीन सौ अटैक हुए। विगत चार वर्षों में 1054 बार पुलिस पर अटैक हुआ है।

उन्होंने कहा कि जिस राज्य में पुलिस ही सुरक्षित नहीं है उस राज्य में जनता का क्या हाल होगा इसका आप अंदाजा लगा सकते हैं। पुलिस की तैयारी पर भी कई प्रश्न उठते हैं, जिस पुलिस को तैयार रहना चाहिए, वह तैयार नहीं रहती, आज एसपी नहीं रहे हमारे बीच, लोग एसपी को मार दे रहे हैं, SHO मर जाते हैं। जब एसपी और SHO को ही DGP और मुख्यमंत्री नहीं बचा सकते तो आप आदमी को मुख्यमंत्री किस प्रकार से हिफाजत कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हम अखिलेश यादव से इन पाँचों प्रश्नों का उत्तर चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश को गुंडाराज बना दिया है।

संबित पात्रा ने कहा कि अखिलेश यादव को नैतिक रूप से इस घटना की जिमेदारी नहीं लेनी चाहिए।

धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में बजरंग दल के पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज !

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Newbuzzindia: विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के यहां स्थित मुख्यालय कारसेवकपुरम् में शौर्य प्रशिक्षण शिविर में एक सम्प्रदाय के लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में बजरंग दल के पदाधिकारियों,कार्यकर्ताओं और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

फैजाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मोहित गुप्ता ने आज यहां बताया कि बजरंग दल के शौर्य प्रशिक्षण शिविर में आतंकवादियों के भेष में एक धर्म विशेष के लोगों को दिखाया गया था, जबकि सैनिक के रुप में दूसरे सम्प्रदाय के युवकों को दिखाया गया था।

पुलिस की ओर से कल देर रात लिखायी गयी रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे धर्म विशेष के लोगों की भावनायें आहत हुई है। पुलिस ने अयोध्या कोतवाली में भारतीय दंड संहिता की धारा 153(ए) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना शुरु कर दी है। शिविर के बारे में राज्यपाल रामनाईक का कल बयान आने के बाद इस मामले ने और तूल पकड लिया। श्री नाईक ने कहा था कि आत्मरक्षा में शौर्य प्रशिक्षण गलत नहीं है ।

आत्मरक्षा के लिये प्रशिक्षण लेना गलत नहीं है। श्री नाईक के इस बयान के बाद सरगर्मियां और तेज हो गयी और पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करना पडा। समाजवादी पार्टी प्रवक्ता के राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि साम्प्रदायिक शक्तियां माहौल खराब करने में लगी हुई हैं लेकिन कानून किसी को हाथ में लेने नहीं दिया जायेगा। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरनाथ अग्रवाल ने कहा कि इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिये।

साम्प्रदायिक माहौल खराब करने में लगे लोगों को जेल में डालना होगा। गौरतलब है कि गत 14 मई को कारसेवकपुरम् में आयोजित शौर्य प्रशिक्षण शिविर में बजरंग दल कार्यकर्ताओं को हथियार चलाने,लाठी चलाने, आग के गोले में कूदने के साथ ही आतंकवादियों से जूझने तक की ट्रेनिंग दी गयी थी। इस दौरान कार्यकर्ता जय श्रीराम ,भारत माता की जय और वंदेमातरम् के नारे लगा रहे थे। कार्यकर्ताओं ने सिर पर भगवा रंग की पट्टी बांध रखी थी। –

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मोदी के घर में “अच्छे दिन” के सवाल पे भाजपा संसद मनोज तिवारी की पिटाई !

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Newbuzzindia: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी स्थित अस्सी घाट पर एक समाचार चैनल द्वारा आयोजित लाइव प्रसारण के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी और कांग्रेस विधायक अजय राय के समर्थकों के बीच जमकर मारपीट हुई और दोनों ओर से पथराव भी किया गया।

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनकी पार्टी के सांसद मनोज तिवारी के साथ मारपीट की। दोनों पक्षों ने पुलिस में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है।

पुलिस निरीक्षक आशुतोष ओझा ने बताया, ‘दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से सांसद हैं। ऐसे में एक साल के अंदर संसदीय क्षेत्र में उनके विकास कार्यों की समीक्षा करने के लिए एक समाचार चैनल द्वारा अस्सी घाट पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।’

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में बीजेपी सांसद मनोज तिवारी, कांग्रेस के विधायक अजय राय और समाजवादी पार्टी (एसपी) सरकार में राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल शामिल थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान जब लोगों से अच्छे दिनों पर सवाल जवाब-सवाल का सिलसिला शुरू हुआ तो बीच में हूटिंग होने लगी। इसके बाद कुछ कार्यकर्ता गाली-गलौज करने लगे। इसी दौरान अजय राय और मनोज तिवारी के समर्थक आपस में भिड़ गए और एक-दूसरे पर जमकर लात-घूसे बरसाए। समर्थकों ने जमकर पथराव भी किया। इसके बाद मनोज शो बीच में ही छोड़कर चले गए।

मारपीट के दौरान विधायक अजय राय और भाजपा नेता भेलूपुर थाने पहुंच गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाते हुए तहरीर दी।

वाराणसी से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे अजय राय ने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यकर्ता रोहित चौरसिया के साथ मारपीट की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

वहीं, बीजेपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके सांसद मनोज तिवारी के साथ कांग्रेस के नेताओं ने मारपीट की। पुलिस सच जानने का प्रयास कर रही है।

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प्रशांत किशोर ने मास्टर प्लान पर शुरू किया काम, जाने कैसे दिलाएंगे कांग्रेस को जीत !

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Newbuzzindia: चार राज्‍यों के चुनाव में बुरी तरह हार चुकी कांग्रेस अब उत्‍तर प्रदेश पर नजरें गड़ाए है। उत्‍तर प्रदेश में 2017 में विधानसभा चुनाव होने हैं। एक साल से भी कम वक्‍त में कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए उसके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इन दिनों लखनऊ में डेरा डाले हैं। जिलाध्‍यक्षों के साथ उनकी बैठकों का अगला दौर सोमवार, 23 मई से शुरू हो चुका है।

प्रशांत किशोर के काम करने के तरीके से यूपी कांग्रेस के कुछ नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है। The Indian Express ने पता लगाया है कि किशोर और उनकी 100 सदस्‍यीय टीम कैसे उत्‍तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की विभिन्‍न इकाइयों को छान कर डेढ़ लाख समर्पित कार्यकर्ता चुन रही है।

प्रशांत जुलाई से प्रचार शुरू करने की योजना बना रहे हैं

हर विधानसभा क्षेत्र से करीब 300 कार्यकर्ताओं को चुना जाएगा, जो जमीन पर कांग्रेस के प्रचार में सबसे अहम साबित होंगे। प्रशांत जुलाई से प्रचार शुरू करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही साथ, वह और उनकी टीम अलग-अलग समूहों, विभागों और इकाइयों से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर ला रही है ताकि वे अपने क्षेत्र की समस्‍याओं, जातिगत समीकरणों के बारे में बता सकें और सुझाव भी दे सकें।

अगले डेढ़ महीने की उनकी रणनीति के तीसरे हिस्‍से में उनकी टीम ऐसे परिवारों से मिलेगी जो लम्‍बे समय तक कांग्रेस से जुड़े थे, मगर किन्‍हीं कारणों की वजह से पार्टी से खुद को दूर कर लियाा है। पार्टी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि किशोर ने इस काम को खत्‍म करने के लिए डेढ़ महीने का वक्‍त मांगा है और पार्टी का असली चुनाव प्रचार जुलाई से शुरू होगा। प्रशांत की टीम के पास एक काम है जो उन्‍हें इस महीने के अंत तक खत्‍म करना है। उन्‍हें हर विधानसभा सीट से कम से कम 30-35 हजार कार्यकर्ता चुनने हैं जिन्‍हें जून में लखनऊ लाया जाएगा और कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी उनसे बातचीत करेंगे।

पंजाब से इतर, उत्‍तर प्रदेश में प्रशांत को उत्‍तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अब तक मन मुताबिक तरीके से काम करने दिया है। यहां तक कि प्रशांत ने जिला स्‍तर से लेकर ब्‍लॉक और कांग्रेस की विभिन्‍न इकाइयों से सीधे बात की, ये सारा कार्यक्रम लखनऊ में उन्‍नाव से पूर्व कांग्रेस सांसद अन्‍नू टंडन के सहयोग से हुआ।

लेकिन इन सभी गतिविधियों के बीच, प्रशांत की अलग कार्यशैली ने कांगेस के नेताओं में बेचैनी जा दी है। किेशोर ने रोजमर्रा की बैठकों से इतर पार्टी के गिने-चुने नेताअों से अलग बात की, वे अक्‍सर राहुल गांधी से सीधा संपर्क होने की याद दिलाते हैं, अपने भाषणों में वे दावा करते हैं कि टिकट बांटने में भी अहम रोल अदा करेंगे।

मार्च में जब प्रशांत किशोर आधिकारिक रूप से कांग्रेस की चुनावी योजना का हिस्‍सा बने और राहुल गांधी द्वारा बुलाई गई उत्‍तर प्रदेश के वरिष्‍ठ नेताओं की बैठक में हिस्‍सा लिया, तो वे बहुत कम बोले। सभी को यह बताया गया कि किशोर 2017 के चुनावों के लिए एक चुनावी प्रचार अभियान बनाएंगे और पार्टी का घोषणा पत्र तैयार करने में मदद करेंगे। सभी नेताओं से प्रशांत को सहयोग करने को कहा गया।

जल्‍द ही, किशोर आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव मधुसूदन मिस्‍त्री और यूपी कांग्रेस अध्‍यक्ष निर्मल खत्री के साथ दिल्‍ली आए और 10 मार्च को कांग्रेस के करीब 140 जिलाध्‍यक्षों और नगर अध्‍यक्षों को दो काम सौंपे। पहला, सभी को हर विधानसभा क्षेत्र से कम से कम 20 समर्पित कार्यकर्ताओं के नाम, मोबाइल नंबर और फोटोग्राफ जुटाने को कहा गया।

यह काम मार्च अंत तक खत्‍म करना था, लेकिन अभी भी कुछ काम बाकी बचा हुआ है। दूसरा, उन्‍हें एक फॉर्म भरने को दिया गया जिसमें जिला इकाइयों से क्षेत्र में पार्टी और संगठन की कमियां और अच्‍छाइयां पूछी गई थीं। ये भी पूछा गया कि क्षेत्र में बीजेपी समेत अन्‍य पार्टियों के बेहतर प्रदर्शन करने के कारण भी पूछे। ये जानकारी भी मांगी गई कि उनके इलाके में कौन से मुद्दे उठाए जा सकते हैं। ज्‍यादातर पार्टी इकाइयों ने काम पूरा कर लिया है लेकिन रायबरेली, अमेठी और सुल्‍तानपुर को इस प्रकिया में शामिल नहीं किया गया।

इस दौरान किशोर की टीम को लखनऊ स्थित उत्‍तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय की छत पर एक कमरा दिया गया था। प्रशांत की टीम किसी नेता से बात नहीं करती। जल्‍द ही एक प्‍लान तैयार किया गया, जहां किशोर वरिष्‍ठ नेताओं की मौजूदगी में हर स्‍तर के कार्यकर्ताओं से मिलते।

पहले तय हुआ कि किशोर पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं के साथ पूरा यूपी घूमेंगे। लेकिन बाद में तय किया गया कि कार्यकर्ताओं और नेताओं को लखनऊ बुलाया जाएगा और बाकी नेता सिर्फ बैठक का इंतजाम करने में लगे रहे।

 

उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के आने से बढ़ेंगी भाजपा की मुसीबतें : बाबा रामदेव

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Newbuzzindia: योग गुरु रामदेव ने कहा कि अगर प्रियंका गांधी कांग्रेस नेतृत्व में आती हैं, तो बीजेपी वालों को ज्यादा मेहनत करनी होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस में किसको नेतृत्व करना है, यह उसे ही तय करना है।

साथ ही रामदेव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके साथ जो किया, वह उसे इस जन्म में नहीं भुला सकते।

बता दें कि रामदेव का इशारा अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान दिल्ली के रामलीला मैदान पर हुई पुलिस कार्रवाई की तरफ था।

शनिवार को राजधानी में आयोजित एक न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम में रामदेव ने कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव और प्रियंका गांधी की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘प्रियंका गांधी अगर कांग्रेस नेतृत्व में आती हैं, तो बीजेपी वालों को ज्यादा मेहनत करनी होगी।’

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यूपी विधानसभा चुनाव : प्रशांत किशोर का मास्टर प्लान तैयार ! कामयाब हुए तो कांग्रेस की जीत पक्की ..

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Newbuzzindia: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की नैया पार करने का जिम्मा लेने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) चाहते हैं, प्रदेश में कुर्मी और ब्राह्मण समाज के लोगों को पार्टी से जोड़ा जाए। पीके के जिम्मेदारी संभालने के बाद एक सुगबुगाहट भी तेजी से फैल रही है कि यूपी कांग्रेस में जल्द ही व्यपाक फेरबदल होने वाला है।

बीजेपी में ब्राह्मण अध्यक्ष को हटाए जाने के बाद ब्राह्मणों की नाराजगी को अपने पक्ष में भुनाने के लिए कांग्रेस उन्हें विकल्प देने जा रही है। यूपी कांग्रेस का नया चेहरा किसी ब्राह्मण को बनाए जाने की तैयारी है।

पीके की रणनीति है कि कुर्मी वोट बैंक के साथ अगर ब्राह्मण को भी पाले में कर लिया जाए तो कांग्रेस को यूपी में बड़ी सफलता हाथ लग सकती है। बीजेपी से नाराज ब्राह्मण प्रतिक्रियात्मक तौर पर कांग्रेस के साथ आ सकता है।

पीके अपने प्रबंधन के लिहाज से तीन ब्राह्मण नेताओं के नाम कांग्रेस हाईकमान को सुझाए हैं, लेकिन राहुल गांधी ने किसी नाम पर फिलहाल अपनी मुहर नहीं लगाई है।

पीके ने प्रदेश अध्यक्ष के लिए कमलापति त्रिपाठी के पौत्र राजेशपति त्रिपाठी, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और सांसद प्रमोद तिवारी के नाम अध्यक्ष पद के लिए सुझाए हैं। उनका मानना है कि विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को ब्राह्मणों में पैठ बनानी ही होगी।

प्रशांत का तर्क है कि ब्राह्मण समाज का बीजेपी से मोहभंग हो रहा है, लेकिन उसे बेहतर विकल्प नहीं मिलने के चलते वह सपा और बसपा की तरफ जाता रहा है। अगर कांग्रेस खुद को मजबूत विकल्प साबित करे तो ब्राह्मण समाज पार्टी से जुड़ सकता है।

विधानसभा के 2002 के चुनाव में 50 फीसदी ब्राह्मण मतदाता बीजेपी के साथ था, लेकिन 2007 में 44 और 2012 के विधानसभा चुनाव में 38 फीसदी मतदाता ही भगवा के साथ रह गया था। वर्ष 2017 में इसमें और कमी आने की प्रबल आशंका है। सन् 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा भी 19 फीसदी ब्राह्मण मतदाताओं के वोट पाने में सफल रहे।

पीके का मानना है कि अगर कांग्रेस मजबूत विकल्प साबित हुई तो मुस्लिम मतदाता भी सपा-बसपा से ज्यादा कांग्रेस से स्वाभाविक तौर पर जुड़ जाएगा। पर, पीके की दिक्कत यह है कि उनके हिस्से में अब तक जो दो जीतें आई हैं, वे प्रतिकूल परिस्थितियों में मिली हैं।

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उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव : आगरा से उठी “प्रियंका लाओ कांग्रेस बचाओ” की मांग !

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Newbuzzindia: प्रियंका गांधी यू.पी. के लिए राइट च्वाइस हैं। यदि वह यू.पी. विधानसभा 2017 में कांग्रेस का चेहरा बनती हैं, तो निश्चित ही जादुई आंकड़े सामने आएंगे।

कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पी.के.) की अध्यक्षता में लखनऊ में हुए सम्मेलन में पूरी यू.पी. से गए 620 जिला व शहर अध्यक्ष तथा वरिष्ठ नेताओं ने पी.के. के सामने यह बात रखी। पूरे सम्मेलन के दौरान प्रियंका गांधी का नाम बार-बार चर्चा में आता रहा।

हालांकि पी.के. ने इस मामले में अभी कोई स्पष्ट बात नहीं की, लेकिन कहीं न कहीं कांग्रेसियों की मांग पर सोचने के लिए मजबूर जरूर कर दिया है।

आगरा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दुष्यंत शर्मा ने बताया कि प्रशांत किशोर ने सम्मेलन के दौरान कहा कि हर कदम पर कार्यकर्त्ता मजबूती के साथ खड़े रहें। अब वक्त कांग्रेस का आने वाला है। बस धैर्य रखना होगा और मजबूती के साथ आगे बढऩा होगा, तभी जीत हासिल कर पाएंगे।

उन्होंने संगठन मजबूती को लेकर जोर दिया। साथ ही कहा कि चुनाव में बहुत अधिक समय नहीं है, इसलिए गली-गली और गांव-गांव जाकर लोगों में पैठ बनाना शुरू कर दें।

इस बैठक में शहर व जिलाध्यक्षों का सबसे बड़ा सवाल था कि इस बार यू.पी. विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से चेहरा कौन बनेगा।

जिलाध्यक्ष दुष्यंत शर्मा ने बताया कि इस सवाल को वह हंस कर टाल गए और कहा कि थोड़ा धैर्य रखिए, जो होगा वह बेहद शानदार होगा। इस बार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस जादुई आंकड़ा छुएगी, बस थोड़ी सी मेहनत की जरूरत है। इस बीच प्रियंका गांधी के लिए आवाज उठी, लेकिन मंचस्थ पदाधिकारी इस पर चुप रहे।

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उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव : मैदान में उतरने से पहले ही प्रियंका गांधी को मिल रहा भरपूर समर्थन !

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Newbuzzindia: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अभी से तैयारियां शुरू हो गई और इसके लिए कांग्रेस ने पूरी तरह कमर कस ली है। इस बार कांग्रेस सोशल नेटवर्किंग साइट पर कैंपेन चला रही है और यूजर्स को कन्विंस करने की पूरी कोशिश में जुटी है। वहीं प्रशांत किशोर कांग्रेस के लिए चुनावी समीकरण बना रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्त्ता गांधी परिवार के पैतृक शहर इलाहाबाद में पार्टी की कमान प्रियंका गांधी को दिए जाने को लेकर फेसबुक पर बाकायदा कैंपेन चला रहे हैं।

कार्यकर्त्ताओं ने ऐलान कर दिया है- दीदी इज़ कमिंग सून इन यूपी। कांग्रेस कार्यकर्त्ता हसीब अहमद ने प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी को लेकर कई पोस्टर सोशल नेटवर्किंग साइट पर डाले हैं। इस तरह के कैंपेन से 2017 विधानसभा चुनाव की तैयारी साफ तौर पर झलक रही हैं।

कार्यकर्त्ता प्रियंका गांधी को प्रदेश की कमान सौंपने के लिए अपनी ताकत झोंक रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसका प्रचार जोर-शोर से शुरू कर दिया गया है। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इलाहाबाद पहुंचने पर उनके सामने भी कार्यकर्त्ताओं ने प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारने की गुजारिश की थी।

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उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव : मोदी के मास्टर स्ट्रोक ने बड़ाई सपा-बसपा की मुसीबतें !

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Newbuzzindia: अपने संसदीय क्षेत्र में ई-रिक्शा और ई-बोट बांटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल की सियासत में हलचल मचा दी है। मोदी की चाल से उनके विरोधियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराने लगी हैं।

चुनावी साल में निषादों और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सौगातों का मरहम लगाकर मोदी ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। साफ कर दिया है कि उनकी नजर सपा और बसपा के परंपरागत वोट बैंक पर है। काशी में मोदी की ई-ड्राइव (ई-रिक्शा व ई-बोट) को भाजपा पीएम का मास्टर स्ट्रोक बता रही है।

भाजपा के चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि अगले साल सूबे में होने वाले विधानसभा चुनाव में जातिगत समीकरण एक बड़ा कारक होगा। खासकर पूर्वांचल में पिछड़ों की अच्छी खासी तादाद है। यदि इन्हें पार्टी साधने में कामयाब हो जाती है तो सीटों की संख्या में इजाफा हो सकता है

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