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जानिए क्या है कोरोना का ‘डबल म्यूटेंट’, जिसने भारत में मचा दी है तबाही

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भारत में कोरोना संक्रमण(Corona Infection) चरम पर है देश मे एक दिन में ढाई लाख से ज्यादा केस निकल रहे हैं हजारों लोग इस वायरस से संक्रमित होकर अपनी जान दे रहे हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं भारत मे कोरोना की दूसरी लहर या आज की स्थिति में कहें तो बेकाबू रफ्तार के लिए जिस ‘डबल म्यूटेंट’ वायरस को जिम्मेदार बताया जा रहा है वह क्या है?

आज दुनियाभर में कोरोना के इस नए वेरिएंट को लेकर चर्चा हो रही है जिसने भारत समेत समूचे विश्व को हलाकान कर रखा है। हालात ये हैं कि ब्रिटेन और पाकिस्तान ने भारत को रेड लिस्ट में डाल दिया है। यानी अब इन देशों में भारतीयों की एंट्री फिलहाल नहीं हो सकेगी।

आज हम आपको कोरोना के इस नए वेरिएंट के बारे वो सब चीजें बताएंगे जो आपके लिए जानना बहुत जरूरी है।

क्या है डबल म्यूटेंट वायरस?
इस वैरिएंट को वैज्ञानिक तौर पर B.1.617 नाम दिया गया है, जिसमें दो तरह के म्यूटेशंस हैं- E484Q और L452R म्यूटेशन। आसान भाषा में यह वायरस का वह रूप है, जिसके जीनोम में दो बार बदलाव हो चुका है। वैसे वायरस के जीनोमिक वेरिएंट में बदलाव होना आम बात है। दरअसल वायरस खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं ताकि उन्हें मारा न जा सके। डबल म्यूटेशन तब होता है जब वायरस के दो म्यूटेटेड स्ट्रेन मिलते हैं और तीसरा स्ट्रेन बनता है। भारत में रिपोर्ट की गई डबल म्यूटेंट वायरस E484Q और L452R के मिलने के प्रभाव से बना है। L452R स्ट्रेन संयुक्त राज्य अमेरिका में कैलिफोर्निया में पाया जाता है और E484Q स्ट्रेन स्वदेशी है।

भारत मे सबसे पहले यहाँ पाया गया
भारत मे डबल म्यूटेंट वायरस सबसे पहले महाराष्ट्र में पाया गया जो अब बढ़कर पांच राज्यों दिल्ली,पश्चिम बंगाल,गुजरात,कर्नाटक,मध्यप्रदेश में पहुँच चुका है। जिन राज्यों में डबल म्यूटेंट वाले वायरस पाए गए हैं। वहा पर कोरोना(COVID-19) मामलों में तेजी से वृद्धि में हो रही हैं।


इस कारण है खतरनाक
डबल म्यूटेशन जेनेटिक कोड (E484Q और L452R) से बना है। यह दोनों म्यूटेशंस ज्यादा संक्रमण दर के लिए जाने जाते हैं, वहीं यह पहली बार है कि दोनों म्यूटेशन एकसाथ मिल गए हैं जिससे कि वायरस ने कई गुना ज्यादा संक्रामक और खतरनाक रूप ले लिया है। 

क्या डबल म्यूटेंट वायरस के खिलाफ असरदार है?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। कि डबल म्यूटेंट वायरस के खिलाफ मौजूदा वैक्सीन कारगर है या नहीं इसकी जांच जारी है। अभी तक यह माना जा रहा है कि भारत में मौजूद कोवैक्सिन और कोविशील्ड वैक्सीन इस वेरिएंट के प्रति कारगर है। 

शरीर में बढता है वायरल लोड
म्यूटेशन के कारण कई बार वायरस पहले से कमजोर हो जाता है लेकिन कई बार यही प्रक्रिया वायरस को काफी खतरनाक बना देती है। ऐसे में वायरस हमारे शरीर की किसी कोशिका पर हमला करते हैं तो कोशिका कुछ ही घंटों के अंदर वायरस की हजारों कॉपीज बना देती है। इससे शरीर में वायरस लोड तेजी से बढ़ता है और मरीज जल्दी ही बीमारी की गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है।