मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव हमेशा से ही द्विपक्षीय रहा है. यहाँ पर सीधी टक्कर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होती रही है. अन्य क्षेत्रीय दलों में सिर्फ बसपा ही कुछ सीटें जीतने में कामयाब रही है. बसपा का काम मध्यप्रदेश में हमेशा से ही वोट काटने का रहा है. भाजपा और कांग्रेस से नाखुश नेताओं को टिकट देकर बसपा मध्यप्रदेश में अपने पैर पसारने की कोशिश सन् 1990 से कर रही है. बसपा के अलावा सपा, एनसीपी और जेडीयू जैसे दल भी काफी समय से मध्यप्रदेश में अपना जनाधार बढ़ाने का असफल प्रयास करते रहे है.
मध्यप्रदेश में बसपा की रणनीति बागियों को टिकट देकर खेल बिगाड़ने की रही है. भाजपा और कांग्रेस से नाखुश नेता, टिकट न मिलने पर चुनाव के वक्त बसपा में शामिल हो जाते है. प्रदेश में हमेशा से ही बागी नेताओं के लिए बसपा एक मजबूत ठिकाना रहा है लेकिन 2018 विधानसभा चुनाव में स्पाक्स, जयस और गोंडवाना जैसी पार्टियों ने पूरा खेल ही बदल दी है.
वैसे तो इन दलों की स्थिति प्रदेश में सरकार बनाने की नही है लेकिन जीतने वाले दल को जिताने में यह दल महत्वपूर्ण भूमिका ज़रुर निभाएंगे.
मध्यप्रदेश में जहाँ महीने भर पहले महागठबंधन के कयास लगाए जा रहे थे वहीं अब हाल यह है की सपा, सपाक्स, जयस और गोंगपा और आप जैसी पार्टी तक पूरी 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है. ऐसे में इन पार्टियों ने कांग्रेस और भाजपा के साथ- साथ बसपा का खेल भी बिगाड़ दिया है. पहले जहां टिकट कटने पर कांग्रेस और बीजेपी नेता सीधे बहनजी के पास पहुँच जाया करते थे वहीं इस बार सपा, स्पाक्स, आप, जयस और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जैसे दल भी इन नेताओं पर अपनी नजर लगाए बैठे है.
कांग्रेस और भाजपा जल्द ही उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर सकती है. इस बार दोनों ही पार्टी की रणनीति प्रत्याशी बदलने की है. मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार भाजपा जहां इस बार 70 से ज्यादा मौजूदा विधायकों की टिकट काटने की तैयारी में है. वहीं कांग्रेस ज्यादातर विधान सभाओं में अपने हारे हुए उम्मीदवारों की टिकट काटने की तैयारी में कर रही है.
दलित बाहुल्य आरक्षित सीटों पर बागी जहाँ बसपा के पाले में जाएंगे, वहीं सवर्ण बाहुल्य सीटों पर बागी अब सपाक्स का रुख कर सकते है. साथ ही आदिवासियों के प्रभाव वाली और एसटी आरक्षित सीटों पर बागी नेता गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और जयस जैसे दलों का रुख कर सकते है.
ऐसे में इन छोटे दलों का इस विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन इसी बात पर निर्भर करेगा की किसके पाले में कितने बागी नेता आएँगे।


