आपने सुना होगा कि केंद्र सरकार को राज्य सरकार की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है ? आपने यह भी सुना होगा कि राज्य सरकार जो रिपोर्ट बनाकर भेजती है केंद्र सरकार उसे खारिज कर देती है। पर क्या यह सब तब हो सकता है जब भाजपा की राज्य सरकार रिपोर्ट ने रिपोर्ट बनाई हो और भाजपा की केंद्र सरकार उसे रिजेक्ट कर दे और वो भी एक या दो नही बल्कि 3 बार।

जी हां ये कीर्तिमान स्थापित करने वाला कोई और नहीं अपना छत्तीसगढ़ ही है। जिसने पहले 96 तहसीलों को सूखा घोषित किया था और फिर 4100 करोड़ की केंद्र से मांग की थी। जिसके बाद केंद्र ने रिपोर्ट देखते ही नसीहत दी कि अफसर ग्राउंड पर जाकर हकीकत जानें और इस रिपोर्ट पर फंड नहीं दिया जा सकता है। केंद्र की मोदी सरकार ने कहा कि रमन सरकार रिपोर्ट दोबारा बनाकर भेजें।
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जिसके बाद रमन सरकार द्वारा फिर रिपोर्ट बनाकर भेजी गई। खास बात ये है कि इस बार भी वही रिपोर्ट भेजी हई जो पहले भेजी गई थी। केंद्र ने फिर फंड नहीं दिया और हकीकत जानने के लिए अपने अफसरों की टीम छत्तीसगढ़ भेज दी।
केंद्रीय सूखा राहत जांच टीम की छत्तीसगढ़ के अफसरों के साथ बैठक हुई। बैठक में एसीएस अजय सिंह ने प्रजेंटेशन दी लेकिन केंद्रीय सूखा राहत जांच टीम के प्रमुख श्रीनिवास ने साफ कह दिया कि हमने 10 सदस्य तीन अलग अलग टीमें बनाई हैं जो पूरे इलाके का 23 तारीख तक दौरा करेंगी और हकीकत खुद ही जानेंगी और जिसकी रिपोर्ट हम 1 हफ्ते में केंद्र सरकार को सौंपेगे और इसी के आधार पर सूखा राहत कोष जारी होगा।

मतलब साफ है कि रमन सरकार की रिपोर्ट पर मोदी सरकार को भरोसा नही है।