लोग अक्सर पूछते है कि आरएसएस का आजादी में योगदान क्या रहा ? आजादी के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) पर कर्ई तरह के आरोप लगते रहे है। आरएसएस को जहां एक तरफ तत्कालीन राजनीतिक शक्ति कांग्रेस ने पूरी तरह नकार दिया था। तो वहीं दुसरी तरफ बड़ी संख्या मे लोगों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कदम से कदम मिलाए। आरएसएस को शुरुआती दौर से ही हिन्दु संगठन होने के आरोपों का सामना करना पड़ा। आजादी के बाद से संघ को अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिए लगातार कढ़ी परीक्षा से गुजरना पड़ा।
इस जैसी अनेक चुनौतियों के बाद भी आज 7 से 8 दशक के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत मे अद्वितीय स्थान पर बैठा हुआ है। अप्रत्यक्ष रुप से आज भारतीय राजनीति मे सक्रिय हो चुका है। जहां एक तरफ कांग्रेस, वामपंथी दल और समस्त विपक्षी पार्टियां आरएसएस को हर किसी किमत पर नीचा दिखाने और देश के एक वर्ग विशेष का विरोधी करार करने से नही थकती । वहीं ये सभी दल RSS के कुछ कामों पर हमेशा से बचती रही है। ये वो काम या योगदान है जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बढ़ी ही देशभक्ति के साथ निभाया है। और मुसीबत मे देश का साथ दिया है।
आरएसएस का आजादी में योगदान
10. तो आइये हम आपकों बताते है कि आरएसएस के किन कामों पर कांग्रेस और सभी विपक्षी दल कभी कुछ नही बोल पाये और इन किन कामों के लिए देश हमेशा संघ का आभारी रहेगा-
विभाजन के समय सीमा पर निगरानी
संघ के स्वयंसेवकों ने आजादी के तुरंत बाद से ही अक्टूबर 1947 से सीमा पर निगरानी की। पाकिस्तानी सैनिकों की घुसपैठ पर स्वयंसेवकों ने भी सीमा पर लड़ाई की और शहीद हुए।

