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40 दिन 40 साल: कमलनाथ ने किसानों की मौत को लेकर पूछा पंद्रहवां सवाल

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madhya pradesh congress chief kamalnath

40 दिन 40 साल पूछने की कड़ी में कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार से पंद्रहवां सवाल पूछा है. पंद्रहवें सवाल में कमलनाथ ने पूछा कि, ‘शिवराज जी, किसानों को तो उतार दिया मौत के घाट, अब खेती को क्यों पहुँचा रहे हो आघात ?’

सवाल नंबर पंद्रह –

मध्यप्रदेश में खेती पर संकट के बादल छा रहे हैं ,
मोदी जी अपनी रिपोर्ट में बता रहे हैं ।
शिवराज जी, किसानों को तो उतार दिया मौत के घाट ,
अब खेती को क्यों पहुँचा रहे हो आघात ?

1) मोदी सरकार ने मध्यप्रदेश की खेती पर 24 सितंबर 2018 को एक रिपोर्ट जारी की है। उसके मुताबिक मध्यप्रदेश में 2011 से 15 के बीच किसानों की संख्या 11लाख़ 31 हज़ार ,अर्थात 12.74% बढ़ गई ,और खेती का रकबा 1 लाख़ 66 हज़ार हेक्टेयर कम हो गया ।

2) मप्र में गंभीर संकट यह पैदा हुआ कि 1 हेक्टेयर से कम खेती करने वाले छोटे किसान 24.25 % बढ़ गए और छोटी खेती अर्थात 1 हेक्टेयर से छोटे खेत 23.85% बढ़ गए

3) मप्र में अनुसूचित जाति के बड़े किसान मामा राज में बीते पाँच सालों में 36% कम हो गए और उनकी खेती का रकबा 35 % कम हो गया

4) आदिवासी भाइयों में बड़े किसानों की संख्या 26% कम हो गई और उनकी खेती का रकबा 28% कम हो गया ।

5) मध्यप्रदेश में छोटे और मंझोले किसानों का प्रतिशत बढ़कर 75.57% हो गया,जो बेहद चिंता जनक है ।

6) मध्यप्रदेश में छोटी और मझौली खेती चिंताजनक रूप से 34% से बढ़कर 39% हो गई है, अर्थात किसानों की लागत का बढ़ना और मुनाफ़ा कम होना।

7) मध्यप्रदेश में मार्जिनल किसान के पास एवरेज खेत मात्र 0.49 हेक्टेयर है,जो बेहद चिंताजनक है ।

8)यह तथ्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है कि व्यक्तिगत खेती की श्रेणी में मप्र के मार्जिनल किसानों के पास खेती का रकबा मात्र 0.38 हेक्टेयर है और साझा खेती में यह मात्र 0.40 हेक्टेयर है
9)मामा,की किसान पुत्र के रूप में जैसे जैसे ब्रांडिंग हुई,वैसे वैसे खेती और किसान समाप्त होते गए

-40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर मामा सरकार”

40 दिन 40 सवाल- ‘मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ? क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?’

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान को लेकर कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से तेरहवां सवाल पूछा है। तेरहवें सवाल में कमल नाथ ने पूछा, ‘मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ? क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?’

सवाल नंबर तेरह –

मोदी जी की निगाह से देखिए मामा जी की विदेशी यात्राओं का कमाल,
निवेश में मध्यप्रदेश ठन ठन गोपाल ।
मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ?
क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का शिवराज ब्रांड झूठ ।

12 सालों से शिवराज जी देश विदेश में चमक-धमक के साथ इन्वेस्टर्स मीट कर रहे हैं। कहते हैं कि 40 लाख़ करोड़ रुपए के अनुबंध भी हुए हैं। सच क्या है? सच 23 जुलाई 2018 को लोकसभा में बताया गया।

1.वर्ष 2103-14 में भारत में कुल 24299.33 मिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आया।

इसमें से केवल 118.85 मिलियन डॉलर (यानी 0.49%) का निवेश मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया। इतने में से पूरा भी मप्र में नहीं आया।

2.वर्ष 2014-15 में भारत में कुल 30930.50मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश आया। इसमें से केवल 100.13 मिलियन डाॅलर (यानी 0.32%) मप्र और छतीसगढ़ में आया।

3.वर्ष 2015-16 में भारत में कुल 4000000मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश भारत में आया। इसमें से केवल 80.02 मिलियन डाॅलर (यानी 0.20%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

4.वर्ष 2016-17में भारत में 43478.27मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश भारत में आया।

इसमें से केवल 76.10 मिलियन डाॅलर ही (यानी 0.17%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

5.वर्ष 2017-18 में भारत में कुल 44856.75 मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश आया। इसमें से केवल 28.16 मिलियन डाॅलर (यानी 0.06%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

शिवराज जी, सरकारी खज़ाने से विदेश यात्रायें करने के बाद भी कोई निवेश करने क्यों नहीं आया?
क्योंकि निवेशक शिवराज सरकार के भ्रष्टाचार से भयभीत रहे।

शिवराज ब्राँड झूठ
सबसे ज्यादा विदेशी निवेश कर्नाटक, तमिलनाडु, आँध्रप्रदेश में आया, जहाँ भाजपा की सरकारें नहीं हैं।

40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,

मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

40 दिन 40 सवाल: कमल नाथ ने पूछा बारहवां सवाल- ‘मामा जी, क्या गौ माता नहीं, गोल्फकोर्स से है प्यार ?’

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40 दिन 40 सवाल पूछने के सिलसिले में मध्य प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से बारहवां सवाल पूछा है. बारहवें सवाल में कमल नाथ ने गौ माता पर हो रहे अत्याचार को लेकर सवाल किया है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, मोदी जी ने बताया मामा जी के मुखौटे में नहीं है दम, मप्र में गौ माता हो गईं कम। मामा जी, क्या गौ माता नहीं, गोल्फकोर्स से है प्यार ? गौ माता के भोजन पर भी क्यों करते हैं वार ?

सवाल नंबर बारह

1)बीजेपी के लोग गौ-माता के नाम पर ख़ूब हल्ला मचाते हैं।
हम हर पंचायत में गौशाला खोलने का वचन दें, तो इनके पेट दुख जाते हैं ।
आइए,देखिए मामा जी गौ माता की कितनी अनदेखी किए जाते हैं:

2) मामा सरकार की पोल खोल रही है मोदी सरकार की लाइव स्टॉक सेंसस की रिपोर्ट ,जो यह बताती है कि:
18 वीं सेंसस में मध्यप्रदेश में गौ -धन की संख्या में भारी कमी आई है। मध्यप्रदेश में 18 वीं सेंसस में 2 करोड़ 19 लाख़ गौधन था ,जो 5 सालों में कम होकर 1करोड़96 लाख़ रह गया ।

3) यानी मामा के शासनकाल में 23 लाख़ 13 हज़ार गौ-धन खत्म हो गया ।
4) शिवराज जी, जवाब दीजिए? 23लाख़ 13हज़ार गौ-धन कहाँ गया ?
5)भैंसों की संख्या 91लाख़ 29हज़ार से कम होकर 81लाख़ 87हज़ार रह गई। शिवराज जी, जवाब दीजिए 9 लाख़ 41 हज़ार भैंसें कहाँ गायब हो गयीं?

6) सभी तरह के पशुधन में 43लाख़ 62 हज़ार की कमी आई है । क्या मध्यप्रदेश में अवैध कत्लखाने चल रहे हैं ?
7) इतना ही नहीं, शिवराज सिंह की सरकार ने हमारे राज्य की देशी प्रजातियों को खत्म करने का काम किया है। मध्यप्रदेश में 26 लाख़ 79 हज़ार देशी प्रजाति के पशु खत्म हो गए।

8) क्या यह सही है कि आपने प्रावधान तो गौ शाला के लिए प्रति गाय लगभग 17 रु किया, मगर 2 रु भी ख़र्च नहीं किये ?
2013-14 में सालाना 608 रुपए अऩुदान दिया गया,प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रु 66 पैसे
-2014-15 में सालाना 635 रु अऩुदान दिया गया,प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 73 पैसे

-2015-16 में सालाना 591 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 61 पैसे।
-2016-17 में सालाना 577 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 58 पैसे।
-2017-18 में सालाना 679 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 86 पैसे

9) मामा जी,क्या गौ माता का खाना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया ?

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,

मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

40 दिन 40 सवाल: कमल नाथ ने पूछा ग्यारहवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से पूछा ग्यारहवां सवाल . ग्यारहवें सवाल में कमल नाथ ने ट्वीट करते हुए पूछा, ‘मोदी जी बता रहे हैं मनरेगा की बात, मामा जी ने मेहनतकशों से किया कुठाराघात । रोज़गार का कानूनी अधिकार मामा, क्यों किया बेकार ?

ग्यारहवां सवाल-

1) मध्यप्रदेश में 68.35 लाख़ मनरेगा के जॉब कार्ड्स हैं,अर्थात लगभग 3 करोड़ 41 लाख़ 75 हज़ार लोग प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से मज़दूरी के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं ।

2) कांग्रेस ने यह तय किया था कि एक साल में 100 दिनों का रोज़गार इस योजना के तहत दिया जाएगा ।

मप्र में मनरेगा में पंजीकृत लोगों मे से
वर्ष 2014-15 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार – 1,58,776 (2.33%)।
वर्ष 2015-16 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार – 2,25,502 (3.30%)।
वर्ष 2016-17 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार -1,40,990 (2.1%)।

वर्ष 2017-18 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार – 1,34,724 (1.97%) ।

3) कांग्रेस द्वारा बनाए गए क़ानून में कहा गया था कि हर मज़दूर को काम करने के एक सप्ताह के भीतर मज़दूरी का भुगतान हो जाएगा; और यदि नहीं हुआ तो सरकार देरी से मज़दूरी के भुगतान का मुआवजा देगी।

4)शिवराज जी ने वर्ष 2013-14 से सितम्बर 2018-19 तक 6हज़ार 167 करोड़ रुपए की मज़दूरी का देरी से भुगतान किया।
हज़ारों मज़दूरों को अब भी उनकी मेहनत की कमाई नहीं दी गई। क़ानून के मुताबिक देरी से भुगतान पर सरकार को 10 % के मान से कम से कम 610 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का अनुमान था,

मगर मामा ने दिये लगभग केवल 3 करोड़ रुपए।
2013-14- देरी से दिये 1706 करोड़ रुपए ।
2014-15- देरी से दिये 1740 करोड़ रुपये।
2015-16 – देरी से दिये 1326 करोड़ रुपए।
2016-17- देरी से दिये 787 करोड़ रुपए।
2017-18- देरी से दिये 434करोड़ रुपये।
2018-19-देरी से1734करोड़ रुपये।

Total- 6167 करोड़ -देरी से दिया गया भुगतान ।

5) मामा सरकार द्वारा मुहैया कराया गया एवरेज रोजगार: 2014-15मात्र 42 दिन ,2015-16 मात्र 45 दिन 2016-17 मात्र 40 दिन ,2017-18मात्र 46 दिन और 2018 -19 मात्र 38 दिन ।

6)मामा सरकार द्वारा मुहैया कराई गई एवरेज मजदूरी प्रतिदिन :
2014-15 मात्र 149रु ,2015-16 मात्र 149 रु 2016-17 मात्र 155रु ,2017-18मात्र165रु और
2018 -19 मात्र 170रु।

40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर, मामा सरकार”

40 दिन 40 सवाल: पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला होने को लेकर कमलनाथ ने पूछा दसवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार से दसवां सवाल पूछा। अपने दसवें सवाल में कमल नाथ ने पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला होने को लेकर किया।

सवाल नंबर दस

मोदी जी ने निकाला पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला,
मामा क्यों डाला मुँह पर ताला ? शर्म करो शिवराज ।
मनमोहन जी के समय ‘धरना-धर’ और उपवास का स्वाँग,
अब क्यों नही उठाते बासमती की माँग ?

1) कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज को सशक्त करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय स्थापित किया था। मोदी सरकार ने नियोजित रूप से पंचायती राज का गला घोंट कर उसे समाप्त प्रायः कर दिया । इस मंत्रालय के 2014-15 के 7000 करोड़(BE) के बजट को 2015-16 में 94 करोड़(BE) कर दिया गया ।

2) इस मंत्रालय के तहत दो प्रमुख कार्यक्रम चलाए जाते थे।
पहला- देश के पिछड़े जिलों का विकास BRGF) और दूसरा पंचायतों को सशक्त करने के लिये राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान (RGPSA)। मोदी सरकार ने दोनों कार्यक्रमों को 2015-16 के बाद बंद कर दिया।

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3) कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश के 30 पिछड़े जिलों को आगे लाने के लिए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि ( BRGF) कार्यक्रम 2006-07 से प्रारंभ किया था । जिसके तहत 2013 -14 तक मध्यप्रदेश पर 2995.59 करोड़ रु खर्च किए ।
4)अलीराजपुर ,अनूपपुर ,अशोकनगर,बालाघाट ,बड़वानी
,बैतूल,बुरहानपुर ,झाबुआ ,मंडला, टीकमगढ,डिंडोरी, श्योपुर इत्यादि पिछड़े 30 जिलों का अनुदान बंद ।

5) मोदी जी ने आने के बाद 2015 -16 से मध्यप्रदेश को यह(BRGF) अनुदान बंद कर दिया ।आखरी साल 2014 – 15 के लिए मोदी जी ने 647.20 करोड़ रु प्रावधानित किए ,मगर जारी किए सिर्फ़ 221.22 करोड़ और मामा जी ने ख़र्च किए मात्र 197.52 करोड़ ।

6) इसी प्रकार मध्यप्रदेश की पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान को भी अनुदान बंद कर दिया । मोदी जी ने आखरी वर्ष 2015-16 में इस हेतु प्रावधानित किए मात्र 41.63 करोड़ और दिए सिर्फ़ 10.8 करोड़ ।

7)शिवराज जी फरवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी को पत्र लिखकर धरने पर बैठे थे कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल की पहचान,जो जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) ने स्वीकारी है,को एपीडा द्वारा स्वीकारा नहीं जा रहा है।ये मध्यप्रदेश के किसानों के साथ कांग्रेस सरकार का अन्याय है

8) अब क्या हुआ मामा जी , जब मोदी सरकार ने फरवरी 2016 में आपकी मांग को ठुकरा कर आदेश दिया कि मध्यप्रदेश के किसान अपने चावलों को बासमती की पहचान नहीं दे सकेंगे ?

9) मध्यप्रदेश में 2 लाख़ हेक्टेयर के 13 जिलों,विदिशा ,सीहोर होशंगाबाद ,नरसिंहपुर ,जबलपुर, गुना ,शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया ,भिंड ,श्योपुर, मुरैना,रायसेन के किसानों को मोदी जी ने कहा कि वे अपने चावल बासमती के नाम से नहीं बेच सकेंगे ।

10)मामा जी,मप्र के बासमती चावल उत्पादक किसानो के लिए अब धरने का स्वाँग भी नही करोगे?अब क्या मोदी सरकार से डर लगता है या कांग्रेस सरकार के समय दिखावा कर रहे थे?
सोर्स -केंद्रीय पंचायतीराज मंत्रालय,कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण
धरना-धर मामा का स्वाँग

40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर, मामा सरकार”

40 दिन 40 सवाल: कमल नाथ ने आठवें सवाल में पूछा, ‘शहरों को सपने बेचे हज़ार, मगर उम्मीदों को क्यों किया तार -तार ?’

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सोशल मीडिया के जरिये 40 दिन 40 सवाल अभियान के तहत कांग्रेस मध्य प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने मोदी सरकार और शिवराज सरकार से आठवां सवाल पूछा है. कमल नाथ ने अपने आठवें सवाल में शहर को विकास बनाने को लेकर झूठे भाषण पर तंज कसा है. उन्होंने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय,पिनाकी मिश्रा कमेटी रिपोर्ट के सोर्स का हवाला देते हुए एक के बाद एक 8 ट्वीट्स के जरिये सवाल पूछा है.

आठवां सवाल-

मोदी और मामा ने कहा,”मिलेगा शहरी विकास का मौका”,
मगर ऊँट के मुँह में जीरा झोंका।
मामा, शहरों को सपने बेचे हज़ार, मगर उम्मीदों को क्यों किया तार -तार ?

1) अमृत ( AMRUT ) -25-6-2015 को लॉन्च किया गया।
2015 से 2018-
प्रोजेक्ट स्वीकृत 6200.62 करोड़, भेजे सिर्फ़ 528.31 करोड़, मामा ने ख़र्च किये सिर्फ़ 389.75 करोड़ ।
वर्ष 2015-16 – (134 cr ),2016-17-(172cr) ,2017-18(211.61cr)

2) स्मार्ट सिटी -25-6-2015 को लॉन्च किया।
मध्यप्रदेश की योजना के लिए स्वीकृत किये 12,685 करोड़, केंद्र से जारी किए मात्र1020 करोड़।
2015-16 में जारी किए -386करोड़ , 2016-17में जारी किए 394करोड़ 2017-18 में जारी किए मात्र 240 करोड़।

3) स्वच्छ भारत का पीटा सिर्फ़ ढिंढोरा। मध्यप्रदेश में कुल ख़र्च किए सिर्फ 721- करोड़।
वर्ष 2015-16 में 135.80करोड़ ,वर्ष 2016-17 में 270 करोड़ वर्ष 2017-18 में मात्र 293 करोड़।

4) प्रधानमंत्री आवास योजना –
केंद्र ने स्वीकृत किये 7007.38करोड़, केंद्र ने भेजे 1488.64 करोड़ ,घर बनने थे -4लाख 59हजार 395, घर पूरे हुए –33 हजार765 ।

5)मोदी-मामा एक समान,
भाषणों के अलावा दूजा नहीं काम।
ख़ुद मोदी सरकार की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट कहती है कि मोदी सरकार ने शहरी विकास के उनके ड्रीम प्रोजेक्ट में अब तक मात्र 21.6% राशि ही ख़र्च की है ।

अमृत(AMRUT) -में राशि खर्च मात्र – 28%
हृदय (HRIDAY)-में राशि खर्च मात्र – 13.58%
स्मार्ट सिटी -में तो राशि ख़र्च मात्र – 1.38%
स्वच्छ भारत -में राशि खर्च मात्र – 38.01%
पीएम आवास योजना -में राशि खर्च मात्र-20.78%

40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”
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40 दिन 40 सवाल- शिक्षा में हो रही धांधली को लेकर कमल नाथ ने पूछा सातवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ को लेकर सातवां सवाल पूछा है. कमल नाथ ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘मोदी सरकार से जानिये मामा सरकार की स्कूली शिक्षा का रोंगटे खड़े कर देने वाला सच।’
बच्चों के भविष्य को पहुँचाई चोट, मामा के मुखौटे में निकले कई खोट। मामा जी, बच्चों से क्यों किया विश्वासघात ? स्कूली शिक्षा को क्यों पहुँचाया गंभीर आघात ?

इसके बाद कमल नाथ ने एक के बाद एक 11 ट्वीट्स के जरिये आंकड़ों के साथ शिक्षा में होने वाली धांधली पर सवाल पूछा।

(1) मध्यप्रदेश के प्राथमिक ,माध्यमिक और उच्चत्तर माध्यमिक ,कुल 150762 स्कूलों में से 1 लाख़ 6 हज़ार से अधिक,अर्थात 71% स्कूलों मे बिजली पहुँची ही नहीं है ।
(2) मध्यप्रदेश के नौनिहालों की आधुनिक शिक्षा का हाल यह है कि मात्र 15. 7 % स्कूलों में कंप्यूटर एजुकेशन की व्यवस्था है

अर्थात राज्य के 1.22 लाख़ स्कूलों में आज भी कम्प्यूटर शिक्षा नहीं है ।
(3) मध्यप्रदेश के सिर्फ़ 15.6 % माध्यमिक स्कूलों में और मात्र 19% उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में लाइब्रेरी की व्यवस्था है । सरकारी स्कूलों में तो यह नगण्य है ।

(4) केंद्र की डाईस-2017 रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में 19 हज़ार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चलते हैं ।
(5) 14.6 हज़ार स्कूलों में बारिश के दिनों में पहुँच का रास्ता ही नहीं रहता,यानी इन स्कूलों में बच्चे पढ़ने ही नहीं जा पाते।
6)राज्य में 46.6हजार स्कूलों में अब भी नहीं बन पाया बच्चों के लिए खेल मैदान।प्रदेश के 93 हजार से अधिक स्कूलों में आज भी दिव्यांग बच्चों के लिये नहीं बन पाया है रैंप
(7)आज भी मप्र के 4451 स्कूलों में सिर्फ़ एक ही कमरा है। यानी चार से आठ वर्ग के बच्चे एक ही रूम में पढ़ते हैं।

8)कक्षा 1से5 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही एक साल मे 3.57लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है।कक्षा 6से8 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही 1साल में 3.42लाख बच्चो को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है
(9)कुल मिलाकर कक्षा 1से8 तक 1साल मे 7.17लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है

10) कंट्रोलर ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट बताती है कि 2010 से 2016 तक माध्यमिक शिक्षा अर्थात आठवीं तक के 42 लाख़ 46 हज़ार बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया ।
11) सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1 से 8 वीं तक मुफ़्त किताबें बाँटे जाने का प्रावधान है ।
कैग ने अपनी 2017 की रिपोर्ट में बताया कि 2010 से 2016 तक 42 लाख़ 88 हज़ार किताबें बाँटी ही नहीं गईं ।
12) कैग की 2017 की रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में 63 हज़ार 851 शिक्षकों की कमी है।
13)सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक़ सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए आवंटित कुल बजट में से 2011-2016 के बीच 7284.61 करोड़ रुपए (आवंटन का 31 प्रतिशत) जारी ही नहीं किये। सरकार बच्चों के शिक्षा के अधिकार के हनन में सबसे बड़ी अपराधी रही ।

कल्पना कीजिए बग़ैर पुस्तक , बग़ैर शिक्षक ,बग़ैर कंप्यूटर , बग़ैर बिजली लाखों बच्चे अपना भविष्य कैसे सँवार सकते हैं । -उखाड़ फेंकिये ऐसी सरकार – 
सोर्स : HRD की EDI , DISE रिपोर्ट CAG की रिपोर्ट

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

40 दिन 40 सवाल: आपको हटाएंगे तो भ्रष्टाचार होगा कम, आइडिया में है दम

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40 दिन 40 सवाल अभियान के क्रम में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ नें मध्यप्रदेश की समृद्धि और सुशासन को लेकर शिवराज सरकार से छठां सवाल पूछा है. कमल नाथ ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘आइडिया में है दम ?’
‘मध्यप्रदेश की समृद्धि और सुशासन के दिन आ रहे है पास,आपकों एक आइडिया दिया है बेहद खास ।
प्रदेश के नागरिक 28 नवंबर को इसे हर हाल में आजमाएंगे,आपकी नाकारा सत्ता को हटाएंगे और 11 दिसंबर से मध्यप्रदेश की समृद्धि के दिन आ जाएंगे ।’

छठां सवाल

शिवराजजी एक बेहद दमदार आइडिया है मध्यप्रदेश की समृद्धि का, जो आपको प्रेषित कर रहा हूं। बीते दिनों मध्यप्रदेश के नागरिकों से हुई चर्चा का सार ही है जिससे इस आइडिया ने जन्म लिया है औऱ सही माने तो इस आइडिया में मध्यप्रदेशकी समृद्धि का राज भी छुपा है। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि मध्यप्रदेश में प्राकृतिक संसाधन औऱ नागरिकों की इच्छा शक्ति प्रचुर मात्रा में बै। मगर यह बात भी सही है कि प्रगित की असीम संभानवाओं के बावजूद मध्यप्रदेश आपके नेतृत्व में समृद्ध प्रदेश नहीं बन पाया और इस बात की पुष्ठि मोदी सरकार भी अपनी रिपोर्ट्स में करती हैं। आप ज्यों-ज्यों सरकारी संसाधनों को अपनी छवि चमकाने की आग में झोंकते गए, त्यों-त्यों मध्यप्रदेश बदहाली की गर्त में गिरता गया।

  1. आपने सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च कर बेटी बचाओ के नारे से अपनी छवि को तो चमका लिया, मगर बेटियों की किस्मत पर अपराधियो और अराजक तत्वों का ग्रहण लगा दिया।
  2. आपने बच्चों के मामा का मुखौटा लगाकर खुद की छवि को हष्ट-पुष्ट तंदरुस्त कर लिया, मगर मप्र के बच्चों को कुपोषण के काल चक्र में फंसा दिया।
    3 आपने हजारों करोड़ के विज्ञाप देकर किसानपुत्र केनाम पर अपनी प्रसिद्धि की फसलें लहलहा लीं, मगर किसान की किस्मत में आत्महत्याका सूखा लिख दिया। यहां तक कि फसलों के दाम मांगने पर किसान के सीने को छलनी करवा दिया।
  3. एक तरफ आदिवासी नृत्य कर अपनी छवि पॉलिश की औऱ उन्हें कैंसर युक्त जूतों से नवाज दिया। इतना ही नहीं उनके वन में रहने का अधिकार को नकार कर लाखों आदिवासी भाइयों को दर-बदर कर दिया।
  4. एक तरफ आप सैकड़ों करोड़ खर्चकर विदेश यात्राएं औऱ इन्वेस्टर मिट कर अपनी छवि चमकाने में जबरदस्त निवेश करते गए औऱ नए उद्योग आना तो दूर पुराने बी बंद हो गए।
  5. एक तरफ आप युवाओं को रोजगार क सपने बेचते गए औऱ दूसरी ओर करोड़ों युवाओं का भिविष्य व्यापम में लुटवा दिया।
  6. एक तरफ मध्यप्रदेश की जीवनदायनी मां नर्मदा की यात्रा कर अपनी धार्मिक छवि का चमकाया और दूसरी तरफ मां नर्मदा का दामन अधर्मी रेत माफियाओं के हवाले कर मां नर्मदा कोछलनी कर दिया।
  7. आपने अपनी छवि के लिए भगवान राम औऱ आदि शंकराचार्य तक के साथ छल किया न राम वनगमन पथ का निर्माण न शंकराचार्य भगवान की 100 फिट ऊंची प्रतिमा।

आपने मध्यप्रदेश के पूरे खजाने को खाली कर दिया और मध्यप्रदेश की किस्मत में अवरूद्ध विकास लिख दिया। इसलिए मध्यप्रदेश की जनता का यह आइडिया बेहद दमदार है कि ’28 नवबंर को आपकी रवानगी तय की जाए औऱ मध्यप्रदेश की समृद्धि सुनिश्चित।’ मध्यप्रदेश के नागरिकों ने आइडिया के साथ कुछ नारे भी दिए हैं।

आपको हटाएंगे तो भ्रष्टाचार होगा कम। आइडिया में है दम।
आपको हटाएंगे तो अपराध होगा कम। आइडिया में है दम।
आपको हटाएंगे तो किसानों में होगी नई उमंग। आइडिया में है दम।
आपको हटाएंगे तो युवाओं में होगी नई तरंग। आइडिया में है दम।
आप जाएंगे तो ही प्रदेश के नागरिकों को मनरेगा की मजदूरी, वन अधिकार कानून के अधिकार पत्र, खाद्य सुरक्षा और मातृत्व हक इत्यादि मिल पाएंगे। मामा जी बस इसी आइडिया में है दम। आपको हटाएंगे और समृद्धि लाएंगे।

40 दिन 40 सवाल – राज्य में बच्चों के भविष्य को अंधकार में डालने को लेकर कमल नाथ ने पूछा पांचवा सवाल

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40 दिन 40 सवाल के अभियान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने प्रदेश में हो रहे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ को लेकर शिवराज सरकार से पांचवा सवाल किया है. उन्होंने एक के बाद एक 10 ट्वीट्स के जरिये मध्य प्रदेश में होने वाले बच्चों पर शोषण, अपहरण और पैदा होते ही बच्चों की मौत को लेकर कई सवाल दागे हैं.

सवाल नंबर पांच-

मोदी सरकार से जानिये, क्या किया है मामा ने मध्यप्रदेश के नौनिहालों का हाल , बच्चों को बनाकर ढाल चलते रहे बस चुनावी चाल । शर्मनाक शिवराज जी , बच्चे राज्य का भविष्य होते हैं।आपने प्रदेश के भविष्य को ही अंधकार की आग में क्यों झोंक दिया ?

1)बच्चों के प्रति अपराध में मप्र नं1: 2004से 2016के बीच बच्चों के साथ अपराधों के सबसे ज़्यादा 88908मामले मप्र मे दर्ज हुए
2016मे मप्र मे बच्चों के साथ अपराध के हर रोज 38मामले दर्ज हुए
2)मामा सरकार के आने के वक्त 2004मे बच्चों पर 3653अपराध होते थे,तो आज 13746अपराध होने लगे है

3)मध्यप्रदेश में सबसे ज़्यादा बच्चे गुम हुए : वर्ष 2016 में ही मध्यप्रदेश में 8503 बच्चे गुम हुए।इनमें से 6037 लड़कियां थीं। पिछले सालों की संख्या भी मिला ली जाए तो वर्ष 2016 की स्थिति में कुल 12068 बच्चे गायब थे। एक साल में मध्यप्रदेश में हर रोज़ 23 बच्चे गुमते हैं।

4)सबसे ज़्यादा नवजात शिशु मृत्यु : नवजात शिशु मृत्यु दर (32 नवजात शिशु मृत्यु/एक हज़ार जीवित जन्म) भी मध्यप्रदेश में सबसे ज़्यादा है। वर्ष 2008 से 2016 के बीच मध्यप्रदेश में 6.79 लाख़ बच्चों की जन्म लेने के 28 दिनों के भीतर ही मृत्यु हो गई।

5)सबसे ज़्यादा शिशु मृत्यु : शिशु मृत्यु दर (यानी एक हज़ार जीवित जन्म पर मृत होने वाले एक साल से कम उम्र के बच्चे) भी मध्यप्रदेश में सबसे ज़्यादा यानी 47 है। वर्ष 2008 से 2016 के बीच मध्यप्रदेश में 9.84 लाख़ बच्चों की अपना पहला जन्मदिन मनाने से पहले ही मृत्यु हो गई।

6)बच्चों का अपहरण : बच्चों के लिए मध्यप्रदेश को आपने सबसे असुरक्षित राज्य बना दिया है। वर्ष 2004 से 2016 के बीच मध्यप्रदेश में बच्चों के अपहरण के 23099 मामले दर्ज़ हुए। अकेले वर्ष 2016 में राज्य में 6016 ,यानी हर रोज़ बच्चों के अपहरण के 16 मामले दर्ज़ हुए।

7) मामा सरकार जब सत्ता में आई तब 2004 में बच्चों के 179 अपहरण होते थे, तो आज 2016 में 6119 अपहरण होने लगे हैं।
8) नैशनल फैमेली हेल्थ सर्वे के मुताबिक मध्यप्रदेश में 32% नाबालिग बच्चियों की शादी करा दी जाती है ।

9)बाल विवाह की गंभीर स्थिति:जनगणना 2011के मुताबिक मप्र मे8.91लाख बच्चो की शादी कर दी गई।इनमे से2.4लाख लड़कियाँ माँ बन चुकी है।3.90लाख बच्चियो की माँ बनने की उम्र 19साल से कम है।इसी तरह 29441बच्चे ऐसे थे,जो विधवा/विधुर,अलग हुए/तलाकशुदा थे।इनमे से 12382लड़किया और 17059लड़के थे
10)बच्चे बने मज़दूर – राज्य में जनगणना के आंकड़ों के अनुसार कुल बाल श्रमिकों की वास्तविक संख्या 7 लाख़ है।15 सालों में शिवराज सरकार ने बाल श्रमिकों का सर्वे ही नहीं करवाया।

सोर्स : केंद्रीय गृह मंत्रालय,राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो,NHFS-4

40 दिन 40 सवाल- कमल नाथ ने स्वर्णिम समृद्ध के झूठ को लेकर पूछा चौथा सवाल

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भाजपा सरकार से 40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने चौथा सवाल स्वर्णिम समृद्ध के झूठ और मध्यप्रदेश लूट को लेकर किया है. एक के बाद एक 10 ट्वीट्स के जरिए कमल नाथ ने शिवराज सरकार से मध्यप्रदेश में बढ़ती गरीबी और रोजगार को लेकर कई सवाल पूछे हैं.

सवाल नंबर चार-

‘वो ही फैला रहे हैं स्वर्णिम से समृद्धि का झूठ,
जिन्होंने लिया मध्यप्रदेश को लूट ‘
मामा जी,क्या समृद्धि का नारा भाजपा नेताओं और मंत्रियों के लिए गढ़ा?
तो फिर बताओ मध्यप्रदेश की गरीबी का ग्राफ़ लगातार क्यों बढ़ा?

मोदी सरकार ही खोल रही है ‘स्वर्णिम से सम्रद्धि’ की पोल,
बता रही है मामा जी का
फूटा हुआ है ढोल।
1 ) मोदी सरकार ने राज्यों का संपत्ति सूचकांक जारी किया है,
जिसमें मप्र के सिर्फ़ 15.8% परिवार ही इसके दायरे में आते हैं।इतनी खराब स्थिति बड़े राज्यों में छत्तीसगढ़ और बिहार की है।

जहाँ चंडीगढ के 78.5% ,पंजाब के 60.7%, हिमाचल जैसे राज्य के 31% परिवार संपन्न हैं। ( लोकसाभा – प्रश्न 174- 2/2/2018 )
2) मोदी सरकार की सितम्बर 2017 (NFHS) में जारी रिपोर्ट बताती है कि 2006 से 2016 के बीच मध्यप्रदेश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की जनसंख्या 27 % बढ़ गई है।

3)केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वे (2016) में मप्र में सिर्फ 36% लोग पक्के घरों में रहते है
(4)मप्र में सिर्फ 23% घरों में नल द्वारा पीने का पानी आता है(शहरों में 51% और गांवों मे 11%)
(5)मप्र के सिर्फ 30% लोग खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करते है

(6)मध्यप्रदेश में 57% परिवार अभी भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं।
(7) मोदी सरकार का नीति आयोग कहता है कि मध्यप्रदेश के 45 लाख़ 82 हज़ार 607 (40.33 %) ग्रामीण घरों में बिजली नहीं है । ( 30 /4/2017 )

(8) हैंडबुक ऑफ स्टेटिस्टिक्स (आर बी आई) के अनुसार यू पी और बिहार के बाद सबसे ज़्यादा गरीब लोग मध्यप्रदेश में हैं – 2करोड़ 34लाख़ 6000 ।
(9) केंद्र की कृषि लागत और मूल्य आयोग की वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट: मध्यप्रदेश में कृषि मजदूरी सबसे कम ,मात्र 210 रुपये है

बिहार में 251रु प्रति दिन,आंध्रप्रदेश में 291रु., महाराष्ट्र में 269 रु,पश्चिम बंगाल में 232रु कृषि मजदूर को मिलते हैं
पिछले 15सालों से मप्र में सबसे कम मजदूरी मिलती है
(10) मप्र में मनरेगा में दर्ज परिवार -68.25 लाख
अर्थात मध्यप्रदेश की लगभग आधी आबादी मज़दूरी के लिए बाध्य।

2014-15 में100दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-1,58,776(2.33%)
2015-16 में 100दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-2,25,502(3.30%)
2016-17 में 100दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-1,40,990(2.1%)
2017-18 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार – 1,34,724 (1.97%)।

(11)मोदी सरकार के नीति आयोग के सीईओ अमिताभकांत मध्यप्रदेश के विकास पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करते हुए अप्रैल 2018 में कहते हैं कि मध्यप्रदेश जैसे पिछड़े राज्यों के कारण देश पिछड़ गया ।

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

‘हार की कगार पर,मामा सरकार’