पश्चिम बंगाल चुनाव में हुई बीजेपी की करारी हार के बाद तिलमिलाई आईटी सेल ने अपने वरिष्ठ नेताओं को खुश करने के उद्देश्य एक ऐसा काम कर डाला जिससे पार्टी की बनी बनाई शाख पर ही बट्टा लग गया।
दरअसल पश्चिम बंगाल की भाजपा आईटी सेल ने ममता बनर्जी की पार्टी के चुनाव जीतने के बाद हुई हिंसा पर एक पत्रकार की तस्वीर अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पोस्ट कर दी जिसके बाद बवाल कटा तो वह पत्रकार सबके सामने आया और बोला कि मैं जिंदा हूं।
भाजपा ने अपने मृत कार्यकर्ता मानिक मोइत्रा के निधन पर वीडियो अधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से प्रसारित किया था लेकिन गलती से उसमें इंडिया टुडे ग्रुप के पत्रकार अभ्रो बनर्जी की तस्वीर लग गई तस्वीर लगने के बाद अब रोने उसका खंडन करते हुए लिखा कि मैं बंगाल से 1300 किलोमीटर दूर दिल्ली में हूं और जिंदा हूं और स्वस्थ हूं भाजपा मेरी तस्वीर का बेजा इस्तेमाल कर रही है।
हालांकि गलती देश दुनिया के सामने आने के बाद भाजपा आईटी सेल ने उस वीडियो को डिलीट कर अवरोध बनर्जी की तस्वीर हटा दी और नए वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया लेकिन तब तक वह वीडियो देश-विदेश में बैठे कई लोगों और राजनीतिक पार्टियों के हत्थे चढ़ चुका था जिसके कारण जय बाबा थमने का नाम नहीं ले रहा है।
गलत तस्वीर लगाकर वीडियो प्रसारित करने के मामले पर बीएमसी ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा टीएमसी की छवि बर्बाद करने के लिए फेक न्यूज़ का सहारा ले रही है और उस के माध्यम से ही बंगाल में हिंसा भड़काने का प्रयास कर रही है।
वही पीड़ित अभ्रो बनर्जी ने ट्वीट किया, ‘मैं अभ्रो बनर्जी हूं। जिंदा और सुरक्षित हूं। सीतलकुची से 1,300 किलोमीटर की दूरी पर हूं। बीजेपी आईटी सेल दावा कर रहा है कि मानिक मोइत्रा हूं और सितालकुची में मेरी मौत हो गई है। कृपया, इन फर्जी पोस्ट्स पर यकीन न करें और चिंतित न हों। एक बार फिर से दोहरा दूं कि मैं जिंदा हूं।’ इस ट्वीट के साथ ही अभ्रो ने बंगाल बीजेपी के पेज से शेयर हुए वीडियो का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है, जिसमें उनकी तस्वीर दिख रही है। हालांकि, अपनी गलती समझ में आते ही बीजेपी ने उस तस्वीर को हटा दिया है और नया वीडियो शेयर किया है।

हालांकि बवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि यह तस्वीर गलती से पोस्ट हो गई है जिसे समय रहते सुधार लिया गया है। हमारे 14 से ज्यादा कार्यकर्ता टीएमसी के गुंडों की हिंसा का शिकार हुए हैं और कई तो आज पड़ोस के राज्यों में भागकर अपनी जान बचा रहे हैं।








