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भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर अब परिजनों के लिए रात में रुकने हेतु की जाएगी व्यवस्था

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कोरोना वायरस संक्रमण से अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने भदभदा विश्राम घाट पर आये लोगों के लिए रात में ठहरने, खाने-पीने एवं सोने का इंतजाम किया गया है, ताकि जरुरत होने पर वे इन सुविधाओं का लाभ ले सकें।

भदभदा विश्राम घाट प्रबंधन समिति के सचिव मम्तेश शर्मा ने शनिवार केा बताया कि शहर के अस्पतालों में महामारी से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। इस कारण विश्राम घाट में शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए लंबी कतारें लग रही है। ऐसे में परिजनों को दाह-संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में दूसरे जिलों से आए लोगों को अपने परिजन की अस्थियां ले जाने के लिए रात में भोपाल में रूकना पड़ रहा है लेकिन कोरोना कर्फ्यू के कारण उन्हें भोजन और रहने की समस्या आ रही है।

शर्मा ने कहा कि लोगों की इन परेशानियों को देखते हुए स्थानीय लोगों की मदद से विश्राम घाट पर रहने और भोजन की व्यवस्था की गयी है। कोविड से मरने वालों के परिजनों का दाह संस्कार करने वाले लोग आवश्यकता अनुसार इन सुविधाओं का लाभ ले सकते है।

उन्होंने बताया कि विश्राम घाट में आजकल रोजाना करीब छह से सात लोग अपने परिजन की अस्थियां ले जाने के लिए रात को ठहरते हैं। उन्होंने बताया कि रात को रुकने वालों के लिए कुछ बिस्तरों का भी इंतजाम किया गया है।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार को विश्राम घाट में 60 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इनमें से 54 कोविड-19 से मरे थे, जिनमें 38 भोपाल जिले के थे, जबकि 16 अन्य जिलों के थे।

भोपाल में टूटे सारे रिकॉर्ड, इतने लोगों का किया गया है अंतिम संस्कार

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भोपाल में कोरोना का आतंक बरकरार है। पहली बार शनिवार को भदभदा विश्रामघाट में 118 शवों को अंतिम संस्कार किया गया। जिसमें कोरोना संक्रमितों के 100 शव थे। 100 शवों में 66 भोपाल और 34 शव बाहर के थे। सरकार के रिकाॅर्ड में शनिवार को भोपाल में सिर्फ 5 मौतें काेरोना से होना दर्ज किया गया है।

दरअसल भदभदा विश्रामघाट में शनिवार लको जितन अंतिम संस्कार किए गए है , उतनी मौतें सरकारी रिकार्ड में पिछले 15 दिनों में होना दर्ज किया गया है। जबकि इस श्मशान में वन विभाग हर रोज 2 से 3 ट्रक लकड़ी उपलब्ध करा रहा है।

बता दे कि शव के अंतिम संस्कार के आरक्षित सभी स्थान फुल होने के कारण विश्राम घाट के अध्यक्ष अरुण चौधरी और सचिव ममतेश शर्मा ने दाह संस्कार के लिए नए अस्थाई वैकल्पिक स्थान के रूप में विद्युत शवदाह गृह के कैंपस का चयन किया है।

भोपाल के भदभदा विश्राम घाट में अंतिम संस्कार के लिए दाम किए तय

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भोपाल(bhopal) में कोरोना(corona) की बढ़ती रफ्तार के साथ शहर में मृत्यु का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में भदभदा विश्राम घाट(bhadbada vishram ghat) समिति(trust) ने अंतिम संस्‍कार(funeral) के लिए दाम तय कर दिए है। क्योंकि हर दिन कोरोना संक्रमित मरीज और सामान्‍य मरीजों की देह यहां आती है। 

अब विश्राम घाट समिति ने निर्णय लिया है कि अब कोरोना मृतकों की देह के अंतिम संस्‍कार के लिए 3500 रुपये शुल्‍क लेंगे। वहीं सामान्‍य मृतक देह के अंतिम संस्‍कार का गोकाष्‍ठ शुल्‍क 3100 रुपये निर्धारित किया गया है। 

भदभदा विश्राम घाट समिति के अध्‍यक्ष अरुण चौधरी ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में भदभदा विश्राम घाट प्रबंधन को लकड़ी की व्‍यवस्‍था करने में काफी संघर्ष करना पड रहा है। और इसीलिए विद्युत शवदाह गृह में दाह संस्‍कार का शुल्‍क 1700 रुपये और लकड़ी की कीमत 1000 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है।

मम्‍तेश शर्मा ने यह भी कहा कि भदभदा विश्राम घाट प्रबंधन आम जनता के सहयोग के लिए तत्‍पर है। लोगों की सुविधा के लिए विश्राम घाट में जगह-जगह इस निर्धारित शुल्‍क के पोस्‍टर-बैनर लगवा दिए गए हैं।

भोपाल में बढ़ते कोरोना संक्रमण ने तोड़ा भोपाल गैस कांड का रिकॉर्ड

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मध्य प्रदेश(madhya pradesh) में कोरोना(corona) की दूसरी लहर ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे है कि कोरोना से हुई मौतों की वजह से भोपाल(bhopal) के कब्रिस्तान और शमशान घाट में जगह कम पड़ रही है। भदभदा विश्राम घाट(bhadbada vishram ghat) पर पहली बार गुरुवार को 36 शव अंत्येष्टि के लिए लाए गए थे। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से 31 शव कोरोना मृतकों के थे। भदभदा विश्रामघाट के संचालक ने बताया कि भोपाल गैस कांड(bhopal gas tragedy) के दौरान भी एक दिन में 24 शवों ही आए थे लेकिन कोरोना ने उसका भी रिकॉर्ड तोड़ दिया।

भदभदा विश्राम घाट के अध्यक्ष अरुण चौधरी ने शवों के अंतिम संस्कार के लिए आरक्षित सभी जगह भर जाने के कारण विधुत शवदाह गृह के कैंपस को वैकल्पिक स्थान के रूप में चयन किया है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जब कोरोना का कहर अपने चरम पर था तब भी कोरोना मृतकों के एक दिन में 10 से 12 शव ही आए थे।

गुरुवार को इतनी संख्या में शव आने की वजह से देर रात तक भदभदा में चिताएं जलती रही। इतना ही नहीं बल्कि शाम को 8-10 शव और आए थे, लेकिन उन्हें रात होने की वजह से मना कर दिया जिन्हें अब शुक्रवार यानी आज जलाया जाएगा।

अरुण चौधरी ने बताया कि शवाें के साथ आए परिजनों को भदभदा विश्राम घाट में मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान ना होना पड़े इसलिए अगले दो से तीन दिन में  भदभदा प्रबंधन 30 नए चिता स्थलों का निर्माण करेगा।