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भाजपा को झटका, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वघेला यूपीए में हुए शामिल

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गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वघेला ने मंगलवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। पार्टी की सदस्यता लेते हुए वाघेला ने कहा कि ऐसे वक़्त जब भाजपा के शासन में देश के लोकतंत्र को ख़तरा है, मैंने भाजपा के ख़िलाफ़ लड़ने और भाजपा विरोधी ताकतों का हाथ मज़बूत करने के लिए एनसीपी में शामिल होने का फैसला किया है। बता दें कि वाघेला ने मंगलवार को शरद पवार की मौजूदगी में उनकी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सदस्यता ली। जिसके बाद वघेला को एनसीपी को राष्टीय महासचिव बनाया गया है।

वघेला का स्वागत करते हुए पवार ने कहा कि राकांपा गुजरात में और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की प्रगति के लिए वाघेला के राजनीतिक अनुभवों का इस्तेमाल करेगी। मैंने वाघेला को गुजरात के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर राकांपा की प्रगति के लिए अपना योगदान देने को कहा है। वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव होंगे। गुजरात में हम भाजपा विरोधी ताकतों को मज़बूत करना चाहते हैं और वाघेला को लाकर हमने ऐसी कोशिश की है।

लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर सवाल पर वघेला ने कहा कि इसका फैसला पार्टी को करना है। वहीं जानकारों का कहना है कि बघेला के एनसीपी में शामिल होने से गुजरात में लोकसभा की कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।

गुजरात में लोकसभा की सभी 26 सीटों पर फिलहाल भारतीय जनता पार्टी का क़ब्ज़ा है। 78 वर्षीय क्षत्रिय नेता ने 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस छोड़ दी थी। इससे पहले उन्होंने और उनके समर्थक कुछ विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल के ख़िलाफ़ वोट दिया था और भाजपा समर्थित उम्मीदवार बलवंत सिंह राजपूत का समर्थन किया था।

हालांकि, वाघेला सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल नहीं हुए और दिसंबर 2017 के राज्य विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों को उतारा था लेकिन उनके सारे उम्मीदवार हार गए। हाल में उन्होंने दिल्ली सहित कई स्थानों का दौरा किया और कहा कि वह केंद्र में भाजपा नीत सरकार को हराने के लिए काम करेंगे. वाघेला 1996 में कांग्रेस के समर्थन से राज्य के मुख्यमंत्री बने थे।

भाजपा विधायक और डिप्टी स्पीकर ने कहा, देश को राहुल गांधी जैसे नेताओं की जरूरत

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कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने के बाद से ही राहुल गांधी में गजब का बदलाव देखने को मिला है। पुराने राहुल की तुलना में नए राहुल को पार्टी के साथ ही विरोधी भी पसंद कर रहे है। भाजपा नेते शत्रुघन सिन्हा हों या शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, सभी समय समय पर राहुल गांधी की तारीफ करते नजर आ रहें है। इसी बाच अब भाजपा विधायक और गोआ विधानसभा के डेप्यूटी स्पीकर माइकल लोबो ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफों के पुल बांधे हैं। लोबो ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि गोवा और भारत को राहुल गांधी जैसे नेताओं की जरूरत है।

मनोहर पार्रिकर से मिलने पहुंचे थे राहुल गांधी

बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को पूर्व रक्षा मंक्षी और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर से मिलने पहुंचे थे। इसी मुलाकात को लेकर लोबो ने कहा कि राहुल गांधी विशेष रूप से हमारे मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर से मुलाकात के लिए आए जो कि बीमार हैं। उनकी यही सादगी, विनम्रता को सभी भारतीयों और गोवावासियों द्वारा सराहे जाने की जरूरत है। वह बेहद साधारण व्यक्ति हैं और उनके जैसे नेता की देश को और गोवा को जरूरत है।

माइकल ने आगे कहा, ‘हम खुश हैं कि हमने राहुल से गोवा विधानसभा में मुलाकात की। गोवा मे अपने निजी दौरे के बीच वह बेहद विशेष रूप से हमारे मुख्यमंत्री से मिलने आए थे। उन्होंने मनोहरजी का हाल-चाल जाना। उनकी सेहत में जल्द सुधार की प्रार्थना की। राहुल की सादगी और विन्रमता को सराहे जाने की जरूरत है।जिस तरह उन्होंने हमारे मुख्यमंत्री और हमसे मुलाकात की, मैंने उन्हें इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया कहा।’

लोकसभा चुनाव के ठीक पहले मोदी सरकार के खिलाफ बिगुल फूकेंगे अन्ना हजारे

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2014 में लोकपाल के मुद्दे पर अनशन कर कांग्रेस की सरकार गिरने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर अनशन पर बैठ रहे है। इस बार यह अनशन मोदी सरकार के खिलाफ है लेकिन मुद्दे फिर वही है, लोकपाल। मोदी सरकार पर लोकपाल के मुद्दे पर हमला बोलते हुए अन्ना ने बुधवार को सुबह 10 बजे अपने गांव रालेगण सिद्धि में अनशन पर बैठने का ऐलान किया है।

मीडिया से बात करते हुए अन्ना ने कहा कि लोकपाल कानून बनकर 5 साल हो गया और नरेंद्र मोदी सरकार 5 साल बाद भी बार-बार बहानेबाजी करती है।

मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के दिल में अगर यह मुद्दा अहम होता तो क्या 5 साल लगना जरुरी था?

इससे पहले अन्ना ने कहा था कि उनका यह अनशन समाज और देश की भलाई के लिए होगा। अन्ना हजारे ने कहा कि उनका यह अनशन किसी व्यक्ति, पक्ष, पार्टी के विरोध में नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज और देश की भलाई के लिए वह आंदोलन करतेेे आए हैं। उसी प्रकार यह अनशन भी उनके इसी आंदोलन का हिस्सा है।

गुजरात मे बाहरी लोगों को नही मिलेगा सवर्ण आरक्षण का लाभ

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मोदी सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्ण गरीबों के लिए 10 फीसदी आरक्षण को लेकर कानून बनाने के बाद गुजरात पहला राज्य था जिसने इस कानून को राज्य में लागू किरने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद बुधवार को गुजरात सरकार ने इसके लिए निर्धारित नियमों को भी मंजूरी दे दी, जिसमें घर या जमीन के मालिकाना हक के मापदंडों को शामिल नहीं किया गया है। गुजरात सरकार द्वारा जारी किए गए नियमों के मुताबिक राज्य में 1978 के पहले से रह रहे लोग ही इस आरक्षण का लाभ उठा पाएंगें। सरकार का कहना है कि आरक्षण में गुजरातियों कोे प्राथमिकता देने के उद्देश से 1978 से पहले तक दूसरे शहरों से आकर गुजरात में बसे लोगों को ही इस आरक्षण के योग्य माना जाएगा। जिसका मतलब है कि 1978 के बाद देश के किसी भी राज्य से यदि कोई व्यक्ति गुजरात जाकर बसा है तो उसे या उसके बच्चों को इस आरक्षण का लाभ नही मिलेगा।

सरकार का कहना है कि 1978 की कटऑफ डेट जारी करने का मकसद गुजरातियों के हितों की रक्षा करना है। इसका मतलब है कि सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण उन लोगों पर लागू होगा जो 1978 से पहले गुजारत में बसे हैं। सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के उच्च सूत्रों ने कहा कि यह शर्त अपने आप लाखों गैर-गुजरातियों को आरक्षण के लिए अयोग्य साबित कर देगा।

इन सभी को मिलेगा आरक्षण का लाभ

डेप्युटी सीएम नितिन पटेल ने कहा कि दूसरे राज्यों से आने वाले लोग कोटा के लिए सेंट्रल जॉब में अप्लाई कर सकते हैं। जमीन, प्लॉट या फ्लैट का मालिकाना हक आरक्षण की योग्यता को प्रभावित नहीं करेगा। हमारा मकसद युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने और उच्च शिक्षा के लिए मदद करना है।’ उन्होंने जोर दिया कि सरकार अतिरिक्त सीटें बनाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को अतिरिक्त अनुदान देगी।

10% में भी 33% महिला आरक्षण

चुनाव से पहले आरक्षण लागू करने करके 10 फीसदी वर्ग में महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। 2015 में गुजरात सरकार ने 33 फीसदी पुलिस नौकरी महिलाओं के लिए आरक्षित करने का फैसला किया था। पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य की गुजरात अनारक्षित शिक्षा और आर्थिक विकास निगम द्वारा जारी की गई विभिन्न योजनाओं के लिए 4.5 लाख रुपये और 6 लाख रुपये का आय मानदंड जारी रहेगा।

भाजपा नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे शिवराज बोले, तुम्हारी इंसानियत मर गई है क्या ?

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आपने नारा देते हुए बदलाव की बात की थी, यह कैसा बदलाव आया है। आए दिन भाजपा के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है। इतने क्रूर मामले को हल्के में लेने वालों, तुम्हारी इंसानियत मर गई है क्या ? भाजपा के मंड़ल अध्यक्ष मनोज ठाकरे की हत्या के बाद मंगलवार को उन्हे श्रद्धांजली देने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान के कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए यह बातें कहीं। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए शिवराज ने कहा कि भाजपा नेताओं की हत्या हो रही है और वो कह रहे है कि यह तो भाजपा ने ही करवा दिया होगा। मैं कहता हूं कि किसी ने भी करवाया हो हमें तो हत्यारे चाहिए किसी भी कीमत पर। हत्यारों को सामने लाओ नहीं तो ऐसा आंदोलन होगा की, जमाना याद रखेगा।

गैर जिम्मेदार बयान ना दें मंत्री

बलवाड़ी पहुंचे शिवराज ने प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक ओर कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद से अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नेता और सरकार के मंत्री अनर्गल बयानबाजी में व्यस्त हैं। वह भाजपा नेताओं की हत्या के लिए पैसों के लेन-देन का विवाद और पार्टी का अंदरूनी मामला जैसे बयान देते हैं। मतोज ठाकरे की हत्या पर प्रश्न करते हुए शिवराज ने कहा कि मॉर्निंग वॉक के लिए घर से निकले भारतीय जनता पार्टी के बलवाड़ी मंडल अध्यक्ष मनोज ठाकरे का शव बीते दिनों सड़क किनारे पाया गया था। उनके सिर में पत्थर से चोट लगने का निशान पाया गया था, जिससे उनकी हत्या किए जाने का संदेह है। कांग्रेस कह रही है कि पैसे के लेन-देन में मंदसौर नगरपालिका अध्यक्ष की हत्या हुई। क्या महज 25 हजार रुपयों के लिए एक नगरपालिका अध्यक्ष की हत्या हो सकती है ? पहले जिले के एसपी एक बनी-बनाई कहानी सुनाते हैं और फिर आरोपी से भी वही बयान दिलाया जाता है। यह सोचने की बात है कि अगर आरोपी के पास कुछ भी पैसे नहीं थे, तो वह हत्या के लिए कट्टा और कारतूस कहां से लाया। स्व. मनोज ठाकरे की हत्या के मामले में भी पुलिस को अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।

असली मुख्यमंत्री कौन ?

भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शिवराज ने कहा कि हम सवाल सरकार से करते हैं, तो जवाब पूर्व मुख्यमंत्री दे रहे हैं। समझना मुश्किल है कि असली मुख्यमंत्री कौन है, सरकार चला कौन रहा है। दिग्विजय सिंह ने पूरी सरकार पर कब्जा कर लिया है। प्रशासन को अपने हाथ में ले लिया है। अजीब तरह की सरकार चल रही है। प्रदेश को अराजकता के दौर में धकेला जा रहा है। हम हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेंगे।

हमारे कार्यकर्ताओं पर हमले और प्रदेश में अराजकता बर्दाश्त नहीं : राकेश सिंह

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आज का पुतला दहन प्रदेश सरकार के लिए एक चेतावनी है। अगर हमारे कार्यकर्ताओं पर इसी तरह हमले होते रहे और प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो हम सड़कों पर उतरेंगे और सरकार को चलने नहीं देंगे। प्रदेश सरकार को यह चेतावनी सोमवार को जबलपुर में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित पुतला दहन कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं का नेतृत्व करते हुए प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने दी। जबलपुर शहर के सभी 14 मंडलों से प्रदेश सरकार के पुतलों का जुलूस निकाला गया और रानीताल चौराहे पर प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में इन पुतलों का दहन किया गया। वहीं, प्रदेश के अन्य जिलों में भी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था और भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं पर लगातार हो रहे हमलों का विरोध किया।

लगातार हो रही घटनाएं

मीडिया से चर्चा करते हुए सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में कानून व्यवस्था के हालात अचानक गंभीर रूप लेने लगे हैं। भोपाल में पुलिस पार्टी पर भारी पथराव, इंदौर में कारोबारी संदीप अग्रवाल की हत्या, मंदसौर में नगरपालिका के अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की बीच बाजार नृशंस हत्या, बड़वानी में हमारे मंडल अध्यक्ष की निर्मम हत्या और रविवार को ही जबलपुर में शहीद अब्दुल हमीद मंडल के महामंत्री मगन सिद्दकी पर चाकू से हमला हुआ। इन घटनाओं से लोगों में दहशत का माहौल है, वहीं यह बात भी साबित होती है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार का कानून-व्यवस्था से कोई लेना देना नहीं है।

हत्या को भाजपा का आंतरिक मामला कहना शर्मनाक

सिंह ने कहा कि मंदसौर में हमारे नगरपालिका अध्यक्ष की सरे बाजार हत्या हो जाती है और प्रदेश के मुख्यमंत्री कहते हैं कि यह भारतीय जनता पार्टी का आंतरिक मामला है। मुख्यमंत्री के इस बयान को शर्मनाक बताते हुए श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस बयान से जाहिर होता है कि सरकार जांच को किस दिशा में ले जाना चाहती है। निश्‍चित रूप से सरकार जांच को उस दिशा में ले जाएगी, जहां से कोई परिणाम नहीं निकलेंगे। सिंह ने कहा कि यह सरकार की सोच का ही परिणाम है कि प्रदेश में फिर नक्सली खतरे की आहट सुनाई दे रही है और सिमी के आतंकियों को छोड़ा जा रहा है। प्रदेश में जानबूझकर अराजकता का महौल बनाया जा रहा है।

सरकार चलने नहीं देंगे

प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार की नाकामी को लेकर हमने पहले चेतावनी दी। उसके बाद प्रदेश के डीजी और सभी जिलों में कलेक्टर्स को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर कानून व्यवस्था बहाल करने आग्रह किया था। उसके बाद भी घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। हम हमारे कार्यकर्ताओं और प्रदेश की जनता के साथ हो रहे अत्याचार को बर्दाश्त नही करेंगे। यह सरकार वैसे ही वेंटिलेटर पर चल रही है, लेकिन हम ये मानते हैं कि जनता ने आपको शासन करने का अधिकार दिया है, तो सरकार इस तरह से चलाएं कि प्रदेश की जनता और हमारे कार्यकर्ता अपने-आपको असुरक्षित महसूस न करें। आज हमने पूरे प्रदेश में सरकार का पुतला दहन करके चेतावनी दी है। यदि सरकार प्रदेश में कानून व्यवस्था बहाल नहीं करती है, तो हम सड़कों पर उतरेंगे और इस सरकार को चलने नहीं देंगे।

जमकर हुई नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन

भोपाल के बोर्ड आफिस चौराहे पर जिला इकाई द्वारा मध्यप्रदेश सरकार का पुतला दहन कर प्रदेश में बढ़ रही अराजकता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के पश्‍चात कार्यकर्ता पैदल मार्च करते हुए बोर्ड आफिस चौराहे से भाजपा कार्यालय पहुंचे। यहां पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्‍वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार आते ही प्रदेश में कानून व्यवस्थाएं पूरी तरह चौपट हो चुकी है। लगातार बढ़ रही हिंसक घटनाएं कांग्रेस सरकार की नाकामियों को दर्शाती है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि पश्‍चिम बंगाल और केरल में जिस तरह गुंडागर्दी और दबाव के आधार पर सरकार चलाने का प्रयास हो रहा है, उसी फार्मूले पर कमलनाथ सरकार प्रदेश में काम कर रही है। यही कारण है कि लगातार प्रदेश में हिसंक घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि आज का प्रदर्शन कांग्रेस की सोई हुई सरकार को जगाने के लिए है।

यह हुए शामिल

इस अवसर पर महापौर आलोक शर्मा, सांसद आलोक संजर, जिला अध्यक्ष सुरेन्द्रनाथ सिंह, विकास विरानी, अशोक सैनी,राजेन्द्र गुप्ता, सुमित रघुवंशी, सविता यादव, नितीन दुबे, राधे महाराज, प्रमोद राजपूत सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

ईवीएम के मुद्दे पर अब सुब्रमण्यम स्वामी ने बोला भाजपा पर हमला

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ईवीएम के साथ छेड़छाड़ का मामला एक बार फिर गर्मा गया है। लंदन में एक ईवीएम एक्सपर्ट ने आज प्रेस वार्ता कर भारतीय जनता पार्टी पर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। अमेरिकी ईवीएम एक्सपर्ट सैयद शुजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में ईवीएम टेंपरिंग कर भारी गड़बड़ी हुई थी।

सैयद शुजा के दावे के बाद ईवीएम की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए है। विपक्ष जहां ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है तो वहीं भाजपा और चुनाव आयोग इसे पूरी तरह सुरक्षित करार दे रहे है। इस सबके बीच अब बाद बयान आया है भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी का।

वरिष्ठ भाजपा नेता और वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने आज अपनी ही पार्टी पर हमला बोलते हुए ट्वीट किया। अपने त्ववेट में स्वामी ने कहा कि ” आज भाजपा नेता टीवी पर वीवीपैट का पूरा श्रेय खुद ले रहे है। जबकि भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए सबसे पहले मैंने ही ईवीएम और वीवीपैट का मुद्दा कोर्ट में उठाया था। मेरी पीआईएल पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने भी मुझे इन मामले में स्पेशल क्रेडिट दिया था। वहीं भाजपा नेता अब इस मामले में मेरा नाम भी नही ले रहे। ”

अपने ट्वीट पर एक ट्विटर यूज़र को जवाब देते हुए स्वामी ने लिखा कि “इन मूर्ख प्रवक्ताओं को यह समझना चाहिए कि बौद्धिक संपत्ति नाम की भी कोई चीज़ होती है।”

स्वामी ने उठाया था सुप्रीम कोर्ट में वीवीपैट का मामला

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में ईवीएम के साथ वीवीपैट इस्तेमाल करने के लिए जनहित याचिका दायर की थी। जिसपर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सदाशिवम ने सुब्रमण्यम स्वामी को धन्यवाद दिया था।

भाजपा नेताओं की हत्या के पीछे भ्रष्टाचार से जुड़ी राशि का लेनदेन: शोभा ओझा

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प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि उसने अपने 15 वर्षीय कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश को अपराधों का गढ़ बना दिया था। महिला अपराधों व बालात्कार के मामले में मध्यप्रदेश को अव्वल बनाकर कलंकित कर चुकी भाजपा किस मुंह से कानून व्यवस्था की बात कर रही है। अपराधों को लेकर कांग्रेस पर आरोप लगाने के पहले भाजपा को स्वयं अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। पिछले दिनों मंदसौर में जिस भाजपा नेता की हत्या हुई, उसकी मूल जड़ में पैसों का लेनदेन रहा है। भाजपा के शासनकाल में जब भ्रष्टाचार चरम पर था और उसके नेता-जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल थे, तब भाजपा नेताओं को उम्मीद नहीं थी कि उनकी सरकार सत्ता में नहीं आएगी। जिन भाजपा नेताओं ने रिश्‍वत के नाम पर पैसे ले लिए लेकिन सत्ता जाने के बाद उसे वापस नहीं कर रहे थे अथवा न करने के मूड में थे, ऐसे भाजपा नेताओं से वसूली करने में असफल उसी की पार्टी के नेताओं या कार्यकर्ताओं द्वारा उनकी हत्या या हमला करने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है।

ओझा ने कहा कि अपराध और भ्रष्टाचार भारतीय जनता पार्टी की संस्कृति रही है। इसी भाजपाई संस्कृति के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं। भ्रष्टाचार के कारण भाजपा नेता अपने ही लोगों का शिकार बन रहे हैं। वे न सिर्फ कानून हाथ में ले रहे हैं, बल्कि बेखौफ होकर भी घूम रहे है, लेकिन मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार उनके मंसूबों को कभी पूरा नहीं होने देगी। प्रदेश की कानून व्यवस्था बिगड़ने संबंधी भाजपा के आरोपों में कोई दम नहीं है। भाजपा ने ही अपने कार्यकाल में मध्य प्रदेश का अपराधीकरण किया है। भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि विभिन्न अपराधों से घिरे उसके दो तत्कालीन वरिष्ठ मंत्री जेल की हवा खा चुके हैं। व्यापम कांड में हुई हत्याओं के पीछे भी भाजपा सरकार वस्तुस्थिति का पता नहीं लगा पाई थी।

ओझा ने कहा कि यदि भाजपा के शासनकाल में इतना भ्रष्टाचार नहीं हुआ होता तो इस प्रकार की घटनाएं भी नही होती। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ अपराधों को सख्ती से रोकने के प्रति पुलिस प्रशासन को सचेत कर चुके है। अपराध में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नही जाए और न ही प्रकरण में ढिलाई बरती जाए।

अपने नेताओं की हत्या के खिलाफ सड़क पर उतरी बीजेपी ने जमकर किया विरोध प्रदर्शन

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मध्य प्रदेश में हाल के कुछ दिनों में एक के बाद एक भाजपा नेताओं की हत्या पर सियासत तेज गई है। आक्रोशित बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री कमलनाथ का पुतला जलाया और ’कमलनाथ मुर्दाबाद’ और ’कमलनाथ इस्तीफा दो’ के नारे भा लगाए। कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार पर मामले को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया। इस दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुतले फूंकने के साथ ही उनकी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।

शिवराज ने दी थी चेतावनी

रविवार को बड़वानी में बीजेपी नेता मनोज ठाकरे की हत्या के बाद भाजपा ने कमलनाथ सरकार पर निशाना साधा था। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो टूक कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। उन्होंने कमलनाथ सरकार को चेतावनी भी दी थी कि अगर जल्द अपराधी नहीं पकड़े गए तो बीजेपी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।

कमलनाथ का पलटवार

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान और भाजपा पर पलटवार किया था। कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए कहा, बेहद शर्मनाक है कि जिन्होंने अपने 15वर्ष के कार्यकाल में प्रदेश को अपराध प्रदेश बनाये रखा,जो अपनी सरकार में अपराध रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहे,जिनके कार्यकाल में अपराधों में,प्रदेश देश में शीर्ष पर रहा,वो हमारी 1 माह की सरकार को अपराध को लेकर कोस रहे है,राजनीति कर रहे हैं। कमलनाथ ने एक औऱ ट्वीट पर कहा, प्रदेश के हर नागरिक को सुरक्षा देने के लिये हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। वो हमारा कर्तव्य है। चाहे भाजपा के आपसी अंतर्कलह के विवाद हो या अन्य कारण से सामने आये विवाद हो, हमारी सरकार अपने कर्तव्यों का पूरा पालन करेगी। बता दें कि सीएम कमलनाथ इन दिनों दावोस दौरे पर हैं। सीएम बनने के बाद कमलनाथ की यह पहली विदेश यात्रा है।

भावांतर योजना बंद हुई, तो करूंगा आंदोलनः शिवराजसिंह चौहान

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प्रदेश सरकार यदि किसानों उनकी उपज का वाजिब मूल्य देने से बचती है और भावांतर योजना को येन-केन-प्रकारेण बंद करती है, तो यह त्रासद होगा और ऐसे में किसानों को उनकी राशि का भुगतान कराने के लिए मुझे आंदोलन पर बाध्य होना पड़ेगा। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर कही। शिवराज ने कहा कि किसान भाई-बहनों को उनका अधिकार दिलाने यदि मुझे सरकार के खिलाफ सड़कों पर संघर्ष करना पड़ा, तो मैं वो भी करूंगा।

शिवराज ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार भाजपा सरकार द्वारा लागू की गई भावांतर योजना को बंद करना चाहती है, इस आशय के समाचार सोमवार को कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं। इन समाचारों में प्रदेश के कृषि मंत्री के हवाले से यह जानकारी दी गई है। जिसको लेकर शिवराज ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को सोमवार को पत्र लिखा है।

वाजिब मूल्य देने से बच रही सरकार

चौहान ने पत्र में कहा है कि भावांतर योजना के तहत तत्कालीन सरकार ने यह निर्णय लिया था कि किसानों को सोयाबीन पर 500 रुपए एवं मक्का पर 500 रुपए प्रति क्विंटल फ्लैट भुगतान किया जाएगा। गेहूं 2100 रुपए एवं धान 2500 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने का निर्णय भी लिया था। इसके अलावा उड़द एवं मूंग पर फ्लैट रेट से भुगतान का निर्णय लिया था। सरकार द्वारा भावांतर योजना बंद करने के निर्णय से यह स्पष्ट है कि सरकार सोयाबीन, मक्का, गेंहूं, धान, उड़द, मूंग आदि फसलों के लिए किसानों को भावांतर योजना के अनुसार भुगतान करने से बचना चाहती है और न ही सरकार इन्हें तय मूल्य पर खरीदने की मंशा रखती है।

किसानों को भुगतान सरकार की जिम्मेदारी

चौहान ने पत्र में लिखा है कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को लागू करना और उसके अनुसार किसानों को राशि का भुगतान करना सरकार का दायित्व है। इसलिए आपसे आग्रह है कि पूर्ववर्ती सरकार के निर्णयों के अनुसार किसानों को उनकी उपज का भुगतान तत्काल किया जाए, ताकि उनके हितों का संरक्षण हो सके। ऐसा न किये जाने पर चौहान ने सड़कों पर संघर्ष करने की चेतावनी भी दी है।