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कोरोना वायरस को लेकर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन, कोरोना के इलाज से हटाई गई प्लाज्मा थेरेपी

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए हो रही प्लाज्मा थैरेपी को केंद्र सरकार ने कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल से हटा दिया है। कोविड 19 के लिए गठित की गई नैशनल टास्क फोर्स की मीटिंग में इस पर चर्चा हुई थी जिसमें यह बात सामने आई कि प्लाज्मा थेरेपी से फायदा नहीं होता है।

इसको मद्देनज़र रखते हुए हेल्थ मिनिस्ट्री के जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप ने कोविड 19 मरीजों के मैनेजमेंट के लिए रिवाइज्ड क्लीनिक गाइडलाइन जारी की है। इसमें प्लाज्मा थेरेपी को कोई जिक्र नहीं किया गया है। हालांकि पहले के प्रोटोकॉल में यह शामिल था। कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में डॉक्टर्स के द्वारा प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया जा रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 संबंधी आईसीएमआर- राष्ट्रीय कार्यबल की बैठक में सभी सदस्य एक मत होकर यह फैसला लिया कि कोविड-19 के वयस्क मरीजों के उपचार प्रबंधन संबंधी चिकित्सीय दिशा-निर्देशों से प्लाज्मा थेरेपी के इस्तेमाल को हटाया जाना चाहिए, क्योंकि यह प्रभावी नहीं है और कई मामलों में इसका अनुचित रूप से इस्तेमाल किया गया है।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इस परिस्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और जनता को कहा लापरवाह

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने शनिवार को कोरोना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर के बाद जनता के साथ सरकार और प्रशासन लापरवाह हो गए थे । इसी के चलते कोरोना की दूसरी लहर नुकसान की वजह बनी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने आगे कहा कि कोरोना महामारी मानवता के सामने चुनौती है । हमें गुण-दोष की चर्चा किए बिना एक टीम के रूप में काम करना चाहिए। हम एक टीम के रूप में काम करे और अपने काम को तेज करके इस चुनौती को दूर कर सकते है।

उन्होंने कहा कि हमें पॉजिटिव रहना होगा और मौजूदा परिस्थिति में खुद को कोरोना नेगेटिव रखने के लिए सावधानियां बरतनी होंगी। वर्तमान परिस्थितियों में बेफिजूल बयान देने से भी बचना चाहिए। यह परीक्षा का समय है लेकिन हमें एकजुट रहना होगा और एक टीम की तरह कार्य करना होगा।

कोविड के वर्तमान हालात पर आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि सफलता और विफलता अंतिम नही है जारी रखने का साहस मायने रखाता है। उन्होंने आगे कहा कि हम इस परिस्थिति का सामना कर रहे है क्योंकि सरकार,प्रशासन और जनता, सभी कोविड की पहली लहर के बाद लापरवाह हो गए थे।

कोरोना की दवा 2डीजी अगले हफ्ते से होगी उपलब्ध

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देश में कोरोना वायरस का कहर अभी भी जारी है और इस बीच वैक्सीनशन पर अधिक जोर दिया जा रहा है। देश में अभी कोवैक्‍सीन या कोविशील्‍ड वैक्सीन लगाई जा रही है। रूस में निर्मित स्पूतनिक V के टीके भी बाजार में जल्दी ही उपलब्ध हो जाएंगे। इसके अलावा कोरोना की एक और वैक्सीन बाजार में आने वाली है जिससे कोरोना से लोगों को काफी राहत मिल सकती है।

दरअसल रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के अधिकारियों के कहा कि कोरोना की दवा 2 डीजी की 10,000 खुराक का पहला खेप अगले सप्ताह से बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। ये दवा कोरोना के मरीजों को जल्द ठीक करती है और उसके साथ साथ उनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करती है।

बता दे कि डीआरडीओ के निर्माताओं ने कहा है कि दवा निर्माता अपने उत्पादन पर तेजी लाने पर काम कर रहे हैं जिससे भविष्य में कोई परेशानी ना हो। आपको बता दें कि इस दवा को डीआरडीओ की एक टीम ने विकसित किया है। संकट के इस समय में वरदान मानी जा रही इस दवा को तैयार करने के पीछे तीन वैज्ञानिकों की मेहनत रही है जिनमे डॉ. सुधीर चांदना, डॉ. अनंत नारायण भट्ट और डॉ. अनिल मिश्रा शामिल है।

2-डीजी (2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज) दवा को ऐसे समय मंजूरी मिली है जब भारत कोरोना वायरस की महामारी की दूसरी लहर से घिरा हुआ है और देश के स्वास्थ्य अवसंरचना पर भारी दबाव है। खास बात यह है कि यह दवा पाउडर के रूप में पैकेट में आती है, इसे पानी में घोलकर पीना होता है।

इस दवा को लेकर रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि कोविड-19 की चल रही दूसरी लहर की वजह से बड़ी संख्या में मरीजों को ऑक्सीजन और अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ रही है। इस दवा से अधिक लोगों के बचने की उम्मीद है क्योंकि यह दवा संक्रमित कोशिकाओं पर काम करती है। यह कोविड-19 मरीजों के अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम करती है।

अब 12 से 16 हफ़्तों के बीच लगाई जाएगी कोविशील्ड की दूसरी खुराक : NTAGI

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कोरोना के चलते भारत में लोगों का टीकाकरण हो रहा है। लेकिन कहीं न कहीं टीकाकरण के लिए पर्याप्त वैक्सीन नहीं मिल पा रही है। जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि 12 लाख लोगों को वैक्सीन के दूसरे डोज का इंतजार है। 

बता दे कि सरकार के राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह(NTAGI) ने कोविशील्ड टीके की दो खुराकों के बीच अंतर बढ़ाकर 12-16 हफ्ते करने की सिफारिश की है और इसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इसके अनुसार अब कोविशील्ड वैक्सीन की दो खुराक के बीच गैप 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह किया गया है।

सरकारी परामर्श समिति ने ये भी कहा कि कोविड-19 से पीड़ित रह चुके लोगों को स्वस्थ होने के बाद 6 माह तक वैक्सीन नहीं लगवाना चाहिए।इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन का हर विकल्प दिया जा सकता है। साथ ही साथ स्तनपान करवाने वाली महिलाएं बच्चे को जन्म देने के बाद किसी भी समय टीका लगवा सकती हैं। 

वहीं दिल्ली सरकार ने बुधवार को कहा था कि उन्हें 100 सेंटर सिर्फ इसलिए बंद करने पड़े क्योंकि उनके पास पर्याप्त टीका नहीं है। इसके साथ ही सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कहा है कि अगस्त से लगभग 10 करोड़ टीके का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

केंद्र सरकार ने की अपनी हद पार , हलफनामा देते हुए सुप्रीम कोर्ट को अपने दायरे में रहने की नसीहत दी

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में टीकाकरण नीति का बचाव करते हुए कहा कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप ना करें।

दरअसल टीकाकरण नीति और कोरोना से निपटने की तैयारी को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना बचाव किया है। रविवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दायर करते हुए कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की जगह नहीं है। 

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में लिखा कि वैश्विक महामारी के संदर्भ में न्यायिक हस्तक्षेप की बहुत कम जरूरत है। आगे केंद्र ने लिखा कि 18-44 साल के लोगों को वैक्सीन लगाने की मंजूरी सिर्फ इसलिए दी गई है क्योंकि राज्य उसकी मांग कर रहे थे।

बता दे कि केंद्र सरकार ने अपने व्यापक टीकाकरण अभियान के लिए वैक्सीन के बड़े-बड़े ऑर्डर दिए है। और इसलिए इसका सीधा असर कीमत पर पड़ रहा है। हालांकि केंद्र ने यह भी कहा कि इससे जनता की जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि सभी राज्यों ने मुफ्त में वैक्सीन देने का एलान कर दिया है।

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि उसे वैक्सीन की कीमत इसलिए कम देनी पड़ रही है क्योंकि केंद्र ने बड़ी संख्या में टीके का ऑर्डर दिया है।

कोरोना से मुकाबला करने के लिए ट्विटर कंपनी ने भारत को दिए 1.5 cr dollar

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ट्विटर ने भारत में कोविड-19 संकट का मुकाबला करने के लिए 1.5 करोड़ डॉलर दिए है। ट्विटर के सीईओ जैक पैट्रिक डोर्सी ने सोमवार को ट्वीट किया कि यह राशि तीन गैर-सरकारी संगठनों- केयर, एड इंडिया और सेवा इंटरनेशनल यूएसए को दान की गई है।

उन्होंने कहा कि सेवा इंटरनेशनल एक हिंदू आस्था आधारित मानवीय और गैर-लाभकारी सेवा संगठन है। सेवा इंटरनेशनल के हेल्प इंडिया डिफीट कोविड-19 अभियान के तहत ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, वेंटिलेटर, बायपैप मशीनों जैसे जीवन रक्षक उपकरणों को खरीदा जाएगा।’

उन्होंने आगे कहा कि सेवा की प्रशासनिक लागत लगभग पांच प्रतिशत है जिसका अर्थ है कि दान में मिले प्रत्येक 100 डॉलर सें 95 डॉलर उन लोगों पर खर्च किया जाता है। ह्यूस्टन मुख्यालय वाले सेवा यूएसए ने अब तक भारत में कोविड-19 राहत कार्यों के लिए 1.75 करोड़ अमरीकी डालर जुटाए है।

अस्पताल में भर्ती होने के लिए अब कोरोना की रिपोर्ट की ज़रूरत नहीं

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कोरोना को लेकर अब सरकार ने नई गाइडलाइन बनाई गई है। अब मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाए जाने के लिए कोविड-19 की पॉजिटिव रिपोर्ट की जरूरत नहीं होगी।

बता दे कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड रोगियों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की राष्ट्रीय नीति में बदलाव किया है। अब कोविड वायरस से संक्रमित किसी भी व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने के लिए पॉजिटिव सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी। पहले अस्पतालों में भर्ती करवाने के लिए कोविड की पॉजिटिव रिपोर्ट या फिर सीटी-स्कैन की जरूरत होती थी।

दरअसल गंभीर मामले वाले मरीज को केस की गंभीरता के मुताबिक संदिग्ध वॉर्ड सीसीसी, डीसीएचसी और डीएचसी में भर्ती किया जाएगा। किसी भी मरीज को किसी भी वजह से सेवाएं देने से मना नहीं किया जाएगा। उसके साथ ऑक्सीजन या आवश्यक दवाएं जैसी दवाएं शामिल है।

इस नीति के मुताबिक किसी भी मरीज को उस शहर में जहां अस्पताल स्थित है वैध पहचान पत्र न उपलब्ध करा पाने में सक्षम न होने पर प्रवेश देने से मना नहीं किया जाएगा। अब अस्पताल में प्रवेश जरूरत के आधार पर दिया जाएगा।

भारत को मिल सकती है कोरोना के खिलाफ एक और वैक्सीन

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भारत को कोरोना के खिलाफ चौथे वैक्सीन के मिलने की संभावना है। अहमदाबाद की कंपनी ज़ाइडस कैडिला इस महीने भारत में अपनी कोविड-19 वैक्सीन ‘ZyCoV-D’ के आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी पाने के लिए आवेदन दे सकती है।

बता दे अगर मंजूरी मिली तो ZyCoV-D भारत के Covid-19 टीकाकरण अभियान में इस्तेमाल होने वाली चौथी वैक्सीन होगी। ZyCoV-D के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी जाती है तो देश के टीकाकरण अभियान में आ रही कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।

इससे पहले अप्रैल में Zydus Cadila ने घोषणा की थी कि उसकी दवा Virafin को Covid-19 के हल्के मामलों के उपचार के लिए भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल से प्रतिबंधित आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिली है।

स्पूतनिक का लाइट वर्जन सिंगल डोज में ही कर देगा कोरोना का काम तमाम

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रूस की कोरोना वायरस वैक्सीन स्पूतनिक ने गुरुवार को कहा कि स्पूतनिक V का लाइट वर्जन सिंगल डोज में ही कोरोना वायरस का काम तमाम कर देगा।

रूस के मुताबिक स्पूतनिक V का लाइट वर्जन सिंगल डोज कोरोना वैक्सीन है जो कि 80 फीसदी तक प्रभावी है। जो कि दो डोज वाले टीकों की तुलना में अधिक है।

स्पूतनिक वी के सूत्रों के अनुसार वैक्सीन के लाइट वर्जन से टीकाकरण को गति मिलेगी जो महामारी को फैलने से रोकने में मदद करेगा।

स्पूतनिक ने कहा कि वैक्सीन के लाइट वर्जन ओवरआल 79.4 फीसदी रही है। 91.7 फीसदी लोगों में मात्र 28 दिन के भीतर वायरस से लड़ने की एंटीबॉडी बन गई। कंपनी ने कहा कि 100 फीसदी लोग जिनके शरीर में पहले से इम्यूनिटी थी उनको वैक्सीन लेने के बाद शरीर का एंटीबॉडी लेवल 10 दिन में 40 गुना बढ़ गया 

आपको बता दें कि रूस की वैक्सीन स्पूतनिक V के इस्तेमाल को भारत सरकार ने भी मंजूरी दे दी है। जिसके बाद उसकी पहली खेप भी भारत पहुंच गई है।

1.5 लाख डोज लेकर रूसी विमान शनिवार को करीब 4 बजे हैदराबाद में लैंड किया। इसके साथ ही देश को कोरोना के खिलाफ तीसरा हथियार मिल गया है। आज ही देश में टीकाकरण के पहले फेज की शुरुआत हुई है, जिसे स्पूतनिक वी के आने से तेजी मिलेगी।

कोरोना की तीसरी लहर आना तय, विजयराघवन ने कहीं ये बात

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केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजयराघवन ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर बड़ी बात कही है। बता दे हर शाम होने वाली प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के साथ मौजूद विजयराघवन ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर का आना तय है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है उसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि तीसरी लहर आएगी। लेकिन ये स्पष्ट नहीं कह सकते कि यह कितनी ख़तरनाक होगी और कब आएगी। साथ ही साथ उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हमें तीसरी लहर के लिए तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वैक्सीनेशन कोरोना के इस नए वेरिएंट के ख़िलाफ़ भी असरदार है। कोरोना का नया वेरिएंट पूरी दुनिया में पैदा होगा और भारत में भी लेकिन जिस वेरिएंट के कारण संक्रमण बढ़ रहा है वो कम भी होगा।

उन्होंने ये भी कहा कि भारत और पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इस प्रकार के वैरिएंट्स को पहले से ही पहचानने और उनके खिलाफ कारगर दावा बनाने में काम कर रहे है।