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मध्यप्रदेश के इस जिले में मिला सफेद फंगस से पीड़ित मरीज

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मध्य प्रदेश में कोरोना महामारी से निपटे ही नहीं थे कि ब्लैक फंगस से प्रदेश में दस्तक दे दी थी। लेकिन अब इससे भी ज्यादा खतरनाक सफेद फंगस ने मध्य प्रदेश में अपनी आमद दे दी है।

बता दे कि जबलपुर से मिले इस मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। राज्य में सफेद फंगस का मरीज मिलने से प्रदेश में हड़कंप मच गया है। मरीज मिलने की पुष्टि मेडिकल कॉलेज के डीन ने की है।

सफेद फंगस के लक्षण कोरोना से मिलते-जुलते हैं। सबसे पहले सफेद फंगस की पुष्टि बिहार में हुई थी। जो मरीज मिले थे उनकी कोविड की आरटीपीसीआर जांच में निगेटिव आई थी। इसकी पहचान केवल सीटी स्कैन द्वारा ही हो पाती है।

मध्यप्रदेश में अब ये अस्पताल नहीं कर सकेंगे कोविड मरीजो का इलाज

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मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले 6 निजी अस्पतालों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। अब ये अस्पताल कोविड मरीजों का इलाज नहीं कर पाएंगे। बताया जा रहा है कि सरकार के आदेश के बाद भी आयुष्मान योजना के तहत कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज नहीं कर रहे थे।

बता दें कि शहर का मेडिसिटी अस्पताल, शिवसागर अस्पताल, आकंक्षा अस्पताल, ट्रू केयर अस्पताल, नर्मदा अस्पताल एवं शुभम अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान योजना के तहत कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया था।

जिसके बाद इन अस्पतालों पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को नोटिस थमाने हुए अस्पताल का कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने की अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।

अस्पताल प्रबंधन ने सबूत मिटाने के लिए ले ली 5 मरीजो की जान

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सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा के मामले में एक महिला ने गम्भीर आरोप लगाते हुए एसपी ऑफिस में शिकायत की है। आरोप है कि पुलिस रेड से पहले सिटी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती 5 मरीज जिन्हें रेमडेसिविर लगे थे उनकी हत्या कर दी गई ताकि वे पुलिस के सामने बयान न दे सकें।महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति का इलाज सिटी हॉस्पिटल में चल रहा था। उसके पति को भी नकली रेमडीसीवीर इंजेक्शन लगाए गए जिससे उसकी मौत हो गई। और उस दिन पुलिस के आने की कुछ घंटे पहले ही आईसीयू में भर्ती कम से कम पांच मरीजों की अचानक एक साथ बेहद संदिग्ध तरीके से मौत हो गई थी।

पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति का इलाज सिटी हॉस्पिटल में चल रहा था। उसके पति को भी नकली रेमडीसीवीर इंजेक्शन लगाए गए जिससे उसकी मौत हो गई। और उस दिन पुलिस के आने की कुछ घंटे पहले ही आईसीयू में भर्ती कम से कम पांच मरीजों की अचानक एक साथ बेहद संदिग्ध तरीके से मौत हो गई थी।

पीड़ित महिला ने जानकरी देते हुए कहा कि उसके पति को 1 मई को कोरोना के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था और 7 मई तक उसकी वीडियो काल के माध्यम से लगातार बात हो रही थी। फिर 9 मई को अस्पताल प्रबंधन ने बताया उसके पति की मौत हो गई है। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने इस संबंध में उसे कोई जानकारी नहीं दी बल्कि इलाज के नाम पर साढे तीन लाख रुपए भी ले लिए।

दरअसल पीड़ित महिला ने सरबजीत सिंह मोखा के खिलाफ हत्या के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। इस मामले को देख रहे एडिशनल एसपी रोहित काशवानी ने पीड़ित महिला को उचित जांच का आश्वासन दिया है।

मध्यप्रदेश के इस अस्पताल को इम्पैनल्ड अस्पतालों की सूची से हटाया

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मध्य प्रदेश में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में गिरफ्तार जबलपुर के सिटी हॉस्पिटल संचालक सरबजीत सिंह मोखा पर प्रशासन का शिकंजा कसता ही जा रहा है। और ऐसे में केंद्र सरकार ने भी सिटी अस्पताल पर कड़ी कार्रवाई करते हुए इम्पैनल्ड अस्पतालों की सूची से हटा दिया है।

दरअसल मंगलवार को नकली इंजेक्शन मामले में सरबजीत को जबलपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस दौरान केंद्र सरकार के सीजीएचएस के अपर निदेशक ने सिटी अस्पताल पर कार्रवाई करते हुए इम्पैनल्ड हॉस्पिटल की सूची से हटा दिया है।

बता दे कि सिटी हॉस्पिटल में सीजीएचएस योजना के तहत लगभग 170 कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज हुआ है। ऐसे में इस योजना के तहत जिन मरीजों को भर्ती किया गया है उन सबका इलाज होगा। लेकिन अब इस योजना से जुड़े मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है।