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मध्यप्रदेश में असली रेमडेसिविर इंजेक्शन से हो रहीं है मरीजो की मृत्यु : मंत्री उषा ठाकुर

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मध्य प्रदेश की कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर ने इस दफा एक बड़ा बयान दे दिया है। और रेमडेसिविर इंजेक्शन पर ही उन्होंने सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि नकली रेमडेसिविर लगने के बाद भी लोगों की जान बच रही है। ये सोचने वाली बात है कि कहीं असली रेमडेसिविर इंजेक्शन की डोज देने के कारण मौत हो रही है।

उन्होंने कहा कि कई बार हाईडोज बहुत ज्यादा तकलीफ दे रहा है। मैंने खुद कई ऐसी मृत्यु देखी है जो मुझे भी लगता है कि इंजेक्शन के हाईडोज की वजह से हुई है। उदाहरण देते हुए कहा कि किसान संघ का नेता मोहन पांडेय उसे 6 रेमडेसिविर लगे, टोसी लगे लेकिन उसे बचा नहीं पाए।

उन्होंने आगे कहा कि रेमडेसिविर और टोसी संजीवनी बूटी नहीं है और न ही प्रमाणिक इलाज। कोई भी इसके पीछे ना पड़ें। ये डॉक्टर तय करेगा कि इंजेक्शन देना है या नहीं।

वहीं मंत्री ने यज्ञ की आहुति देने वाले बयान पर टिकी रही और कहा कि तथ्यों के आधार पर मैं प्रमाण दे सकती हूं कि वैदिक पद्धति कितनी कारगर है। स्वस्थ्य रहने के लिए वैदिक जीवन पद्धति को अपनाना ज़रूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ये माना है कि भारतीय वैदिक जीवन पद्धति को अपनाना ज़रूरी है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेसहारा परिवारों और बच्चों को देंगे 5000 रुपयें पेंशन

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मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत देने की घोषणा की है। सरकार ने बेसहारा परिवारों और बच्चों को हर महीने 5000 रुपये पेंशन देगी। इसके साथ ही बच्चों के लिए फ्री पढ़ाई की व्यवस्था करेगी।

उन्होंने कहा कि बच्चों को जीवन यापन के लिए परेशान ना होना पड़े। ऐसे सभी बच्चों के शिक्षा का नि:शुल्क प्रबंध किया जाएगा ताकि वह अपनी पढ़ाई लिखाई पूरी कर सकें। और साथ ही साथ ऐसे परिवार को फ्री में राशन दिया जाएगा।

सीएम ने कहा कि हमारी बहन कोई ऐसी है जो काम या नौकरी करना चाहती है तो उनको सरकार की गारंटी पर बिना ब्याज का ऋण काम या नौकरी के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा। ताकि फिर से वह अपना काम जीवन यापन के लिए प्रारंभ कर सके।

उन्होंने कहा कि बच्चों को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है वे प्रदेश के बच्चे है और प्रदेश उनकी चिंता करेगा। दरअसल एमपी में कई ऐसे बच्चे है जिनके माता-पिता का निधन कोरोना की वजह से हो गया है।

राजधानी भोपाल में 14 साल से कम उम्र के बच्चे हुए कोरोना संक्रमित

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मध्य प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर बच्चों के लिए भी घातक सिद्ध हो रही है। जानकरी के अनुसार दूसरी लहर में बड़ी संख्या में 14 साल से कम उम्र के बच्चे भी संक्रमित हुए है। अगर सिर्फ भोपाल में ही देखे तो 54000 मरीजों में 14 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या 2700 है।

दरअसल दूसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने से सरकार के भी कान भी खड़े हो गए है। ऐसा भी माना जा रहा है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार तीसरी लहर में 50 प्रतिशत मरीज 14 साल से कम उम्र के बच्चे हो सकते हैं।

बता दे कि इस आपदा से निपटने के लिए सरकार ने खास तौर पर बच्चों के लिए अस्पतालों में आईसीयू बनाए जाने के निर्देश दे चुकी है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बच्चों के लिए अलग से 50 बिस्तरों का आईसीयू बनाया जाएगा।

केंद्र सरकार ने की अपनी हद पार , हलफनामा देते हुए सुप्रीम कोर्ट को अपने दायरे में रहने की नसीहत दी

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में टीकाकरण नीति का बचाव करते हुए कहा कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप ना करें।

दरअसल टीकाकरण नीति और कोरोना से निपटने की तैयारी को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना बचाव किया है। रविवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दायर करते हुए कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की जगह नहीं है। 

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में लिखा कि वैश्विक महामारी के संदर्भ में न्यायिक हस्तक्षेप की बहुत कम जरूरत है। आगे केंद्र ने लिखा कि 18-44 साल के लोगों को वैक्सीन लगाने की मंजूरी सिर्फ इसलिए दी गई है क्योंकि राज्य उसकी मांग कर रहे थे।

बता दे कि केंद्र सरकार ने अपने व्यापक टीकाकरण अभियान के लिए वैक्सीन के बड़े-बड़े ऑर्डर दिए है। और इसलिए इसका सीधा असर कीमत पर पड़ रहा है। हालांकि केंद्र ने यह भी कहा कि इससे जनता की जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि सभी राज्यों ने मुफ्त में वैक्सीन देने का एलान कर दिया है।

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि उसे वैक्सीन की कीमत इसलिए कम देनी पड़ रही है क्योंकि केंद्र ने बड़ी संख्या में टीके का ऑर्डर दिया है।

कोरोना से मुकाबला करने के लिए ट्विटर कंपनी ने भारत को दिए 1.5 cr dollar

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ट्विटर ने भारत में कोविड-19 संकट का मुकाबला करने के लिए 1.5 करोड़ डॉलर दिए है। ट्विटर के सीईओ जैक पैट्रिक डोर्सी ने सोमवार को ट्वीट किया कि यह राशि तीन गैर-सरकारी संगठनों- केयर, एड इंडिया और सेवा इंटरनेशनल यूएसए को दान की गई है।

उन्होंने कहा कि सेवा इंटरनेशनल एक हिंदू आस्था आधारित मानवीय और गैर-लाभकारी सेवा संगठन है। सेवा इंटरनेशनल के हेल्प इंडिया डिफीट कोविड-19 अभियान के तहत ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, वेंटिलेटर, बायपैप मशीनों जैसे जीवन रक्षक उपकरणों को खरीदा जाएगा।’

उन्होंने आगे कहा कि सेवा की प्रशासनिक लागत लगभग पांच प्रतिशत है जिसका अर्थ है कि दान में मिले प्रत्येक 100 डॉलर सें 95 डॉलर उन लोगों पर खर्च किया जाता है। ह्यूस्टन मुख्यालय वाले सेवा यूएसए ने अब तक भारत में कोविड-19 राहत कार्यों के लिए 1.75 करोड़ अमरीकी डालर जुटाए है।

अमेरिका में 12-15 साल के बच्चों को लगेगी वैक्सीन, फाइजर-बायोएनटेक को दी हरी झंडी

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देश में कोरोना के चलते जारी तबाही के बीच अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने सोमवार को 12 से 15 साल के बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer-BioNTech) के वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है। एफडीए ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हमने 12-15 वर्ष के बच्चों में आपातकालीन उपयोग के लिए फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन को अधिकृत किया है।

दरअसल फाइजर ने मार्च महीने में बताया था कि 12 से 15 साल के 2,260 वॉलंटिअर्स को ये वैक्सीन दी गई जिसके बाद किसी भी बच्चे में कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने इस बात का दावा किया कि उनका वैक्सीन बच्चों पर पूरे 100 प्रतिशत असरदार है।

बता दे कि ये फैसला बच्चों के हित में तो है ही साथ उन्हें एक सामान्य जीवन जीने में मदद करेगा। इससे पहले वैक्सीन को 16 साल से अधिक उम्र वाले बच्चों के लिए मंजूरी दी गई थी। लेकिन बच्चों को वैक्सीन की मंजूरी देने से हम उन्हें इस कोरोना महामारी के प्रकोप से बचा सकते है।

महाकौशल को मिला सबसे बड़ा कोविड सेंटर,सांसद राकेश सिंह करेंगे उद्धघाटन

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मध्य प्रदेश के महाकौशल को सबसे बड़े कोविड सेंटर की आज सौगात मिलेगी। लगभग 500 बिस्तरों वाले कोविड केयर सेंटर का आज उद्घाटन किया जाएगा। सांसद राकेश सिंह आज दोपहर 3 बजे इसका शुभारंभ करेंगे।

कोविड केयर सेंटर की तैयारियों को अंतिम रूप देने सांसद राकेश सिंह एवं जिला कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने शनिवार को सेंटर का निरीक्षण किया। सांसद ने इस दौरान अधिकारियों को कल तक सभी तरह की तैयारी पूर्ण करने आदेशित भी किया।

सांसद सिंह ने इस अवसर पर बताया कि कोरोना संक्रमण की बढ़ते प्रभाव को देखते हुए जबलपुर में कोविड पॉजिटिव मरीजो हेतु प्राथमिक तौर पर बड़े कोविड केयर सेंटर की आवश्यकता थी और सभी जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन एवं जनसहयोग से करमेता स्थित डी मार्ट में 500 बिस्तर का सेंटर बनाया गया है।

भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर अब परिजनों के लिए रात में रुकने हेतु की जाएगी व्यवस्था

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कोरोना वायरस संक्रमण से अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने भदभदा विश्राम घाट पर आये लोगों के लिए रात में ठहरने, खाने-पीने एवं सोने का इंतजाम किया गया है, ताकि जरुरत होने पर वे इन सुविधाओं का लाभ ले सकें।

भदभदा विश्राम घाट प्रबंधन समिति के सचिव मम्तेश शर्मा ने शनिवार केा बताया कि शहर के अस्पतालों में महामारी से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। इस कारण विश्राम घाट में शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए लंबी कतारें लग रही है। ऐसे में परिजनों को दाह-संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में दूसरे जिलों से आए लोगों को अपने परिजन की अस्थियां ले जाने के लिए रात में भोपाल में रूकना पड़ रहा है लेकिन कोरोना कर्फ्यू के कारण उन्हें भोजन और रहने की समस्या आ रही है।

शर्मा ने कहा कि लोगों की इन परेशानियों को देखते हुए स्थानीय लोगों की मदद से विश्राम घाट पर रहने और भोजन की व्यवस्था की गयी है। कोविड से मरने वालों के परिजनों का दाह संस्कार करने वाले लोग आवश्यकता अनुसार इन सुविधाओं का लाभ ले सकते है।

उन्होंने बताया कि विश्राम घाट में आजकल रोजाना करीब छह से सात लोग अपने परिजन की अस्थियां ले जाने के लिए रात को ठहरते हैं। उन्होंने बताया कि रात को रुकने वालों के लिए कुछ बिस्तरों का भी इंतजाम किया गया है।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार को विश्राम घाट में 60 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इनमें से 54 कोविड-19 से मरे थे, जिनमें 38 भोपाल जिले के थे, जबकि 16 अन्य जिलों के थे।

अस्पताल में भर्ती होने के लिए अब कोरोना की रिपोर्ट की ज़रूरत नहीं

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कोरोना को लेकर अब सरकार ने नई गाइडलाइन बनाई गई है। अब मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाए जाने के लिए कोविड-19 की पॉजिटिव रिपोर्ट की जरूरत नहीं होगी।

बता दे कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड रोगियों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की राष्ट्रीय नीति में बदलाव किया है। अब कोविड वायरस से संक्रमित किसी भी व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने के लिए पॉजिटिव सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी। पहले अस्पतालों में भर्ती करवाने के लिए कोविड की पॉजिटिव रिपोर्ट या फिर सीटी-स्कैन की जरूरत होती थी।

दरअसल गंभीर मामले वाले मरीज को केस की गंभीरता के मुताबिक संदिग्ध वॉर्ड सीसीसी, डीसीएचसी और डीएचसी में भर्ती किया जाएगा। किसी भी मरीज को किसी भी वजह से सेवाएं देने से मना नहीं किया जाएगा। उसके साथ ऑक्सीजन या आवश्यक दवाएं जैसी दवाएं शामिल है।

इस नीति के मुताबिक किसी भी मरीज को उस शहर में जहां अस्पताल स्थित है वैध पहचान पत्र न उपलब्ध करा पाने में सक्षम न होने पर प्रवेश देने से मना नहीं किया जाएगा। अब अस्पताल में प्रवेश जरूरत के आधार पर दिया जाएगा।

मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के जिले में मरीज के लिए एम्बुलेंस की जगह ठेले का किया इस्तेमाल

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मध्य प्रदेश में कोरोना का संक्रमण से संक्रमित लोगों की परेशानी कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। प्रदेश के अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही है। कहीं जगह मिल भी गई दवाइयों की कमी तो कहीं ऑक्सीजन सिलेंडर की। वहीं मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी के गृह क्षेत्र की कमियां सामने आ रही है।

दरअसल मंत्री के गृह क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। जहां एक युवक बुजुर्ग महिला को हाथ ठेले पर बिठाकर अस्पताल ले जा रहा था। बताया जा रहा है कि वे महिला कोरोना पॉजिटिव है।

बता दे कि 70 वर्षीय बसंती बाई को सर्दी जुकाम और बुखार की शिकायत थी। उसे कोई अपने वाहन से अस्पताल तक ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ। और साथ ही साथ लॉकडाउन के कारण ऑटो, टैक्सी बंद है। ऐसे में बुजुर्ग महिला नीलेश कुशवाह ने अपने हाथ ठेले को ही एंबुलेंस बनाकर बैठा लिया और इलाज के लिए उन्हें एक किमी दूर एक निजी डॉक्टर के क्लीनिक तक ले गया।

इसके बाद भी कोई अपने वाहन में बसंती बाई की मदद के लिए तैयार नहीं हुआ। ऐसे हालात में नाती नीलेश से रहा नहीं गया तो उसने अपने हाथ ठेले पर ही अपनी को बैठा कर एक किलोमीटर प्राइवेट डॉक्टर के पास इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ा।