प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस से मजबूती से लड़ने और संक्रमण की चैन तोड़ने के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों को वैक्सीन लगवाने का वायदा अपने मन की बात कार्यक्रम में किया था जिसके बाद पूरे देश की राज्य सरकारों ने वैक्सीन की खेप आर्डर की थी।
उसी क्रम में मध्य प्रदेश सरकार ने भी प्रदेशवासियों को वैक्सीन लगवाने के लिए को वैक्सीन और को भी सील वैक्सीन कंपनियों से वैक्सीन के आर्डर किए थे लेकिन कंपनियों के पास ऑर्डर ज्यादा आने और माल कम होने के कारण 1 मई से होने वाला वैक्सीनेशन कार्यक्रम कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था।
अब मध्य प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया है कि 5 मई से मध्यप्रदेश में वैक्सीनेशन का कार्यक्रम सुचारू ढंग से चलने लगेगा क्योंकि हमें 5 मई तक को भी फील्ड को वैक्सीन की खेप मिल जाएंगी।
आपको बता दें कि को cowin.gov.in पोर्टल के माध्यम से 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों ने अपने रजिस्ट्रेशन किए थे कई लोगों ने सलाद भी बुक कर लिए थे लेकिन समय पर वैसलीन की खेप ना पहुंच पाने के कारण उनका वैक्सीनेशन का नहीं हो पाया है इस कारण से अब उन लोगों के अपॉइंटमेंट को रीशेड्यूल करके प्रदेश सरकार 5 मई से वैक्सीन लगवाना शुरू कर देगी।
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अब इस तारीख से शुरू होगा मध्यप्रदेश में 18 वर्ष से अधिक उम्र वालों का वैक्सीनेशन
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का बयान : 1 मई से 18 वर्ष वालों को नहीं लगेगी वैक्सीन, यह बताया कारण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशभर में वैक्सीनेशन तेज करवाने की बात कही थी जिससे जल्द से जल्द कोरोनावायरस के संकट से बचा जा सके लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में बड़ा बयान देते हुए बताया कि 1 मई से 18 वर्ष से ऊपर वाले व्यक्तियों को लगने वाली वैक्सीन नहीं लगेगी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमने कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों कंपनियों को वैक्सीन के ऑर्डर दिए थे जिससे 18 वर्ष की आयु से अधिक उम्र के लोगों वैक्सीनेशन करवाया जा सके लेकिन दोनों कंपनियों ने हमें 1 मई तक वैक्सीन दे पाने में अनभिज्ञता जाहिर की है इसके कारण अब यह कार्यक्रम नहीं हो पाएगा।
हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि 45 वर्ष की आयु से अधिक उम्र के लोगों को लगने वाला वैक्सीन सुचारू रूप से चलता रहेगा इसमें कोई रोक तो नहीं रहेगी।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री ने देश में वैक्सीनेशन के लिए 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन लगवाने की बात कही थी जिससे प्रभावित होकर देशभर के युवाओं ने Covin पोर्टल से जमकर रजिस्ट्रेशन किए थे। जिसके कारण कई बार तो covin portal क्रेश मार गया,कई लोगों को वैक्सीनेशन के लिए वेटिंग मिली तो कई लोग वेबसाइट क्रैश होने के कारण रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाए।
टीकाकरण अभियान के लिए डॉक्टरों ने दिया ये सुझाव, कहा सिर्फ टीका लगवाना ज़रूरी है
देश में युवाओं के लिए टीकाकरण अभियान शुरू होने जा रहा है। लेकिन युवाओं के मन में टीके को लेकर कई तरह के संशय है। कई डॉक्टरों ने बताया कि मौजूद स्थिति से उबरने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र विकल्प है। कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पूतनिक-वी तीनों ही टीके पूरी तरह सुरक्षित हैं।
बता दे कि मौजूदा हालात को देखे तो जो भी टीका उपलब्ध हो हमे वहीं लगवा लेना चाहिए, क्योंकि अब चुनने का समय नहीं है। जहां तक टीके के प्रभाव की बात है, वह कम और ज्यादा हो सकता है पर वह व्यक्ति क्षमता पर निर्भर करता है।
टीका लगवाने के बाद हल्के लक्षण जैसे बुखार, इंजेक्शन वाले स्थान पर दर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्या हो सकती है और ये स्वाभाविक है। किसी को थोड़ी ज्यादा परेशानी हो सकती है और किसी को बिल्कुल परेशानी नहीं होगी। ऐसे में छोटे बच्चे को जब टीका लगाया जाता है तो उसे भी इस तरह की परेशानी होती है और ये घबराने वाली बात नहीं है।
कोवीसील्ड वैक्सीन की कीमतों का ऐलान, सरकारी और प्राइवेट में रहेगा इतना अंतर
भारत सरकार ने कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी जंग को तेज कर दिया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मई से वैक्सीनेशन का दायरा बढ़ाते हुए 18 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों वर्ग को भी वैक्सीन लगवाने का फैसला किया है।
इसी बीच कोविसील्ड के सीईओ अदार पूनावाला ने राज्य सरकारों और प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन कितने रुपए में मिलेगी, इसका ऐलान कर दिया है।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों के लिए वैक्सीन के एक डोज की कीमत तय कर दी है कोविशील्ड की एक खुराक प्राइवेट अस्पताल को 600 रुपए में और सरकारी अस्पताल को 400 रुपए में मिलेगी।

इसे कोई भी व्यक्ति सरकारी अस्पताल में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग 400 रुपए देकर तो प्राइवेट अस्पताल में 600 रुपए देकर वैक्सीन लगवा सकते हैं।
सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा कि कंपनी वैक्सीन की कुल उत्पादन का 50% भारत सरकार के टीकाकरण कार्यक्रम को देगी और शेष 50 फीसदी वैक्सीन राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों के लिए होगी।



