कोरोना की बढ़ती महामारी के बीच देश के हर राज्य में ऑक्सीजन की कमी की खबरे आ रही हैं ताजा मामला देश की राजधानी दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल से जुड़ा है जहाँ पर ऑक्सीजन खत्म होने के कारण बीते 24 घंटों में 25 लोगों की मौत हो गयी।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली वासियों के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करवाने की अपील की लेकिन उनकी अपील का प्रधानमंत्री पर कोई असर पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है बीते 24 घंटों में दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल में 25 लोगों की मौत ऑक्सीजन न मिलने के कारण हो गई तो कई भर्ती मरीजों की जान भी खतरे में पड़ गई।
खबरों के अनुसार सर गंगा राम हॉस्पिटल दिल्ली के स्टॉक में सिर्फ 2 घंटे की ही ऑक्सीजन बची हुई थी फॉक्स हॉस्पिटल ने प्रशासन से तुरंत ऑक्सीजन सप्लाई की मांग भी की थी प्रशासन ने गिर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन पहुंचाई भी लेकिन इसी बीच 24 घंटे में 25 से ज्यादा मरीजों की मौत हो गई।
इसके अलावा ऑक्सीजन लेवल कम होने से 60 से ज्यादा मरीजों की जान खतरे में थी हॉस्पिटल प्रशासन ने ऑक्सीजन तुरत एयर लिफ्ट करा कर पहुंचाने की मांग की थी जब हॉस्पिटल में ऑक्सीजन पहुंच गया तब जाकर मरीजों के घरवालों ने चैन की सांस ली।
ऐसा नहीं है कि दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल में ही ऑक्सीजन की कमी हुई है इसके पहले मैक्स हॉस्पिटल में भी ऑक्सीजन की कमी थी जहां पर ऑक्सीजन पहुंच गई है। गुरुवार को ही दिल्ली के शांति मुकुंद हॉस्पिटल के सीईओ सुनील सागर,हॉस्पिटल में ऑक्सिजन की कमी का हाल सुनाते- सुनाते रो पड़े थे। उन्होंने कहा कि बहुत विकट स्थिति है। हमारे पास बहुत कम ऑक्सिजन बचा है। हम ऑक्सिजन नहीं दे पाए तो हमारे मरीज मर जाएंगे।
दिल्ली के कड़कड़डूमा स्थित मकुंद हॉस्पिटल के सीईओ को जब यह पता चला कि उनके हॉस्पिटल में सिर्फ 2 घंटे का ही ऑक्सिजन बचा है तो वो परेशान हो गए। उनके यहां भर्ती 110 कोरोना मरीजों को लेकर वो परेशान हो गए।
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दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल में 24 घंटे में 25 मरीजों की मौत, कई अस्पतालों में भी नही बची ऑक्सिजन
किसान आंदोलन को लेकर जगजीत सिंह दल्लेवाल का बड़ा बयान,कृषि मंत्री को लेकर बोले….
किसान आंदोलन को लेकर किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने बड़ा बयान दिया है। दल्लेवाल ने कहा कि अब यह आंदोलन पंजाब और हरियाणा का नहीं बल्कि देश का आंदोलन बन गया है।
दल्लेवाल के अनुसार अब दिल्ली में एमपी और यूपी के किसानों ने भी डेरा जमाना शुरू कर दिए है और बहुत जल्द यहाँ पूरे देश के किसान आकर हमे अपना समर्थन देने वाले हैं।
एक दूसरे के पूरक है तीनों कानून
किसान नेता के अनुसार पहला कानून किसान की कमर तोड़ेगा दूसरा कानून कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग से किसानों को थोड़ी रोशनी दिखायेगा लेकिन एक समय के बाद किसान खुद को ठगा हुआ महसूस करेगा और तीसरा कानून किसान और उपभोक्ता दोनों वर्ग के लिए हानिकारक होगा।
किसानों के हाथ से जमीन निकलकर कारपोरेट के हाथों में चली जायेगी
किसान नेता ने कहा कि मोदी सरकार किसानों की जमीन किसान के हाथ से निकालकर कॉरपोरेट के हाथों में देने की पूरी योजना बना चुकी है लेकिन हम सभी किसानों का एकमात्र मकसद इस तीनो काले कानूनों को वापस करवाना है।
एमएसपी पर लिखित गारंटी देकर कानून बनाए सरकार
एमएसपी पर सरकार की गारंटी के सवाल पर दल्लेवाल ने कहा कि सरकार किसानों और किसान नेताओं को मूर्ख समझती है अगर मोदी जी और उनकी सरकार को किसानों और एमएसपी की इतनी ही चिंता है तो क्यों सरकार लिखित गारंटी नहीं दे रही? हम चाहते हैं कि सरकार इसपर लिखित गारंटी देकर इसका कानून बनाये।
दल्लेवाल ने कहा अब हमारी लड़ाई किसान के अस्मिता को बचाने की है और हमे इसमे पंजाब के अलावा अन्य राज्यो के लोग सहयोग भी कर रहे है।
पंजाब और हरियाणा के लोग ही आंदोलन में शामिल हैं बाकी देश के किसानों को इससे दिक्कत नही है भाजपा नेताओं के इस आरोप पर जवाब देते हुए दल्लेवाल ने कहा कि आंदोलन से पंजाब का पुराना नाता रहा है। चाहे वो देश के लिए मर मिटने की बात हो या देश को आजाद करवाने की बात हर जगह बागडोर पंजाबियों ने ही संभाली है यही वजह है कि कृषि बिल को लेकर पंजाब के किसानों ने मोर्चा संभाल लिया है।
आंदोलन में पंजाब और हरियाणा के लोग इसलिए ज्यादा दिखाई दे रहे क्योंकि दोनों राज्य दिल्ली के पास है। लेकिन इसके बावजूद भी अन्य राज्य के किसान भी दिल्ली आने लगे है।
चतुर सुजान हैं नरेंद्र सिंह तोमर
केंद्रीय कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के एमएससी और तीनों कृषि कानूनों पर दिए गए बयानों पर दल्लेवाल ने कहा तोमर पुराने राजनीतिज्ञ और चतुर सुजान हैं लेकिन हम उनकी किसी भी चाल में फसने वाले नही हैं।
CBIvsCBI- आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
CBIvsCBI मामले में आलोक वर्मा को CBI के डायरेक्टर पद से हटाए गए आलोक वर्मा की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई नें सुनवाई के दौरान कई अहम निर्देश दिए.
फैसले की अहम बातें.
1-सीजेआई गोगोई ने कहा कि सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव कोई नीतिगत फैसले नहीं लेंगे. उन्हें सिर्फ रूटीन काम करना होगा.
2-डायरेक्टर आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी की जांच दो हफ्ते में खत्म करनी होगी.
3-नागेश्वर राव की ओर लिए गए सभी फैसले बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपे जाएं.
4-सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एके पटनायक आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी जांच की निगरानी करेंगे.
5-सीजेआई ने कहा, देश के हितों को देखते हुए सीबीआई मामले को हम ज्यादा दिन तक नहीं खींच सकते. छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और एक एनजीओ द्वारा दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई.
CBI मामले में की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि वह इस मामले को देखेंगे, उन्होंने सीवीसी से अपनी जांच अगले 2 हफ्ते में पूरी करने को कहा है, ये जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एके पटनायक की निगरानी में होगी. चीफ जस्टिस ने कहा कि देशहित में इस मामले को ज्यादा लंबा नहीं खींच सकते हैं.
केंद्र सरकार को नोटिस
आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है. उन्होंने सरकार से पूछा है कि किस आधार पर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा गया है. इस मामले में अब 12 नवंबर को अगली सुनवाई होगी. CJI ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस स्थिति में बस इस मामले पर सुनवाई होगी कि ये प्रथम दृष्टया केस बनता है या नहीं.
CBIvsCBI- विपक्ष के सवालों पर अरुण जेटली के यह 10 जवाब
सीबीआई बनाम सीबीआई मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. दरअसल देर रात सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिए जाने से हड़कंप मच गया. विपक्ष केंद्र सरकार पर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगी. आरोप लगाने की लिस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल हैं. राहुल गांधी ने इसको राफेल से जुड़ा मुद्दा बताया. वहीं आरोपों का सिलसिला बढ़ता देख केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कई सवालों का जवाब दिया.
अरुण जेटली की 10 बड़ी बातें
- अरुण जेटली ने बताया कि सीवीसी की सिफारिश के बाद केंद्र ने अधिकारियों को हटाने का फैसला किया है।
- देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की छवि को बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी हो गया था।
- सीवीसी की अनुशंसा पर एक एसआईटी पूरे मामले की जांच करेगी।
- अरुण जेटली ने कहा कि इस मामले की जांच करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है और न ही इसकी जांच सरकार करेगी।
- दोनों शीर्ष अधिकारियों पर ही आरोप लगे हैं, ऐसे में इसकी जांच ये अधिकारी खुद नहीं कर सकते।
- जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारी अवकाश पर रहेंगे।
- एसआईटी केस की जांच करेगी। उच्चतम निष्पक्षता के तहत यह कदम उठाया गया है।
- विपक्ष के आरोपों को जेटली नें अनफेयर बताया।
- जेटली नेकहा कि सरकार ने सेक्शन 42 की शक्ति का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश पारित किया है।


