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दिग्विजय सिंह ने BJP की आईटी सेल और बजरंग दल पर लगाए गंभीर आरोप, कही ये बात…

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पुलवामा हमले को लेकर जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक (satyapal malik) के दिए गए बयान ने राजनैतिक सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। मलिक के बयान का मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने समर्थन किया है। दरअसल मलिक ने एक इंटरव्यू में पुलवामा हमले की एक वजह केंद्र सरकार की खामी बताया था।

सत्यपाल मलिक जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले यहां के आखिरी राज्यपाल थे। जिस समय पुलवामा अटैक हुआ, उस वक्त भी मलिक राज्यपाल के पद पर थे। सत्यपाल मलिक के इंटरव्यू में दिए गए इस बयान के बाद एक बार फिर कांग्रेस मोदी सरकार पर निशाना साध रही है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सत्यपाल मलिक के बयान का समर्थन किया है। सिंह कहा कि पहले ही दिन इंटेलिजेंस फेलियर का खुलासा हो गया था। वहीं उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी के आईटी सेल और बजरंग दल के लोग आईएसआई (ISI) से पैसे लेकर जासूसी करते हैं।

दिग्विजय ने राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सतना में बजरंग दल का अध्यक्ष और भोपाल में ध्रुव सक्सेना के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। लेकिन देशद्रोह का मामला राज्य सरकार ने दर्ज क्यों नहीं किया? जमानत कैसे हो गई? इन सभी सवालों के सरकार को जवाब देना चाहिए।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को मिल सकता है बंगाल में 8 चरण के चुनाव कराने का फायदा, बनाये जा सकते हैं राज्यपाल

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मोदी सरकार पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त(Chief Election Commissioner) सुनील अरोड़ा(Sunil Arora) को बंगाल चुनाव को 8 चरणों मे करे गए उनके फैसले का फायदा दे सकती है। उन्हें राज्यपाल बनाये जाने की संभावना है।

इसके पहले भी मोदी सरकार ने भारत के मुख्य न्यायाधीश(CJI) रंजन गोगोई(Ranjan Gogoi) को राज्यसभा(Rajyasabha) के सदस्य के रूप में नामित किया था वो आज राज्यसभा के माननीय सदस्य हैं।

केंद्र सरकार ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सुनील अरोड़ा को गोवा के राज्यपाल के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया है। अरोड़ा आईएएस(IAS) 1980 बैच के राजस्थान कैडर के अधिकारी हैं। अरोड़ा हाल में ही CEC के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं। अब सरकार ने उनके पुनर्वास की योजना बनाई है।

शिवराज कैबिनेट का विस्तार: सिंधिया समर्थकों के साथ यह भी लेंगे शपथ

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मध्यप्रदेश के राज्य सरकार के कैबिनेट का विस्तार तय हो गया है। शिवराज की टीम में दो मंत्री शामिल किए जाएंगे। रविवार 3 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे राजभवन में होगा शपथ सम्मारोह। मंत्रिमंडल विस्तार की सूचना मंत्रालय से राजभवन भेजी गई है और इसकी पुष्टि राजभवन ने कर दी है।

कैबिनेट विस्तार में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत के साथ मध्यप्रदेश के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक भी शपथ लेंगे। मंत्रियों और नए मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाने के लिए रविवार सुबह 11 बजे राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भोपाल आएंगी।

उपचुनाव के परिणाम 10 नंवबर को आए थे। इसके बाद से शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार किया जा रहा था। इसे लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की चार दौर की बैठकें हुई। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार सुबह ही राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार की अनुमति मिली है। इसके बाद कार्यक्रम तय किया गया है।

तुलसी को जल संसाधन व गोविंद को परिवहन व राजस्व विभाग मिलेगा

मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि तुलसी सिलावट को जल संसाधन और गोविंद सिंह राजपूत को परिवहन व राजस्व विभाग मिलना लगभग तय है। शिवराज सरकार सत्ता में आने के बाद सिलावट और राजपूत को यही विभाग सौंपे गए थे। बीजेपी अब इन दोनों को अन्य विभाग देना चाहती थी, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व और सिंधिया के बीच हुई सहमति के बाद दाेनों को एक बार फिर उन्हीं विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

4 पद रह जाएंगे खाली

शिवराज कैबिनेट के 14 सदस्‍यों गोविंद सिंह राजपूत, तुलसीराम सिलावट, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, डॉ. प्रभुराम चौधरी, बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंषाना, हरदीप सिंह डंग, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, बृजेंद्र सिंह यादव, गिर्राज दंडौतिया, सुरेश धाकड़ और ओपीएस भदौरिया ने चुनाव लड़ा था। इसमें से इमरती देवी, एदल सिंह कंषाना और गिर्राज दंडोतिया चुनाव हार गए थे। इसमें से 2 तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को छह माह का कार्यकाल पूरा होने पर चुनाव के दौरान ही मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब दोनों को फिर से कैबिनेट में लिया जा रहा है। इसके बाद भी 4 पद खाली रह जाएंगे। यानी आगे भी कैबिनेट विस्तार होगा।