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अगस्ता वेस्टलैंड मामले में आया भाजपा के 2 मुख्यमंत्रियों का नाम !

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Newbuzzindia: कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा की मोदी सरकार ने वसुंधरा राजे के खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लिया, जबकि कैग की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर खरीद कर जनता के 1.14 करोड़ रुपए का नुकसान किया था।

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर डील पर कांग्रेस ने मोदी सरकार से सवाल किए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कंपनी पर लगे बैन को मोदी सरकार ने हटा दिया। अपने सवालों में कांग्रेस ने बीजेपी के दो मुख्यमंत्रियों वसुंधरा राजे और रमन सिंह पर भी आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा की मोदी सरकार ने राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे के खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लिया, जबकि कैग की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर खरीद कर जनता के 1.14 करोड़ रुपए का नुकसान किया था।

दरअसल राज्य सरकार ने वीआईपी के लिए करीब 20 करोड़ की लागत में हेलिकॉप्टर खरीदा था। यह राजे सरकार के पिछले कार्यकाल का मामला है, तब 2005 में यह सौदा हुआ था।

अब यह सौदा रक्षा मंत्रालय की जांच के घेरे में है। राज्य सरकार को लिखे पत्र में रक्षा मंत्रालय की ओर से अगस्ता ई-190 पावर हेलिकॉप्टर की खरीद संबंधी दस्तावेज मांगे गए थे। 31 मार्च 2008 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कैग की रिपोर्ट में इस सौदे को लेकर कई अनियमितताओं का जिक्र किया गया था।

उसके अनुमान के मुताबिक इससे खजाने को करीब 1.14 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। सीबीआई अगस्ता वेस्टलैंड से वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीद के 3,600 करोड़ के मामले में आर्थिक अनियमितताओं की जांच कर रही है।

राजे सरकार ने करीब 20 करोड़ रुपए में यह हेलिकॉप्टर खरीदा था, जो मुख्यत: मुख्यमंत्री, राज्यपाल जैसे वीआईपी के दौरों के लिए था, लेकिन यह हेलिकॉप्टर सजावटी हाथी ही साबित हुआ क्योंकि प्रशिक्षित पायलट के अभाव में यह खड़ा रहा एवं पहली बार 2007 में ही उड़ा।

राज्य सरकार ने इसके लिए कंपनी से अनुबंध किया था, जबकि देश में उस श्रेणी के हेलिकॉप्टर के लिए कोई प्रशिक्षित पायलट नहीं था। इस तरह जहां हेलिकॉप्टर की खरीद एवं रखरखाव पर काफी पैसा खर्च किया गया, वहीं पायलट न होने से दूसरे हेलिकॉप्टरों पर भी काफी खर्चा हुआ। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि हेलिकॉप्टर 29 जुलाई 2005 में दिल्ली पहुंचा और 22 सितंबर 2005 को जयपुर आया।
इसका कोई उपयोग नहीं हुआ, क्योंकि उड़ान के लिए आवश्यक प्रशिक्षण जनवरी 2006 में सिर्फ एक पायलट को दिया गया। जबकि अनुबंध की शर्तों के अनुसार फर्म को दो पायलट को प्रशिक्षण देना था। इसके अलावा एक अतिरिक्त पायलट को प्रशिक्षण एवं तीन हफ्तों के लिए दो टेक्नीशियन को मैंटेेनेंस ट्रेनिंग देनी थी।

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हेलिकॉप्टर घोटाला : इटली की अदालत ने माना डील में हुआ भ्रष्टाचार , बैकफुट पे कांग्रेस !

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Newbuzzindia: इटली की एक अदालत ने 2010 में हुए वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाले में अनियमितता की बात मानते हुए इंडियन एयर फोर्स के पूर्व चीफ को भ्रष्टाचार का दोषी पाया है। इटली की एक अदालत ने कहा कि इस मामले में तर्कसंगत आधार पर माना जा सकता है कि भ्रष्टाचार हुआ और यह बात साबित हुई है कि 1-1.5 डॉलर का एक हिस्सा अवैध फंड के तौर पर भारतीय अधिकारियों तक पहुंचा।

कोर्ट ने अपने फैसले में भारत के पांच नेताओं के नाम का भी जिक्र किया है। इसमें कुछ नाम टॉप कांग्रेस नेताओं के हैं। इटली कोर्ट के इस फैसले के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला है। अब संसद में भी इस मामला गूंज सकता है। बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी इस पर चर्चा के लिए नोटिस दे सकती हैं।

इटली कोर्ट के इस फैसले पर बीजेपी सांसद किरीट सोमैया ने कहा कि उनकी पार्टी ने चार साल पहले इस माामले को उठाया था। कैग ने भी इस पर सवाल खड़ा किया था। अब इटली के कोर्ट के फैसले से करप्शन की बात साफ हो गई है। उन्होंने कहा कि इटली के कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इस मामले की की जांच होनी चाहिए।

वहीं, कांग्रेस की तरफ से आनंद शर्मा ने इस पर सफाई दी है। शर्मा ने कहा कि यूपीए सरकार ने इस पर ऐक्शन लिया था। तत्कालीन रक्षा मंत्री ऐंटनी ने दोनों सदनों में बयान दिया था। ईडी और सीबीआई द्वारा मामले की जांच शुरू की गई थी। आनंद शर्मा ने कहा कि बीजेपी इस मामले पर स्मृतिलोप की शिकार है।

बता दें कि मिलान कोर्ट ऑफ अपील्स के 223 पेज के फैसले में 17 पेज का अलग चैप्टर है, जिसका शीर्षक है- मार्शल शशि त्यागी का भ्रष्ट होना। इसमें उन बातों और सबूतों का जिक्र है, जिस आधार पर अदालत ‘भारतीय अफसर’ के भ्रष्टाचार में शामिल होने के नतीजे पर पहुंची।

कोर्ट ने कहा, ‘वीवीआईपी हेलिकॉप्टर्स डील के लिए ऑगस्टावेस्टलैंड के पक्ष में पैसे की खातिर मार्शल शशि त्यागी के दखल देने की बात साबित होती है।’

एयर फोर्स के पूर्व चीफ ने हमेशा इस मामले में अपनी बेगुनाही की बात कही। त्यागी इटैलियन कोर्ट में हाजिर नहीं हुए थे और फिलहाल इस मामले में सीबीआई और ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं।

इटैलियन कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा कि त्यागी फैमिली को कैश के अलावा वायर ट्रांसफर भी किए गए। कोर्ट के मुताबिक, कुछ हिस्सा एयर चीफ के रिश्तेदारों को पहुंचा, जबकि कुछ खुद त्यागी को दिया गया। त्यागी 2005 से 2007 के दौरान एयर फोर्स के चीफ थे। इस दौरान वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाला हुआ था। दरअसल, हेलिकॉप्टर डील की प्रोसेसिंग एयर फोर्स हेडक्वॉर्टर से ही हुई थी।

अदालत ने कहा कि इस मामले में त्यागी कनेक्शन को छिपाने की कोशिश की गई और यहां तक कि डील के बिचौलियों ने संभावित सबूतों को भी खत्म करने का प्रयास किया। अदालत के ऑर्डर में कहा गया, ‘इससे जुड़ी बातचीत के विश्लेषण के आधार पर हमें एक भारतीय अफसर के भ्रष्टाचार के बारे में पता चला, जिसकी पहचान त्यागी बंधुओं के रिश्तेदार के तौर पर हुई।

इस सिलसिले में हुई बातचीत का कंटेंट इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त है कि भ्रष्टाचार हुआ।’ इटैलियन कोर्ट ने इंडियन सीएजी रिपोर्ट के अलावा मार्च 200 में बिचौलियों के बीच हुई बातचीत का हवाला दिया।

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कोहिनूर नहीं लाना है तो निवेश, कालाधन और दाऊद को लाए मोदी सरकार

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Newbuzzindia: तीन असंबद्ध, अलग विषय। किन्तु एक ही पाठ पढ़ा रहे हैं। कि जल्दबाज़ी बहुत ही बुरी होती है। कहा जा सकता है कि हम सभी इस कालजयी कहावत को जानते हैं, इसमें नया क्या है? यही समझने का प्रयास है कि हम जानते तो हैं, किन्तु मानते नहीं। और इसीलिए ज़ल्दबाज़ी करते चले जाते हैं। पिछला सप्ताह कोहिनूर हीरे से दमकता रहा। देश की विरासत को वापस लाने से सुप्रीम कोर्ट में सरकार के इनकार से काफी हल्ला मचा। और चौबीस घंटे में सरकार ने कहा कि वह हीरा वापस लाएगी।

ऐसा क्यों हुआ?
केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने वैसा जवाब सुप्रीम कोर्ट में दे दिया था। कि महाराजा रणजीत सिंह के वंशज ने कोहिनूर ब्रिटिश राजघराने को भेंट किया था। अब आप सोचिए, क्या सॉलिसिटर जनरल ऐसा कह सकते हैं? और यदि किया, तो यह घातक जल्दबाज़ी ही तो हुई।

वास्तव में सॉलिसिटर जनरल ने ऐसा तथ्य पेश करने में कोई जल्दबाज़ी नहीं की थी। वे तो 1956 के पं. नेहरू के मत को ही केन्द्र सरकार के अधिकृत मत के रूप में व्यक्त कर रहे थे। जिसमें कहा गया था कि उपहार में दिया गया हीरा वापस मांगना अनुचित होगा। जल्दबाज़ी तो यह थी कि सॉलिसिटर जनरल ने तत्काल सारी जानकारी पेश कर दी। वर्तमान सरकार से पूछे बग़ैर। क्योंकि यदि पूछते तो पाते कि मोदी सरकार उल्टा पक्ष रखती। कहती कि भले ही पं. नेहरू ने ऐसा तय किया था- किन्तु हम इसे, ‘भारत का गौरव’ मानकर वापस लाएंगे।

यदि पूछते तो मोदी सरकार यह भी तथ्य सुप्रीम कोर्ट को बताती कि कैसे वह 10वीं शताब्दी की दुर्लभ दुर्गा प्रतिमा जर्मनी से वापस लाई। फिर उसने कैनेडा से 400 वर्ष पुरानी ‘पैरेट लेडी’ शिल्प प्राप्त किया। अॉस्ट्रेलिया से भी देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां वापस लीं। यह, सॉलिसिटर जनरल के कथन के बाद प्रचारित भी किया गया। 

प्रश्न हालांकि और भी हैं।
चाहिए किसे कोहिनूर?

लाना ही है मोदी सरकार को, तो विदेश और देश से भी, निवेश लाए। 
लाना ही है मोदी सरकार को, तो नौकरियां लाए।

और विदेश में मौजूद यदि हमारे यहां से गया हुआ, भेजा हुआ कुछ ला सकती है मोदी सरकार, तो हजारों करोड़ का काला धन वापस लाए।
और, हत्यारों-हमलावरों की एक पूरी पंक्ति बसी-बसाई है पाकिस्तान, दुबई या कि ऐसे ही किसी देश में। दाऊद इब्राहिम को खींचकर लाए। पैसे लेकर, बांटकर खून बहाने वाले कई हैं लखवी या मसूद या दाऊद गिलानी हेडली।

इन्हें वापस लाए।
जल्दबाज़ी न करें, किन्तु यहां भी।
जल्दी कर सकें, तो बेहतर होगा।
जल्दी और जल्दबाज़ी में महीन किन्तु स्पष्ट अंतर है।
जल्दी में गति है।
जल्दबाज़ी में दुर्गति है।
जल्दी का अर्थ तत्काल करना है।
जल्दबाज़ी तात्कालिक है।

जैसे, कोहिनूर (यदि भेंट किया गया हो तो) जल्दबाज़ी थी। उस समय का -तात्कालिक लाभ को ध्यान में रखते हुए- लिया निर्णय था। जिसमें निश्चित ही बहुत सारे स्वर शामिल नहीं होंगे।
किन्तु कोहिनूर को सीधे ब्रिटेन पहुंचाया या कि ब्रिटिश ताज में जड़ देना -जल्दी उठाया कदम था। कारोबारी बनकर आए धूर्त ब्रितानी समझते थे कि यह भारी-भरकम नायाब हीरा कल भावनाओं को आहत करने का कारण बनेगा।

एक जल्द फैसला रोचक भी है।
ब्रिटेन ने इसे ‘अशुभ’ मानते हुए टावर ऑफ लंदन में रखवा दिया। और राजघराने ने तय किया कि केवल महारानियां ही इसे पहनेंगी! रोचक इसलिए कि हो सकता है, इतने बड़े हीरे को राजा-युवराज अपने पास रख लें -और महारानी इसे कभी पा ही न सके- ऐसी आशंका से तो उनकी महारानी द्वारा कहीं इसे ‘अशुभ’ प्रचारित नहीं किया गया! एक जल्दी में किया गया प्रचार -और संभवत: जल्दबाज़ी में पाया गया निर्णय।

कोहिनूर के लिए, किन्तु हमें कोई न जल्दी है। न जल्दबाज़ी।
कोहिनूर आ भी जाए तो क्या? म्यूज़ियम में रखा जाएगा।
अब बात पीएफ की।

बजट में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने पीएफ को लेकर बड़ी ग़लतियां की थीं। टैक्स तो जल्दबाज़ी में लगाया था। फिर वापस लेना पड़ा भारी रोष के कारण। यहां उन्हें जल्दी करना चाहिए था निर्णय। जो उन्होंने नहीं किया। और इस तरह वेतन पाने वाले देश के महत्वपूर्ण मध्यम वर्ग को उन्होंने भारी नाराज़ कर दिया। 

एक जल्दबाज़ी तब की थी। फिर पीएफ को लेकर की गई नई जल्दबाज़ी का और नुकसान उन्होंने पिछले पखवाड़े में झेला। 
नए नियमों के अंतर्गत उन्होंने पीएफ निकालने पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। 58 वर्ष की उम्र से पहले नहीं निकाल सकते। नौकरी चली जाने या छोड़ने के बाद ‘बिटविन द जॉब्स’ यानी नई नौकरी पाने से पहले के समय में रकम नहीं निकाल सकते आदि। 

भारी आक्रोश के बाद मोदी सरकार को इसे भी वापस लेना पड़ा। 
वापस जल्दी लेना चाहिए था। क्योंकि इस बीच देश को भारी उग्र प्रदर्शन, हिंसक वातावरण  का सामना करना पड़ा। 

प्रश्न यह है कि लोगों के बचत के पैसे पर सरकार का अधिकार ही कैसे है? फूटी कौड़ी की सुविधाएं छोटी बचत के लिए सरकार दे नहीं रही। एक नियम, एक रुपए तक का लाभ किसी बचत के लिए ला नहीं रही। कोई प्रोत्साहन है ही नहीं। फिर जब आप कुछ दे नहीं सकते, तो लेने-छीनने और रोक लगाने का गलत अधिकार कहां से ले आए?

और देश में दो तरह के मापदण्ड, दोहरे भेदभाव वाले नियम कैसे हो सकते हैं? तनख्वाह पाने वाले सरकारी तो सवा सौ-डेढ़ सौ प्रतिशत की वेतनवृद्धियां लें -और उन्हें उनके जीपीएफ पर न कोई टैक्स का प्रावधान कभी प्रस्ताव तक के रूप में न झेलना पड़े। जबकि निजी क्षेत्र में तनख्वाह पाने वालों को उन्हीं के पैसे बच्चों की शादियां, घर बनाने और कोई आपात स्थिति में निकालने तक पर रोक लगे- ऐसा कैसे हो सकता है?

स्पष्ट है, जेटली ने बगैर प्रभावित पक्षों की दलील सुने, जल्दबाज़ी में ऐसा फैसला कर लिया। और बहुत ही बुरे परिणाम सामने आए। 
ताज़ा मामला उत्तराखंड की खंडित राजनीति का है। 
रातोरात मोदी मंत्रिमंडल ने एक आपात बैठक बुलाकर वहां राष्ट्रपति शासन लागू किया था। कांग्रेस की हरीश रावत सरकार बगावत के बाद वहां अल्पमत में आ गई थी। नौ विधायकों को अयोग्य करार देने के बाद भारी नाटकीय स्थितियों में हर कदम जल्दबाज़ी भरा लिया गया। 

इसी कारण हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन रद्द करते हुए भारी फटकार लगाई। 
किन्तु सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी।

क्योंकि यहां कारण रावत की जल्दबाज़ी थी। हाईकोर्ट के जिस फैसले में रावत को पुन: मुख्यमंत्री बनाने की बात कही गई थी उसकी प्रति प्राप्त किए बग़ैर ही रावत ने मुख्यमंत्री पद का काम संभाल लिया। देर रात मंत्रिमंडल बैठक की। 

कई फैसले भी ले लिए। 
प्रश्न यह उठता है कि जो कुछ फैसले लिए गए, वे यदि उतने ही आवश्यक थे, तो उन्होंने मुख्यमंत्री रहते क्यों नहीं लिए? 

सरकार बचाने के लिए करोड़ों की खरीद करने के प्रयास के आरोप -कैमरे में दर्ज स्टिंग- के बाद रावत हाईकोर्ट से लौटें या कि सदन में बहुमत सिद्ध कर, उनकी विश्वसनीयता पर संदेह नहीं हटेगा। जैसे कि सुप्रीम कोर्ट से रोक मिल भी गई हो, मोदी सरकार क्यों धारा 356 में इंदिरा गांधी शैली में विरोधी सरकारें बर्खास्त करने पर लौट रही है, यह प्रश्न बना ही रहेगा। 

जल्दबाज़ी करने में जितना कम समय लगता है – उतना ही लम्बा समय जल्दबाज़ी के कारण पछतावे में लगाना पड़ता है। 
जहां हमें जल्दी करनी हो, वहां हम जल्दी करें – असंभव है। किन्तु करनी ही होगी। जल्दबाज़ी रोकना असंभव है। किन्तु रोकनी ही होगी। 

हम इन्सान हैं। 
जल्दबाज़ी का काम किसका है, यह अलग से लिखने की अावश्यकता नहीं है।

ये लेख कल्पेश याग्निक (दैनिक भास्कर) द्वारा लिखा गया है ।

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आजाद भारत के सर्वश्रेष्ठ नेता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : हाशिम अंसारी

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Newbuzzindia: बाबरी मस्जिद के मुख्य मुद्दई व पक्षकार हाशिम अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र के लिए तारीफों के पुल बांधे हैं. हाशिम अंसारी ने कहा है कि आजाद भारत में नरेंद्र मोदी जैसी देश समर्पित सोच रखने वाला कोई राजनेता नहीं आया. प्रधानमंत्री मोदी देश के अब तक के सर्वश्रेष्ठ नेता हैं.

उन्‍होंने अपील की कि देशवासियों को पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व पर गर्व करना चाहिए. इस मौके पर हाशिम अंसारी ने प्रधानमंत्री को अयोध्‍या आने का भी न्‍योता दिया. साथ ही कहा कि वे अयोध्‍या में पीएम मोदी का फूलों से भव्‍य स्‍वागत करेंगे.

शनिवार को अयोध्या स्थित अपने घर पर हाशिम अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खूब तारीफ की. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद मोदी जैसा लीडर हिन्दुस्तान में कोई दूसरा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि मेरे साथ बैठने वाले बहुत से ऐसे मुसलमान हैं जो मोदी की तारीफ करते हैं.

मैं खुद मोदी के काम की तारीफ करता हूं. दिल से उनके साथ हूं. अयोध्या समेत पूरे मुल्क में बड़ी संख्या में मुसलमान हैं जो मोदी के साथ हैं. हाशिम ने यूपी के आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मुसलमानों से मोदी को समर्थन देने की अपील भी की.

उन्‍होंने देश के मुसलमानों से कहा कि वो मीडिया और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों की ओर से मोदी के प्रति पिछले कई वर्षों में सुनियोजित तरीके से पैदा किए गए खौफ से अब खुद को आजाद कर दें. मोदी का दिल खोलकर साथ दें और एक लीडर के रूप में उनके हाथों को और मजबूती प्रदान करें.
उन्‍होंने कहा कि वास्तव में देश के मुसलमानों की तकदीर बदलने का किसी में दम है तो वह मोदी में है.

कांग्रेस समेत बाकी राजनीतिक दल तो सिर्फ मोदी और भाजपा का झूठा भय दिखाकर आजादी के बाद से अब तक मुसलमानों को छलते ही रहे. तभी तो देश में आजादी के 60 साल से भी ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी मुसलमानों की तकदीर में कोई बदलाव नहीं आया. इस बारे में देश के प्रत्येक मुसलमान को ठण्डे दिमाग से सोचना चाहिए.

मालूम हो कि 2017 में उत्‍तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं. ऐसे में हाशिम अंसारी का पीएम मोदी की तारीफ करना राजनीति के गलियारे में चर्चा का विषय बन गया है.

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मोदी और आरएसएस पे बरसीं अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी ! बोली संघवाद से चाहिए आजादी..

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Newbuzzindia: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी एवं पूर्व भाजपा नेता करुणा शुक्ला ने जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार का खुलकर समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि कन्हैया ने क्या गलत कहा है। वह भी भगवा से आजादी चाहती हैं, संघवाद (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से आजादी चाहती हैं। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी जमकर निशाना साधा।

करुणा ने कहा, “उन्होंने बहुत सरकारें देखीं, लेकिन पहली बार ऐसी सरकार देखी है जिसमें एक व्यक्ति झूठ का सहारा लेकर लोगों की भावनाओं को भड़काकर प्रधानमंत्री बन गया। अपनी मां और गरीबी का प्रचार करते हुए यह बताया कि मेरी मां बरतन मांजती थी, और मैं चाय बेचकर प्रधानमंत्री बना।

महत्वाकांक्षा इतनी कि अब दस लाख का सूट पहनकर विदेश यात्राएं करने लगा। उनके दाएं और बाएं जेब में अडानी और अंबानी विराजमान हो गए। प्रधानमंत्री ने अपना खेल शुरू कर दिया है। उन्होंने अरुणाचल की सरकार बदल दी।”

उन्होंने उत्तराखंड का मामला उठाया। करुणा ने कहा, “भला हो उच्च न्यायालय का जिसने राष्ट्रपति शासन लगाने की समीक्षा की। वही पैसा यहां अंतागढ़ तक पहुंच गया। इससे कांग्रेस के विधायक की खरीद-फरोख्त की गई।”

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हाइकोर्ट ने लगाई मोदी सरकार को फटकार कहा की बड़ी पार्टी को सरकार बननर का मौका क्यों नही दिया !

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Newbuzzindia: उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के मामले पर गुरुवार को हाईकोर्ट नैनीताल में सुनवाई पूरी हो गई। अब हाईकोर्ट में फैसला लिखा जा रहा है।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई और पूछा कि उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन क्यों नहीं हटाया जा रहा है। केंद्र सरकार क्यों राष्ट्रपति शासन हटाकर बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका नहीं दे रही है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि सरकार प्राइवेट पार्टी है क्या? केंद्र सरकार हाईकोर्ट से किसी भी कीमत पर नहीं खेल सकती।

अब कुछ ही देर में आर्टिकल 356 पर फैसला आने की संभावना जताई जा रही है। गुरुवार को सुबह 11 बजे कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई और करीब 12 बजे सुनवाई पूरी हो गई। यह भी माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की राष्ट्रपति शासन को चुनौती देने वाली याचिका पर पीठ फैसला आज सुरक्षित कर सकती है।

हाईकोर्ट ने बुधवार को तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि असीमित शक्ति किसी को भी भ्रष्ट कर सकती है फिर चाहे वह राष्ट्रपति ही क्यों न हों। राष्ट्रपति के निर्णय की भी समीक्षा हो सकती है, वह कोई राजा नहीं हैं। उनके फैसले भी गलत हो सकते हैं।वहीं, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को भी इशारों में चेता दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि हमें उम्मीद है कि राष्ट्रपति शासन को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा न होने तक केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन हटाकर कोर्ट को उकसाने का काम नहीं करेगी।

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मिशन कोहेनूर : नरेंद्र मोदी ने तैयार किया मास्टर प्लान , भारत वापिस लाएंगे कोहेनूर !

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Newbuzzindia: कोहिनूर की वापसी को लेकर उठे हालिया विवाद के बीच सरकार ने साफ किया कि वह कोहिनूर की वापसी चाहती है, लेकिन ब्रिटेन के साथ आपसी संबंधों व सहमति के साथ। इतना ही नहीं, सरकार चाहती है कि संसद में इस बारे में चर्चा हो।

सरकार की योजना है कि कोहिनूर को लेकर देश की जनता के सामने जहां तस्वीर साफ हो। दूसरी ओर, वह देश को बताना चाहती है कि उससे पहले किसी सरकार ने इसे लाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।

सरकार कूटनीतिक व राजनैतिक कोशिशों के जरिए मिशन कोहिनूर पर आगे बढ़ना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, इस मिशन में खुद पीएम की दिलचस्पी है। इसके लिए वह खुद अपने तौर पर भी प्रयासरत बताए जाते हैं।

होमवर्क में जुटा मंत्रालय सरकार का संस्कृति मंत्रालय इन दिनों को कोहिनूर को लेकर होमवर्क करने में व्यस्त है। इसे लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को 6 हफ्ते का वक्त दिया है। सरकार जहां एक ओर कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करने के लिए विभिन्न स्रोतो से जानकारी जुटा रही है।

वही, यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसे लेकर भारत सरकार की ओर से पिछला प्रयास कब-कब हुआ था और तत्कालीन सरकार का क्या रुख था।

बताया जा रहा है कि सरकार की दलील उस कानून पर आधारित होगी, जिसमें किसी नाबालिग द्वारा किसी को उपहार देने का अधिकार नहीं है। सरकार आजादी से पहले वाले और मौजूदा ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट के तहत आने वाले गिफ्ट डीड को आधार बनाने की योजना बना रही है।

अपने हलफनामे में सरकार यह दिखाने की कोशिश करेगी कि राजा दिलीप सिंह से यह कोहिनूर हीरा अंग्रेजों के पास गया तो उस वक्त वह नाबालिग थे। इसलिए अगर उन्होंने हीरा स्वेच्छा से दिया या उन पर दबाव डाल कर लिया गया हो, लेकिन उनके पास कानूनी तौर पर इसका अधिकार नहीं था।

कांग्रेस को घेरेगी बीजेपी

बीजेपी सरकार इस मामले में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में है। उसकी कोशिश है कि वह देश के सामने यह बात रख सके कि पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर में कांग्रेस की बहुमत वाली सरकार होने के बावजूद कभी भारत की ओर से कोहिनूर की वापसी को लेकर कोई गंभीर कोशिश नहीं हुई।

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भाजपा विधायक द्वारा पीटे गए शक्तिमान ने कहा दुनिया को अलविदा !

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Newbuzzindia: भारतीय जनता पार्टी के विधायक गणेश जोशी द्वारा घायल किए गए घोड़े शक्तिमान की आज मौत हो गई। उत्तराखंड के भाजपा विधायक गणेश जोशी तथा पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान शक्तिमान को बुरी तरह घायल कर दिया था।

इस प्रदर्शन के दौरान शक्तिमान की टांग में गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद उसको काटना पड़ा था।

शक्तिमान की मौत के बाद भाजपा का कहना है कि सरकार ने इस मामले में लापरवाही दिखाई तथा घोड़े का सही से इलाज नहीं किया। भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार अगर  सही से इलाज करती तो शक्तिमान का जीवन बचाया जा सकता था।

बता दें शक्तिमान एक सरकारी पुलिसकर्मी की ही भांति उत्तराखंड पुलिस में तैनात था और एक जवान की तरह मेहनत और सैलरी पाता था।

इस पूरे मामले पर आरोपी भाजपा विधायक गणेश जोशी का कहना था कि मेरे ऊपर लगे सभी आरोप बेबुनियाद हैं, प्रदर्शन के दौरान घोड़े ने एक कार्यकर्ता को धक्का मार दिया था जिसके बाद मैंने डंडे से उसे हमला करने से रोका था, मारा नहीं था।

उन्होंने कहा कि बाद में मैंने देखा कि सड़क किनारे लगे लोहे के एंगल में घोड़े का पैर फंस गया था जिसके बाद उसे चोट आई थी।

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महाराष्ट्र नगर पंचायत चुनाव : कांग्रेस को सबसे ज्यादा 21 सीट वहीं भाजपा को सिर्फ 5 सीट !

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NewBuzzIndia:महाराष्ट्र के नगर पंचायत चुनाव में भाजपा को करारा झटका लगा है। छह नगर पंचायतों में सत्ताधारी पार्टी महज पांच सीट जीत सकी है। कांग्रेस ने 21 सीटों पर कब्जा किया है, जबकि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के खाते में 20-20 सीटें आई हैं।

इन निकायों की 102 सीटों पर रविवार को मतदान हुआ था। मंगलवार को जब परिणाम सामने आए तो कांग्रेस को बड़ी राहत मिलती दिखी। इनमें तटीय कोंकण की कुदाल नगर पंचायत का चुनाव काफी अहम है। यह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नारायण राणे का गढ़ है।

राणे 2014 विधानसभा चुनाव में हार गए थे। इस बार उन्होंने पार्टी को अपनी अगुवाई में 17 में से नौ सीटें जीताकर खोई साख हासिल कर ली है। यहां भाजपा को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा।

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बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने की राजीव गांधी की तारीफ , बोले राजीव गांधी फिरसे बनते प्रधानमंत्री तो बन जाता राम मंदिर !

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Newbuzzindia: नेहरू-गांधी परिवार के घोर आलोचक भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अयोध्या विवाद के समाधान के लिए प्रयासों के लिए दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सराहना की और कहा कि कांग्रेस नेता अगर दोबारा प्रधानमंत्री निर्वाचित होते तो राम मंदिर का निर्माण हो गया होता।

उन्होंने यहां ‘अयोध्या में श्रीराम मंदिर क्यों और कैसे’ विषय पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए रविवार को कहा, ‘मैं राजीव गांधी को बहुत अच्छी तरह जानता था। अगर वह दोबारा प्रधानमंत्री बनते तो उन्होंने उसी स्थान पर (जहां विवादास्पद बाबरी मस्जिद था) राम मंदिर का निर्माण करा दिया होता।’

उन्होंने कहा, ‘उन्होंने राम मंदिर (बाबरी मस्जिद) का ताला खुलवा दिया था और राम मंदिर के लिए शिलान्यास कार्यक्रम की अनुमति दे दी थी।’ भाजपा नेता ने कहा कि राजीव गांधी ने ‘रामराज्य की अवधारणा को लागू करना’ शुरू किया था लेकिन उनके असामयिक निधन से चीजें बदल गईं।

स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी को अदालत में घसीटा है। स्वामी ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय में रोजाना आधार पर बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई किए जाने के लिए आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

स्वामी ने दावा किया कि उन्होंने मामले में शामिल मुस्लिम नेताओं से प्रस्ताव पर चर्चा की थी और सिद्धांत रूप में वो सहमत भी हो गए थे। हालांकि, जब अदालत में प्रस्ताव का समर्थन करने की बारी आई तो वो ‘चुप’ रह गए।

भाजपा नेता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का आखिरी फैसला अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ करेगा। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य मौजूदा साल के आखिर में शुरू हो सकता है।

यह पूछे जाने पर कि देश को स्कूल, अस्पताल, सड़क और शौचालयों की अधिक आवश्यकता है या राम मंदिर की तो उन्होंने कहा, ‘यह (विकास) सरकार का काम है और सरकार सही तरीके से काम कर रही है। सरकार उसका खयाल रखेगी। मुझे मेरा काम (मंदिर निर्माण के लिए प्रयास का काम) करने दें।’

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