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केंद्र सरकार ने की अपनी हद पार , हलफनामा देते हुए सुप्रीम कोर्ट को अपने दायरे में रहने की नसीहत दी

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में टीकाकरण नीति का बचाव करते हुए कहा कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप ना करें।

दरअसल टीकाकरण नीति और कोरोना से निपटने की तैयारी को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना बचाव किया है। रविवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दायर करते हुए कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की जगह नहीं है। 

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में लिखा कि वैश्विक महामारी के संदर्भ में न्यायिक हस्तक्षेप की बहुत कम जरूरत है। आगे केंद्र ने लिखा कि 18-44 साल के लोगों को वैक्सीन लगाने की मंजूरी सिर्फ इसलिए दी गई है क्योंकि राज्य उसकी मांग कर रहे थे।

बता दे कि केंद्र सरकार ने अपने व्यापक टीकाकरण अभियान के लिए वैक्सीन के बड़े-बड़े ऑर्डर दिए है। और इसलिए इसका सीधा असर कीमत पर पड़ रहा है। हालांकि केंद्र ने यह भी कहा कि इससे जनता की जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि सभी राज्यों ने मुफ्त में वैक्सीन देने का एलान कर दिया है।

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि उसे वैक्सीन की कीमत इसलिए कम देनी पड़ रही है क्योंकि केंद्र ने बड़ी संख्या में टीके का ऑर्डर दिया है।

भारत के संगीतकार उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान अब इस दुनिया मे नही रहे

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भारतीय शास्त्रीय संगीतकार उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान का आज निधन हो गया । उनकी बहू नम्रता गुप्ता खान ने यह दुखद जानकारी साझा की है। उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान का जन्म 3 मार्च 1931 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था। वह रामपुर सहसवान घराने से ताल्लुक रखते थे । संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया था। वह महान दिग्गज सिंगर सोनू निगम के गुरु थे।

उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान के निधन पर लता मंगेशकर ने दुख जताया और उन्होंने ट्वीट कर लिखा मुझे अभी यह दुखद खबर मिली है कि महान शास्त्रीय गायक उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान साहब इस दुनिया में नहीं रहे । यह सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ वह गायक तो अच्छे थे ही पर इंसान भी बहुत अच्छे थे। उन्होंने आगे लिखा मेरी भांजी ने भी खान साहब से संगीत सीखा है, मैंने भी उनसे थोड़ा संगीत सीखा था। उनके जाने से संगीत की बहुत हानि हुई है। मैं उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि- उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान के चले जाने से हमारे सांस्कृतिक संसार को क्षति पहुंची है। वे संगीत की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कलाकार थे। उनकी कला काफी विविध थी जिसने दुनियाभर के लोगों को प्रेरित किया और वे कई पीढ़ियों के प्रिय बन। मेरे जेहन में उनसे मुलाकात की सुखद यादें ताजा हैं। उनके परिवार और करीबियों के प्रति मेरी संवेदनाएं।

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया-उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान भारतीय शास्त्रीय संगीत के लेजेंड थे। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे 2018 में उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित करने का मौका मिला। उनके जाने से संगीत की दुनिया ने न सिर्फ अपना अगुआ खो दिया बल्कि नई पीढ़ी ने मेन्टॉर भी खोया है। उनके परिजनों, दोस्तों और शिष्यों के प्रति मैं अपनी संवेदना प्रकट करता हूं।

भारत-अमेरिका हिन्दी मैत्री सम्मेलन रविवार को

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इंदौर। हिन्दी भाषा के अंतरराष्ट्रीय प्रचार और अमेरिका में हिन्दी की स्थिति और चुनौतियाँ सहित हिन्दी के मार्ग से भारत-अमेरिका में कैसे बढ़ेगी मैत्री जैसे गंभीर विषयों पर मातृभाषा उन्नयन संस्थान एवं अमेरिका की हिन्दी प्रचार संस्था हिन्दी यूएसए मिलकर वर्चुअल विमर्श रविवार शाम को आयोजित कर रहे हैं।

इस आयोजन मे हिन्दी यूएसए के संस्थापक देवेंद्र सिंह, आकाशवाणी दिल्ली के पूर्व उपमहानिर्देशक लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ एवं हिन्दी यूएसए के स्वयंसेवक सुशील अग्रवाल बतौर वक्ता सम्मिलित होंगे तथा इस विमर्श का संचालन संस्थान के राष्ट्रीय सचिव गणतंत्र ओजस्वी करेंगे।

इस विमर्श का मुख्य उद्देश्य हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार करना और भारत और अमेरिकी व्यापारिक संवर्धन में हिन्दी की भूमिका के बारे में दोनों देशों की जनता को जागृत करना हैं।मातृभाषा उन्नयन संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने बताया कि ‘संस्थान का प्रयास है कि हिन्दी का दायरा सम्पूर्ण विश्व में फैले और लोग हिन्दी के महत्त्व को समझते हुए इसे अपनाएँ।’हिन्दी मैत्री सम्मेलन में अमेरिका और भारत से सैंकड़ो श्रोता जुड़ेंगे। इसका लाइव प्रसारण यूट्यूब आदि माध्यमों पर भी होगा।

Akshay Venkatesh, Australian-Indian, wins Fields Medal

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New-Delhi born Akshay Venkatesh is one of the four winners of this years Fields Medal. This prestigious medal is awarded once in every four years to the most promising mathematicians under the age of 40. The prize was inaugurated in 1932 due to the request of Canadian mathematician John Charles Fields, who ran the 1924 Mathematics Congress in Toronto. Each winner receives a 15,000 Canadian-dollar cash prize. At least two, and preferably four people, are always honored in the award ceremony.

Who is Akshay Venkatesh?

Akshay was a child prodigy. He was born in New Delhi but moved to Perth with his parents when he was 2. He participated in physics and maths Olympiad and won medals in the two subjects at ages 11 and 12, respectively.

At 13, became the youngest person to study at the University of Western Australia. He went straight into second-year maths courses after he proved he could write the exam papers for all the first-year subjects. He earned first-class honors in pure mathematics aged 16 – again the youngest to do so – before studying at Princeton.

In 2002, he earned his PhD at the age of 20. Since then, he has gone from holding a post-doctoral position at MIT to becoming a Clay Research Fellow and, now a professor at Stanford University.

Venkatesh has worked at the highest level in number theory, arithmetic geometry, topology, automorphic forms and ergodic theory.

His research has been recognized with many awards, including the Ostrowski Prize, the Infosys Prize, the Salem Prize and Sastra Ramanujan Prize.