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कर्णाटक: कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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कर्नाटक के बागी विधायकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। आज हुई सुनवाई में कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर द्वारा विधायकों की अयोग्यता के फैसले को सही ठहराया लेकिन कांग्रेस और जेडीएस के 17 अयोग्य विधायकों को राहत देते हुए उन्हें उपचुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्य विधायकों की याचिका पर 25 अक्टूबर को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन विधायकों को विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष के आर रमेश कुमार ने अयोग्य घोषित कर दिया था। न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ ने इन विधायकों की याचिकाओं पर 25 अक्टूबर को सुनवाई पूरी की थी।

5 दिसंबर को होगे उपचुनाव

इन विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने की वजह से 17 में से 15 सीटों के लिए पांच दिसंबर को उपचुनाव हो रहे हैं। अयोग्य विधायकों ने अपनी याचिका में 5 दिसंबर को होने वाले उपचुनाव पर रोक लगाने की मांग भी की थी। विधायकों का कहना था कि उपचुनाव तब तक नहीं होने चाहिए जब तक कि उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला न आ जाए।

उपचुनाव न कराने के लिए दायर की थी याचिका

उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 18 नवंबर है। इन विधायकों ने शीर्ष अदालत में एक आवेदन दायर कर 15 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव की तारीख स्थगित करने का निर्वाचन आयोग को निर्देश देने का अनुरोध किया था। इन विधायकों का कहना था कि उनकी याचिकाओं पर कोर्ट का निर्णय आने तक निर्वाचन आयोग को इन सीटों पर चुनाव नहीं कराने चाहिए। अयोग्य घोषित विधायकों की दलील थी कि सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना उनका अधिकार है। अध्यक्ष का निर्णय दुर्भावनापूर्ण है और इससे प्रतिशोध झलकता है। इन विधायकों में से अनेक ने सदन की सदस्यता से इस्तीफा देते हुए अध्यक्ष को पत्र लिखे थे।

तत्कालीन स्पीकर रमेश कुमार ने ठहराया था अयोग्य

बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने विधान सभा में एचडी कुमारस्वामी सरकार के विश्वास प्रस्ताव से पहले ही 17 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। वहीं विधानसभा में विश्वास मत्र प्राप्त करने मे विफल रहने पर कुमारस्वामी की सरकार ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, बीजेपी के बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व में राज्य में नई सरकार का गठन हुआ।

कर्नाटक विधानसभा का गणित

कर्नाटक विधानसभा में इस समय बीजेपी के पास 105 विधायक हैं जबकि एक निर्दलीय विधायक ने समर्थन दिया है। वहीं विपक्ष (कांग्रेस+जेडीएस+बीएसपी) के पास कुल 101 सीटें हैं। इसमें कांग्रेस के पास 66, जेडीएस के पास 34 और बीएसपी के पास 1 सीट है। इन 17 विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव से पहले पाला बदलते हुए इस्तीफा दे दिया था जिसकी वजह से तत्कालीन स्पीकर आर रमेश कुमार ने इन्हें अयोग्य ठहरा दिया था। इस वजह से सदन में सदस्यों की संख्या घटकर 211 रह गई थी और मैजिक नंबर 106 हो गया था। इस आधार पर बीजेपी कर्नाटक में सरकार बनाने में सफल रही थी। कर्नाटक की फिलहाल जो 17 सीटें खाली हैं उनसे 15 सीटों पर 5 दिसंबर को उपचुनाव होने हैं।

सरकार को अस्थिर करना भाजपा की आदत बन गई है: सिद्धारमैया

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former chief minister of karnataka siddaramaiah
Image of former chief minister of karnataka siddaramaiah, tweeted by @ani

कर्नाटक का सियासी संग्राम लाइव, जानें पल पल की अपडेट

कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के 15 विधायकों के इस्तीफे के बाद शुरु हुई सियासी लडाई आज भी जारी है। इस्तीफा दे चुके ज्यादातर विधायक मुंबई जाकर होटल में रुके हुए है। कांग्रेस भाजपा पर विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप लगा रही है तो वही भाजपा इस मामले में अपना हाथ होने के इंकार कर रही है। कांग्रस ने आज सर्कुलर जारी करते हुए सभी विधायकों को विधायक दल की बैठक में पहुंचने को कहा है। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस्तीफा देने वाले कुछ विधायक आज वापिस आ सकते है।

कर्नाटक की इस सियासी लड़ाई की पल-पल की अपडेट से जुड़े रहने के लिए पढ़ते रहें हमारा यह लाइव ब्लाग

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और बीके हरिप्रसाद आज बेंगलुरु जाएंगे।

हमने राज्य में विकास नहीं होने के कारण विधायक पद से इस्तीफा दिया है। कर्नाटक सीएम विधायकों को बताए बिना विदेश यात्रा पर चले जाते है, राज्य में कोई काम नहीं हुआ। हम यहां 2 दिन रुकेंगे और फिर लौटेंगे।

जेडीएस नेता नारायण गौड़ा, मुंबई में

कुल 10 विधायकों (कांग्रेस-जेडीएस) ने स्पीकर और कर्नाटक के राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हम अभी भी कांग्रेस पार्टी में हैं लेकिन हमने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। हमें किसी मंत्री पद की उम्मीद नहीं है।

मुंबई में कांग्रेस नेता एसटी सोमशेखर

​​सरकार को अस्थिर करना भाजपा की आदत रही है। यह अलोकतांत्रिक है, लोगों ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए जनादेश नहीं दिया। लोगों ने हमें ज्यादा वोट दिए हैं। जेडी (एस) और कांग्रेस दोनों को एक साथ 57% से अधिक वोट मिले है।

सिद्धारमैया, कांग्रेस

इस बार न केवल बीजेपी की राज्य शाखा बल्कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता भी शामिल हैं। उनके निर्देश पर सरकार को अस्थिर करने के प्रयास किए गए हैं। यह लोकतंत्र और लोगों के जनादेश के खिलाफ है। वे पैसे और पद की पेशकश कर रहे हैं।

सिद्धारमैया, कांग्रेस

उन्होंने बीजेपी के साथ सांठगांठ की, मैंने उनसे वापस आने और अपना इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया है। हमने उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए स्पीकर के समक्ष याचिका दायर करने और इस्तीफा स्वीकार नहीं करने का अनुरोध करने का फैसला किया है।

सिद्धारमैया, कांग्रेस

हम अध्यक्ष से भी दलबदल विरोधी कानून के तहत कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध कर रहे हैं। हम अपने पत्र में उनसे अनुरोध कर रहे हैं कि वे न केवल उन्हें अयोग्य घोषित करें बल्कि उन्हें 6 साल के लिए चुनाव लड़ने से भी रोकें।

सिद्धारमैया, कांग्रेस

वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम से मेरा कोई संबंध नही है। मैं संविधान के अनुसार काम कर रहा हूं। अब तक किसी भी विधायक ने मुझसे मिलने का समय नही माँगा है। अगर कोई मुझसे मिलना चाहता है, तो मैं अपने कार्यालय में उपलब्ध रहूंगा।

कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष, के आर रमेश कुमार

​​गृहमंत्री राजनाथ सिंह कह रहे हैं कि ‘हम कहीं परेशान नहीं हैं, हमें सरकार गिराने में कोई दिलचस्पी नहीं है, हम इस बारे में नहीं जानते हैं’। बीएस येदियुरप्पा भी यही कह रहे हैं, लेकिन वह अपने पीए को हमारे सभी मंत्रियों को लेने के लिए भेज रहे हैं।

डीके शिवकुमार, कांग्रेस

अपनी विफलता के लिए किसी पर भी आरोप लगाना कांग्रेस का स्वभाव बन गया है। उनके विधायकों ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और उसी के अनुसार निर्णय लेंगे।

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी

बेंगलुरु में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कब्बन पार्क से राजभवन तक मार्च निकाला।

विधायकों के इस्तीफे स्वीकारने से जुड़े प्रश्न पर बोले विधानसभा अध्यक्ष, ” इस मामले में कुछ नियम हैं,उन के अनुसार फैसला लिया जाएगा। मुझे जिम्मेदारी के साछ फैसला लेना होगा। इस मामले में किसी समय-सीमा का उल्लेख नहीं किया गया है।

कर्नाटक में बड़ी कांग्रेस-जेडीएस सरकार की मुश्किलें, लगभग 8 विधायकों ने दिया इस्तीफ़ा

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Image of congress president rahul gandhi and cm of karnataka hd kumaraswamy

कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही. आज के ताजा राजनैतिक घटनाक्रम में कांग्रेस और जेडीएस के लगभग 8 विधायकों ने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर विधानसभा अध्यक्ष ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया, तो जेडीएस – कांग्रेस की सभा में संख्या 111 हो जाएगी। वहीं भाजपा के पास इस समय सदन में 105 विधायक हैं।

इन विधायकों ने दिया है इस्तीफ़ा

मीडिया मीडिया चल रही रिपोर्ट्स के अनुसार इस्तीफ़ा देने वालों में कांग्रेस विधायक रमेश जारकीहोली, बीसी पाटिल, महेश कुमटल्ली, प्रथापसौदा पाटिल, शिवराम हेब्बार, सुब्बा रेड्डी शामिल है वहीं जेडीएस विधायकों में एच विश्वनाथ, नारायण गौड़ा और के गोपालैया का नाम सामने आ रहा हैं।

कांग्रेस विधायकों का एक अन्य दल जिसमें रामलिंग रेड्डी, सौम्या रेड्डी, एन मुनिरत्ना, एसटी सोमशेखर और बैराठी बसवराज शामिल है, ने भी विधानसभा स्पीकर से मुलाकात की। हालांकि, दोनों दलों ने बार-बार कहा है कि गठबंधन को कोई खतरा नहीं है और सरकार अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेगी।

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद छाए खतरे के बादल

हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में, कांग्रेस और जेडीएस ने कर्णाटक में सत्ता दल होने के बावजूद बेहद ही ख़राब प्रदर्शन किया। वहीं भाजपा ने लोकसभा की 28 में 25 सीटें जीतने में कामयाबी मिली थी। जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे की भाजपा जल्द ही कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को तोड़कर राज्य की सत्ता पाने की कोशिश करेगी।