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मुख्यमंत्री योगी के टीम में काम करने वाले युवक ने की आत्महत्या,माखनलाल विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा को बताया मौत का जिम्मेदार

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोशल मीडिया टीम में काम करने वाले एक युवक ने ने फांसी लगा कर आत्महत्या करली। युवक का नाम पार्थ श्रीवास्तव है। पार्थ ने एक सुसाइड नोट छोड़ा है और अपनी मौत का जिम्मेदार शैलजा श्रीवास्तव और पुष्पेंद्र सिंह को बताया है।

बता दे कि मौत से पहले पार्थ श्रीवास्तव ने सुसाइड नोट ट्विटर पर अपलोड कर मुख्यमंत्री को टैग करते हुए अपनी कंपनी की गुटबाजी और राजनीति के बारे में बताया है। सुसाइड नोट में लिखा है कि मेरी आत्महत्या एक कत्ल है जिसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ राजनीति करने वाली शैलजा श्रीवास्तव और उनका साथ देने वाले पुष्पेंद्र सिंह है। शैलजा श्रीवास्तव माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग की पूर्व छात्रा रह चुकी है।

दरअसल पार्थ ने अपने सुसाइड नोट में अपनी कंपनी के तीन-चार लोगों के नामों का जिक्र किया है। कंपनी में अपने साथ काम करने वाली शैलजा श्रीवास्तव और पुष्पेंद्र सिंह को अपनी मौत का जिम्मेदार ठैराय है। हालांकि यह सुसाइड नोट कुछ समय बाद पार्थ के सोशल मीडिया एकाउंट से गायब हो गया। यह सबकुछ उसकी मौत के बाद हुआ।

माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त संस्था का प्रमुख निकला रेमडेसिवर इंजेक्शन रैकेट का सरगना

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मध्य प्रदेश में रेमडेसिविर की कालाबाजारी रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। MCRPV भोपाल से संबंधित संस्था के संचालक को STF ने ग्वालियर से तब गिरफ्तार किया जब वह इंजेक्शन की डिलिवरी देने ग्वालियर पहुँचा था।

प्रदेश के सिवनी जिले का रहने वाला सरकारी PG कॉलेज के सामने जीनियस कंप्यूटर कॉलेज जो कि (भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से संबंध संस्था है) के संचालक कमलेश्वर प्रसाद दीक्षित को रेमडिसिवर की कालाबाजारी करते ग्वालियर STF ने रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। दीक्षित सोशल मिडिया के जरिये करता था इसका पर्दाफाश STF ग्वालियर इकाई ने किया है।

इस व्यक्ति ने बांग्लादेश से इंदौर तक का नेटवर्क बनाया और उसके जरिये 30,000 रु का एक रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने के उद्देश्य से 5 रेमडिसिवर लेकर ग्वालियर पहुँचा। लेकिन वहीं जाल बिछाकर मरीज का भाई बनकर ग्वालियर STF ने इसको रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

बता दें कि कमलेश्वर प्रसाद का नाम इससे पहले भी विवादित रहा है। जानकारी के अनुसार इसके द्वारा पूर्व में भी माखनलाल यूनिवर्सिटी की मान्यता लेने के लिए धोखा देकर प्रधानमंत्री कौशल भवन दिखा कर फर्जी मान्यता लेने की कोशिश की थी। उसके बाद विश्वविद्यालय की टीम द्वारा पकड़ा गया और मान्यता नही दी गई थी।

लेकिन उसके विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ एक अधिकारी जो ग्वालियर के रहने वाले थे और अब दिवंगत हो गए हैं उनके इस दीक्षित के ससुराल पक्ष से अच्छे संबंध थे जिसके कारण इसे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल का कंप्यूटर इंस्टीट्यूट मिल गया था।

विधायक का चुनाव भी लड़ चुका है आरोपी

आरोपी कमलेश्वर प्रसाद दीक्षित अत्यंत महत्वाकांक्षा से ग्रस्त व्यक्ति भी रहा है कभी उसने विधायक बनने के अरमान भी पाले थे। लेकिन कामयाब नही हो पाया था। उसने 2018 में सपाक्स के टिकट पर सिवनी से चुनाव भी लड़ा था जिसमे 832 वोट मिले थे।

फिर ‘आपदा को अवसर’ में बदलने लगा

आरोपी MCU से सम्बंधित सेंटर का मालिक है लेकिन उस समय कोरोना कर्फ्यू के कारण जब सब चीजें बन्द हैं तो उसने इस समय कमाई के लिए रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने की सोची और करने लगा। यह इतना शातिर बदमाश था कि बहुत सोच समझकर इंजेक्शन डिलेवरी करता था लेकिन STF द्वारा बुने जाल में वह फंस गया और अब जेल में है।