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कोर्ट में 97 वकील लगाने के बाद राजनीति में अकेले पड़े अकबर, दिया इस्तीफा

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यौनशोषण के आरोप में घिरे केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री एम.जे.अकबर ने पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि अकबर पर 20 महिलाओं ने अनुचित व्यवहार/यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसे पहले रविवार को विदेश दौरे से लौटने के बाद एम. जे. अकबर ने दलीलें देते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया था।

प्रिया रमानी का सबसे पहला आरोप

एम. जे. अकबर पर आरोपों के लिस्ट में सबसे पहला आरोप प्रिया रमानी ने लगाया था। प्रिया के बाद आरोप लगाने वाली पत्रकारों में फोर्स पत्रिका की कार्यकारी संपादक गजाला वहाब, अमेरिकी पत्रकार मजली डे पय कैंप और इंग्लैंड की पत्रकार रूथ डेविड शामिल हैं।

अकबर का कैरियर

एम. जे. अकबर 1989 में राजनीति में आने से पहले मीडिया में एक बड़े हस्ती के रूप में जाने जाते थे। अकबर दैनिक अखबार ‘द टेलीग्राफ’ और पत्रिका ‘संडे’ के संस्थापक संपादक रह चुके हैं। राजनीति की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की उसके बाद साल 2014 में भाजपा में शामिल हो गए । वहीं मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य अकबर जुलाई 2016 से विदेश राज्य मंत्री के पद पर कार्यरत थे।

अकबर का स्टेटमेंट

वहीं अकबर ने इस्तीफे के बाद कहा कि, ‘मैं आरोपों से निजी तौर पर लड़ता रहूंगा। न्याय के लिए व्यक्तिगत लड़ता रहूंगा। इस्तीफा देना उचित समझा इसलिए इस्तीफा दिया।’ गौरतलब है कि #metoo कैम्पेन के तहत उनपर आरोप लगने शुरू हो गए थे।

#MeToo:एमजे अकबर ने प्रिया रमानी पर किया का केस,नहीं देंगे इस्तीफ़ा,लड़ेंगे क़ानूनी लड़ाई

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वरिष्ठ पत्रकार और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ क्रिमिनल डिफमेशन केस कर दिया है। अकबर ने यह केस दिल्ली के पटियाला कोर्ट में किया है। प्रिया रमानी पहली महिला पत्रकार थीं जिन्होंने सबसे पहले अकबर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी।

पत्रकार सुपर्णा शर्मा अकबर के इस्तीफा न देने के फैसले से निराश

यौन शोषण के आरोपों से घिरे विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर के अपने इस्तीफा से इनकार करने के बाद उनपर आरोप लगाने वाली 5 महिला पत्रकारों ने कहा कि वो अब भी अपने आरोपों पर कायम हैं। इनमें से 2 ने कहा कि अकबर के इस्तीफा नहीं देने के फैसले से वो मायूस हैं मगर उन्हें इससे कोई आश्चर्य नहीं हुआ।

द एशियन एज की रेसीडेंट एडिटर सुपर्णा शर्मा ने कहा, ‘मैं अपने साथ हुई दो घटनाओं की गवाह हूं- पहले में उन्होंने (एमजे अकबर) ने मेरी ब्रा की स्ट्रैप पकड़ी थी और दूसरे में जब वो मेरे ब्रेस्ट को लगातार घूर रहे थे। मैं इस बात की भी गवाह हूं कि उन्होंने दफ्तर में काम करने वाली अन्य सहकर्मी महिलाओं के साथ भी ऐसा कुछ ही किया। मैं अकबर के इस्तीफा नहीं देने के फैसले से निराश हूं मगर मुझे आश्चर्य नहीं है। यह एक लंबी चलने वाली लड़ाई है। इस मामले में अगला कदम कानूनी होगा।’

#MeToo पर राहुल गाँधी ने कहा महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आना सीखना चाहिए

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कांग्रेेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शारीरिक उत्पीड़न पर अपनी बात कहने वाले महिलाओं के विश्व व्यापी अभियान “मी टू्” का समर्थन करते हुए कहा है कि अब समय आ गया है कि हर किसी को महिलाओं के साथ सम्मान के पेश आने की बात सीखनी है। श्री गांधी ने शुक्रवार को एक ट्वीट कर कहा“मुझे इस बात की खुशी है कि जिन महिलाओं को अपनी बात कहने का कोई मौका नहीं मिल रहा था अथवा मीडिया में उन्हें जगह नहीं मिल रही थी , अब यह अंतर कम हो रहा है। परिवर्तन लाने के लिए सच को जोर से तथा स्पष्टता से सुना जाना चाहिए।”

मी टू के तहत एमजे अकबर पर लगे आरोप

गौरतलब है कि विदेशों में महिलाओं ने इस अभियान के जरिए अपने साथ हुए शारीरिक उत्पीड़न की बातें खुलकर की है अौर यह लहर भारत में भी आ गई है जहां अनेक महिलाओं ने अपने साथ हुई शारीरिक ज्यादतियों को उजागर किया है। देश में अनेक महिलाओं ने इस मुहिम का हिस्सा बनकर अपनी अापबीती जाहिर की और इसकी चपेट में विदेश राज्य मंत्री और पूर्व संपादक एमजे अकबर भी आए हैं जिन पर कईं महिला पत्रकारों ने आपत्तिजनक हरकतें करने का आरोप लगाया है ।

एक महिला पत्रकार ने ट्वीट कर विदेश राज्य मंत्री और पूर्व संपादक एमजे अकबर पर आरोप लगाते हुुए कहा कि अकबर जब संपादक थे तब होटल रूम में इंटरव्यू के दौरान कई महिला पत्रकारों के साथ आपत्तिजनक हरकतें कर चुके हैं।