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क्या नरसिंहपुर में आमने-सामने होंगे पचौरी-विवेक तन्खा

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पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का प्रभाव क्षेत्र माने जाने वाले नरसिंहपुर जिले में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य एवं सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा का दखल बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। तन्खा की पहल पर ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने रविवार को जबलपुर एवं नरसिंहपुर जिले के टिकट के दावेदार नेताओं को बुलाकर चर्चा की है। यह माना जा रहा है कि कांग्रेस नरसिंहपुर सीट से तन्खा को विधानसभा का चुनाव लड़ा सकती है। तन्खा ने इस बात से इंकार किया है कि उनके पुत्र विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

तन्खा ने लड़ा था जबलपुर से लोकसभा का चुनाव

सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा ने लोकसभा का पिछला चुनाव जबलपुर से लड़ा था। वे भारतीय जनता पार्टी के राकेश सिंह के खिलाफ चुनाव हार गए थे। राकेश सिंह वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस में बने नए राजनीतिक समीकरणों में विवेक तन्खा ताकतवर रूप में उभरकर सामने आए हैं। माना यह जाता है कि कमलनाथ,ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह को एक करने में विवेक तन्खा की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। विवेक तन्खा, कमलनाथ के ज्यादा करीबी माने जाते हैं।

कमलनाथ करीबियों में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी माने जाते हैं। सुरेश पचौरी की सलाह पर ही कमलनाथ ने शोभा ओझा को मीडिया विभाग का अध्यक्ष और राजीव सिंह को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रशासन और संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। सुरेश पचौरी के नरसिंहपुर-होशंगाबाद संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं हमेशा ही रहतीं हैं। सुरेश पचौरी नरसिंहपुर और होशंगाबाद की राजनीति में लगातार दिलचस्पी भी दिखाते हैं।

नरसिंहपुर के किसान आंदोलन में भी सुरेश पचौरी ने मुख्यमंत्री के समक्ष किसानों की मांगे रखीं थीं। ऐसे में नरसिंहपुर जिले में टिकट के दावेदारों को विवेक तन्खा के जरिए चर्चा के लिए कमलनाथ द्वारा बुलाया जाना नए राजनीतिक समीकरणों के बनने का संकेत दे रहा है।

रहते हैं इंदौर में और टिकट के लिए नज़र दूसरे जिलों की सीट पर

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मालवा एवं निमाड की लगभग आधा दर्जन विधानसभा सीटें ऐसी हैं जिन पर टिकट के लिए इंदौर में रहने वाले नेताओं की नजर रहती है। नेता भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों के हैं। जिन सीटों पर इंदौरी नेताओं की नजर रहती हैं वे सोनकच्छ,अलोट,बडवाह,महेश्वर,भोजपुर हैं। कांग्रेस में सोनकच्छ से टिकट के दावेदार पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा हैं। वर्मा इस सीट से लगातार चुनाव लड़ते रहे हैं। उनका घर और स्थायी पता इंदौर का है।

सोनकच्छ अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित सीट है। वर्मा देवास-शाजापुर की लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं। सोनकच्छ से विधायक राजेन्द्र वर्मा भी इंदौर में ही रहते हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। इंदौर में ही रहने वाले नगर निगम के पूर्व महापौर एवं मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष कृष्ण मुरारी मोघे खरगोन जिले की बडवाह सीट से टिकट मांग रहे हैं। मोघे खरगोन से सांसद रह चुके हैं।

इंदौर में ही रहने वाले कांग्रेस नेता एवं पूर्ण सांसद प्रेमचंद्र गुड्डू आलोट से टिकट मांग रहे हैं। आलोट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित सीट है। गुड्डू पहले भी यहां से विधायक रह चुके हैं। महेश्वर के भाजपा विधायक रमेश मेव भी इंदौर में रहते हैँ। महेश्वर भी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट है।

मालवा-निमाड़ की इन आरक्षित सीटों पर बाहरी व्यक्तियों के उम्मीदवार बनाए जाने के पीछे पार्टियों की अपनी मजबूरी है। इन क्षेत्रों में स्थानीय नेतृत्व का अभाव बड़ी समस्या है। इंदौर में ही रहने वाले शिवराज सिंह चौहान के संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा रायसेन जिले के भोजपुर से चुनाव लड़ते हैं।