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मध्यप्रदेश को डब्ल्यूएचओ की तरफ से मिले 100 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर

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मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। डब्ल्यूएचओ ने प्रदेश को 100 ऑक्सीजिन कन्संट्रेटर दिए है। भोपाल पहुंचे कॉन्संट्रेटर्स को प्रदेश के अलग अलग अस्पतालों में भेजा जाएगा।

बता दे कि इस मौके पर मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सरकार कोविड को नियंत्रण करने की लगातार कोशिश कर रही है। यहां लगभग 600 ब्लैक फंगस के मामले सामने आए है। इसलिए ब्लैक फंगस के मरीजों को मुफ्त इलाज दिलाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि आज दिनभर मेडिकल कॉलेज के डीन्स और एक्सस्पर्ट से चर्चा होगी। कोरोना पॉजिटिव और पोस्ट कोविड मरीजों की निशुल्क नेजल एंडोस्कोपी होगी।

भोपाल में ऑक्सीजन सिलेंडर का दाम किया तय

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मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए सुखद खबर है। अब ऑक्सीजन सिलेण्डर के लिए लोगों को मनमाने पैसे नहीं देने पड़ेंगे। इसके लिए भोपाल कलेक्टर ने दाम तय कर दिए है। दिए गए आदेश के मुताबिक अब ज्यादा पैसे लेने वालों पर कालाबाजारी की धारा के तहत की जाएगी कार्रवाई।

दरअसल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने भोपाल में ऑक्सीजन सिलेंडर के मूल्य को निर्धारित कर दिया है। उससे अधिक राशि लेने पर कालाबाजारी करने की धारा में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऑक्सीजन सिलेंडर के विक्रय मूल्यों में एकरूपता रखने के लिए मूल्य निर्धारित किये गए है।

7 क्यूबिक मीटर सिलेंडर वितरक और निर्माता रेट (जीएसटी सहित) 360 रुपए और सब वितरक रेट/अस्पताल तक रेट(परिवहन एवं जीएसटी सहित) 500 रुपए निर्धारित किया है।

10 क्यूबिक मीटर सिलेण्डर वितरक और निर्माता रेट (जीएसटी सहित) 510 रुपए, सब वितरक रेट/अस्पताल तक रेट (परिवहन एवं जीएसटी सहित) 650 रुपए नियत व अधिकतम दर है।

मध्यप्रदेश बनेगा ऑक्सीजन सप्लाई में आत्मनिर्भर

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार बीना में बीओआरएल के निकट 1000 बिस्तर के अस्थायी कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया और साथ ही मौके पर पूरे रोडमैप की समीक्षा भी की।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि ये प्रदेश का पहला आक्सीजन सप्लाई आधारित अस्थाई अस्पताल है जहां पलंग तक डायरेक्ट ऑक्सीजन पाइप लाइन रहेगी।

इस दौरान सीएम ने कहा कि हमारा उद्देश्य आने वाले समय में मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की उपलब्धता के मामले में भी आत्मनिर्भर बनकर उभरे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें कोरोना से हर मुकाबले के लिए तैयार रहना होगा। इस सिलसिले में ही बड़े ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना भी की जा रही है।

मध्यप्रदेश को ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर की मदद करेगा टाटा संस

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मध्य प्रदेश में कोरोना का प्रकोप बरकरार है। आज भी ऑक्सीजन और दवाइयों को समस्या से इंसान जूझ रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टाटा सन्स के प्रमुख एन चंद्रशेखरन से फोन पर बात की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर देने में वे हमारी मदद करेंगे। उन्होंने ये भी बताया कि ऑक्सीजन प्लांट लगाने में भी उनका सहयोग हमे मिलेगा। और साथ ही साथ टाटा की सीटी स्कैन मशीन भी प्रदेश को उपलब्ध करवाई जाएगी।

प्रदेश ने ट्वीट कर बताया कि, TataCompanies के चेयरमैन श्री एन. चंद्रशेखरन से फोन पर चर्चा हुई।चर्चा के दौरान टाटा समूह की ओर से मध्यप्रदेश को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और कोविड से लड़ने हेतु अन्य उपयोगी सहायता प्रदान करने की पहल का मैं स्वागत करता हूँ।हम सब मिलकर जल्दी ही इस महामारी से जीतेंगे।

बता दे कि प्रदेश में दूसरी लहर आने पर भी आक्सीजन की उपलब्धता को लेकर अधिकारियों के शुरुआती दावे भ्रमित करने वाले रहे हैं। भोपाल में देखें तो यहां आक्सीजन की मांग प्रतिदिन 110 टन की है, जबकि उपलब्धता 80 टन ही है। फिलहाल ऐसी ही स्थिति पूरे प्रदेश की है। अच्छी बात यह है कि देर से ही सही आक्सीजन की कमी से पैदा समस्या का समाधान ढूंढने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

ऑक्सीजन लेकर भोपाल पहुची ऑक्सीजन एक्सप्रेस

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कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मरीजों की वजह से प्रदेश में ऑक्सीजन की किल्लत हो गई है। इसी बीच बोकारो से संजीवनी लेकर पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेन देर रात भोपाल पहुच गई है। इस ऑक्‍सीजन एक्सप्रेस में छह टैंकर है जिसमें 64 मीट्रिक टन ऑक्सीजन है। बताया जा रहा है कि इसमे से एक टैंकर ऑक्‍सीजन जबलपुर, तीन टैंकर सागर और दो टैंकर मंडीदीप भोपाल के लिए पहुंचाई गई है।

बात दे कि ऑक्सीजन एक्सप्रेस के कम समय में राज्यों तक पहुंचाने और तेज आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। साथ ही लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन क्रायोजेनिक लोड होने के चलते ट्रेन की स्पीड और एक्सेलेरेशन का भी ध्यान रखा गया है।

दरअसल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बाद भारतीय रेलवे की तरफ से पिछले हफ्ते ऑक्सीजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। ऑक्सीजन की आपूर्ति जल्द से जल्द सुनिश्चित करने के लिए ऑक्सीजन टैंकरो को इस ट्रेन के जरिए सड़क मार्ग के मुकाबले कम से कम घंटों में राज्यों में पहुंचाया जा रहा है। और ऑक्सीजन एक्सप्रेस से एमपी में ऑक्सीजन की आपूर्ति जारी रहेगी।

बेटी के लिए पिता ने जोड़े थे 2 लाख रुपए, कोरोना की बिगड़ती हालात को देख अस्पताल को दान कर आया वो रकम

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मध्य प्रदेश के नीमच से एक अनोखी खबर सामने आई है। नीमच के एक किसान ने अपनी बेटी की शादी करने के लिए कड़ी मेहनत से कमाये हुए दो लाख रूपए कोविड-19 के गंभीर मरीजों के वास्ते दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन खरीदने के लिए नीमच जिला प्रशासन को दान दे दिए है।

उन्होंने दो लाख रूपय नीमच जिला कलेक्टर मयंक अग्रवाल को चेक द्वारा सौंपे है। और उनसे कहा कि इन रुपयों से दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीद लिए जायें। उन्होंने अनुरोध किया है कि एक जिला अस्पताल नीमच को और एक जीरन शासकीय अस्पताल को दिया जाए।

बता दे कि नीमच कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने इस कार्य की सराहना करते हुए कहा है कि यदि सबकी सोच ऐसी हो तो निश्चित ही बड़ी मदद हो सकती है। उन्होंने ये भी कहा कि किसान द्वारा दिए गए रुपयों से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मंगवाए जा रहे है।

मध्यप्रदेश के इस जिले में ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी का हुआ पर्दाफाश

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कोरोना की इस महामारी में कालाबाजारी रुक ही नहीं रही। बीते दिन शिक्षक कॉलोनी डबरा में चेतन गुप्ता के मकान में दर्जनों ऑक्सीजन सिलेंडर का स्टॉक मिला है। एडिशनल एसपी देहात जयराज कुबेर के नेतृत्व में हुई छापामार हुई है । बताया गया है कि ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लैक में बेचने के लिए यहां पर भंडारित किए गए थे।

एसडीएम प्रदीप शर्मा ने बताया कि प्रशासन को अज्ञात व्यक्ति ने सूचना दी थी कि शिक्षक कॉलोनी के एक मकान को ऑक्सीजन सिलेंडर का अवैध गोदाम बना लिया गया है। यहां से ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी की जा रही है।

एसडीएम ने कहा कि जिन लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है और प्रारंभिक मेडिकल जांच में वह सभी लोग कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इस घर में रहने वाले कई सदस्य पॉजिटिव पाए गए है।

मध्यप्रदेश में हो रही है इतने टन ऑक्सीजन की खपत

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मध्य प्रदेश में बढ़ते हुए कोरोना की स्थिति को देखते हुए सरकार पूरी ताकत से सारे कदम ले रही है।बहराल ऑक्सीजन की कमी से हालात बदतर होती जा रही हैं। बात दे कि ऑक्सीजन की कमी से भारी संख्या में लोगों की मौत हो रही हैं। वहीं इन सबके बीच अब कुछ अस्पतालों ने नए कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती लेने से इंकार कर दिया है।

सीहोर के सरकारी अस्पताल की तस्वीर

दरअसल बताया गया है कि प्रदेश में मौजूदा हालात में 441 टन ऑक्सीजन की जरूरत है जबकि 385 टन की ही आपूर्ति हो रही है। प्रदेश में बीते 10 दिनों में 170 टन ऑक्सीजन की अतिरिक्त खपत बढ़ गई है।

ऑक्सीजन की इतनी हुई आपूर्ति

  • 11 अप्रैल 213 टन
  • 12 अप्रैल 251 टन
  • 13 अप्रैल 262 टन
  • 14 अप्रैल 300 टन
  • 15 अप्रैल 305 टन
  • 16 अप्रैल 335 टन
  • 17 अप्रैल 347 टन
  • 18 अ्रपैल 374 टन
  • 19 अप्रैल 375 टन
  • 20 अप्रैल 382 टन

दमोह जिले के सरकारी अस्पातल में ऑक्सीजन सिलेंडर की मची लूट

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मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस रफ्तार से बढ़ रहा है। शासन प्रशासन और हेल्थ वर्कर्स सभी लाचार और बेबस नजर आ रहे हैं। प्रदेश में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। जनता ने सरकार से भी उम्मीद छोड़ दी है। वहीं दमोह स्थित सरकार अस्पताल में नए ऑक्सीजन सिलेंडर ( Oxygen Cylinder) उतरने ही लोगों ने लूट लिए।

बता दे कि दमोह के सरकारी अस्पताल में आक्सीजन सिलेंडर की लूट कल रात हुई। भर्ती मरीज़ों के परिजन ऑक्सीजन सिलेंडर ( Oxygen Cylinder) आते ही टूट पड़े, मेडिकल स्टाफ़ ने इलाज बंद करने की धमकी दी। पूरे प्रदेश में आक्सीजन की भारी क़िल्लत है।

ऐसा अनुमान है कि बेकाबू हालातों को देखते हुए सरकार लॉकडाउन आगे भी बढ़ा सकती है। पहले सरकार ने 19 अप्रेल तक लाकडाउन की घोषणा की थी लेकिन अब इसे बढ़ाकर 30 अप्रेल तक कर दिया गया है। लेकिन स्थिति नियंत्रित होने की स्थिति में सरकार आगे भी लॉकडाउन जारी रख सकती है।

मुख्यमंत्री शिवराज ने लगाया आरोप, कहा कुछ अधिकारियों ने रोके प्रदेश में आने वाले ऑक्सीजन टैंकर

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मध्य प्रदेश में चल रही ऑक्सीजन की कमी के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को आरोप लगाया कि कुछ राज्यों के अधिकारी उनके राज्यों से मध्य प्रदेश में आ रहे ऑक्सीजन के टैंकर रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अनुचित है एवं अपराध भी है।

शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया कि , ‘‘कोविड-19 संक्रमण की विषम परिस्थितिया बनी हुई हैं, संकटकाल है। ऑक्सीजन संजीवनी है। ऐसे में कुछ राज्यों के अधिकारी ऑक्सीजन के टैंकर रोक रहे हैं, जो अनुचित है और अपराध भी है।’’

उन्होंने आगे लिखा, ‘‘कल (रविवार को) मध्यप्रदेश राज्य के ऑक्सीजन टैंकरों को अन्य राज्यों में कुछ अधिकारियों द्वारा रोका गया। इससे समय बर्बाद होता है और इस दौरान कुछ मरीजों की जान जाने का खतरा बना रहता है।’’

चौहान ने यह भी कहा, ‘‘मैं राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अपील करता हूँ कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें, जो संजीवनी ऑक्सीजन के टैंकरों को अकारण रोक रहे हैं।’