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भोपाल में ऑक्सीजन सिलेंडर का दाम किया तय

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मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए सुखद खबर है। अब ऑक्सीजन सिलेण्डर के लिए लोगों को मनमाने पैसे नहीं देने पड़ेंगे। इसके लिए भोपाल कलेक्टर ने दाम तय कर दिए है। दिए गए आदेश के मुताबिक अब ज्यादा पैसे लेने वालों पर कालाबाजारी की धारा के तहत की जाएगी कार्रवाई।

दरअसल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने भोपाल में ऑक्सीजन सिलेंडर के मूल्य को निर्धारित कर दिया है। उससे अधिक राशि लेने पर कालाबाजारी करने की धारा में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऑक्सीजन सिलेंडर के विक्रय मूल्यों में एकरूपता रखने के लिए मूल्य निर्धारित किये गए है।

7 क्यूबिक मीटर सिलेंडर वितरक और निर्माता रेट (जीएसटी सहित) 360 रुपए और सब वितरक रेट/अस्पताल तक रेट(परिवहन एवं जीएसटी सहित) 500 रुपए निर्धारित किया है।

10 क्यूबिक मीटर सिलेण्डर वितरक और निर्माता रेट (जीएसटी सहित) 510 रुपए, सब वितरक रेट/अस्पताल तक रेट (परिवहन एवं जीएसटी सहित) 650 रुपए नियत व अधिकतम दर है।

मध्यप्रदेश बनेगा ऑक्सीजन सप्लाई में आत्मनिर्भर

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार बीना में बीओआरएल के निकट 1000 बिस्तर के अस्थायी कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया और साथ ही मौके पर पूरे रोडमैप की समीक्षा भी की।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि ये प्रदेश का पहला आक्सीजन सप्लाई आधारित अस्थाई अस्पताल है जहां पलंग तक डायरेक्ट ऑक्सीजन पाइप लाइन रहेगी।

इस दौरान सीएम ने कहा कि हमारा उद्देश्य आने वाले समय में मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की उपलब्धता के मामले में भी आत्मनिर्भर बनकर उभरे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें कोरोना से हर मुकाबले के लिए तैयार रहना होगा। इस सिलसिले में ही बड़े ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना भी की जा रही है।

भोपाल AIIMS की एक बड़ी लापरवाही, मरीज को ऑक्सीजन सिलेंडर बिना ऑक्सीजन के लगा दिया

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भोपाल में AIIMS की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक मरीज और उसके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि उन्होंने मरीज को ऑक्सीजन सिलेंडर तो लगाया था लेकिन सिलेंडर में ऑक्सीजन ही नहीं था। इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

मध्य प्रदेश सरकार के हिसाब से भोपाल में संक्रमण का असर कम हुआ है। बीते 10 दिनों में भोपाल में कोरोना संक्रमण 12.75 फीसदी तक कम हो गया है। वहीं देश के जाने माने डॉक्टर और एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि अगर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन किया जाए तो 3 हफ्ते में पूरे देश में कोरोना संक्रमण कम हो जाएगा।

दरअसल भोपाल के अस्पतालों की हालात देखे तब स्थिति कुछ और ही है। हर जगह ऑक्सीजन की किल्लत दवाओं की किल्लत बेड और वेंटिलेटर की किल्लत है। बता दे कि सरकारी आंकड़े कुछ और ही कहते है।

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान, इस चीज में मध्यप्रदेश बनेगा मॉडल स्टेट

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मध्यप्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा(Narottam Mishra)ने शनिवार को कहा कि अब प्रदेश में ऑक्सीजन(Oxygen) संबंधी कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि कोविड-19(Covid-19) के मामलों में प्रदेश देश में 14वें स्थान पर आ चुका है। प्रदेश में शनिवार को करीब 88,000 उपचाराधीन मामले हैं।

मिश्रा ने ट्वीट किया कि मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा युद्धस्तर पर किए गए प्रयासों का नतीजा है कि अब हमारे पास जरूरत से अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध है। आपूर्ति की व्यवस्था इस तरह की गई है कि अब ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।

उन्होंने आगे लिखा कि 2 मई को प्रदेश में 503 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति होगी। बता दे कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं जनता द्वारा लगाए गए ‘जनता कर्फ्यू’ और शहरी क्षेत्रों में ‘कोरोना कर्फ्यू’ के कारण विगत आठ दिनों से कोरोना वायरस संक्रमण के नये मामलों में निरंतर कमी दर्ज की जा रही है। मिश्रा ने कहा कि जल्द ही हम देश के लिए ‘मॉडल स्टेट’ बनकर दिखायेंगे।

मध्यप्रदेश को ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर की मदद करेगा टाटा संस

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मध्य प्रदेश में कोरोना का प्रकोप बरकरार है। आज भी ऑक्सीजन और दवाइयों को समस्या से इंसान जूझ रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टाटा सन्स के प्रमुख एन चंद्रशेखरन से फोन पर बात की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर देने में वे हमारी मदद करेंगे। उन्होंने ये भी बताया कि ऑक्सीजन प्लांट लगाने में भी उनका सहयोग हमे मिलेगा। और साथ ही साथ टाटा की सीटी स्कैन मशीन भी प्रदेश को उपलब्ध करवाई जाएगी।

प्रदेश ने ट्वीट कर बताया कि, TataCompanies के चेयरमैन श्री एन. चंद्रशेखरन से फोन पर चर्चा हुई।चर्चा के दौरान टाटा समूह की ओर से मध्यप्रदेश को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और कोविड से लड़ने हेतु अन्य उपयोगी सहायता प्रदान करने की पहल का मैं स्वागत करता हूँ।हम सब मिलकर जल्दी ही इस महामारी से जीतेंगे।

बता दे कि प्रदेश में दूसरी लहर आने पर भी आक्सीजन की उपलब्धता को लेकर अधिकारियों के शुरुआती दावे भ्रमित करने वाले रहे हैं। भोपाल में देखें तो यहां आक्सीजन की मांग प्रतिदिन 110 टन की है, जबकि उपलब्धता 80 टन ही है। फिलहाल ऐसी ही स्थिति पूरे प्रदेश की है। अच्छी बात यह है कि देर से ही सही आक्सीजन की कमी से पैदा समस्या का समाधान ढूंढने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

मध्यप्रदेश में अब मुख्यमंत्री करेंगे ऑक्सीजन सप्लाई की ऑडिट

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मध्य प्रदेश में कोरोना बेकाबू है और उसके कारण ऑक्सीजन की कमी और कालाबाजारी की खबरे आ रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में अब ऑक्सीजन की भी ऑडिट होगी। उन्होंने कहा कि किस जिले में कितनी ऑक्सीजन की जरुरत है और कितनी आपूर्ति हो रही है, कितनी ऑक्सीजन कहां जा रही है इसका भी अधिकारियों को हिसाब किताब रखना होगा।

दरअसल प्रदेश में ऑक्सीजन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम गड़बड़ चल रहा है। ऑक्सीजन की वितरण प्रणाली पर सीएम नाराज हो गए। अधिकारियों के साथ चल रही बैठक में उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की। सीएम ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि जिले ऑक्सीजन की डिमांड पहले बताएं। ल

बता दे कि व्यवस्थाओं में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब सीएम माइक्रो मॉनिटरिंग करेंगे। सीएम ने समीक्षा के लिए जिलों को तीन ग्रुप A, B और C में बांट दिया है।

ग्रुप A में है ये जिले

इंदौर, उज्जैन, रतलाम, टीकमगढ़, धार, अनूपपुर, झाबुआ, नीमच, देवास, निवाड़ी, मंदसौर, खरगोन, शाजापुर, आगर, मालवा, अलीराजपुर, बड़वानी, खंडवा, बुरहानपुर जिले है।

ग्रुप B में है ये जिले

 भोपाल, ग्वालियर, बैतूल, दतिया, विदिशा, सीहोर, मुरैना, शिवपुरी, होशंगाबाद, अशोक नगर, रायसेन, राजगढ़, गुना, हरदा, श्योपुर, भिंड जिले है।

ग्रुप C में है ये जिले

जबलपुर, रीवा, नरसिंहपुर, सिंगरौली, सीधी, पन्ना, सतना, सागर, शहडोल, कटनी, छतरपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, उमरिया, डिंडोरी, छिंदवाड़ा और दमोह जिले शामिल है।

ऑक्सीजन लेकर भोपाल पहुची ऑक्सीजन एक्सप्रेस

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कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मरीजों की वजह से प्रदेश में ऑक्सीजन की किल्लत हो गई है। इसी बीच बोकारो से संजीवनी लेकर पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेन देर रात भोपाल पहुच गई है। इस ऑक्‍सीजन एक्सप्रेस में छह टैंकर है जिसमें 64 मीट्रिक टन ऑक्सीजन है। बताया जा रहा है कि इसमे से एक टैंकर ऑक्‍सीजन जबलपुर, तीन टैंकर सागर और दो टैंकर मंडीदीप भोपाल के लिए पहुंचाई गई है।

बात दे कि ऑक्सीजन एक्सप्रेस के कम समय में राज्यों तक पहुंचाने और तेज आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। साथ ही लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन क्रायोजेनिक लोड होने के चलते ट्रेन की स्पीड और एक्सेलेरेशन का भी ध्यान रखा गया है।

दरअसल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बाद भारतीय रेलवे की तरफ से पिछले हफ्ते ऑक्सीजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। ऑक्सीजन की आपूर्ति जल्द से जल्द सुनिश्चित करने के लिए ऑक्सीजन टैंकरो को इस ट्रेन के जरिए सड़क मार्ग के मुकाबले कम से कम घंटों में राज्यों में पहुंचाया जा रहा है। और ऑक्सीजन एक्सप्रेस से एमपी में ऑक्सीजन की आपूर्ति जारी रहेगी।

बेटी के लिए पिता ने जोड़े थे 2 लाख रुपए, कोरोना की बिगड़ती हालात को देख अस्पताल को दान कर आया वो रकम

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मध्य प्रदेश के नीमच से एक अनोखी खबर सामने आई है। नीमच के एक किसान ने अपनी बेटी की शादी करने के लिए कड़ी मेहनत से कमाये हुए दो लाख रूपए कोविड-19 के गंभीर मरीजों के वास्ते दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन खरीदने के लिए नीमच जिला प्रशासन को दान दे दिए है।

उन्होंने दो लाख रूपय नीमच जिला कलेक्टर मयंक अग्रवाल को चेक द्वारा सौंपे है। और उनसे कहा कि इन रुपयों से दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीद लिए जायें। उन्होंने अनुरोध किया है कि एक जिला अस्पताल नीमच को और एक जीरन शासकीय अस्पताल को दिया जाए।

बता दे कि नीमच कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने इस कार्य की सराहना करते हुए कहा है कि यदि सबकी सोच ऐसी हो तो निश्चित ही बड़ी मदद हो सकती है। उन्होंने ये भी कहा कि किसान द्वारा दिए गए रुपयों से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मंगवाए जा रहे है।

मध्यप्रदेश के इस जिले में ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी का हुआ पर्दाफाश

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कोरोना की इस महामारी में कालाबाजारी रुक ही नहीं रही। बीते दिन शिक्षक कॉलोनी डबरा में चेतन गुप्ता के मकान में दर्जनों ऑक्सीजन सिलेंडर का स्टॉक मिला है। एडिशनल एसपी देहात जयराज कुबेर के नेतृत्व में हुई छापामार हुई है । बताया गया है कि ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लैक में बेचने के लिए यहां पर भंडारित किए गए थे।

एसडीएम प्रदीप शर्मा ने बताया कि प्रशासन को अज्ञात व्यक्ति ने सूचना दी थी कि शिक्षक कॉलोनी के एक मकान को ऑक्सीजन सिलेंडर का अवैध गोदाम बना लिया गया है। यहां से ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी की जा रही है।

एसडीएम ने कहा कि जिन लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है और प्रारंभिक मेडिकल जांच में वह सभी लोग कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इस घर में रहने वाले कई सदस्य पॉजिटिव पाए गए है।

मध्य प्रदेश के सिवनी में टीआई की गुंडागर्दी, जबरदस्ती उठा ले गया ऑक्सीजन सिलेंडर

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मध्य प्रदेश के सिवनी में पुलिस का अमानवीय चेहरा देखने को मिला है मामला सिवनी के लखनादौन का है जहां पर घूमा थाने के टीआई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से ऑक्सीजन सिलेंडर स्वास्थ्य कर्मियों से अभद्रता करते हुए जबरदस्ती उठा ले गए।


मामला घूमा थाना प्रभारी राहुल बघेल से जुड़ा हुआ है जो लखनादौन स्थित सिविल अस्पताल पहुंचे जहां पर उन्होंने एक ऑक्सीजन सिलेंडर जबरदस्ती उठाया जिस पर स्वास्थ्य कर्मियों ने आपत्ति ली और टीआई को ऐसा करने के लिए मना किया लेकिन कि आई ने अपने पद का रौब दिखाते हुए उन सबको धमकी दी और सिलेंडर ले गए।

जब लखनादौन के सिविल अस्पताल के बीएमओ डॉ एम के सोलंकी ने इसकी रिपोर्ट थाने में दर्ज करवाने के लिए आवेदन दिया तो डीएम लखनादौन सिद्धार्थ जैन ने दोनों का समझौता करवा दिया।

अपने बचाव में घूमा थाना प्रभारी राहुल बघेल ने कहा कि मेरे थाने के आरक्षक की माताजी की तबीयत खराब थी इसलिए मैं लखनादौन सिविल अस्पताल पहुंचा और स्वास्थ्य कर्मियों की सहमति से सिलेंडर लेकर आया था जबकि बीएमओ डॉक्टर एमके सोलंकी ने कहा कि टीआई अपने पद की धौंस दिखाकर जबरदस्ती सिलेंडर ले गए थे।

इसके बाद जब यह मामला मीडिया में आया तो एसडीएम सिद्धार्थ जैन ने दोनों अधिकारियों के बीच समझौता करवाते हुए मामले को यहीं खत्म करने की सलाह दी और टीआई सिलेंडर सिविल अस्पताल को वापस कर गए।