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टीवी पर कोल्ड ड्रिंक का विज्ञापन देखकर पीएम मोदी ने लिया था नोटबंदी का फैसला !

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Newbuzzindia : संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दिए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नोटबंदी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि टीवी पर कोल्ड ड्रिंक का एक विज्ञापन दिखाई देता है जिसमें ऐड कर रहा हीरो कहता है- ‘आज कुछ तूफानी करते हैं।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसी ऐड से प्रेरित होकर नोटबंदी का फैसला किया है।

विख्‍यात अमेरिकी अर्थशास्‍त्री स्‍टीव एच हैंके ने भी पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले की कड़ी आलोचना की है। हैंके ने कहा है कि नोटबंदी ‘लूजर्स’ (हारने वालों) के लिए है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अंदाजा नहीं है कि देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। मेरीलैंड की जॉन्‍स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले हैंके ने ट्वीट कर कहा, ”नोटबंदी हारने वालों के लिए है और यह शुरुआत से ही गलत तरीके से लागू किया गया। कोई नहीं, यहां तक कि मोदी को भी नहीं पता है कि भारत किस दिशा में जा रहा है।” वाशिंगटन के केटो इंस्‍टीट्यूट में ट्रबल्‍ड करंसी प्रोजेक्‍ट के निदेशक और वरिष्‍ठ फेलो, हैंके ने पहले कहा था कि ”भारत में मोदी की नोटबंदी को अपनाने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा नहीं है… उन्‍हें यह बात पता होनी चाहिए थी।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को रात आठ बजे राष्‍ट्र के नाम संबोधन में 500 और 1000 रुपए के करेंसी नोटों तत्‍काल प्रभाव से बंद कर दिए थे। पीएम ने इस फैसले को काले धन, जाली मुद्रा और भ्रष्‍टाचार पर कड़ी चोट बताया था और लोगों से 50 दिन के अंदर हालात सामान्य हो जाने की बात कही थी लेकिन करीब 90 दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। अभी भी लोगों के कैश की किल्लत से दो-चार होना पड़ रहा है। एटीएम के बाहर अभी भी कतारें लग रही हैं। कई एटीएम नोटबंदी के बाद से ही बंद पड़े हैं।

राष्ट्रपति ने मोदी सरकार की स्वास्थ व्यस्था पर उठाए सवाल, बोले गाँव पर भी करे फोकस !

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Newbuzzindia: मोदी सरकार के कामकाज से खुश होकर अक्सर उनकी तारीफ करने वाले राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने शुक्रवार को मोदी सरकार की स्वाथ्य नीति पर सवाल खड़े किए। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा की मौजूदा स्वास्थ व्यस्था में काफी खामियां है । राष्ट्रपति ने  कहा की मौजूद सरकार का गाँवों को छोड़कर शहर पर ज्यादा फोकस है।

गौरतलब है की राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शुक्रवार को शिमला के पीटरहॉफ में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति ने आगे कहा की ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत आबादी रहती है। ऐसे में गांवों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की ज्यादा भर्ती करने की आवश्यकता पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को तालमेल बनाकर काम करने का भी आह्वान किया।

प्रणब मुखर्जी शुक्रवार को शिमला के पीटरहॉफ में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में सभी लोगों को एक समान स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए आधारभूत ढांचे को विकसित करने की आवश्यकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की तैनाती महत्वपूर्ण पहलू है, जिसे केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर देखने की जरूरत है। कई तरह के आधुनिक उपचार में पैरामेडिक्स भी सक्षम हैं।

तमाम चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों की नियुक्ति के साथ इस वर्ग के कर्मचारियों की ज्यादा तैनाती करने की जरूरत है। उन्होंने चिकित्सकों का आह्वान किया कि वे देशसेवा की भावना से काम करते रहें। इस अवसर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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एनएसजी की सदस्यता हासिल करने के लिए नरेंद्र मोदी ने तैयार किया “मास्टर प्लान” !

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Newbuzzindia: भारत ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानि एनएसजी की सदस्यता हासिल करने के लिए चुपचाप आवेदन कर दिया है। भारत ने ये कवायद प्रधानमंत्री की 4 जून से शुरू हो रही अमेरिका यात्रा ये पूर्व की है।

भारत ने ये आवेदन 12 मई को किया है जोकि पाकिस्तान के अपना पक्ष रखने से ठी‌क एक हफ्ते पूर्व है। अब इस आवेदन पर फैसला 9-10 जून को विएना में होने वाली बैठक में लिया जाएगा। नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ राजनयिक ने ईटी को  बताया कि प्रधानमंत्री मोदी एनएसजी की सदस्यता हा‌सिल करने के लिए खुद व्यापक कदम उठा रहे हैं।

वह सभी 48 सदस्य देशों के राजनेताओं से फोन के माध्यम से संपर्क कर भारत के पक्ष में फैसला लेने के लिए आग्रह कर रहे हैं। सरकार के इस आवेदन ने पिछले सात सालों से जारी एनएसजी की सदस्यता के लिए जंग को और तेज कर दिया है, जब एक सदस्य देश चीन, भारत के बजाय पाकिस्तान के‌ पक्ष में बात कर रहा हो।

अमेरिका ने दिया था भारत का साथ !
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हाल ही में हुई चीन यात्रा को एनएसजी की सदस्यता के ‌लिए भारत के प्रति चीन के रुख को बदलाव लाने के तौर पर देखा जा रहा है हालांकि चीन ने अपना रुख तो साफ नहीं किया, लेकिन ये जरूर कहा कि दोनों देशों के अधिकारी वार्ता जारी रखेंगे।

चीन तब भी भारत के खिलाफ था जब एनएसजी ने भारत-अमेरिका के बीच परमाणु करार को मंजूरी दे दी थी। अब अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान पीएम मोदी खुद सबसे बड़ा राजनीतिक दांव खेलेंगे ताकि सभी सदस्य देशों को वाशिंगटन की ओर से संदेश पहुंचाया जा सके और इसका असर 9-10 जून को होने वाली बैठक पर दिखे। इस बैठक के बाद 24 जून को सियोल में होने वाली प्लेनरी में इस एजेंदे को रखा जाना है।

गौरतलब है कि अमेरिका ने 48 सदस्यीय एनएसजी में भारत को सदस्यता देने की सिफारिश की है। अमेरिकी सिफारिश के बावजूद भारतीय सदस्यता का पाक विरोध कर रहा है। इससे अमेरिका पाक से नाराज हो गया और जमकर फटकार लगाई।

पाकिस्तान ने एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध करते हुए कहा था कि इससे दक्षिण एशिया में परमाणु हथियारों की एक रेस शुरू हो जाएगी। हालांकि अमेरिका का कहना है कि भारत को सदस्यता ‘सदस्यता हथियारों की रेस में शामिल होने और परमाणु हथियारों के निर्माण के लिए नहीं है। यह परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए है।

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