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धार: 46000 में रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचते अधेड़ गिरफ्तार, साथी फरार

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मध्यप्रदेश के धार जिले में रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचते एक अधेड़ को पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह को सूचना मिली थी कि पीथमपुर के सेक्टर वन में एक व्यापारी रेमडेसिविर इंजेक्शन बाहर से लाकर लोगों को बेच रहा है।

सूचना पर पीथमपुर के सीएसपी तरुणेंद्र सिंह बघेल को कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया। सीएसपी बघेल के निर्देश पर थाना प्रभारी चंद्रभान सिंह चढ़ार व सब इंस्पेक्टर के. एस. मंडलोई ने देर रात घेराबंदी कर चंद्रेश जैन को गिरफ्तार कर उसके पास से दो रेमडिसिविर इंजेक्शन बरामद किए।

सब इंस्पेक्टर के. एस. मंडलोई ने बताया कि चंद्रेश जैन पिता ज्ञानचंद्र जैन हाउसिंग बोर्ड कालोनी पीथमपुर में हार्डवेयर का व्यापारी है और सागर का रहने वाला है। वह इंजेक्शन दमोह से बेचने के लिए लाया था। यहां पर एक इंजेक्शन की ₹23000 की कीमत के हिसाब से दोनों इंजेक्शनों को ₹46000 में बेचना तय हुआ था।

आरोपियों ने बताया इस इंजेक्शन की कालाबाजारी में पीथमपुर के डॉक्टर नरेंद्र उर्फ आनंद की भी मिलीभगत थी। लेकिन पुलिस ने बेचने से पहले ही व्यापारी को गिरफ्तार कर लिया इसका डॉक्टर साथी फरार है, जिसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है। डॉक्टर साथी पीथमपुर में पीथमपुर हॉस्पिटल के नाम से क्लीनिक चलाता है।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने दवाइयों की कालाबाजारी करने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून न्याय के तहत मामला दर्ज करने और ऐसे व्यक्तियों की संपत्ति कुर्क करने की बात कही है उसके बावजूद भी लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

रेमडेसिविर इंजेक्शन बराबर प्रभावी है, 2 रुपये का डेक्सामेथासोन

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देश में जैसे-जैसे कोरोना संक्रमण अपने पांव फैला रहा है वैसे ही वैसे एक दवाई की चर्चा आम आदमियों की जुबान पर आ गई है आज उस कंपनी या उस दवाई को ऐसा कोई शख्स नहीं है जो नाम से ना जानता पहचानता हो कई लोग तो ऐसे भी हैं जो इस महामारी के दौर में भी उस दवाई की कालाबाजारी करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं।

हम बात कर रहे हैं कोरोनावायरस के लिए इस समय सबसे प्रभावी दवा रेमदेसीविर इंजेक्शन की जिसकी मूल कीमत तो ₹900 से लेकर ₹3700 तक है लेकिन इस महामारी के दौर में यह इंजेक्शन मुंह मांगे दामों पर बिक रहा है कहीं यह ₹10000 में मिल जाता है तो कहीं यह 20,30,35,45 और 47 हजार तक का मिल रहा है।

हम अगर मध्यप्रदेश की बात कहें तो यहाँ के भोपाल और इंदौर में तो हजारों इंजेक्शन चोरी भी हो चुके हैं। भोपाल में वहां के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल हमीदिया से 863 इंजेक्शन चोरी हो गए तो इंदौर में सैल्बी अस्पताल से 133 इंजेक्शन इंजेक्शन चोरों की जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि इनके रखवालों ने ही इनकी चोरी करना शुरू कर दी थी।

इसी कालाबाजारी,किल्लत और चोरी के बीच एक बड़ी खबर आई है मेडिकल एक्सपर्ट का मानना है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन का कोई विशेष फायदा नहीं है यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) ने इसको मान्यता नहीं दी है डब्ल्यूएचओ(WHO) का मानना है कि रेमडेसिविर की एक्यूट रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) रोकने में कोई भूमिका नहीं है।

रिसर्च सोसायटी ऑफ एनेस्थीसिया क्लिनिकल फार्मोकोलॉजी के सचिव संजय गांधी पीजीआई के आईसीयू एक्सपर्ट प्रोफेसर संदीप साहू कहते हैं कि रेमदेसीविर के पीछे भागने का कोई मतलब नहीं है इससे कोरोनावायरस संक्रमित में एआरडीएस रोकने कोई खास फायदा नहीं है।

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के हाल के शोध का हवाला देते हुए प्रोफेसर संदीप साहू ने कहा कि इसके मुकाबले डेक्सामेथासोन सबसे सस्ती और आसानी से मिलने वाली दवा है एआरडीएस रोकने में काफी कारगर है।

क्या है एआरडीएस?

एक्यूट रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम ऐसी स्थिति है जिसमें फेफड़ों की थैलियों मैं तरल जमा हो जाने के कारण अंगों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है कोरोनावायरस मरीजों में सांस न ले पाने का यह है महत्वपूर्ण कारक बनता है जो कभी-कभी घातक बन जाता है।