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इंदौर के जिला स्वास्थ्य अधिकारी का ड्राइवर कर रहा था इंजेक्शन की कालाबाजारी

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मध्य प्रदेश में फिर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की खबर सामने आई है। दरअसल जिला स्वास्थ्य अधिकारी पूर्णिमा गडरिया के ड्राइवर पुनीत अग्रवाल ने किया बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि इंजेक्शन प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट की पत्नी के ड्राइवर गोविंद राजपूत ने उसे उपलब्ध कराए थे।

बता दे कि गोविंद राजपूत उन्हें 14 हजार में एक इंजेक्शन देता था। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मचारी ललित शर्मा ने उन्हें फोन कर इंजेक्शन की मांग की थी। उन्होंने कहा कि इसके पहले भी गोंविद राजपूत से ही इंजेक्शन लेकर अस्पताल में भर्ती कई मरीजों को भी डाक्यूमेंट के आधार पर इंजेक्शन दिए थे।

उन्होंने कहा कि वाट्सऐप में डाक्यूमेंट भेजने पर गोविंद राजपूत इंजेक्शन उपलब्ध कराते थे। कितने में कराते थे यह मुझे मालूम नहीं. इसी तरह उन्होंने कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराने की बात भी कही है।

रेमडेसिविर की कालाबाजारी को लेकर बीजेपी ने किया पलटवार, कहा कांग्रेस के नेता है शामिल और आरोप हमपर लगाती है

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मध्य प्रदेश में रेमडेसिविर इंजेक्शन कालाबाजारी को लेकर सियासत तेज हो गई है। दिग्विजय सिंह द्वारा सीएम शिवराज के साथ इंजेक्शन कालाबाजारी के आरोपी का फोटो ट्विटर में पोस्ट करने के बाद बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी ने कहा कालाबाजारी और नकली रेमडेसिविर के मामले मे कांग्रेस के नेता शामिल है और आरोप हमपर लगा रहे है।

बता दे कि बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार लगातार ऐसे लोगों पर रासुका की कार्रवाई कर ही रही है। उन्होंने ये भी कहा कि किसका फोटो किसके साथ है ये सवाल नहीं लेकिन ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो रही है या नहीं वो बड़ा सवाल है।

वहीं इस मामले को लेकर चिकित्सा मंत्री विश्वास सारंग भी मैदान में आ गए है। उन्होंने दिग्विजय के ट्वीट पर कहा कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हमारी सरकार ने की है अब कोई किसी के साथ फोटो खिंचवा लें लेकिन अपराध करेगा तो कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल प्रबंधन ने सबूत मिटाने के लिए ले ली 5 मरीजो की जान

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सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा के मामले में एक महिला ने गम्भीर आरोप लगाते हुए एसपी ऑफिस में शिकायत की है। आरोप है कि पुलिस रेड से पहले सिटी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती 5 मरीज जिन्हें रेमडेसिविर लगे थे उनकी हत्या कर दी गई ताकि वे पुलिस के सामने बयान न दे सकें।महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति का इलाज सिटी हॉस्पिटल में चल रहा था। उसके पति को भी नकली रेमडीसीवीर इंजेक्शन लगाए गए जिससे उसकी मौत हो गई। और उस दिन पुलिस के आने की कुछ घंटे पहले ही आईसीयू में भर्ती कम से कम पांच मरीजों की अचानक एक साथ बेहद संदिग्ध तरीके से मौत हो गई थी।

पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति का इलाज सिटी हॉस्पिटल में चल रहा था। उसके पति को भी नकली रेमडीसीवीर इंजेक्शन लगाए गए जिससे उसकी मौत हो गई। और उस दिन पुलिस के आने की कुछ घंटे पहले ही आईसीयू में भर्ती कम से कम पांच मरीजों की अचानक एक साथ बेहद संदिग्ध तरीके से मौत हो गई थी।

पीड़ित महिला ने जानकरी देते हुए कहा कि उसके पति को 1 मई को कोरोना के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था और 7 मई तक उसकी वीडियो काल के माध्यम से लगातार बात हो रही थी। फिर 9 मई को अस्पताल प्रबंधन ने बताया उसके पति की मौत हो गई है। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने इस संबंध में उसे कोई जानकारी नहीं दी बल्कि इलाज के नाम पर साढे तीन लाख रुपए भी ले लिए।

दरअसल पीड़ित महिला ने सरबजीत सिंह मोखा के खिलाफ हत्या के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। इस मामले को देख रहे एडिशनल एसपी रोहित काशवानी ने पीड़ित महिला को उचित जांच का आश्वासन दिया है।

मध्यप्रदेश में असली रेमडेसिविर इंजेक्शन से हो रहीं है मरीजो की मृत्यु : मंत्री उषा ठाकुर

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मध्य प्रदेश की कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर ने इस दफा एक बड़ा बयान दे दिया है। और रेमडेसिविर इंजेक्शन पर ही उन्होंने सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि नकली रेमडेसिविर लगने के बाद भी लोगों की जान बच रही है। ये सोचने वाली बात है कि कहीं असली रेमडेसिविर इंजेक्शन की डोज देने के कारण मौत हो रही है।

उन्होंने कहा कि कई बार हाईडोज बहुत ज्यादा तकलीफ दे रहा है। मैंने खुद कई ऐसी मृत्यु देखी है जो मुझे भी लगता है कि इंजेक्शन के हाईडोज की वजह से हुई है। उदाहरण देते हुए कहा कि किसान संघ का नेता मोहन पांडेय उसे 6 रेमडेसिविर लगे, टोसी लगे लेकिन उसे बचा नहीं पाए।

उन्होंने आगे कहा कि रेमडेसिविर और टोसी संजीवनी बूटी नहीं है और न ही प्रमाणिक इलाज। कोई भी इसके पीछे ना पड़ें। ये डॉक्टर तय करेगा कि इंजेक्शन देना है या नहीं।

वहीं मंत्री ने यज्ञ की आहुति देने वाले बयान पर टिकी रही और कहा कि तथ्यों के आधार पर मैं प्रमाण दे सकती हूं कि वैदिक पद्धति कितनी कारगर है। स्वस्थ्य रहने के लिए वैदिक जीवन पद्धति को अपनाना ज़रूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ये माना है कि भारतीय वैदिक जीवन पद्धति को अपनाना ज़रूरी है।