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माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त संस्था का प्रमुख निकला रेमडेसिवर इंजेक्शन रैकेट का सरगना

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मध्य प्रदेश में रेमडेसिविर की कालाबाजारी रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। MCRPV भोपाल से संबंधित संस्था के संचालक को STF ने ग्वालियर से तब गिरफ्तार किया जब वह इंजेक्शन की डिलिवरी देने ग्वालियर पहुँचा था।

प्रदेश के सिवनी जिले का रहने वाला सरकारी PG कॉलेज के सामने जीनियस कंप्यूटर कॉलेज जो कि (भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से संबंध संस्था है) के संचालक कमलेश्वर प्रसाद दीक्षित को रेमडिसिवर की कालाबाजारी करते ग्वालियर STF ने रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। दीक्षित सोशल मिडिया के जरिये करता था इसका पर्दाफाश STF ग्वालियर इकाई ने किया है।

इस व्यक्ति ने बांग्लादेश से इंदौर तक का नेटवर्क बनाया और उसके जरिये 30,000 रु का एक रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने के उद्देश्य से 5 रेमडिसिवर लेकर ग्वालियर पहुँचा। लेकिन वहीं जाल बिछाकर मरीज का भाई बनकर ग्वालियर STF ने इसको रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

बता दें कि कमलेश्वर प्रसाद का नाम इससे पहले भी विवादित रहा है। जानकारी के अनुसार इसके द्वारा पूर्व में भी माखनलाल यूनिवर्सिटी की मान्यता लेने के लिए धोखा देकर प्रधानमंत्री कौशल भवन दिखा कर फर्जी मान्यता लेने की कोशिश की थी। उसके बाद विश्वविद्यालय की टीम द्वारा पकड़ा गया और मान्यता नही दी गई थी।

लेकिन उसके विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ एक अधिकारी जो ग्वालियर के रहने वाले थे और अब दिवंगत हो गए हैं उनके इस दीक्षित के ससुराल पक्ष से अच्छे संबंध थे जिसके कारण इसे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल का कंप्यूटर इंस्टीट्यूट मिल गया था।

विधायक का चुनाव भी लड़ चुका है आरोपी

आरोपी कमलेश्वर प्रसाद दीक्षित अत्यंत महत्वाकांक्षा से ग्रस्त व्यक्ति भी रहा है कभी उसने विधायक बनने के अरमान भी पाले थे। लेकिन कामयाब नही हो पाया था। उसने 2018 में सपाक्स के टिकट पर सिवनी से चुनाव भी लड़ा था जिसमे 832 वोट मिले थे।

फिर ‘आपदा को अवसर’ में बदलने लगा

आरोपी MCU से सम्बंधित सेंटर का मालिक है लेकिन उस समय कोरोना कर्फ्यू के कारण जब सब चीजें बन्द हैं तो उसने इस समय कमाई के लिए रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने की सोची और करने लगा। यह इतना शातिर बदमाश था कि बहुत सोच समझकर इंजेक्शन डिलेवरी करता था लेकिन STF द्वारा बुने जाल में वह फंस गया और अब जेल में है।

धार: 46000 में रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचते अधेड़ गिरफ्तार, साथी फरार

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मध्यप्रदेश के धार जिले में रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचते एक अधेड़ को पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह को सूचना मिली थी कि पीथमपुर के सेक्टर वन में एक व्यापारी रेमडेसिविर इंजेक्शन बाहर से लाकर लोगों को बेच रहा है।

सूचना पर पीथमपुर के सीएसपी तरुणेंद्र सिंह बघेल को कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया। सीएसपी बघेल के निर्देश पर थाना प्रभारी चंद्रभान सिंह चढ़ार व सब इंस्पेक्टर के. एस. मंडलोई ने देर रात घेराबंदी कर चंद्रेश जैन को गिरफ्तार कर उसके पास से दो रेमडिसिविर इंजेक्शन बरामद किए।

सब इंस्पेक्टर के. एस. मंडलोई ने बताया कि चंद्रेश जैन पिता ज्ञानचंद्र जैन हाउसिंग बोर्ड कालोनी पीथमपुर में हार्डवेयर का व्यापारी है और सागर का रहने वाला है। वह इंजेक्शन दमोह से बेचने के लिए लाया था। यहां पर एक इंजेक्शन की ₹23000 की कीमत के हिसाब से दोनों इंजेक्शनों को ₹46000 में बेचना तय हुआ था।

आरोपियों ने बताया इस इंजेक्शन की कालाबाजारी में पीथमपुर के डॉक्टर नरेंद्र उर्फ आनंद की भी मिलीभगत थी। लेकिन पुलिस ने बेचने से पहले ही व्यापारी को गिरफ्तार कर लिया इसका डॉक्टर साथी फरार है, जिसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है। डॉक्टर साथी पीथमपुर में पीथमपुर हॉस्पिटल के नाम से क्लीनिक चलाता है।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने दवाइयों की कालाबाजारी करने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून न्याय के तहत मामला दर्ज करने और ऐसे व्यक्तियों की संपत्ति कुर्क करने की बात कही है उसके बावजूद भी लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।