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26 जनवरी को शिवराज सिंह चौहान रीवा में करेंगे ध्वजारोहण

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गणतंत्र दिवस(Republic Day) को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान(Shivraj Singh Chauhan) भोपाल(Bhopal) में नहीं बल्कि रीवा(Rewa) जिला मुख्यालय पर आयोजित समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहरायेंगे और प्रदेशवासियों को संबोधित करेंगे। मंत्री-परिषद के सदस्य जिला मुख्यालयों पर आयोजित जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहरायेंगे और मुख्यमंत्री के प्रदेश की जनता के नाम संदेश का वाचन करेंगे।

कौनसे मंत्री किस जिले में शामिल होएंगे

डॉ. नरोत्तम मिश्रा दतिया, गोपाल भार्गव सागर, तुलसीराम सिलावट इंदौर, कुंवर विजय शाह खंडवा, जगदीश देवड़ा मंदसौर, बिसाहूलाल सिंह अनूपपुर, यशोधरा राजे सिंधिया शिवपुरी, भूपेन्द्र सिंह जबलपुर, मीना सिंह मांडवे उमरिया, कमल पटेल हरदा, गोविन्द सिंह राजपूत छिंदवाड़ा, बृजेन्द्र प्रताप सिंह पन्ना, विश्वास कैलाश सारंग सीहोर, डॉ. प्रभुराम चौधरी रायसेन, डॉ. महेन्द्र सिंह सिसौदिया गुना, प्रद्युम्न सिंह तोमर ग्वालियर, प्रेम सिंह पटेल बड़वानी, ओमप्रकाश सकलेचा नीमच, उषा ठाकुर होशंगाबाद, अरविंद भदौरिया भिंड, डॉ. मोहन यादव उज्जैन, हरदीप सिंह डंग राजगढ़ और राजवर्धन सिंह प्रेमसिंह दत्तीगांव धार जिले में राष्ट्रीय ध्वज फहरायेंगे।

इसी प्रकार राज्य मंत्री भारत सिंह कुशवाह मुरैना, इंदर सिंह परमार शाजापुर, राम खेलावन पटेल सतना, रामकिशोर कावरे बालाघाट, बृजेन्द्र सिंह यादव अशोकनगर, सुरेश धाकड़ बैतूल और ओपीएस भदौरिया छतरपुर में राष्ट्रीय ध्वज फहरायेंगे और मुख्यमंत्री के प्रदेश की जनता के नाम संदेश का वाचन करेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड पर पुर्नविचार की अपील की

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ग्वालियर पहुंचे नरेंद्र सिंह तोमर से सोमवार को संवाददाताओं ने जब किसान आंदोलन और किसानों के गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने के ऐलान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि सभी किसान यूनियनों से आग्रह करता हूं कि 26 जनवरी हमारा गणतंत्र दिवस है, यह राष्ट्रीय त्योहार है, यह आजादी बड़ी कुर्बानी के बाद देश को मिली है, किसान के किसी भी कदम से गणतंत्र दिवस की गरिमा प्रभावित न हो यह जिम्मेवारी किसान की भी है।

किसानों की माली हालत सुधारने के लिए बीते छह सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कई कदम उठाए हैं। किसानी का क्षेत्र फायदे का क्षेत्र बने, नए नौजवान भी इस ओर आकर्षित हो सकें, किसान तकनीक का उपयोग करके महंगी फसलों की ओर जा पाए। इसके लिए दो नए कानून और एक बिल में संशोधन कुल मिलाकर तीन नए कानून बनाए गए हैं।

किसान यूनियनों से हर बार यही कहा गया है कि, वह प्रावधान पर चर्चा करें, जिस प्रावधान से किसान को तकलीफ है उस पर विचार करने के लिए और उसमें संशोधन करने के लिए सरकार खुले मन से चर्चा कर रही है और करना चाहती है मगर यूनियन की तरफ से प्रावधान पर चर्चा नहीं हो पा रही है।