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Arun Jaitley questions Rahul Gandhi’s degree while defending Smriti Irani

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Politics is the only field where fake degrees can lead you to the post of Human Resource Development minister, ironically. In other fields, fake degree can lead to banishment and jail-time as well.

Former HRD minister Smriti Irani revealed in her poll affidavit that she was not a graduate. However, in her affidavit for 2014 polls, Irani had reportedly said that she had graduated from Delhi University’s School of Open Learning with a Bachelor of Commerce degree in 1994. Opposition found a weak spot and they kept attacking BJP over her fake degree.

Finance Minister Arun Jaitley came to her defence and said the academic credentials of Congress president Rahul Gandhi, too, were the subject of debate. He said that Rahul Gandhi completed his MPhil without completing his post-graduation.

“One day the focus (of Congress campaign) would be on the BJP candidate’s educational qualification, fully forgetting that a public audit of Rahul Gandhi’s academic credentials may leave a lot to be answered. After all, he got an MPhil without a Master’s degree,” Jaitley said in a Facebook blog titled ‘India’s Opposition is on a Rent a Cause Campaign’.

In 2009, amid a row over Gandhi’s foreign degrees, the University of Cambridge had said the Congress leader was a student of Trinity College and was awarded an M.Phil in Development Studies in 1995.

Fake degree for politicians controversy is not new. Smriti Irani and Rahul Gandhi are not the only high profile politicians surrounded by this controversy. Our own PM Modi was allegedly having a fake degree in ‘Entire Political Science’ from Delhi University. There are numerous discrepancies in the records.

The point is that the politicians are setting a very notorious image in the youth of our nation. This fake degree scandal would definitely bring international shame to our country. What can one expect in that country where the law-makers are not following their own laws? Think about it.

तो इन मतभेदों के चलते मोदी ने छीना स्मृति से HRD मंत्रालय !

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#Newbuzzindia/नई दिल्ली | मोदी ने अपने कैबिनेट में विस्तार मंगलवार को किया। इसमें सबसे अधिक चर्चा में HRD मंत्री स्मृति ईरानी का तबादला है जिसने सियासी गलियारे में खलबली मचा दी है।
कैबिनेट विस्तार में स्मृति ईरानी से HRD मंत्रालय छीन लिया गया है और इसके स्थान पर उन्हें कपड़ा मंत्रालय दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार, स्मृति ईरानी को HRD मिनिस्ट्री से हटाने के पीछे मोदी और स्मृति के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद होना बताया जा रहा है, जिससे स्मृति को कैबिनेट विस्तार के जरिये दुसरा व् छोटा मंत्रालय सौपा गया।

मोदी और स्मृति के बिच निम्न मुद्दों पर मतभेद हुआ था-
1• HRD मंत्रालय ने देश में 20 विश्वस्तरीय मानको पर खरे उतरने वाले संस्थान खोलने का मन बनाया था। पर स्मृति और पीएमओ के बीच इस मुद्दे को लेकर 13 प्रोविजन पर अनबन थी। कयाश लगाए जा रहे है कि इसी के चलते स्मृति से HRD छीना गया है।
आपको बता दे कि शिक्षा के क्षेत्र में इस साल का यह सबसे बड़ा प्रोजेक्ट था।

2•  आईआईएम बिल को लेकर भी PMO इंडिया और स्मृति ईरानी के बीच मतभेद था। IIM बिल में 2 प्रोविज़न पर PMO राजी नही हो रहा था तो वहीं इस मुद्दे पर स्मृति ईरानी भी पीछे हटने को तैयार नही थी।

3• स्मृति ईरानी के द्वारा केंद्रीय संस्थानों में जर्मन भाषा के स्थान पर संस्कृत करना भी भारी पड़ा। स्मृति के इस कदम से IIT के पूर्व डायरेक्टर RK शिवगांवकर और IIT बॉम्बे के चेयरमैन अनिल ककोड़ ने नाखुश होकर इस्तीफा दे दिया।

4• हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रोहित बेमुला की आत्महत्या से भी स्मृति ईरानी विपक्ष के निशाने पर रही और अनेक तरह की स्थितियो का सामना भी करना भी पड़ा।

5• सुप्रीम कोर्ट की तरफ से स्मृति ईरानी को एक पत्र लिखा गया था जिसमे उन्हें कहा गया था कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सटी को अल्पसंख्यक यूनिवर्सटी के दर्जे से हटा दे। पर इस पर HRD मंत्री ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया की संविधान में ऐसे किसी संस्थान को चलाने की परमिशन नहीं है।

आपको बता दे कि, इन मुद्दों में से कुछ मुद्दों पर प्रधानमन्त्री के प्रमुख सचिव निरेंद्र मिश्रा ने उच्च शिक्षा सचिव वीएस ओबेरॉय से मीटिंग भी की थी, पर इन मीटिंग से किसी भी तरह का समाधान नही निकल पाया था।

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बिहार टॉपर घोटाला पर बोले कन्हैया कुमार, ‘प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री की डिग्री तो फ़र्ज़ी तो नहीं।’

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NewBuzzIndia:

जेएनयू छात्रसंघ अध्‍यक्ष कन्‍हैया कुमार ने बुधवार को कहा कि जब देश के पीएम और केंद्रीय शिक्षा मंत्री की डिग्री शक के घेरे में है हैं, ऐसे में बिहार के स्‍टूडेंट्स की डिग्री पर चर्चा करना कहां तक सही है। उन्‍होंने कहा कि बिहार का मामला देश में शिक्षा के स्‍तर के बारे में बताता है। कन्‍हैया से बिहार बोर्ड एग्‍जाम में टॉपरों के नकल करने और बाद में हुई गिरफ्तारियों पर यह बात कही।

कन्‍हैया जेल में बंद अपने संगठन एआईएसएफ के कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे। बाद में वे एक विरोध मार्च में शामिल हुए। इस मार्च को गांधी भवन पर रोक लिया गया। वहां जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए कन्‍हैया ने कहा, ‘बिहार में जो हुआ (टॉपर्स घोटाला) वो शर्मनाक है। हालांकि, इस देश में इससे ज्‍यादा शर्मनाक यह है कि लोग पीएम और केंद्रीय शिक्षा मंत्री की डिग्री पर सवाल उठा रहे हैं। मुझे नहीं पता कि पीएम और शिक्षा मंत्री की डिग्री असली हैं कि नहीं। मुझे नहीं पता कि आप (पीएम और शिक्षा मंत्री) ने शिक्षा ग्रहण की है कि नहीं। यह देश की शिक्षा मंत्री की डिग्री के बारे में नहीं है बल्‍क‍ि देश की शिक्षा के बारे में है।’ दरअसल, कन्‍हैया बिहार टॉपर्स घोटाले के बारे में बात कर रहे थे।

भारत माता बनी व्यक्ति के शिक्षित और अशिक्षित होने का मापदंड

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NewBuzzIndia:

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Smriti Zubin Irani, HRD Minister of India and BJP leader.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने यहां शुक्रवार को कहा कि कि भारत को मां मानने वाला ही शिक्षित कहा जाएगा। टुकड़े करने की बात करने वाला कतई नहीं। भारतीय शिक्षा पद्धति मनुष्य का निर्माण करती है और ऐसा नागरिक तैयार करती है, जिसमें राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव होता है। स्मृति ने ये बातें लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक संगोष्ठी में कही।

उन्होंने कहा, “कुछ अंग्रेजी पढ़े बुद्धिजीवी भारतीय शिक्षा पद्धति को संस्कृत का गुणगान कहते हैं तो कुछ पत्रकार इसे भगवाकरण, पर इससे शिक्षा में संस्कार भरने के लिए उठे कदम रुकने वाले नहीं हैं।” स्मृति ने यूथ इन एक्शन द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में राष्ट्रीय और भारतीय शिक्षा पद्धति पर व्याख्यान दिया। संगोष्ठी के दौरान स्मृति ईरानी ने कहा कि केंद्र की योजनाएं यूपी में जमीन पर नहीं उतर रहीं। साथ ही उन्होंने यूपी में महिला सुरक्षा पर भी चिंता जताई।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुक्रवार को ईरानी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रकरण की ओर इशारा करते हुए लोगों से पूछा, “आप ही बताइए, भारत के टुकड़े करने वाला शिक्षित है या जननी जन्मभूमिश्च की अवधारणा मानने वाला। क्या ऐसा करने वाले भारतीय शिक्षा पद्धति से परिचित होंगे या जो भारत को माता के रूप में पूजते हैं।” स्मृति ने भारतीय शिक्षा पद्धति को समाज को एकजुट करने वाला बताते हुए कहा, “ऐसे उद्देश्य को लेकर दी जाने वाली शिक्षा ही समाज को एकसूत्र में बांधती है। देश को विकास पथ पर अग्रसर करती है।”

अपने विरोधियों व पत्रकारों पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, “समाज के कुछ बौद्धिक लोग मुझे संस्कृत का गुणगान करने वाला कहते हैं। इसमें पत्रकारों का एक गुट शिक्षा के भगवाकरण करने का आरोप लगाता है। शायद इन्हें भारतीय शिक्षा पद्धति का ज्ञान ही नहीं है। अब आप ही बताइए, शिक्षित कौन? डिग्रीधारी, भौतिक जीवन जीने वाला या फिर समाज की एकता के लिए मानवीय रूप अख्तियार करने वाला।”