अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी के एक ऊचे हिस्से में बाघों की एक आश्चर्यजनक आबादी पाई गयी है। दिबांग घाटी का यह हिस्सा जमीन से लगभग 3,630 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। बर्फ की चादरों से ढकी यह जगह पूर्वी हिमालय के भारतीय हिस्से की सबसे ऊंची सीमा है। अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में इस ऊंचाई पर तीन साल की महनत और 108 कैमरे लगाने के बाद इन बाघों की तस्वीरें सामने आई है। भारत में पहली बार शेरों को इतनी ऊंचाई पर बर्फ के बीच देखा गया है। इससे पहले भूटान में शेरों को 4,200 मीटर और भारत के उत्तराखंड के जंगलों में 4,000 मीटर पर शेरों को देखा गया था। इन दोनों ही जगहों पर शेर ज्यादा ऊंचाई पर जरूर थे लेकिन यहां बर्फ़बारी नही होती थी। वहीं अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में शेरों को इस ऊंचाई पर बर्फ के बीच रहते हुए देखा गया है। इससे पहले सिर्फ रूस के अमुर शेरों को ही बर्फ के बीच रहते हुए देखा गया था।
दरअसल सबसे पहले 2012 में दिबांग घाटी के इस हिस्से में शेर के कुछ बच्चों को देखा गया था और इन बच्चों को वहां से 900 किलोमीटर दूर ईटानगर के एक चिड़ियाघर में भेज दिया गया था। जिसके बाद डब्लूआईआई (वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया) ने एनटीसीऐ (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) के साथ मिलकर इस जगह पर प्रारंभिक सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण का नेतृत्व वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया के गोपी और ऐशो शर्मा ने किया। सर्वेक्षण में इस बात के सबूत मिले के दिबांग घाटी के इस हिस्से में शेर रह रहे है। जिसके बाद जनवरी 2014 में इन शेरों की कुछ धुंधली सी तस्वीरें रिकॉर्ड की गयी और यह साफ़ हो गया कि मिश्मी हिल्स की इस सबसे ऊंची चट्टानों पर शेरों की बहुत बड़ी प्रजाति रह रही है।
इसके बाद तीन साल तक इन जगहों में शेरों की खोज की गयी और करीब 108 कैमरे लगाए गये। जिसके नतीजों को ‘जर्नल ऑफ़ थ्रेटनड टक्सा’ के नवीनतम अंक में प्रकाशित किया गया है। पत्रिका में दो बच्चों समेत 11 शेरों की 42 तस्वीरें प्रकाशित की गयी है। सर्वेक्षण करने वालों का कहना है कि “मिश्मी पहाड़ के और ऊंचे हिस्सों में भी शेर मौजूद है। हमने 4,000 वर्ग किलोमीटर की दिबांग घाटी में से सिर्फ 330 वर्ग किलोमीटर में सर्वे किया है। अगर हम और ऊपर जाएं और हमें और शेर जरूर मिलेंगे।”

