सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सिजन और दवाइयों की कमी के मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यदि कोई नागरिक सोशल मीडिया पर अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, तो इसे गलत जानकारी नहीं कहा जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि अगर कार्रवाई के लिए ऐसी शिकायतों पर विचार किया जाता है तो हम इसे अदालत की अवमानना मानेंगे।
कोर्ट ने केंद्र और राज्यों के डीजीपी को आदेश देते हुए कहा अफवाह फैलाने के नाम पर कार्रवाई की गई तो अवमानना का मामला चलाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि दवाओं का प्रोडक्शन और वितरण सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रहा है?
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने शुक्रवार सरकार से कई सवाल पूछे उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार सौ फीसदी टीकों की खरीद क्यों नहीं करती? इसे राष्ट्रीय टीकाकरण मॉडल पर राज्यों को वैक्सीन क्यों नहीं वितरित करती जिससे दामों में अंतर न रहे?
केंद्र सरकार की तरफ से पेश हलफनामे में कहा गया कि हमारी हर महीने एक करोड़ से अधिक रेमडेसिविर उत्पादन की क्षमता है। जिसपर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि लोगों को ऑक्सिजन सिलेंडर के लिए रोते हुए सुना है। राजधानी दिल्ली में ऑक्सिजन नहीं है। गुजरात, महाराष्ट्र में भी ऐसा है।
आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया था और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा था कि वो बताए कि कोरोना पर उसका प्लान क्या है।
