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भारत का रूस के साथ S-400 रक्षा सौदे पर हो सकता है समझौता,बढ़ी अमेरिका की चिंता

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को दो दिन की यात्रा पर भारत आ रहे हैं। पुतिन अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दोनों नेता ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध के मद्देनजर कच्चे तेल की स्थिति समेत विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं अंतराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं। इस दौरान रूस के साथ एस-400 वायु प्रतिरक्षा प्रणाली सौदे पर समझौता हो सकता है। 19वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेता रूसी रक्षा कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध की पृष्टभूमि में द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की भी समीक्षा कर सकते हैं। पुतिन की भारत यात्रा के दौरान मुख्य जोर एस-400 वायु प्रतिरक्षा प्रणाली सौदे पर समझौते पर केंद्रित रहेगा।

5 अरब डॉलर से ज्यादा का है एस-400 सौदा

व्लादिमीर पुतिन की इस यात्रा की मुख्य विशेषता एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति के लिए समझौते पर दस्तखत करना होगा और यह करार पांच अरब डॉलर की राशि से ज्यादा का होगा। पुतिन के शीर्ष विदेश नीति सलाहकार युरी उशाकोव ने कहा कि राष्ट्रपति 4 अक्टूबर को भारत रवाना हो रहे हैं और इस दौरान एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति के लिए समझौते पर जोर होगा। इस खरीद से अमेरिका के काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट (सीएएटीएसए) का उल्लंघन होगा। हालांकि इससे छूट मिलने की संभावना है।

अमेरिका की भारत को चेतावनी,रूस से हथियारों का सौदा करने पर लग सकते हैं प्रतिबंध

पुतिन के दौरे का असर अमेरिका और भारत के संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है। अमेरिका ने पुतिन के दौरे से पहले भारत को चेतावनी दी है। उसने कहा है कि मॉस्को के साथ किसी भी तरह का रक्षा सौदा करने पर भारत को अप्रत्यक्ष प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिकी प्रतिबंध कॉउंटरिंग अमेरिकास एडवर्सरीज़ थ्रू सैंक्शन एक्ट (CAATSA) कानून का हिस्सा हैं। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में रूसी हस्तक्षेप, सीरियाई विद्रोह में रूस की भूमिका और क्रीमिया पर कब्जा करने के लिए रूस को सजा देने के लिए इस कानून को लाया गया है। हम अपने सभी साथियों और साझेदारों से आग्रह करते हैं कि वह रूस के साथ ऐसा कोई लेन-देन नहीं करे, जिससे उसके खिलाफ CAATSA लगाना पड़े। अमेरिकी राष्ट्रपति इसमें छूट दे सकते हैं यदि यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए कोई खतरा नहीं हो।

आंबेडकर का मानना था 10 साल के लिए हो आरक्षण,हर दस साल के लिए बढ़ाया जाता है:सुमित्रा महाजन

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लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने आरक्षण को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। रांची में आयोजित एक कार्यक्रम में महाजन ने कहा कि आंबेडकर जी ने खुद कहा था कि आरक्षण की जरूरत महज 10 सालों के लिए है। उन्होंने 10 साल के भीतर समतामूलक समाज की कल्पना की थी। लेकिन, ऐसा नहीं हो सका। अब भी हम हर 10 साल पर इसे अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ा देते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे आरक्षण मिला, मैं कुछ जीवन में बन गया तो मैंने जीवन के कितने क्षण ऐसे बिताए सोचने में कि मैंने मेरे समाज को बांटा कितना है।

हमे ये सोचना बहुत जरूरी है कि क्या उसका फायदा है। क्या आरक्षण की यही कल्पना था। महाजन ने कहा कि समाज और देश में सामाजिक सौहार्द के लिए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संदेश को मानना होगा और उनके रास्ते का अनुसरण करना होगा। छोटी जातियों में सुरक्षा की भावना होनी चाहिए आरक्षण को लेकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि अगर किसी को दी हुई चीज को तुरंत छीना जाए तो विस्फोट हो सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक स्थिति ठीक नहीं है, पहले एक वर्ग विशेष के साथ अन्याय किया गया तो इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे वर्ग के साथ भी अन्याय किया जाए। उन्होंने कहा कि हमे अन्याय की बराबरी नहीं करनी चाहिए। हमे लोगों को न्याय देना चाहिए, लोगों के मन में इस बात की भावना होनी चाहिए कि छोटी जातियों के साथ अन्याय नहीं होगा, उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।

 

ये समय की मांग है अब लोग इस बात को बिना किसी पूर्वाग्रह या राजनीति से ऊपर उठकर सोचें कि आखिर वो कौन सी व्यवस्था हो सकती है जिसके जरिए सही माएने में जिन्हें फायदा नहीं मिला है वो लोग भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनकर मूल धारा से जुड़ सकें। बता दें कि भविष्य का भारत कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि आरक्षण के जरिए हम समाज के उन तबकों को मुख्यधारा में शामिल कर सकते हैं जो सदियों से पिछड़े हुए हैं।

विदेश नीति में कांग्रेस की कामयाबी को नही भुना पाई मोदी सरकार ।

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Newbuzzindia : जवाहरलाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक कांग्रेस पार्टी की विदेश नीति दुनिया भर में कामयाब रही । रूस के साथ रिश्ते हो या मनमोहन सिंह द्वारा की गई nuclear deal हो । कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार के मुकाबले ज्यादा कामयाब रही है ।

आर्थिक मंदी के दौर में जब अमेरिका समेत सभी देशों की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई थी । तब मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत रही ।

जवाहरलाल नेहरू के दौर में भारत ने दोनों रूस और अमेरिका से अच्छे रिश्ते बनाए रखे । यह वो समय था जब भारत का डंका पूरी दुनिया में बजता था । आज जो लोग मोदी की विदेश नीति की तारीफ करते नही थक रहे है , उन्हें जवाहरलाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह की विदेश नीति पड़नी चाहिए ।

मोदी जी पाकिस्तान जाते है तो बदले में पठानकोट मिलता है । मोदी जी चीन जाते है तो वह पाकिस्तान के साथ चला जाता है । यहाँ तक की नेपाल और रूस जैसे हमारे पुराने दोस्त भी अब हमारे खिलाफ होते जा रहे है ।

इतने सब के बाद भी भक्त “मोदी-मोदी” करते नही थक रहे है । विदेश नीति के नाम पर अमेरिका-अमेरिका कर रहे है । मेक इन इंडिया की बात करने वाले मोदी जी अमेरिका में बने हथियारों का भंडार खरीद रहे है । दुगनी कीमत पर राफेल सौदा करते है और उनका निर्माण भी फ्रांस में करवाते है ।

नजर डाली जाए तो मोदी सरकार की विदेश नीति में कई विफलताएं है । जिनमें प्रमुख है –
* NSG
* राफेल सौदा
* पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद
* पाकिस्तान-रूस सैन्याभ्यास
* चीन का पाकिस्तान को समर्थन

मोदी सरकार के आने के बाद भारत के सबसे भरोसेमंद और पुराने दोस्त रूस ने भी पाकिस्तान से नजदीकियां बड़ा ली है । रूस पाकिस्तान के साथ सैन्य अभ्यास कर रहा है । पाकिस्तान को हथियार बेच रहा है और आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा भी नजर आ रहा है । रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने पाकिस्तान को सन्देश भेजते हुए कहा है कि ” रूस आतंकवाद के मुद्दे पर उसके साथ है”

मोदी भक्त मीडिया चाहे कुछ भी कहे लेकिन अगर आंकड़ों और तथ्यों पर नजर डाली जाए तो विदेश नीति के मुद्दे पर मोदी सरकार पूरी तरह फेल रही है ।

लेखक : रोहित गुप्ता
ईमेल   : rohit.newbuzzindia@gmail.com

अगर पाकिस्तान युद्ध चाहता है तो युद्ध हो जाने दो..!

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Newbuzzindia : उत्तरी कश्मीर के उरी शहर में आतंकवादियों ने रविवार को तड़के भारतीय सेना की एक बटालियन पर धावा बोल दिया जिसमें 17 सैनिकों की की जान चली गई। सेना का शिविर उरी में अपनी ब्रिगेड मुख्यालय से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित है।

उरी क्षेत्र के मोहरा में इसी तरह का हमला दो साल पहले भी आतंकवादियों के द्वारा किया जा चुका है। 5 दिसंबर 2014 को इस हमले में दस सुरक्षाकर्मी मारे गए थे।

उरी में इस हमले के बाद अपनी भावनाओं को भारतीय मुक्केबाजी स्टार विजेंदर सिंह ने सोशल माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर व्यक्त किए।
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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस और अमेरिका की अपनी यात्रा के इस भयंकर हमले के कारण स्थगित कर दिया है।

भारत में बढ़ती असहिष्णुता चिंता का विषय : अमेरिका 

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NewBuzzIndia: ​अमेरिका ने भारत में असहिष्णुता के बढ़ते मामले पर प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हुए इसे चिंता का विषय बताया है। कड़ी कार्रवाई न होने के कारण अपराधियों के बढ़ते हौसले को भी गंभीरता से लिया है। अमेरिका ने भारत सरकार से कहा है कि वे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। हर समुदाय के लोगों की सुरक्षा के उपाय किए जाएं। गोमांस का उपयोग करने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर बात करते हुए अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि सभी तरह की असहिष्णुता से मुकाबला करने में हम भारत सरकार का सहयोग करेंगे।
दरअसल हाल ही में मी‍डिया में कुछ ऐसी खबरें आई हैं जो समुदाय विरोधी हैं। इसमें प्रशासन की चुप्‍पी के कारण इससे गलत संदेश गया। इसी हफ्ते मध्य प्रदेश के मंदसौर में गोमांस होने की शक में दो महिलाओं की पिटाई की गई थी। यह सब कुछ पुलिस की मौजूदगी में ये सब हुआ था। उनके पास भैंस का मांस था जबकि लोगों को शक था कि उनके पास गोमांस है। इससे पहले गुजरात में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। यहां कुछ दिनों पहले दलित युवकों पर हमला किया गया था। दलित युवकों की पिटाई मृत गाय की खाल उतारने के आरोप में की गई थी।
कुछ महीने पहले पश्चिमी यूपी के बिसाहड़ा में गौ मांस के उपयोग को लेकर दो समुदायाें में संघर्ष हुआ था। घरों को आग के हवाले कर दिया गया था। महीनों तक वहां तनाव का माहौल रहा। राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप प्रत्‍यारोप लगाती रही।ऐसे में देश में ध्रवीकरण की राजनीति शरू होने का भी खतरा है। भारत में लोकतंत्र है और अमेरिका में भी लोकतंत्र है। ऐसे में लोकतंत्र के उलट हो रहे क्रिया कलापों पर अमेरिका ने कड़ी प्र‍तिक्रया व्‍यक्‍त की है।
अमेरिका ये बयान ऐसे वक्‍त पर आया है जब असहिष्णुता को लेकर देश में बीते दिनों खूब चर्चा हो चुकी है। कई लोगों ने देश में बढ़ती असहिष्णुता का हवाला देते हुए अपने पुरस्‍कार लौटा दिए थे। कई सिने अभिनेता और सेलीब्रिटी ने भी असहिष्णुता की बात की थी। अब जॉन किर्बी के भारत में असहिष्णुता की बात करने पर एक बार फर से इस बात के जोर पकड़ने के पूरे आसार हैं। बीते दिनों की तरह दुबारा लोग देश में बढ़ते असहिष्णुता की बात न शुरू कर दें। हालांकि अमेरिका का कहना है कि सहिष्णु विचारों को साकार करने के लिए दोनों देश को साथ मिलकर काम करना चाहिए। यह दोनों देशों के हित में है।

ओबामा को भाए मोदी , जून में फिर बुलाया अमेरिका !

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Newbuzzindia: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी साल जून में अमेरिका के दौरे पर जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो वो अपने दो साल के कार्यकाल में चौथी बार अमेरिका जाएंगे। इस बार पीएम मोदी वॉशिंगटन के स्टेट विजिट पर होंगे। ये दौरा दोनों देशों के बीच की द्विपक्षीय वार्ता के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस मुलाकात को लेकर उत्सुकता जताई है।

स्टेट विजिट दो देशों के रिश्तों को मजबूत करने का सबसे अहम माना जाता है। इसके दौरान दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों को मजबूत करने के लिए पॉम्प, आधिकारिक डिनर और कई आयोजन किए जाते हैं।

जाहिर है कि पीएम मोदी के स्टेट विजिट से बराक ओबामा अपने कार्यकाल में भारत-अमेरिका के संबंधों को एक बेहतर मुकाम पर ले जाना चाहेंगे, क्योंकि यह राष्ट्रपति के तौर पर उनके कार्यकाल में किसी नेता की आखिरी स्टेट विजिट होगी। मिल रही जानकारी के मुताबिक, बराक ओबामा अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले मोदी से मिलना चाहते थे।

पीएम मोदी और ओबामा की ये मुलाकात के अमेरिका के ‘एशिया फोकस’ और भारत की ‘लुक ईस्ट’ पॉलिसी पर चर्चा के लिहाज से बेहद खास होगी। बता दें इससे पहले स्टेट विजिट के तौर पर साल 2009 में मनमोहन सिंह अमेरिका गए थे।

ओबामा ने चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओं का 2011 और शी जिनपिंग का 2015 में स्टेट विजिट के दौरान स्वागत किया था। इनके अलावा ब्रिटेन, फ्रांस, मैक्सिको और साउथ कोरिया के प्रमुख भी स्टेट विजिट पर जा चुके हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी की सऊदी अरब यात्रा बिगड़ेगी पकिस्तान का खेल..

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Newbuzzindia: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सऊदी अरब यात्रा ने पाकिस्तान का खेल खराब कर सकते हैं, ये मानना है अमरीकी विशेषज्ञ का। इस संबंध में एक शीर्ष अमरीकी विशेषज्ञ का कहना है कि इससे पाकिस्तान को परेशानी हो सकती है क्योंकि आर्थिक और रणनीतिक अवसर भारत को तेल समृद्ध खाड़ी देश के करीब ला रहे हैं।

अमरीकी थिंक टैंक इंडिया इनिशिएटिव आफ दी हडसन इंस्टीट्यूट की अपर्णा पांडे ने कहा, ‘‘सालों तक सऊदी अरब को एक प्रमुख सहयोगी और आर्थिक मददगार मानने वाले पाकिस्तान को अब लग सकता है कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी भारत के हाथों अपने इस संरक्षक को खो रहा है। मोदी पिछले सप्ताह सरकारी यात्रा पर रियाद पहुंचे थे और इस यात्रा का राजनयिक महत्व था।’’

उन्होंने कहा कि मोदी की यात्रा और उनका गर्मजोशी से किया गया स्वागत पाकिस्तानी नेताओं को यह याद दिलाता है कि अंतर्राष्ट्रीय संबंध राष्ट्रीय हितों पर टिके होते हैं, केवल धर्म आधारित विचारधारा पर नहीं।’’

पांडे ने कहा, ‘‘आर्थिक और रणनीतिक मुद्दे भारत और सऊदी अरब को करीब ला रहे हैं, वैसे ही जैसे ये दोनों क्षेत्र भारत और अन्य देशों के संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं।’’  उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा संघर्ष को ही देखते हैं और एेसे में यह स्पष्ट रूप से भारत की जीत है।

इस यात्रा के दौरान शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज ने मोदी को देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘द किंग अब्दुल अजीज आर्डर’ प्रदान किया था। पांडे ने कहा कि सहायता के रूप में अरबों डालर देने और पाकिस्तानियों को बड़े पैमाने पर रोजगार देने के बावजूद सऊदी अरब ने कभी भी किसी पाकिस्तानी नेता को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान नहीं किया।

पांडे ने कहा कि वर्ष 2014-15 में 39.4 अरब डालर के द्विपक्षीय कारोबार के साथ भारत और सउदी अरब आर्थिक रूप से एक दूसरे के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसके विपरीत पाकिस्तान और सउदी अरब के बीच कारोबार मात्र 6.1 अरब डालर का है।  

भारत के लिए सउदी अरब उसके तेल आयात का मुख्य स्रोत है जो भारत की वार्षिक तेल मांग के पांचवें हिस्से की आपूर्ति करता है। उधर, सउदी अरब के लिए चीन, जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बाद भारत उसका पांचवां सबसे बड़ा उपभोक्ता है। पांडे साथ ही कहती हैं कि पाकिस्तान इस विकास को एक खतरे के तौर पर देख सकता है ।   उन्होंने कहा, ‘‘ या यह भी हो सकता है कि वह भारत के प्रति अपनी धारणा को बदले और उन आर्थिक तथा रणनीतिक अवसरों का लाभ उठाए जिनके चलते भारत उसके पुराने मित्र का वांछित सहयोगी बन रहा है।’’ 

मोदी शनिवार को अपनी दो दिवसीय यात्रा पर सउदी अरब आए थे। वर्ष 1956 में जवाहरलाल नेहरू, 1982 में इंदिरा गांधी और वर्ष 2010 में मनमोहन सिंह के बाद मोदी सउदी अरब की यात्रा पर जाने वाले चौथे भारतीय प्रधानमंत्री हैं।

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