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भोपाल में 10 मई तक बढ़ाया गया ‘कोरोना कर्फ्यू’, इस बार ज्यादा सख्त रहेगा प्रशासन

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राजधानी भोपाल में लगातार बढ़ रहे कोरोनावायरस के मरीजों और मौत के लगातार बढ़ रहे आंकड़ों से आजिज आकर जिला प्रशासन भोपाल ने जिले में पांचवीं बार लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला लिया है।

भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया द्वारा जारी आदेश में इस बात की पुष्टि की गई है कि भोपाल में 10 मई तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है जो अभी 3 मई तक था।

आपको बता दें कि इस बार के लॉकडाउन में प्रशासन ज्यादा सख्त रहेगा बेवजह घूमने वालों और बहाने बनाकर किसी अन्य अन्य कामों के लिए जाने वालों पर प्रशासन कड़ाई से निगरानी रखेगा और ऐसे व्यक्ति को पाए जाने पर उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

लॉकडाउन के दौरान उन्हीं व्यक्तियों को बाहर निकलने की अनुमति होगी जिन्हें जिला प्रशासन या राज्य सरकार द्वारा सक्षम पास उपलब्ध करवाए गए हैं।

कोरोना संक्रमण: भोपाल इंदौर में तबाही मचाने के बाद विंध्य पहुँचा कोरोना,रीवा में लगा 10 दिन का लॉकडाउन, सतना में कल लग सकता है…

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मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण अपने चरम पर पहुँच चुका है हालात यह है कि प्रदेश के सभी बड़े शहरों में शासन ने सख्ती करते हुए लॉकडाउन लगा दिया है। भोपाल और इंदौर के हालात आउट ऑफ कंट्रोल( Out Of Control) होते जा रहे हैं यहाँ के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन और इंजेक्शन की कमी से लोग लगातार मर रहे हैं।

यही कारण है कि बढ़ते कोरोना संक्रमण को रोकने के उद्देश्य से सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू(LOCKDOWN) लगाया जा चुका है। जो जिले इससे बच गए थे अब उन जिलों में भी अब जिला क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक करके लॉकडाउन का फैसला किया जा रहा है।

विन्ध्य की राजधानी रीवा ज़िला भी कोरोना से अछूता नहीं है यहाँ भी लगातार कोरोना के केसों में वृद्धि हो रही है यही कारण है कि जिला प्रशासन ने आज सम्पन्न हुई जिला क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में जिले में आज दिनाँक 14 अप्रैल से 25 अप्रैल तक सम्पूर्ण लॉकडाउन का एलान कर दिया गया है। बैठक में विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम, सांसद जनार्दन मिश्रा, पूर्व मंत्री व रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला मौजूद रहे।

लॉकडाउन के दौरान जिले में अस्पताल, दूध की दुकान, सहित आपातकाल सेवाएं चालू रहेंगी। वहीं होटल, किराना दुकानें, सब्जी मंडी, समेत आवागमन की सभी सेवाएं बंद रहेंगी। इस दौरान शहर के हर चौराहे पर पुलिस जवानों की मुस्तैदी रहेगी। बिना मास्क के घर से बाहर निकलने पर चालानी और दंडात्मक दोनों कार्रवाई की जाएगी और बेवजह घूमते पाए जाने पर ओपन जेल में रखा जाएगा।

इसी प्रकार रीवा के पड़ोसी जिले सतना में भी कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं आज सतना में रिकॉर्ड 242 कोरोना पॉजिटिव पाये गए। साथ ही 3 मौत भी दर्ज की गई। जिसको देखते हुए जिला प्रशासन ने दिए लॉक डाउन के संकेत दे दिए हैं। सतना में कल शाम से लॉकडाउन लगाया जा सकता है। यही कारण है कि जिला प्रशासन सतना ने कल 11 बजे एक बैठक बुलाई है जिसमे लॉकडाउन लगाने पर फैसला हो सकता है।

आपको बता दें कि मध्यप्रदेश के कई जिलों में 22 अप्रैल तक लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है। कोरोना मामले में सीएम प्रतिदिन क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक कर रहे हैं। प्रदेश में बीते 42 घंटे में सबसे अधिक 8,998 नए मामले सामने आए। प्रदेश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,53,632 तक पहुंच गई है। कोरोना से अब तक 4,261 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

 

 

शराब दुकानों पर मेहरबान हुई शिवराज सरकार, बन्द होने का प्रतिदिन इतना हर्जाना देगी

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मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने एकतरफ लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिलों में लॉकडाउन लगाकर जनता और मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ के रख दी है तो दूसरी तरफ सरकार को राजस्व घाटा होने के कारण सरकार भी पशोपेश में हैं।

मध्यप्रदेश में शराब दुकानों से सबसे ज्यादा राजस्व सरकार को प्राप्त होता है यही कारण है कि लॉकडाउन के बाद जब प्रदेश की शराब दुकान बंद हुई तो सरकार को नियमित खर्चे और कोरोनावायरस की व्यवस्थाओं के लिए खजाने में कमी दिखाई देने लगी।

सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में अगर शराब दुकानें 4 दिन से ज्यादा बन्द रहती हैं तो शराब दुकानों को हुए नुकसान की भरपाई सरकार ठेकेदारों को क्षतिपूर्ति राशि देगी।

देश में पिछले वर्ष 22 मार्च से लॉकडाउन लगाया गया था जो वित्तीय वर्ष 31 मार्च तक लगा रहा था जिससे प्रभावित शराब दुकानों के ठेकेदारों को आज तक उस राशि का भुगतान नहीं हुआ है लेकिन इस साल के नुकसान की भरपाई के लिए भी सरकार ठेकेदारों को क्षतिपूर्ति राशि देने की बात कर रही है।

प्रदेश सरकार को 1 दिन पूरे प्रदेश की शराब दुकानों के बंद होने से 36 करोड़ के से ज्यादा का नुकसान होता है अगर बात प्रदेश के 4 बड़े शहरों की करें तो यह नुकसान लगभग 20 करोड़ रुपए के ऊपर होता है।

भोपाल में इतना होता है नुकसान

राजधानी भोपाल में अगर शराब की दुकान है 1 दिन के लिए बंद होती हैं तो सरकार को एक करोड़ 75 लाख रुपए ठेकेदारों को क्षतिपूर्ति के तौर पर देना पड सकती है यही कारण है कि सरकार 4 दिन से ज्यादा शराब दुकानें बंद होने की भरपाई ठेकेदारों को करके प्रदेश की अर्थव्यवस्था में इनके योगदान को बनाए रखना चाहती है क्योंकि सरकार को डर है कि अगर वह क्षतिपूर्ति राशि भी नहीं देगी तो शराब दुकानदार शराब बेचना बंद कर देंगे और सरकार को राजस्व घाटा हो सकता है।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार के लिए शराब दुकान इतनी महत्वपूर्ण है कि पिछले साल के लॉकडाउन के दौरान सरकार ने शराब बिकवाने के लिए सरकारी कर्मचारियों तक की ड्यूटी लगा दी थी तो भोपाल में कई जगह तो महिला कर्मचारियों को भी शराब की दुकानों में बिठा दिया गया था जिसका बाद में विरोध हुआ और सरकार ने महिलाओं की जगह पुरुष पुरुष कर्मचारियों को दुकान पर बैठाया।