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अब प्रदेश में नहीं हो पाएगी हुक्का और रेव पार्टी,शिवराज सरकार ला रही है सख्त कानून

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भोपाल:- प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी चौथी पारी में एक नए तेवर और कलेवर के साथ दिखाई दे रहे हैं शिवराज ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद संभालते ही जिस प्रकार से ताबड़तोड़ कार्यवाही माफियाओं और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ की हैं उससे तो यही लगता है कि आने वाले दिनों में शिवराज के तेवर नरम नहीं होंगे।

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में होने वाली हुक्का और रेव पार्टी को सख्ती से बंद करने के लिए कानून लाने की बात की है मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का युवा नशे की लत का लगातार शिकार हो रहा है जिसके खिलाफ हमने नशा माफियाओं की कमर तोड़ने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार हम हुक्का पार्टी,रेव पार्टी और इन जैसी और अन्य पार्टियां जिसमे तंबाकू से बने उत्पादों या शराब का उपयोग होता है उन्हें पूर्णता बंद करने के लिए कानून लाने का विचार कर रहे हैं यह कानून इतने सख्त होंगे इनका उल्लंघन करना अपनी जिंदगी से खिलवाड़ करना होगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले दिनों एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुंडे माफियाओं को प्रदेश से भाग जाने की नसीहत दी थी उन्होंने कहा था की “सुन लो रे गुंडों और माफियाओं या तो प्रदेश छोड़ दो या गुंडई और माफियागिरी नही तो 10 फुट जमीन में नीचे गाड़ दूंगा”

भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार जल्द,सिंधिया समर्थकों को मिलेगा झुनझुना

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भोपाल- भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा जल्द ही अपनी कार्यकारिणी का विस्तार कर सकते हैं लेकिन इस कार्यकारिणी में सिंधिया समर्थकों को इस विस्तार में मायूसी हाथ लग सकती है।

लंबे इंतजार और मंथन के बाद भाजपा मध्यप्रदेश में अपनी कार्यकारिणी को कल मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कभी भी घोषित कर सकती है क्योंकि इस बारे में प्रदेशाध्यक्ष और राष्ट्रीय अध्यक्ष के बीच चर्चा भी हो चुकी है और जे पी नड्डा ने इसपर अपनी सहमति भी दे दी है।

प्रदेशाध्यक्ष वी.डी. शर्मा इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी चर्चा करके सिंधिया समर्थकों को कार्यकारिणी विस्तार में एडजस्ट करने पर बातचीत कर चुके हैं लेकिन सिंधिया के अड़ियल रूख को देखते हुए सभी समर्थकों को एडजस्ट करने पर सहमति नही बन पा रही है यही कारण है कि अब भाजपा सिंधिया के 2-3 खास समर्थकों को ही शामिल करने का मूड बना चुकी है।

सूत्रों की माने तो संघ के बढ़ते दवाब के कारण प्रदेशाध्यक्ष शर्मा खुद भी ऐसे लोगों को अपनी टीम में शामिल करना नहीं चाहते जो पहले कभी संघ और उसकी विचारधारा के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं इसी कारण वो ऐसे चेहरों को शामिल करके सबको चौका सकते हैं जो भले ही कांग्रेस से भाजपा मे आये हैं लेकिन उन्होंने कभी अनर्गल बयानबाजी नहीं की हो।

सिंधिया के ये समर्थक हो सकते हैं शामिल

बात अगर सिंधिया समर्थकों की करें तो भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में गिरीश शर्मा,मनोज चौधरी,पंकज चतुर्वेदी नई टीम में प्रमुखता से दिखाई दे सकते हैं।

वही अन्य जो समर्थक या तो अपने विवादित बयानों या संघ विरोधी बयानबाजी के कारण चर्चा में रहते हैं ऐसे लोगो को भाजपा कार्यकारिणी से बाहर का रास्ता दिखा सकती है।

कोरोना अपडेट: मध्यप्रदेश में 500 पार हुई कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या

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मध्यप्रदेश में कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या अब 500 के पार हो गई है। स्वास्थ्य संचालनालय मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति में इसकी पुष्टि की गई है।

स्वास्थ्य संचालनालय मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आज दिनाँक- 11/04/2020 को जारी हेल्थ बुलेटिन में प्रदेश 529 कोरोना पीड़ित मरीजों की पुष्टि की गई है।

प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले इंदौर में सामने आए हैं जहाँ पर पीड़ितों की संख्या अब 281 हो गई है जो कल की तुलना में 36 ज्यादा है।

प्रदेश की राजधानी भोपाल पीड़ितों की संख्या के हिसाब से प्रदेश में दूसरे स्थान पर है जहाँ पर पीड़ितो की संख्या 131 पहुंच गई है जो कल की तुलना में 15 ज्यादा है।

इसके दोनों के अलावा प्रदेश के 20 अन्य और जिलों में भी कोरोना वाइरस पहुंच चुका है यही कारण है कि जिला और राज्य प्रशासन लगातार लोगों को घर के अंदर रहने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की लगातार हिदायतें दे रहा है।

भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक शुरू, प्रत्याशियों की अंतिम सूची पर लगेगी मोहर।

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भाजपा कार्यालय में आज प्रदेश कार्यकारिणी और चुनाव समिति की बैठक शुरू हो गयी है। बैठक में आज प्रत्याशियों की अंतिम सूची पर मौहर लग सकती है। बैठक में प्रदेश के लगभग 20 वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और प्रदेश महामंत्री सुहास भगत की अध्यक्षता में यह बैठेक चल रही है। बैठेक में नरोत्तम मिश्रा, प्रभात झा, नंदकुमार सिंह चौहान, नरोत्तम मिश्रा और पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी भी शामिल हुए।

40 दिन 40 सवाल- कमल नाथ ने स्वास्थ सेवाएं को लेकर पूछा दूसरा सवाल

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भाजपा सरकार से 40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने प्रदेश की स्वाथ्य घोषणाओं और उनकी जमीनी स्तर की सच्चाई को उठाते हुए शिवराज सरकार से दूसरा सवाल पूछा है। कमलनाथ ने केंद्र सरकार के आकड़ों को पेश करते हुए मध्यप्रदेश को बीमारियों का अड्डा बताया है। साथ ही सरकार पर स्वाथ्य सेवाओं का बेड़ा गर्क करने का आरोप भी लगाया है। 

सवाल नंबर दो

मामा , क्या यही है तुम्हारी घोषणा और सच्चाई का फ़र्क ?
क्यों मप्र को बना दिया बीमारियों का नर्क ?’
कल मोदी सरकार ने बताया था कैसे हुआ मप्र की स्वास्थ्य सुविधाओं का बेड़ा गर्क ;


आज उन्हीं से सुनिये प्रदेश कैसे बन गया बीमारियों का नर्क:-


1) मप्र में पिछले 2 सालों में (2016-2017) एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन से 35 लाख 81 हजार 936 लोग पीड़ित हुए।
2) पिछले 2 सालों में (2016-2017) एक्यूट डायरिया से 14 लाख 80 हजार 817 लोग पीड़ित हुए।
3) पिछले 5 सालों में गंभीर संक्रामक बीमारियों से 3 लाख़ 91 हजार 18 लोग पीड़ित हुए।
4) पिछले 2 सालों में टाइफाॅइड से 2,29,532 लोग पीड़ित हुए ।
5) मप्र में 1आदमी के ग्रामीण क्षेत्र में अस्पताल में 1बार भर्ती होने पर औसत खर्च 25961रु आता है,जो बड़े राज्यों में सबसे अधिक की श्रेणी में है।जो बिहार जैसे राज्य में 15237रु,तमिलनाडु में 16042रु,उप्र में 15393 रु है।
6) पूरे देश में मप्र में सर्वाधिक 42.8% अर्थात 48 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हैं ।
7) मप्र के 68.9 % बच्चे खून की कमी के शिकार और 15 से 49 साल की 52.4% महिलाएं खून की कमी की शिकार हैं ।
8) मप्र में एक साल तक के बच्चों की मृत्यु दर देश में सबसे अधिक 47 अर्थात 90 हज़ार बच्चे अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते और मौत की आगोश में समा जाते हैं ।
9) बिहार, उत्तर प्रदेश के बाद तीसरा राज्य मप्र है,जहाँ कुल प्रजनन दर सर्वाधिक (टोटल फर्टिलिटी रेट ) 3.1 है।
10) मध्यप्रदेश में 89.6% महिलाओं की पूरी गर्भावस्था के दौरान पूरी जाँच नहीं होती ।
11) मध्यप्रदेश में 46% बच्चों का सम्पूर्ण टीकाकरण नहीं होता।
सोर्स :- NFHS – 4, NHP – 2018 केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”
“हार की कगार पर, मामा सरकार”

कमलनाथ और सीएम शिवराज की ट्विटर पर हुई नोकझोंक,फिर चर्चा में एमपी की सड़क

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मध्य प्रदेश की सड़क एक बार फिर चर्चा में हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने खराब सड़क की एक फोटो के साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा। इसके बाद उस पर रिप्लाई करते हुए सीएम शिवराज ने उस सड़क की फोटो को बांग्लादेश का बता दिया।

कमलनाथ ने ट्विटर पर लिखा, ‘मामा जी के राज में भ्रष्टाचारी रास्तों की लगी है झड़ी, और वाशिंगटन से अच्छी मख़मली सड़क कर लो घड़ी, भाजपा के सामने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड लजाते हैं, मामाजी जाते जाते तथाकथित विकास को घड़ी कर साथ लिए जाते हैं।

इसके बाद सीएम शिवराज ने रिप्लाई करते हुए लिखा कि, हमारे कांग्रेसी मित्रों का क्या कहना, पहले दिग्विजय जी पाकिस्तान के पुल को भोपाल ले आए, और अब कमलनाथ जी बांग्लादेश की सड़क को मध्य प्रदेश ले आए।

कमलनाथ और सीएम शिवराज की ट्विटर पर इस नोकझोंक के बाद मध्य प्रदेश की सड़कें फिर से चर्चा में आ गईं। साथ ही सीएम शिवराज के उस बयान की याद दिलाने लगी जब उन्होंने अमेरिका में कहा था कि मध्य प्रदेश की सड़कें वॉशिंगटन से भी अच्छी हैं।

धार में नीना का पत्ता कटेगा या रंजना से हाथ जोड़ेगी पार्टी,शेखावत से भी है नाराजगी

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भारतीय जनता पार्टी का राष्टीय संगठन यह जानने की कोशिश कर रहा है कि नीना वर्मा और रंजना बघेल का टिकट काटने पर चुनाव परिणामों पर कोई विपरीत असर तो नहीं पड़ेगा। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मध्यप्रदेश के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे इन दिनों मालवा-निमाड़ अंचल की नौ सीटों पर कार्यकर्त्ताओं से आमने-सामने चर्चा कर राजनीतिक हालात समझने की कोशिश कर रहे हैं। मंदसौर पुलिस फायरिंग की घटना के बाद से मालवा-निमाड़ अंचल में भारतीय जनता पार्टी को भारी नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस इलाके के नगरीय निकाय के चुनाव परिणाम भी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ गए थे।

धार जिले में पार्टी की गुटबाजी बनी है मुसीबत – विनय सहस्त्रकुद्धे ने धार जिले के कार्यकर्त्ताओं से वन-अू-वन चर्चा कर यह जानने की कोशिश की कि रंजना बघेल और नीना वर्मा के बीच तनातनी किस बात को लेकर रहती है। रंजना बघेल मनावर से विधायक हैं और नीना वर्मा धार से चुनी गईं थीं। नीना वर्मा भाजपा के वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा की पत्नी हैं। रंजना बघेल शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में 2013 से पहले तक मंत्री हुआ करतीं थीं। 2013 के बाद नीना वर्मा और रंजना बघेल में से किसी को मंत्री बनाने के लिए चयन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को करना था। मुख्यमंत्री ने पांच साल तक दोनों को ही मौका नहीं दिया।

नीना वर्मा सिर्फ ग्यारह हजार से अधिक वोटों से चुनाव जीतीं थीं। जबकि रंजना बघेल सोलह सौ से अधिक वोटों से चुनाव जीतीं थीं। पार्टी जिले में गुटबाजी पर काबू करने के लिए विवादास्पद विधायकों का टिकट काटने की तैयारी कर रही है। जिले की दोनों महिला नेत्रियां इस दायरे में आ रहीं हैं। दोनों महिला नेत्रियों के बीच की तनातनी मंत्रिमंडल में जगह पाने को लेकर ही रहती है। धार जिले में विधानसभा की कुल सात सीटें हैं। सरदारपुर में भाजपा मात्र 529 वोटों से चुनाव जीत पाई थी। विनय सहस्त्रबुद्धे से पार्टी कार्यकर्त्ताओं ने जिला भाजपा अध्यक्ष डा.राज बर्फा के रवैये को लेकर शिकायत भी की।

कार्यकर्त्ताओं का कहना था कि नगरीय निकाय के चुनाव में उम्मीदवारों का नाम तय करने से पहले डा. बर्फा ने पार्टी के किसी भी स्थानीय नेताओं को भरोसे में नहीं लिया। इसके कारण चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में गए। सहस्त्रबुद्धे ने पूर्व सांसद छतर सिंह दरबार को चर्चा में उनसे मनावर से विधानसभा चुनाव लड़ने के बारे में भी पूछा। बदनाबर के भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने स्थानीय उम्मीदवार को टिकट देने की मांग भी सहस्त्रबुद्धे के सामने रखी। बदनावर से भंवर सिंह शेखावत विधायक हैं। उनका घर इंदौर में है। शेखावत ने पिछला चुनाव 9812 वोटों से जीता था। जिले की पांच सीटें अभी भाजपा के पास हैं। धरमपुरी की सीट भाजपा ने 7573 वोटों से जीती थी।

चुनाव आया तो शिवराज सिंह चौहान को फिर याद आए पंडित कमल किशोर नागर

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वर्ष 2013 विधानसभा चुनाव के पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो दांव चले थे वहीं दांव वे इस चुनाव में जीत के लिए आजमा रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ठीक पांच साल बाद शुक्रवार को एक बार फिर शाजापुर जिले के ग्राम सेमली धाम पहुंच गए। यहां पंडित कमल किशोर नागर का आश्रम है। मुख्यमंत्री चौहान ने लगभग चालीस मिनट तक पंडित नागर से बंद कमरे मं चर्चा की। इस चर्चा के बाद वे चेहरे पर मुस्कान लेकर कमरे से बाहर निकले और सीधे हेलीकॉप्टर में बैठकर भोपाल आ गए। मुख्यमंत्री की मुस्कराहट का अर्थ यह निकाला जा रहा है कि पंडित कमल किशोर नागर ने उन्हें इस बार भी चुनाव जीतने का अशीर्वाद दे दिया है।

मालवा क्षेत्र की तेरह सीटों पर है पंडित नागर का प्रभाव – कथा वचक कमल किशोर नागर मालवा के संत के नाम से भी जाने जाते हैं। गौ संरक्षण में पंडित नागर की काफी महत्वपूर्ण भूमिका है। पंडित नागर का प्रभाव मालवा अंचल की तेरह सीटों पर देखने को मिलता है। गांव-गांव में पंडित नागर के अनुयायी मौजूद हैं। सितंबर माह में एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ उज्जैन में हुए संत समागम में पंडित कमल किशोर नागर भी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में एट्रोसिटी एक्ट के बारे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने का प्रस्ताव समागम में पारित किया गया था।

पंडित नागर की समागम में मौजूदगी से भाजपा की नींद उडी हुई थी। पिछला विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंडित नागर से दूरी बनाई हुई थी। पंडित नागर मुख्यमंत्री के इस रवैये से भी नाराज थे। शुक्रवार को अचानक मुख्यमंत्री सेमली धाम जा पहुंचे। बताया जाता है कि पहले तो पंडित नागर ने चुनाव में समर्थन देने से साफ इंकार कर दिया। लेकिन, बाद में वे तटस्थ रहने को तैयार हो गए। पंडित नागर के नाराज होने का असर भाजपा के ब्राह्मण वोट बैंक पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है।

रहते हैं इंदौर में और टिकट के लिए नज़र दूसरे जिलों की सीट पर

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मालवा एवं निमाड की लगभग आधा दर्जन विधानसभा सीटें ऐसी हैं जिन पर टिकट के लिए इंदौर में रहने वाले नेताओं की नजर रहती है। नेता भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों के हैं। जिन सीटों पर इंदौरी नेताओं की नजर रहती हैं वे सोनकच्छ,अलोट,बडवाह,महेश्वर,भोजपुर हैं। कांग्रेस में सोनकच्छ से टिकट के दावेदार पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा हैं। वर्मा इस सीट से लगातार चुनाव लड़ते रहे हैं। उनका घर और स्थायी पता इंदौर का है।

सोनकच्छ अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित सीट है। वर्मा देवास-शाजापुर की लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं। सोनकच्छ से विधायक राजेन्द्र वर्मा भी इंदौर में ही रहते हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। इंदौर में ही रहने वाले नगर निगम के पूर्व महापौर एवं मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष कृष्ण मुरारी मोघे खरगोन जिले की बडवाह सीट से टिकट मांग रहे हैं। मोघे खरगोन से सांसद रह चुके हैं।

इंदौर में ही रहने वाले कांग्रेस नेता एवं पूर्ण सांसद प्रेमचंद्र गुड्डू आलोट से टिकट मांग रहे हैं। आलोट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित सीट है। गुड्डू पहले भी यहां से विधायक रह चुके हैं। महेश्वर के भाजपा विधायक रमेश मेव भी इंदौर में रहते हैँ। महेश्वर भी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट है।

मालवा-निमाड़ की इन आरक्षित सीटों पर बाहरी व्यक्तियों के उम्मीदवार बनाए जाने के पीछे पार्टियों की अपनी मजबूरी है। इन क्षेत्रों में स्थानीय नेतृत्व का अभाव बड़ी समस्या है। इंदौर में ही रहने वाले शिवराज सिंह चौहान के संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा रायसेन जिले के भोजपुर से चुनाव लड़ते हैं।

साधु-संतों के आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की तनख्वाह की बढ़ोत्तरी

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गैरआरक्षित दल सपाक्स द्वारा अलग राजनैतिक संगठन बनाये जाने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ब्राह्मण वोटों को बचाने के लिए सक्रिय हो गए है। बुधवार को साधू संत और पूजारियों की गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें खुश करने के लिए मंदिर की दस एकड़ तक की भूमि नीलाम करने के अधिकार देने का वादा किया है। पुजारियों की तनखा भी 1000 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए प्रति माह कर दिया है।