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श्योपुर में एकता परिषद और सबलगढ़ में रामनिवास रावत का हो रहा है विरोध

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श्योपुर जिले की विजयपुर सीट पर कांग्रेस और एकता परिषद के बीच हुए समझौते के बाद आदिवासियों को दो गुटों में बांटने की कवायद तेज हो गई है। श्योपुर जिले में एक नया आदिवासी संगठन सहरिया विकास परिषद ने एकता परिषद के उम्मीदवार के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। सबलगढ़ में भी कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत को बाहरी बताकर कांग्रेस में ही उनका विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की यात्रा की तैयारियों के लिए सबलगढ़ गए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने कोंग्रेसियों ने रावत के खिलाफ नारेबाजी की।

सहरिया विकास परिषद उतारेगा श्योपुर जिले में अपने उम्मीदवार

श्योपुर जिला सहरिया आदिवासी बाहुल्य जिला है। एकता परिषद का इन आदिवासियों पर खासा प्रभाव है। एकता परिषद ने अपने दिल्ली मार्च के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से विजयपुर की सीट पर आदिवासी को कांग्रेस का टिकट देने का सुझाव रखा था। राहुल गांधी ने उम्मीदवार का नाम तय करने की जिम्मेदारी एकता परिषद के नेताओं पर डाल दी। एकता परिषद जिला पंचायत सदस्य गोपाल डी भास्कर का नाम आगे बढ़ाया है। विजयपुर से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत विधायक हैं उन्हें मुरैना जिले की सबलगढ़ सीट पर भेजा जा रहा है। सहरिया आदिवासी विकास परिषद भी जिले में आदिवासियों के बीच सक्रिय है।

सहरिया विकास परिषद, एकता परिषद के नेताओं पर भाजपा से हाथ मिलने का आरोप लंबे समय से लगा रही है। पिछले दो चुनाव में एकता परिषद ने भाजपा का खुलकर समर्थन किया था। इस चुनाव में वह कांग्रेस के साथ जा रही है। सहरिया विकास परिषद ने शुक्रवार को कराहल के झरेर गांव में बीस गांव के आदिवासियों की पंचायत बुलाई थी। इस पंचायत में एकता परिषद और भाजपा के उम्मीदवार के बहिष्कार का एलान किया गया। जिले में आदिवासियों के दो धड़े में बंट जाने की स्थिति में यहां चुनावी गणित बुरी तरह गड़बड़ा सकते हैं।

बाहरी के नाम पर सबलगढ़ में रामनिवास रावत का विरोध

एकता परिषद से हुए समझौते के तहत विजयपुर के विधायक रामनिवास रावत को मुरैना जिले की सबलगढ़ विधानसभा सीट से टिकट दिया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पहल पर रावत को सबलगढ़ भेजने के फैसले पर राज्य कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने अपनी सहमति भी दे दी है। रामनिवास रावत,सिंधिया के करीबी विधायक हैं। सिंधिया शुक्रवार को रावत को लेकर सबलगढ़ भी पहुंचे थे। सिंधिया की सबलगढ़ यात्रा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की श्योपुर यात्रा की तैयारियों से संबधित थी। सबलगढ़ में सिंधिया के स्वागत के दौरान कांग्रेसी नेताओं ने रावत का विरोध करते हुए नारेबाजी भी की। कांग्रेसी स्थानीय नेता को टिकट देने की मांग कर रहे थे।

एकता परिषद को मनाने राहुल गांधी ने कुर्बान की मध्यप्रदेश की एक सीट

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6 अक्टूबर को एकता परिषद के दिल्ली मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हिस्सा लिया था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इस मंच तक पहुंचने के लिए अपने एक विधायक रामनिवास रावत की सीट बदलना पड़ रही है। रामनिवास रावत मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक हैं। वे पिछले 28 साल से इस क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे हैं। रामनिवास रावत का निर्वाचन क्षेत्र श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट है। श्योपुर जिला राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। श्योपुर जिले में सहरिया आदिवासी वोट निर्णायक माने जाते हैं। इस आदिवासी वोट बैंक पर एकता परिषद का गहरा प्रभाव है। आदिवासी उसे ही वोट देते हैं जिसे देने का निर्णय एकता परिषद के नेता करते हैं।

आदिवासी वोट कांग्रेस को दिलाने के बदले में एकता परिषद के नेताओं ने विजयपुर की सीट उनके उम्मीदवार को देने की मांग राहुल गांधी के समक्ष रखी थी। राहुल गांधी ने इस मांग को तत्काल मंजूर भी कर लिया। बताया जाता है कि उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को कहा था कि रामनिवास रावत को किसी ओर सीट पर चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया जाए। रामनिवास रावत को दो विकल्प कमलनाथ की ओर से दिए गए थे। पहला श्योपुर और दूसरा सबलगढ़ विधानसभा सीट का विकल्प दिया गया था। सबलगढ़ सीट मुरैना जिले में आती है। बताया जाता है कि रामनिवास रावत ने पहले श्योपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मन बनाया था। लेकिन, कांग्रेस नेता तुलसीनारायण मीणा के बसपा में शामिल होने के बाद उन्होंने अपना ध्यान सबलगढ़ पर केंद्रित कर दिया है।

सबलगढ़ मुरैना जिले में आता है। यह क्षेत्र रावत बाहुल्य क्षेत्र है। पिछले चुनाव में इस सीट पर भाजपा के मेहरबान सिंह रावत चुनाव जीते थे। मेहरबान सिंह रावत की टिकट कटने की चर्चाएं भी भाजपा में चल रहीं हैं। रामनिवास रावत को यदि कांग्रेस सबलगढ़ से उम्मीदवार बनाती है तो भाजपा को मजबूरी में मेहरबान सिंह रावत को उम्मीदवार बनाना होगा। रामनिवास रावत की सीट विजयपुर से जिला पंचायत के सदस्य गोपाल भास्कर का नाम कांग्रेस के टिकट के लिए एकता परिषद ने कांग्रेस अध्यक्ष को सुझाया है।

रामनिवास रावत कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी हैं। वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष भी हैं। श्री रावत ने वर्ष 1990 में विजयपुर से पहली बार चुनाव लड़ा था। वे वर्ष 2003 का विधानसभा चुनाव हार गए थे। पिछले दो चुनाव से उनकी जीत का अंतर लगातार कम हो रहा है। इसकी वजह एकता परिषद का झुकाव भाजपा की ओर रहा है। एकता परिषद पिछले दो चुनाव से इस क्षेत्र में भाजपा का समर्थन करती आ रही है। कोलारस विधानसभा के उप चुनाव के दौरान एकता परिषद और कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया करीब आए थे। राहुल गांधी की एकता परिषद के नेताओं से मुलाकात में भी सिंधिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही थी।