3अगर मीडिया ट्रायल नहीं हुआ होता तो ?

लेकिन ये दौर देश ने पहली बार नहीं देखा और ना ही पाकिस्तान की मीडिया ने, याद कीजिए पाकिस्तान के स्कूल में हुई आतंकवादी घटना को और याद कीजिए दिल्ली में 29 अप्रैल 1999 को हुए जेसिका लाल मर्डर को, और याद कीजिए जब 2006 में दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, क्यों कि इन घटनाओं में अगर मीडिया ट्रायल ना हुआ होता तो शायद तस्वीर ही कुछ और होती,
यानि हर मीडिया पर्सन ने अपनी जिम्मेदारी को बड़ी संजीदगी से निभाया, लेकिन ये कहने का मतलब ये बिल्कुल नहीं था कि हर दिन एक मीडिया पर्सन अपने काम को संजीदगी से नहीं निभाता है, बेशक करता है लेकिन जब चम्मच चोर कहा जाने लगे, तो कुछ याद दिलाना जरूरी हो चला है,