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भोपाल: प्रत्याशियों की लिस्ट जारी करने से पहले भाजपा-कांग्रेस कार्यालय में बढ़ी सुरक्षा

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भोपाल स्थित भाजपा और कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय के बाहर पुलिस ने भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। बता दें कि आज भाजपा विधानसभा चुनावों के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर सकती है। वहीं कांग्रेस भी कल चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करेगी।

पुलिस को आशंका है कि टिकट न मिलने से नाराज कार्यकर्ता और समर्थक कार्यालय के बाहर तोड़फोड़ कर सकते है। जिसके चलते पुलिस ने दोनों ही कार्यालय के बाहर पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है।

https://youtu.be/iCvo4k6LY4c

40 दिन 40 सवाल- ‘मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ? क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?’

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान को लेकर कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से तेरहवां सवाल पूछा है। तेरहवें सवाल में कमल नाथ ने पूछा, ‘मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ? क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?’

सवाल नंबर तेरह –

मोदी जी की निगाह से देखिए मामा जी की विदेशी यात्राओं का कमाल,
निवेश में मध्यप्रदेश ठन ठन गोपाल ।
मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ?
क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का शिवराज ब्रांड झूठ ।

12 सालों से शिवराज जी देश विदेश में चमक-धमक के साथ इन्वेस्टर्स मीट कर रहे हैं। कहते हैं कि 40 लाख़ करोड़ रुपए के अनुबंध भी हुए हैं। सच क्या है? सच 23 जुलाई 2018 को लोकसभा में बताया गया।

1.वर्ष 2103-14 में भारत में कुल 24299.33 मिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आया।

इसमें से केवल 118.85 मिलियन डॉलर (यानी 0.49%) का निवेश मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया। इतने में से पूरा भी मप्र में नहीं आया।

2.वर्ष 2014-15 में भारत में कुल 30930.50मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश आया। इसमें से केवल 100.13 मिलियन डाॅलर (यानी 0.32%) मप्र और छतीसगढ़ में आया।

3.वर्ष 2015-16 में भारत में कुल 4000000मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश भारत में आया। इसमें से केवल 80.02 मिलियन डाॅलर (यानी 0.20%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

4.वर्ष 2016-17में भारत में 43478.27मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश भारत में आया।

इसमें से केवल 76.10 मिलियन डाॅलर ही (यानी 0.17%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

5.वर्ष 2017-18 में भारत में कुल 44856.75 मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश आया। इसमें से केवल 28.16 मिलियन डाॅलर (यानी 0.06%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

शिवराज जी, सरकारी खज़ाने से विदेश यात्रायें करने के बाद भी कोई निवेश करने क्यों नहीं आया?
क्योंकि निवेशक शिवराज सरकार के भ्रष्टाचार से भयभीत रहे।

शिवराज ब्राँड झूठ
सबसे ज्यादा विदेशी निवेश कर्नाटक, तमिलनाडु, आँध्रप्रदेश में आया, जहाँ भाजपा की सरकारें नहीं हैं।

40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,

मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

मध्यप्रदेश चुनाव : कांग्रेस की बैठक टलते ही फर्जी लिस्ट हुई वायरल

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस पार्टी की दिल्ली में चल रही बैठक को फिलहाल टाल दिया गया है। वहीं दूसरी ओर बैठक टलते ही सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों के नाम की एक लिस्ट वायरल होने लगी। जिसमें 150 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। लेकिन बाद में कांग्रेस पार्टी ने इस लिस्ट को फर्जी बताया है और जल्द ही मध्यप्रदेश की 230 सीटों पर चर्चाओं का दौर जल्द ही शुरु होगा।

150 नाम वाली फर्जी लिस्ट :

मध्यप्रदेश कांग्रेस पार्टी की मीडिया सेल की अध्यक्ष शोभा ओझा ने इस लिस्ट को फर्जी बताते हुए इसका खंडन किया है। बता दें कि इस लिस्ट में अटेर से हेमंत कटारे, रोघौगढ़ से जयवर्धन सिंह, पवई से मुकेश नायक, रीवा से कविता पांडे, गोविंदपुरा से गोविंद गोयल जैसे बड़े नेताओं के नाम शामिल थे।

मध्यप्रदेश चुनाव : भाजपा-कांग्रेस आज जारी कर सकती है टिकट

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आज भाजपा और कांग्रेस टिकटों का ऐलान कर सकती है। टिकटों को लेकर राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं के बीच दिल्ली में हो रही लगातार बैठकों में ये कयास लगाए जा रहें है कि टिकटों की घोषणा जल्द ही हो सकती हैं। दोनों ही पार्टियों में सीटों को लेकर अंर्तविरोध देखा जा रहा है। मीटिंग के दौरान बड़े नेताओं के भी आपस में भिड़ने की खबरें लगातार बनी हुई हैं।

भाजपा की मीटिंग धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में खत्म हो चुकी है वहीं कांग्रेस की मीटिंग राहुल गांधी के नेतृत्व में फिलहाल अभी भी जारी है। दोनों पार्टियों में सीटों को लेकर पार्टी नेताओं के बीच धमासान को विशेष तौर पर ध्यान दिया जा रहा है। आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को एक चरण में पूरे प्रदेश में चुनाव होने वालें हैं। वहीं 11 दिसंबर को इस चुनाव के परिणाम भी आ जाएंगे।

भाजपा की सीटों को लेकर दिल्ली स्थित धर्मेंद्र प्रधान के घर में बैठकों का सिलसिला आखिर कार  खत्म हो चुका है। जहां राष्ट्रीय स्तर के नेताओं और प्रदेश के नेताओं के बीच लगातार बैंठक हो रही थी, जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय, चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा समेत कई बड़े नेताओं के बीच सीटों के मंथन का दौर समाप्त हो चुका है और जल्द ही भाजपा अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस पार्टी की फिलहाल मीटिंग अभी जारी है, जहां प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष ज्योर्तिरादित्य सिंधिया मौजूद है। टिकट बटवारे को लेकर दिग्विजय सिंह और सिंधिया बे बीच भिड़ने की भी खबर वायरल हो रही थी। लेकिन बाद में सिंधिया ने इस बात का खंडन करते हुए कहा कि इस प्रकार की कोई भी विवाद हमारे बीच नहीं हुआ है।

दिगंबर अखाड़े ने कम्प्यूटर बाबा को किया निष्कासित

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गुरुवार को 1008 महामंडलेश्वर नामदेव त्यागी उर्फ कम्प्यूटर बाबा को दिगंबर अखाड़े ने निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही प्रयागराज कुंभ में अखाड़ा की गतिविधियों में बाबा शामिल नहीं हो पाएंगे। इस बात की पुष्ठी दिगंबर अखाड़े के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने की है। कम्प्यूटर बाबा अपने नाम और काम दोनों को लेकर हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं, फिलहाल बाबा राज्यमंत्री पद से  इस्तीफा देकर शिवराज के खिलाफ करने को लेकर चर्चाओं में बनें हुए हैं।

दिगंबर अखाड़े ने जारी किया पत्र।

बाबा का लगातार शिवराज पर वार :

शिवराज सरकार में राज्यमंत्री रहते हुए लगातार नर्मदा में हो रहे अवैध उत्खनन, गौरक्षा और मंदिर निर्माण के मुद्दे को उठाते रहते थे। जिसे लेकर सरकार की तरफ से किसी प्रकार का कदम ना उठाने पर बाबा ने इस्तीफा देकर शिवराज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकाल कर जगह-जगह आंदोलन करते नजर आ रहें थे।

बाबाओं को मंत्री बनाने पर हुआ था विवाद :

सरकार ने नर्मदानंदजी, हरिहरानंदजी, कंप्यूटर बाबाजी, भय्यूजी महाराज और योगेंद्र महंतजी को राज्य सरकार में राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया था। जिसे लेकर  विपक्ष लगातार सरकार पर महाकुंभ और नर्मदा घोटाले का  आरोप लगा रही थी, तभी कम्प्यूटर बाबा ने  भी बगावत कर शिवराज की मुश्किले बढ़ा दी थी। 

बाबा पर समागम के दौरान पैसे बांटे का आरोप :

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बाबा ने अपनी मन की बात के ज़रिए सरकार के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। जिसे लेकर 23 अक्टूबर को इंदौर, 30 अक्टूबर को ग्वालियर में उन्होंने मन की बात के ज़रिए संत समागम किया और अब 4 नवंबर को खंडवा, 11 नवंबर को रीवा, 23 नवंबर को जबलपुर में संतों के समागम में मन की बात करने की तैयारी में हैं। बाबा के ग्वालियर में हुए समागम मे पैसे बांटते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके  बाद बाबा पर आरोप लगाए जा रहे थे कि समागम में साधुओं को पैसा देकर बुलाया जाता है।

ग्वालियर समागम की तस्वीर

Exclusive: दिग्विजय सिंह से झड़प की खबरों का सिंधिया ने किया खंडन

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मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी की ख़बरें एक बार फिर सामने आ रही है. कल दिग्विजय सिंह की एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी थी. चिट्ठी में दिग्विजय सिंह ने सोनिया गाँधी से टिकट बटवारे वो लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. हालाँकि दिग्विजय सिंह ने इस चिट्ठी पर सफाई देते हुए इस चिट्ठी को फर्जी करार दे दिया था.

मीडिया में फैली सिंधिया-दिग्विजय में झड़प की खबर

मीडिया आज सुबह-सुबह सुबह खबर आई की देर रात स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में दिग्विजय सिंह और सिंधिया के बीच झड़प हो गयी थी. टिकट बटवारे को लेकर दिग्विजय सिंह और सिंधिया राहुल गाँधी के सामने ही बहस करने लगे. प्रदेश के दोनों दिग्गज नेताओं के बीच हुई इस लड़ाई के कारण राहुल गाँधी भी काफी नजर हो गए है.


सिंधिया ने किसी भी विवाद का किया खंडन

मीडिया में ख़बरें आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिग्विजय सिंह से किसी भी विवाद का खंडन किया है. सिंधिया के करीबी सू्त्रों के मुताबिक कल रात स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में उनका दिग्विजय सिंह से कोई विवाद नहीं हुआ. 

Update: दिग्विजय सिंह ने भी किया किसी भी तरह के विवाद का खंडन


ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद अब दिग्विजय सिंह ने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया से किसी भी तरह के विवाद का खंडन किया है। दिग्विजय सिंह ने अपने ट्विटर अककॉउंट पर लिखा कि “मीडिया में यह गलत खबर चलाई जा रही है कि मेरे और सिंधिये जी के बीच कोई विवाद हुआ है जिसमे राहुल गांधी जी को बीच बचाव करना पड़ा। मध्यप्रदेश कांग्रेस के हम सभी नेता एक है और इस भ्रष्ट भाजपा सरकाकर को मध्यप्रदेश में हारने के लिए प्रतिबद्ध है।


https://twitter.com/digvijaya_28/status/1057991702785351681?s=19

कैलाश की निगाहें इंदौर लोकसभा पर तो कई दिग्गज हार के डर से हट रहे हैं पीछे

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मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने दोनों हाथों में लड्डू रखने की रणनीति पर चल रहे हैं। विजयवर्गीय की निगाहें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर लगी है। विजयवर्गीय इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। अभी लोकसभा अध्यक्ष इस क्षेत्र से सांसद हैं। सुमित्रा महाजन अपनी राजनीतिक पारी समाप्त करने से पहले बेटे मंदार महाजन को विधानसभा में भेजना चाहती हैं। कुछ ही समय यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि कैलाश विजयवर्गीय और सुमित्रा महाजन के बेटे को पार्टी टिकट देती है या नहीं।

इंदौर की राजनीति में होगा बड़ा फेरबदल

राज्य में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनना और उसका नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान के हाथ में होना कैलाश विजयवर्गीय के लिए किसी भी स्थिति में अच्छे संकेत देने वाला नहीं रहा। कैलाश विजयवर्गीय को वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में इंदौर-2 की अपनी परंपरागत सीट को छोड़ना पड़ी थी। यह सीट उन्होंने अपने सहयोगी रमेश मेंदोला के लिए छोड़ी थी। विजयवर्गीय महू चुनाव लड़ने के लिए चले गए थे। वे चुनाव जीते भी।

इसके बाद से ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनकी दूरी बढ़ती गई। दूरी बढ़ने की बड़ी वजह पेंशन घोटाला रहा। इस घोटाले के लिए चौहान द्वारा बनाए गए आयोग की रिपोर्ट को अब तक विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया है। जबकि आयोग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। बताया जाता है कि विजयवर्गीय ने मेंदोला को मंत्री बनावाने के लिए ही मंत्री पद छोड़ा था। विजयवर्गीय को पार्टी ने राष्ट्रीय महा सचिव बना दिया। विजयवर्गीय पर उनका बेटा आकाश विजयवर्गीय टिकट के लिए दबाव बना रहे हैं। पार्टी एक ही टिकट देने को तैयार बताई जाती है।

सूत्रों ने बताया कि विजयवर्गीय ने इंदौर से लोकसभा का टिकट देने की मांग भी पार्टी के सामने रखी है। अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हुआ है कि आकाश विजयवर्गीय को महू से उम्मीदवार बनाया जाएगा या फिर इंदौर-दो से। इंदौर-दो से यदि आकाश को टिकट दी जाती है तो रमेश मेंदोला का भविष्य दांव पर होगा। सुमित्रा महाजन के बेटे को टिकट देने की स्थिति में परिवारवाद की चर्चा इंदौर की सड़कों पर भी सुनाई दे सकती है।

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सूर्यप्रकाश मीणा ने इज्जत बचाने लिखी चिट्ठी

कैलाश विजयवर्गीय के चुनाव न लड़ने के पीछे कारण और भी हैं। पार्टी में कई दिग्गज नेता अपने साथ-साथ अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए भी टिकट मांग रहे हैं। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव का नाम प्रमुख है। वे अपने बेटे अभिषेक के लिए देवरी से टिकट मांग रहे हैं। विजयवर्गीय फार्मूले को पार्टी ने यदि मान लिया तो कई नेताओं को अपने बेटों की खातिर घर बैठना पड़ेगा। राज्य में चौथी बार भाजपा की सरकार बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोशिश नए चेहरों को टिकट देने की है। इसमें बड़ा फायदा उनका ही है। पार्टी में उनके कद का कोई नेता चुनौती देने वाला नहीं होगा।

gopal bhargav

पिछले सप्ताह कैलाश विजयवर्गीय ने ही सार्वजनिक तौर पर कहा था कि अब नई पीढ़ी आगे आना चाहिए। उनका यह सुझाव कई नेताओं के लिए मुश्किल बन गया है। भाजपा में उथल-पुथल कई मोर्चों पर देखी जा रही है। राज्य के उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा का एक पत्र सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसमें उन्होंने चुनाव न लड़ने की इच्छा प्रकट की है। पत्र मुख्यमंत्री को लिखा गया है। मीणा का टिकट काटे जाने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही थी। वे अपने दावेदारी को लेकर पार्टी कार्यालय में बड़े नेताओं से मिले थे।

गुलाब सिंह किरार मामला : कांग्रेस ने पल्ला झाड़ किया सिंधिया को आगे

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व्यापम घोटाले में आरोपी गुलाब सिंह किरार ने मंगलवार को कांग्रेस की सदस्यता ली थी। एक दिन बाद ही किरार की सदस्यता कांग्रेस की समस्या बन गई। दरअसल राहुल गांधी के दो दिवसीय मालवा-निमाड़ दौरे में गुलाब सिंह किरार समेत नरसिंहपुर के तेंदूखेड़ा विधायक संजय शर्मा के अलावा इंदौर क्षेत्र के एक पूर्व विधायक कमलापत आर्य ने कांग्रेस का दामन थामा था, पर बुधवार को कांग्रेस किरार से पल्ला झाड़ते द्खिाई दी। 

गुलाब सिंह किरार का मामला :

गुलाब सिंह किरार पर व्यापम घोटाले में मुख्य आरोपी जगदीश सागर को पैसे देने का आरोप है। दरअसल गुलाब सिंह किरार अपने बेटे शक्ति प्रताप सिंह को एडमिशन दिलाने के लिए जगदीश को पैसे दिए थे। उन पर ग्वालियर के झांसी रोड थाने में मामला दर्ज होने के बाद से वे लंबे समय तक फरार थे। गुलाब सिंह शिवराज के खास थे, जिस कारण शिवराज ने उन्हें राज्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का अध्यक्ष और राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। लेकिन व्यापमं घोटाले में नाम आने के बाद किरार को पार्टी ने निलंबित कर दिया था।

गुलाब सिंह किरार

कांग्रेस ने झाड़ा पल्ला :

शिवराज सरकार पर खुल कर व्यापम घोटाले का आरोप लगाने के बाद राहुल गांधी ने व्यापम के आरोपी किरार को इंदौर में कांग्रेस की सदस्यता दिलाई, इसके साथ ही किरार और राहुल गांधी की फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। कांग्रेस मीडिया सेल की चेयरमैन शोभा ओझा का कहना है कि ‘किरार सिर्फ सिंधिया से मिलने आए थे। पार्टी में वो शामिल नहीं हैं।’ शोभा ओझा के इस बयान के बाद सिंधिया के लिए ये समस्या का कारण बनती नजर आ रही है।

मध्यप्रदेश के चुनावी दगंल में संतों और बाबाओं को शीर्षासन

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दो दिन बाद मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का काम शुरू हो जाएगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में साधु-संत और बाबा भी शीर्षासन करते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तीन बाबाओं को मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद संतों और सन्यासियों की इच्छा भी सिंहासन पर बैठने की हो गई है। सिहांसन की इच्छा रखने वाले बाबाओं के सामने साध्वी उमा भारती और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उदाहरण भी है।

बाबाओं की भस्मासुरी भूमिका

इसी साल अप्रैल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। ये धर्म गुरु नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भैयू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत थे। भय्यूजी महाराज ने दर्जा मिलने के कुछ दिनों बाद ही इंदौर में अपने निवास पर आत्महत्या कर ली थी। बाबाओं और संतों को दर्जा दिए जाने से पूर्व सरकार ने नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता अभियान चलाने के लिए गठित विशेष समिति में 31 मार्च को शामिल किया था।

कंप्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को उपकृत करने के पीछे नर्मदा वृक्षारोपण का घोटाला बड़ी वजह बताई गई थी। इन दोनों ने ही शिवराज सिंह चौहान सरकार की पोल खोलने के लिए नर्मदा यात्रा निकालने का एलान किया था। राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद सारे बाबा शिव भक्ति में लीन हो गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफें भी इन बाबाओं द्वारा की गईं। हाल ही में कंप्यूटर बाबा ने राज्यमंत्री का दर्जा वापस लौटाकर शिवराज सिंह चौहान पर एक बार फिर आरोप लगाना शुरू कर दिया है।

कंप्यूटर बाबा ने कहा कि हजारों संतों ने मुझ पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया था. मुख्यमंत्री ने मुझसे वादा किया था कि मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन नहीं होगा, गाय की दुर्दशा नहीं होगी, मठ-मंदिरों के संत जो कहेंगे, वह करेंगे। इस्तीफे के पहले कंप्यूटर बाबा की प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ से हुई मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। कंप्यूटर बाबा को मनाने का शिवराज सिंह चौहान का प्रयास भी पूरी तरह विफल रहा। कंप्यूटर बाबा अब जगह-जगह राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कल यानि 30 अक्टूबर को ग्वालियर में बाबाओं और संतों का जमावड़ा भी लगाया। ज्यादतर बाबा भंडारे में शामिल होने के लिए बुलाए गए थे।

राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से ही संतों और सन्यासियों का राजनीतिक रूतबा काफी बढा़ है। पिछले दो साल से स्वामी अवधेशानंद जी को शिवराज सिंह चौहान के संकट मोचक के तौर पर देखा जा रहा है। स्वामी अवधेशनंद जी के भक्त प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह भी हैं। वे हर साल रामकथा भी करते हैं। शिवराज सिंह चौहान और अजय सिंह के राजनीतिक रिश्ते के साथ-साथ व्यक्तिगत रिश्ते भी विरोध के ही हैं। दो माह पूर्व स्वामी अवधेशनंद और संघ के सर कार्यवाह भैय्या जी जोशी की मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। चुनाव से ठीक पहले साधु-संतों की सक्रियता ने राजनीतिक दलों को हैरान कर दिया है।
कांग्रेस इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति मान रही है। प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि राजनीति में कांग्रेस ने कभी धर्म को ढाल नहीं बनाया। माना यह जा रहा है कि साधु-संतों के मैदान में आने से सरकार विरोधी वोट का पूरा लाभ कांग्रेस को नहीं मिल पाएगा।

सवर्णों की राजनीति भी है बाबाओं के पीछे

राज्य में एट्रोसिटी एक्ट के ताजा संशोधनों का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। सीधा टकराव अनुसूचित जाति और समान्य वर्ग के बीच दिखाई दे रहा है। सपाक्स, समान्य एवं पिछड़ा वर्ग के वोटों के धुर्वीकरण से लाभ उठाना चाहती है। राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की आबादी 36 प्रतिशत से अधिक है। सवर्ण आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ग्वालियर-चंबल संभाग में देखने को मिला था।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन में हिस्सेदारी कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें दतिया में पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। ठाकुर का कर्मक्षेत्र वृन्दावन है। लेकिन, वे राजनीति करने मध्यप्रदेश में आ रहे हैं। आज उन्होंने सर्वसमाज कल्याण पार्टी से अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने का एलान भी किया है। ठाकुर ने दावा किया है कि पार्टी वर्ष 2013 में बनाई गई। इसी तरह पंडोखर सरकार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में अपनी संभावानाएं देख रहे हैं। उन्होंने सांझाी विरासत नाम से पार्टी के गठन का एलान किया है। पचास सीटों पर वे अपने उम्मीदवार उतारेंगे।


राज सिंहासन की चाह में कई बाबा मांग रहे हैं टिकट

उज्जैन दक्षिण से महंत अवधेशपुरी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। बाबा ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा भाजपा के बड़े नेताओं को बता दी है। अवधेशपुरी महाराज कहते हैं कि उनके क्षेत्र के लोगों की इच्छा भी है कि वे चुनाव लड़ें। अपने टिकट की दावेदारी के पीछे वे पिछले बीस सालों में भाजपा के लिए किए गए कामों को सबसे मजबूत आधार मानते हैं। बाबा के पास डॉक्टरेट की उपाधि है। सिवनी जिले के केवलारी से संत मदनमोहन खडेश्वरी टिकट मांग रहे हैं। संत मदन मोहन टिकट मिलने से पहले ही जीत का दावा कर रहे हैं। मदन मोहन कहते हैं कि उनकी चुनाव लड़ने की तैयारी पूरी है। अगर भाजपा से टिकट नहीं मिला तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। रायसेन जिले के सिलवानी से टिकट के दावेदार महेंद्र प्रताप गिरि हैं। बाबा कहते हैं कि अगर संगठन ने उनको टिकट नहीं दिया तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। इसी जिले की उदयपुरा सीट से संत रविनाथ टिकट मांग रहे हैं। संत रविनाथ नर्मदा को बचाने के लिए विधायक बनना चाहते हैं।

40 दिन 40 सवाल: कमल नाथ ने पूछा बारहवां सवाल- ‘मामा जी, क्या गौ माता नहीं, गोल्फकोर्स से है प्यार ?’

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40 दिन 40 सवाल पूछने के सिलसिले में मध्य प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से बारहवां सवाल पूछा है. बारहवें सवाल में कमल नाथ ने गौ माता पर हो रहे अत्याचार को लेकर सवाल किया है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, मोदी जी ने बताया मामा जी के मुखौटे में नहीं है दम, मप्र में गौ माता हो गईं कम। मामा जी, क्या गौ माता नहीं, गोल्फकोर्स से है प्यार ? गौ माता के भोजन पर भी क्यों करते हैं वार ?

सवाल नंबर बारह

1)बीजेपी के लोग गौ-माता के नाम पर ख़ूब हल्ला मचाते हैं।
हम हर पंचायत में गौशाला खोलने का वचन दें, तो इनके पेट दुख जाते हैं ।
आइए,देखिए मामा जी गौ माता की कितनी अनदेखी किए जाते हैं:

2) मामा सरकार की पोल खोल रही है मोदी सरकार की लाइव स्टॉक सेंसस की रिपोर्ट ,जो यह बताती है कि:
18 वीं सेंसस में मध्यप्रदेश में गौ -धन की संख्या में भारी कमी आई है। मध्यप्रदेश में 18 वीं सेंसस में 2 करोड़ 19 लाख़ गौधन था ,जो 5 सालों में कम होकर 1करोड़96 लाख़ रह गया ।

3) यानी मामा के शासनकाल में 23 लाख़ 13 हज़ार गौ-धन खत्म हो गया ।
4) शिवराज जी, जवाब दीजिए? 23लाख़ 13हज़ार गौ-धन कहाँ गया ?
5)भैंसों की संख्या 91लाख़ 29हज़ार से कम होकर 81लाख़ 87हज़ार रह गई। शिवराज जी, जवाब दीजिए 9 लाख़ 41 हज़ार भैंसें कहाँ गायब हो गयीं?

6) सभी तरह के पशुधन में 43लाख़ 62 हज़ार की कमी आई है । क्या मध्यप्रदेश में अवैध कत्लखाने चल रहे हैं ?
7) इतना ही नहीं, शिवराज सिंह की सरकार ने हमारे राज्य की देशी प्रजातियों को खत्म करने का काम किया है। मध्यप्रदेश में 26 लाख़ 79 हज़ार देशी प्रजाति के पशु खत्म हो गए।

8) क्या यह सही है कि आपने प्रावधान तो गौ शाला के लिए प्रति गाय लगभग 17 रु किया, मगर 2 रु भी ख़र्च नहीं किये ?
2013-14 में सालाना 608 रुपए अऩुदान दिया गया,प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रु 66 पैसे
-2014-15 में सालाना 635 रु अऩुदान दिया गया,प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 73 पैसे

-2015-16 में सालाना 591 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 61 पैसे।
-2016-17 में सालाना 577 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 58 पैसे।
-2017-18 में सालाना 679 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 86 पैसे

9) मामा जी,क्या गौ माता का खाना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया ?

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,

मामा सरकार की बदहाली का हाल।”