मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने दोनों हाथों में लड्डू रखने की रणनीति पर चल रहे हैं। विजयवर्गीय की निगाहें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर लगी है। विजयवर्गीय इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। अभी लोकसभा अध्यक्ष इस क्षेत्र से सांसद हैं। सुमित्रा महाजन अपनी राजनीतिक पारी समाप्त करने से पहले बेटे मंदार महाजन को विधानसभा में भेजना चाहती हैं। कुछ ही समय यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि कैलाश विजयवर्गीय और सुमित्रा महाजन के बेटे को पार्टी टिकट देती है या नहीं।
इंदौर की राजनीति में होगा बड़ा फेरबदल
राज्य में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनना और उसका नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान के हाथ में होना कैलाश विजयवर्गीय के लिए किसी भी स्थिति में अच्छे संकेत देने वाला नहीं रहा। कैलाश विजयवर्गीय को वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में इंदौर-2 की अपनी परंपरागत सीट को छोड़ना पड़ी थी। यह सीट उन्होंने अपने सहयोगी रमेश मेंदोला के लिए छोड़ी थी। विजयवर्गीय महू चुनाव लड़ने के लिए चले गए थे। वे चुनाव जीते भी।
इसके बाद से ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनकी दूरी बढ़ती गई। दूरी बढ़ने की बड़ी वजह पेंशन घोटाला रहा। इस घोटाले के लिए चौहान द्वारा बनाए गए आयोग की रिपोर्ट को अब तक विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया है। जबकि आयोग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। बताया जाता है कि विजयवर्गीय ने मेंदोला को मंत्री बनावाने के लिए ही मंत्री पद छोड़ा था। विजयवर्गीय को पार्टी ने राष्ट्रीय महा सचिव बना दिया। विजयवर्गीय पर उनका बेटा आकाश विजयवर्गीय टिकट के लिए दबाव बना रहे हैं। पार्टी एक ही टिकट देने को तैयार बताई जाती है।
सूत्रों ने बताया कि विजयवर्गीय ने इंदौर से लोकसभा का टिकट देने की मांग भी पार्टी के सामने रखी है। अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हुआ है कि आकाश विजयवर्गीय को महू से उम्मीदवार बनाया जाएगा या फिर इंदौर-दो से। इंदौर-दो से यदि आकाश को टिकट दी जाती है तो रमेश मेंदोला का भविष्य दांव पर होगा। सुमित्रा महाजन के बेटे को टिकट देने की स्थिति में परिवारवाद की चर्चा इंदौर की सड़कों पर भी सुनाई दे सकती है।

सूर्यप्रकाश मीणा ने इज्जत बचाने लिखी चिट्ठी
कैलाश विजयवर्गीय के चुनाव न लड़ने के पीछे कारण और भी हैं। पार्टी में कई दिग्गज नेता अपने साथ-साथ अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए भी टिकट मांग रहे हैं। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव का नाम प्रमुख है। वे अपने बेटे अभिषेक के लिए देवरी से टिकट मांग रहे हैं। विजयवर्गीय फार्मूले को पार्टी ने यदि मान लिया तो कई नेताओं को अपने बेटों की खातिर घर बैठना पड़ेगा। राज्य में चौथी बार भाजपा की सरकार बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोशिश नए चेहरों को टिकट देने की है। इसमें बड़ा फायदा उनका ही है। पार्टी में उनके कद का कोई नेता चुनौती देने वाला नहीं होगा।

पिछले सप्ताह कैलाश विजयवर्गीय ने ही सार्वजनिक तौर पर कहा था कि अब नई पीढ़ी आगे आना चाहिए। उनका यह सुझाव कई नेताओं के लिए मुश्किल बन गया है। भाजपा में उथल-पुथल कई मोर्चों पर देखी जा रही है। राज्य के उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा का एक पत्र सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसमें उन्होंने चुनाव न लड़ने की इच्छा प्रकट की है। पत्र मुख्यमंत्री को लिखा गया है। मीणा का टिकट काटे जाने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही थी। वे अपने दावेदारी को लेकर पार्टी कार्यालय में बड़े नेताओं से मिले थे।
