Raigarh: महिला कांस्टेबल से अभद्र हिंसा के मामले में गिरफ्तारी, पर भीड़ को भड़काने वाले अब तक कार्यवाही से बाहर क्यों ?

रायगढ़ | 2 जनवरी 2026

रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में 27 दिसंबर 2025 को आयोजित जिन्दल पावर के सेक्टर-1 कोल ब्लॉक से जुड़ी जनसुनवाई, जो विकास और संवाद का मंच होनी थी, वह कुछ ही घंटों में हिंसा, धमकी और अराजकता की भयावह तस्वीर बन गई। खुले मंच से प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और कुरुक्षेत्र से सांसद Naveen Jindal को गालियों के साथ जान से मारने की धमकियाँ दिए जाने के आरोप सामने आए। हालात बिगड़े तो औद्योगिक परिसर में तोड़-फोड़ हुई और सबसे शर्मनाक घटना के तौर पर एक महिला कांस्टेबल के साथ अमानवीय बदसलूकी की गई।

पुलिस कार्रवाई: पांच गिरफ्तार, दो फरार

महिला कांस्टेबल पर जानलेवा हमला, कपड़े फाड़ने, अभद्र व्यवहार और लूटपाट जैसे गंभीर आरोपों में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि दो अन्य फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं और आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर गहन विवेचना की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना से जुड़े हर पहलू की जांच होगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पर सवाल कायम—उकसावे के चेहरे कहां?

गिरफ्तारियां होने के बावजूद सबसे अहम सवाल यही है कि भीड़ को भड़काने, धमकी भरी भाषा देने और माहौल उग्र करने वाले चेहरों पर कार्रवाई अब तक क्यों नहीं दिखी? इसी घटनाक्रम के बीच राधेश्याम शर्मा नामक व्यक्ति का भड़काऊ बयान वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें हथियार उठाने और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को नुकसान पहुँचाने जैसी बातें कही गईं।
मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस वीडियो की भूमिका और समय-संबंध जनसुनवाई के दौरान फैली अराजकता से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस पर औपचारिक पुष्टि या कार्रवाई की जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

ग्रामीणों की गिरफ्तारी, पर ‘इंस्टिगेटर’ पर चुप्पी क्यों?

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि आदिवासी समाज के सीधे-साधे ग्रामीणों को उकसाकर हालात बिगाड़े गए। यदि ऐसा है, तो हिंसा में शामिल गांव वालों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उकसाने वालों की जवाबदेही भी तय होना जरूरी है।
जब राज्य सरकार बस्तर जैसे इलाकों में कड़े नियंत्रण का दावा करती है, तो रायगढ़ जैसे औद्योगिक जिले में इतनी संगठित अराजकता कैसे पनपी—यह प्रश्न प्रशासनिक तैयारियों पर भी उंगली उठाता है।

सिर्फ जनसुनवाई नहीं, शासन की कसौटी

27 दिसंबर की घटना अब सिर्फ एक जनसुनवाई का मामला नहीं रही। यह कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और शासन की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुकी है। जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या कार्रवाई हर स्तर के जिम्मेदारों तक पहुंचेगी, या फिर जवाबदेही निचले स्तर तक ही सीमित रह जाएगी?

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