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सुप्रीम कोर्ट ने CBI की जांच पर उठाए सवाल, अधूरी CAG रिपोर्ट से कोयला कंपनी पर दर्ज आपराधिक मामले को किया खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक ईएमटीए कोल माइंस लिमिटेड के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस मामले में सीबीआई द्वारा एक अधूरी और अंतिम रूप से अप्रमाणित CAG रिपोर्ट पर भरोसा करने को अनुचित बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स को संसद की समीक्षा के बिना आपराधिक मामलों का आधार नहीं बनाया जा सकता।सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की जांच को ‘फिशिंग और रोविंग इंक्वायरी’ करार देते हुए उसकी तीखी आलोचना की।

अदालत ने कहा कि सीबीआई ने एक साधारण संविदात्मक विवाद को आपराधिक मामला बना दिया, जो कि गलत है। कोर्ट का यह फैसला उन मामलों में सख्त प्रक्रिया और सावधानी बरतने की जरूरत को दोहराता है, जहां नागरिक विवादों को आपराधिक रूप दिया जाता है।

इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि आपराधिक जांच के लिए ठोस और निष्कर्षपूर्ण साक्ष्यों की आवश्यकता होती है, न कि अधूरी रिपोर्टों और अटकलों पर आधारित आरोपों की।

बहुत जरूरी हो तभी आरोपी को गिरफ्तार करे पुलिस- सुप्रीम कोर्ट

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देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को अपराधियों की गिरफ्तारी के महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि अगर बहुत ज्यादा जरूरी न हो तो पुलिस आरोपी को गिरफ्तार न करे।

सुप्रीम कोर्ट ने जेल में कैदियों की संख्या कम करने और संक्रमण रोकने के उद्देश्य से यह जरूरी दिशा निर्देश जरुरी किये हैं। शीर्ष अदालत ने देश के सभी राज्यों की पुलिस से कहा है बहुत ज्यादा जरूरी न हो तो गिरफ्तारी न करें।

चीफ जस्टिस(CJI) एनवी रमना, जस्टिस एल नागेश्वर राव और सूर्यकांत की बेंच ने जेल में कैदियों की संख्या घटाने के लिए ये निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इसके साथ ही राज्यों से कहा कि ‘हमारे पुराने आदेश के अनुसार जिन्हें पैरोल दी गयी थी उन्हें 90 दिन की फरलो पुनः दे दी जाए इसमे कोई देर न करें।’

सुप्रीम कोर्ट ने ‘Central Vista Project’ पर रोक लगाए जाने की याचिका लौटाई, बोला पहले हाईकाेर्ट जाओ

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सुप्रीम कोर्ट(SC) ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट(Central Vista Project) पर रोक लगाए जाने की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए लौटा दिया है जिसमें यह मांग की गई थी कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर अविलंब रोक लगाई जाए कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि पहले वह हाईकोर्ट जाए।

जस्टिस विनीत शरण व दिनेश माहेश्वरी की बेंच ने याचिकाकर्ता को कहा कि वह उक्त मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष याचिका लगाए। इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट उचित निर्णय दे सकती है।

आपको बता दें कि देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच चालू सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाये जाने की मांग को लेकर अन्या मल्होत्रा और सोहेल हाशमी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि निर्माण कार्य में लगे सैंकड़ों मजदूर कोरोना की दूसरी लहर का शिकार हो सकते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई को टालते हुए 17 मई की तारीख तय की थी। सुनवाई टालने के निर्णय के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शरण ने कहा, ‘हम जानते हैं कि लोग मर रहे हैं। पर हम इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है। इसलिए हम इसमें दखल नहीं देंगे। बेहतर होगा कि आप दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष इस मामले की जल्द सुनवाई की अपनी मांग रखें। हाईकोर्ट याचिकाकर्ता की मांग पर विचार करे।’

फर्जी वोटर लिस्ट: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मानी वोटर लिस्ट में गड़बडी

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वोटर लिस्ट में फर्जी वोटर होने का आरोप लगा रही कांग्रेस पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटाक लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ की याचिका खारिज कर दी है। कमलनाथ के अलावा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी एक याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले ही चुनाव आयोग ने कांग्रेस की शिकायत पर ही वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण किया था। इस पुनरीक्षण में चौबीस लाख से अधिक ऐसे वोटरों के नाम हटाए गए थे जिनकी मृत्यु हो गई थी अथवा अन्य क्षेत्र में जाकर रहने लगे थे।

चुनाव आयोग का तर्क था कि नए स्थान पर वोटर लिस्ट में अपना नाम तो जुड़वा लेते हैं लेकिन, पुराने स्थान की लिस्ट से नाम नहीं कटवाते हैं। कांग्रेस ऐसे ही वोटरों का फर्जी बता रही थी। जबकि चुनाव आयोग लिस्ट में दोहराव मान रही थी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका खरिज हो जाने के बाद अब कांग्रेस के लिए वोटर लिस्ट में संशोधन के सारे रास्ते बंद हो गए हैं।

केंद्र सरकार बताये कैसे हुई राफेल सौदे पर डील,बंद लिफाफे में माँगा जवाब : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से फ्रांस के साथ हुई राफेल एयरक्राफ्ट डील पर जवाब मांगा। केंद्र से पूछा कि सरकार ने कैसे राफेल डील की, इसके बारे में पूरी जानकारी 29 अक्टूबर तक सीलबंद लिफाफे में दी जाए। इस संबंध में एक जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। इस पर अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोेगोई की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला किया है।

खंडपीठ ने कहा कि वह इस समय केन्द्र सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं कर रही है। इस याचिका में फ्रांस की कंपनी दसाल्ट द्वारा रिलायंस को दिए गए ठेके की जानकारी भी मांगी गई है। गौरतलब है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कांग्रेस भारी अनियमितताओं का आरोप लगा रही है।

कांग्रेस का कहना है कि केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार 1670 करोड़ रुपये प्रति राफेल की दर से इन विमानाें को खरीद रही है, जबकि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में इनकी कीमत 526 करोड़ रुपये प्रति विमान निर्धारित की गई थी।

मोदी के कहने पर रिलायंस को साझेदार बनाया

राफेल सौदे पर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार को घेर रही है। पिछले कई दिनों से कांग्रेस और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार में हुए राफेल सौदे पर सवाल उठाया है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट से 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद का जो सौदा किया है, उसका मूल्य पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में विमानों की दर को लेकर जो सहमति बनी थी उसकी तुलना में बहुत अधिक है। इससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। कांग्रेस ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौदे को बदलवाया और एचएएल से ठेका लेकर रिलायंस डिफेंस को दिया गया।

जस्टिस रंजन गोगोई ने मुख्य न्यायाधीश के पद की ली शपथ, नवंबर 2019 तक रहेगा कार्यकाल

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सुप्रीम कोर्ट के 46वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर बुधवार को जस्टिस रंजन गोगोई शपथ लेंगे। वह बुधवार से भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभालेंगे। बतौर सीजेआई जस्टिस गोगोई का कार्यकाल नवंबर 2019 तक रहेगा। देश के नागरिकों को उनसे काफी उम्मीदें हैं। वहीं अदालतों में पड़े करोड़ों मुकदमे और न्यायाधीशों के खाली पड़े पद उनके लिए बड़ी चुनौती होंगे।

हालांकि गोगोई इससे पहले ही एक बयान के जरिए संकेत दे चुके हैं कि मुकदमों का बोझ कम करने के लिए कोई कारगर योजना लागू की जा सकती है। जो कि आने वाले समय में न्यायपालिका के उज्जवल भविष्य के लिए बेहतर होगी। गोगोई बुधवार को जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ के साथ मुख्य न्यायाधीश की अदालत में मुकदमों की सुनवाई करने बैठेंगे। इस वक्त देशभर की अदालतों में 2.77 करोड़ मुकदमे लंबित हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट में 54 हजार मुकदमें लंबित हैं।

24 साल की उम्र से ही 1978 में शुरू कर दी थी वकालत

जस्टिस गोगोई ने 24 साल की उम्र से ही 1978 में वकालत शुरू कर दी थी। गुवाहाटी हाईकोर्ट में लंबे समय तक वकालत कर चुके 18 नवंबर 1954 को जन्मे जस्टिस गोगोई को सांविधानिक, टैक्सेशन और कंपनी मामलों का अच्छा-खासा अनुभव रहा है। जस्टिस गोगोई 28 फरवरी 2001 को गुवाहाटी हाई कोर्ट के जज बने थे। इसके बाद वह 9 सितंबर 2010 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने और यहीं 12 फरवरी 2011 को मुख्य न्यायाधीश बनाए गए। गोगोई ने 23 अप्रैल 2012 को सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में शपथ ली।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा राफेल डील का मामला, कोर्ट ने सुनाया यह फैसला।

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राफेल डील का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। सभी प्रमुख विपक्षी पार्टियां जहां इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है तो वहीं सरकार भी यहां बचाव की मुद्रा में आ गयी है। अनिल अंबानी ने कांग्रेस के कई नेताओं समेत नेशनल हेराल्ड अखबार पर मानहानी का मुकदमा कर दिया है।

मानहानी के बावजूद कांग्रेस जहां हर रोज इस मुद्दे को उठा रही है तो वहीं मोहन लाल नाम के एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर राफेल डील पर रोक लगाने की मांग की है।

अगले हफ्ते राफेल डील पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

वहीं मनोहर लाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में अगले हफ्ते सुनवाई करेगा।

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सुप्रीमकोर्ट से बीजेपी को बड़ा झटका, कल शाम 4 बजे बहुमत साबित करने का मिला आदेश ।

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कर्नाटक में बिना बहुमत के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले येदुरप्पा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस और जेडीएस ने राज्यपाल के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें राज्यपाल ने कर्नाटक में सरकार गठन के लिए बीजेपी को न्यौता दिया था। कांग्रेस की ओर से बहस करने के लिए कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल मौजूद थे। वहीं मुकुल रोहतगी बीजेपी का पक्ष रख रहे थे।

कोर्ट ने शनिवार को बीजेपी से बहुमत साबित करने की बात कही, लेकिन बीजेपी ने इसका विरोध किया। ऐसे में कोर्ट ने बीजेपी से पूछा कि आखिर कल बहुमत परीक्षण क्यों नहीं हो सकता। वहीं कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंंघी कल बहुमत परीक्षण के लिए तैयार थे। बहस के दौरान कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्यपाल कैसे बीजेपी को बहुमत सिद्ध करने का मौका दे सकते हैं, जबकि कांग्रेस-जेडीएस के पास पूरी संख्या है। सिंघवी ने यह भी कहा कि अगर कल बहुमत परीक्षण के लिए सदन को बुलाया जाता है, तो भी इस मामले में कानून सम्मत फैसला होना चाहिए कि क्या इस मामले में राज्यपाल फैसला ले सकते हैं।

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस-जेडीएस विधयकों को सुरक्षा देने का आदेश दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा में एंग्लो-भारतीय विधायक को नामित करने के राज्यपाल के फैसले पर रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने कल यानी शनिवार को शाम 4 बजे बहुमत परीक्षाण का आदेश दिया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बीजेपी कल बहुमत परीक्षण कराने के पक्ष में नहीं थी। लेकिन कांग्रेस-जेडीएस इसके लिए तैयार थे।

जिसके बाद कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु संघवी ने कहा कि ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साबित हो गया कि येदियुरप्पा के पास विधायकों की पर्याप्त संख्या नहीं है।येदियुरप्पा की तरफ से राज्यपाल को दिए गए जो पत्र सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए उसमें लगता है कि सरकार बनाने के लिए जरूरी विधायकों का सर्मथन नहीं था। इसीलिए हमें भरोसा है कि हम 100 फीसदी इस परीक्षण को जीतेंगे।

Live: येदियुरप्पा का शपथ ग्रहण रुकवाने के लिए कांग्रेस पहुंची सुप्रीम कोर्ट

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कर्नाटक के राज्यपाल द्वारा येदुरप्पा को शपथ दिलाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। देर रात 1:45 पर कांग्रेस-जेडीएस की अर्जी पर तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी। इस बेंच में जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस ए बोबडे शामिल हैं

दरअसल

कांग्रेस ने राज्यपाल के फैसले पर रोक लगाने के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय में अर्जी दाखिल की और अपील की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस देर रात को ही इस मसले को सुनें और फैसला दें।

कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा सदस्य और मशहूर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा और कांग्रेस नेता जी परमेश्वर की तरफ से अर्जी दाखिल की। अर्जी में अपील की गई है कि येदियुरप्पा का शपथ ग्रहण रोका जाए और उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन की मोहलत न दी जाए। अपील में विश्वास हासिल करने की मोहलत को कम करने की मांग की गई।

गुजरात चुनाव में कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक, नतीजे घोषित होने से पहले होगी ईवीएम की जांच !

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2014 के बाद भाजपा एक के बाद एक कई चुनाव जीतते आ रही है। वहीं विपक्ष इसके लिए ईवीएम को दोषी ठहरा रहा है। ईवीएम से फर्जीवाड़ा हुआ है या नही यह बताना अभी मुश्किल है लेकिन गुजरात मरीन कांग्रेस पार्टी ने ईवीएम फर्जीवाड़े से बचने के लिए एक मास्टर स्ट्रोक खेला है। 

गुजरात कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका

आपको बता दें कि गुजरात चुनाव के नतीजे 18 दिसंबर को घोषित होने है। कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगते हुए मांग की है कि नतीजा घोषित करने से पहले चुनाव आयोग हर विधानसभा सीट पर कम से 25% VVPAT मशीनों की पुनः जांच की जाए। 

गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भारत सोलंकी ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए कहा कि अगर ऐसा होता है तो जनता के बीच चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा बढेगा। 


गुजरात से आई ईवीएम फर्जीवाड़े की खबरें

इससे पहले मतदान के दौरान ईवीएम में फर्जीवाड़े को लेकर कई खबरें सामने आई थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि के ईवीएम मशीनों को ब्लूटूथ के माध्यम से हैक किया जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस का यह कदम कांग्रेस के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।