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क्यों कांग्रेस-जेडी(एस) गठबंधन को मिलना चाहिए पहले सरकार बनाने का मौका

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कर्नाटक की रणनीति इस समय राष्ट्रीय पटल पर छाई हुई है। चुनाव परिणामों में किसी भी पार्टी को बहुमत न मिलने के कारण गेंद अब गवर्नर के पाले में आ गयी है। एक तरफ 104 सीटों के साथ भाजपा है तो दूसरी तरफ है 117 विधायकों के समर्थन के साथ कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन। दोनो दल बारी बारी गवर्नर से मुलाकात कर चुके है। भाजपा जहां बहुतमत साबित करने के लिए 2 दिन का समय मांग रही थी तो वहीं कांग्रेस और जेडीएस ने 117 विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र गवर्नर को सौंप दिया है।

गवर्नर वाजुभाई पटेल से मिलने के बाद जेडीएस विधायक दल के नेता एचडी कुमारास्वामी ने कहा, “हमने कांग्रेस-जेडीएस के सभी विधायकों के साथ राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। हमने उन्हें 117 विधायकों के समर्थन का पत्र भी सौंपा है। राज्यपाल ने हमें आश्वासन दिया है कि वे कानूनी राय लेने के बाद इस मामले में अपना फैसला लेंगे।”

ऐसे में जनता के बीच एक सवाल उठ रहा है कि आखिर गवर्नर पहले किस पार्टी को सरकार बनाने का मौका देते है। जानकारों के अनुसार गवर्नर को बिना देर करे पहले कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन को बहुमत साबित करने का मौका देना चाहिए।

कांग्रेस- जेडीएस गठबंधन के पास है पर्याप्त बहुमत है। गठबंधन के पास 117 विधायकों का समर्थन है। गठबंधन ने 117 विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंप दिया है। कांग्रेस और जेडीएस ने सभी विधायकों को लेकर बैठक की और गवर्नर से मिलने की कोशिश भी की। हालांकि गवर्नर ने उन्हें इस बात की इजाजत नही दी।

अगर गवर्नर भाजपा को बहुमत साबित करने का मौका देते है तो उनके फैसले पर कई सवाल उठेंगे क्योंकि कर्नाटक से पहले कुछ ऐसी ही स्तिथि गोआ, मणिपुर और नागालैंड में बनी थी। जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इन राज्यों में भाजपा ने अन्य छेत्रिय दलों के साथ गठबंधन बनाया था। जिसके बाद पहले भाजपा को बहुमत साबित करने का मौका दिया गया।

अगर इन तीनों राज्यों में हुए निर्णय को सही माना जाए तो कर्नाटक में कांग्रेस और जेडी(एस) गठबंधन को सरकार बनाने का मौका पहले मिलना चाहिए।

जेडीएस के बयान के बाद कर्नाटक में बड़ी कांग्रेस की सरकार बनने की संभावनाएं।

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कर्नाटक में मतदान समाप्त होने के बाद अलग-अलग मीडिया संस्थानों द्वारा लगभग एक दर्जन एग्जिट पोल किये गए। किस एग्जिट पोल में कांग्रेस की सरकार बनी तो किसी एग्जिट पोल में भाजपा सत्ता पर काबिज होती दिखाई दी। लेकिन ज्यातर एग्जिट पोल में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलता दिखाई नही दे रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनो ही पूर्ण बहुमत से 20-30 सीटें पीछे दिखाई दे रही है। वहीं देवगौड़ा की जेडीएस को 20 से लेकर 40 सीटें मिल रही है।

ऐसे में अगर कर्नाटक में किसी पार्टी को बहुमत नही मिलता है तो सत्ता की चाबी जेडीएस के हाँथ में रहेगी। जेडीएस जिस भी पार्टी को समर्थन देती है उसकी सरकार कर्नाटक में बनना तय है। मतदान से पहले जेडीएस भाजपा को समर्थन देने से इनकार कर चुकी है लेकिन सिद्धारमैया से देवगौड़ा की रंजिश भी जगजाहिर है।

जेडीएस के बयान ने कांग्रेस के लिए खोला सत्ता का दरवाजा

एग्जिट पोल सामने आने के बाद सिद्धारमैया के एक बयान ने कर्नाटक के सियासी समीकरण बदल दिए। सिद्धारमैया ने कहा कि ‘अगर कांग्रेस द्वारा किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो वह सीएम पद छोड़ देंगे। जिसके बाद देवगौड़ा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस कर्नाटक में किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाती है तो जेडीएस कांग्रेस को समर्थन दे सकती है।

ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अगर ऐसी स्तिथि बनती है तो कांग्रेस मलिकार्जुन खड़गे, केएच मुनियप्पा या फिर जी परमेश्वर को मुख्यमंत्री बन सकती है।