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इजरायल के बाद अब अमेरिका में भी मास्क पहनना जरूरी नही

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संयुक राष्ट्र अमेरिका में अब कोरोना का कहर समाप्त हो चला है और वहां की स्थिति सामान्य हो रही है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने कहा है कि पूरी तरह से टीका लगाए गए लोगों को अब मास्क पहनने की आवश्यकता नहीं है। सीडीसी ने आगे कहा कि यह निर्णय घर के अंदर और बाहर दोनों के लिए सही है। यह संकेत कि संयुक्त राज्य अमेरिका अब महामारी से आम जीवन के तरफ तेजी से लौट रहा है।

सीडीसी के घोषणा के बाद, राष्ट्रपति जो बिडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस बिना मास्क पहने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में पत्रकारों के सामने आए। बाइडेन ने कहा कि “मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। एक महान दिन। यह सफलता हमें इतनी जल्दी टीकाकरण करने से संभव हुआ है”।

नवीनतम सीडीसी के दिशानिर्देशों का उल्लेख करते हुए, बाइडेन ने कहा कि पूरी तरह से टीकाकरण वाले लोगों को कोविड -19 के अनुबंध का बहुत कम जोखिम है।

राष्ट्रपति बाइडन ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि ‘यदि आप पूरी तरह से टीकाकरण करवा चुके हैं, तो आपको भीड़ भाड़ वाले स्थानों को छोड़कर अन्य स्थान पर मास्क लगाने की आवश्यकता नहीं है.’ राष्ट्रपति ने कहा कि टीकाकरण आपके और आपके आसपास के लोगों के जीवन को बचाने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि 114 दिनों में 250 मिलियन वैक्सीन शॉट्स दिए गए हैं।

अमेरिका में 12-15 साल के बच्चों को लगेगी वैक्सीन, फाइजर-बायोएनटेक को दी हरी झंडी

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देश में कोरोना के चलते जारी तबाही के बीच अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने सोमवार को 12 से 15 साल के बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer-BioNTech) के वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है। एफडीए ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हमने 12-15 वर्ष के बच्चों में आपातकालीन उपयोग के लिए फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन को अधिकृत किया है।

दरअसल फाइजर ने मार्च महीने में बताया था कि 12 से 15 साल के 2,260 वॉलंटिअर्स को ये वैक्सीन दी गई जिसके बाद किसी भी बच्चे में कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने इस बात का दावा किया कि उनका वैक्सीन बच्चों पर पूरे 100 प्रतिशत असरदार है।

बता दे कि ये फैसला बच्चों के हित में तो है ही साथ उन्हें एक सामान्य जीवन जीने में मदद करेगा। इससे पहले वैक्सीन को 16 साल से अधिक उम्र वाले बच्चों के लिए मंजूरी दी गई थी। लेकिन बच्चों को वैक्सीन की मंजूरी देने से हम उन्हें इस कोरोना महामारी के प्रकोप से बचा सकते है।

अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बने जो बाइडेन,वहीं कमला हैरिस ने ली उपराष्ट्रपति की शपत

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जो बाइडन (Joe Biden) अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के तौर पर शपत ली है। वहीं, कमला हैरिस (Kamala Harris) ने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने अमेरिकी कैपिटल के वेस्ट फ्रंट में जो बाइडन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले जो बाइडन ने ट्वीट कर कहा कि यह ‘अमेरिका के लिए नया दिन है.’

कमला हैरिस ने पहली महिला, पहली अश्वेत और पहली दक्षिण एशियाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति बनकर इतिहास रचा। उन्हें सुप्रीम कोर्ट की पहली लैटिन सदस्य न्यायमूर्ति सोनिया सोटोमेयर ने पद की शपथ दिलाई।

जो बाइडन और कमला हैरिस शपथ लेने के लिए कैपिटल हिल जाने से पहले अपने परिवार के सदस्यों के साथ यहां एक स्थानीय ऐतिहासिक गिरजाघर में एक प्रार्थना सभा में शामिल हुए। बाइडन और हैरिस ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ ‘द कैथेड्रल ऑफ सेंट मैथ्यू द एपोस्टल’ में आयोजित सामूहिक प्रार्थना सभा में भाग लिया।

भारत-अमेरिका हिन्दी मैत्री सम्मेलन रविवार को

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इंदौर। हिन्दी भाषा के अंतरराष्ट्रीय प्रचार और अमेरिका में हिन्दी की स्थिति और चुनौतियाँ सहित हिन्दी के मार्ग से भारत-अमेरिका में कैसे बढ़ेगी मैत्री जैसे गंभीर विषयों पर मातृभाषा उन्नयन संस्थान एवं अमेरिका की हिन्दी प्रचार संस्था हिन्दी यूएसए मिलकर वर्चुअल विमर्श रविवार शाम को आयोजित कर रहे हैं।

इस आयोजन मे हिन्दी यूएसए के संस्थापक देवेंद्र सिंह, आकाशवाणी दिल्ली के पूर्व उपमहानिर्देशक लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ एवं हिन्दी यूएसए के स्वयंसेवक सुशील अग्रवाल बतौर वक्ता सम्मिलित होंगे तथा इस विमर्श का संचालन संस्थान के राष्ट्रीय सचिव गणतंत्र ओजस्वी करेंगे।

इस विमर्श का मुख्य उद्देश्य हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार करना और भारत और अमेरिकी व्यापारिक संवर्धन में हिन्दी की भूमिका के बारे में दोनों देशों की जनता को जागृत करना हैं।मातृभाषा उन्नयन संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने बताया कि ‘संस्थान का प्रयास है कि हिन्दी का दायरा सम्पूर्ण विश्व में फैले और लोग हिन्दी के महत्त्व को समझते हुए इसे अपनाएँ।’हिन्दी मैत्री सम्मेलन में अमेरिका और भारत से सैंकड़ो श्रोता जुड़ेंगे। इसका लाइव प्रसारण यूट्यूब आदि माध्यमों पर भी होगा।

हारे ट्रम्प, जो बिडेन बनेंगे राष्ट्रपति, कामाला हैरिस बनेंगी पहली महिला उपराष्ट्रपति

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अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों के नतीजे आ चुके हैं और वाइट हाउस की कमान अब डेमोक्रैट कैंडिडेट जो बाइडेन के हांथों में आना तय है। बाइडेन ने रिपब्लिकन कैंडिडेट डोनाल्ड ट्रंप को पीछे छोड़ते हुए पेंसिल्वेनिया अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही उन्हें जरूरी 270 इलेक्टोरल वोट मिल गए।

जीत की रिपोर्ट्स सामने आने के बाद बाइडेन ने ट्वीट किया-‘अमेरिका, मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि आपने देश के नेतृत्व के लिए मुझे चुना है। हमारे आगे का काम मुश्किल होगा लेकिन मैं वादा करता हूं कि मैं सभी देशवासियों का राष्ट्रपति रहूंगा- चाहे आपने मुझे वोट किया हो चा नहीं। आपने जो भरोसा मुझपर दिखाया है, उसे मैं पूरा करूंगा।’ बता दें कि पेंसिल्वेनिया में ट्रंप आगे चल रहे थे लेकिन जैसे-जैसे मेल-इन बैलेट की गिनती की गई, वैसे-वैसे बाइडेन आगे निकलते गए। इससे पहले खबरें आ रही थीं कि फिलेडेल्फिया में फर्जी बैलेट ले जाने के आरोप में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

राहुल गांधी ने भी दी बधाई

अमेरिका में पहली महिला उपराष्ट्रपति बनेंगी कमला हैरिस

कमला हैरिस ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति चुनाव जीत वे ऐसा करने वाली पहली महिला, पहली अश्वेत अमेरिकी और पहली एशियाई अमेरिकी बन गई हैं।

बता दें कि कमला हैरिस के माता और पिता भारत और जमैका से आए थे। कमला ने अपनी पार्टी की ओर से 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन किया था और पार्टी के दूसरे उम्मीदवारों बिडेन और अन्य का मुकाबला किया था। हालांकि वे पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो गईं थीं।

कोरोना पर संयुक्त राष्ट्र की बैठक में चीन- अमरीका आए सामने, एक दूसरे पर लगाए आरोप

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दुनिया भर में तबाही मैच चुकी कोरोना महामारी इस समय सभी देशों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। चीन से शुरू हुए इस वायरस ने अमरीका, रूम, जर्मनी, इटली, भारत, यूके समेत लगभग सभी देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। इसी मसले पर जब संयुक्त राष्ट्र ने बैठक बुलाई तो अमेरिका और चीन यहां पर भी आमने-सामने आ गए। अबतक अमेरिका UN-WHO के रोल पर सवाल खड़े कर रहा था, तो वहीं चीन ने यहां बैठक में दोनों की जमकर तारीफ की।

बैठक में क्या बोला चीन ?

कोरोना वायरस के मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गुरुवार को एक महाबैठक बुलाई, ये बैठक वर्चुअल थी. चीन ने यहां बैठक में कहा कि कोरोना वायरस एक ग्लोबल चुनौती है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जो अगुवाई की जा रही है चीन उसकी तारीफ करता है.


चीन की ओर से कहा गया कि कोरोना वायरस हर किसी के लिए खतरा है, जिसमें सभी को साथ आकर काम करना होगा. चीन संयुक्त राष्ट्र की उस अपील का भी समर्थन करता है, जहां उसने सभी देशों से अपने मतभेद भुलाकर पहले Covid-19 से लड़ने की बात कही. चीन ने यहां कहा कि चीन में जब कोरोना वायरस का संकट था, तब कई देशों ने उनकी मदद की. अब वो 100 से अधिक देशों को मदद पहुंचा रहे हैं.

बैठक में क्या बोला अमरीका?

अमेरिका की ओर से एक बार फिर यहां बैठक में चीन की नीयत पर सवाल खड़े किए गए. अमेरिका ने कहा कि इस संकट के वक्त में जरूरत है कि पारदर्शिता रखी जाए, ताकि हर कोई सच्चाई जान सके. अमेरिका ने दावा किया कि वह इस वक्त दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ मिलकर कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है.


बता दें कि अमेरिका की तरफ से पहले भी आरोप लगाया गया था कि चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मिलकर कोरोना वायरस की सच्चाई को छिपाया था, जिसका खामियाजा दुनिया भुगत रही है. इस बैठक में भी अमेरिका ने इस बात को दोहराया और अपील करते हुए कहा कि हर देश को सच के साथ सामने आने की जरूरत है.

माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक पॉल जी. एलन का निधन,कैंसर से थे पीड़ित

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माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक पॉल जी. एलन का सोमवार को अमेरिका के सिएटल में निधन हो गया। वह कैंसर (नॉन-होजकिंग लिम्फोमा) से पीड़ित थे। श्री एलन 65 साल के थे। पॉल जी. एलन की बहन सुश्री जोडी एलन ने कहा, ‘मेरा भाई हर स्तर पर एक अद्भुत व्यक्ति था। अधिकांश लोग श्री एलन को एक प्रौद्योगिकीविद और समाज-सेवी के रूप में जानते थे। हमारे लिए वह प्यारा भाई, चाचा और एक असाधारण दोस्त था।’

गौरतलब है कि पॉल गार्डनर एलन का जन्म 21 जनवरी 1953 को अमेरिका के सिएटल में हुआ था। उन्होंने बिल गेट्स के साथ मिलकर 1975 में माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना की थी। माईक्रोसॉफ्ट विश्व की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कम्पनी है।

अमेरिका वियना संधि के प्रोटोकॉल से निकल रहा बाहर, फिलीस्तीन से जुड़ा है मामला

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अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा कि अमेरिका वियना संधि के ऑप्शनल प्रोटोकॉल से बाहर निकल रहा है। बुधवार को व्हाइट हाउस में प्रेस को संबोधित करते हुए बोल्टन ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फैसला किया है कि अमेरिका राजनयिक संबंधों पर वियना संधि को लेकर हुए विवाद के कारण ऑप्शनल प्रोटोकॉल से बाहर निकल रहा है। बोल्टन ने कहा कि हमारा यह कदम फिलीस्तीन के उस मामले से जुड़ा है, जिसमें फिलीस्तीन ने अमेरिका के दूतावास को तेल अवीव से हटाकर जेरूसलम ले जाने पर सवाल खड़े किए थे। यह प्रोटोकॉल 1964 में अस्तित्व में आया था,जिसमें अमेरिका भी शामिल था।

बोल्टन ने आगे कहा की मैं जोर देकर यह कहना चाहता हूं कि अमेरिका राजनयिक मामलों पर वियना संधि से जुड़ा रहेगा लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि सभी पक्ष संधि के तहत अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों का पालन करेंगे।

क्या है वियना संधि?

वियना संधि एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जिसमे अबतक लगभग 191 देशों ने अपनी सहमति जताकर हस्ताक्षर किए हैं। 1961 में वियना कन्वेंशन हुआ था जिसमे इस अंतराष्ट्रीय संधि का प्रावधान किया गया।वियना संधि को 18 अप्रैल 1961 में पारित किया गया था पर लागू 24 अप्रैल 1964 से किया गया। इसमें हस्ताक्षर करने वाले देशों के द्वारा दूसरे देशो के राजनयिकों को विशेष सुविधाए उपलब्ध करायी जाती है ताकि राजनयिक बगैर किसी डर के अपने मूल देश के हितो के बारे में पक्ष रख सके। वियना संधि में कुल 53 आर्टिकल ( अनुच्छेद ) हैं।

भारत का रूस के साथ S-400 रक्षा सौदे पर हो सकता है समझौता,बढ़ी अमेरिका की चिंता

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को दो दिन की यात्रा पर भारत आ रहे हैं। पुतिन अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दोनों नेता ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध के मद्देनजर कच्चे तेल की स्थिति समेत विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं अंतराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं। इस दौरान रूस के साथ एस-400 वायु प्रतिरक्षा प्रणाली सौदे पर समझौता हो सकता है। 19वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेता रूसी रक्षा कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध की पृष्टभूमि में द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की भी समीक्षा कर सकते हैं। पुतिन की भारत यात्रा के दौरान मुख्य जोर एस-400 वायु प्रतिरक्षा प्रणाली सौदे पर समझौते पर केंद्रित रहेगा।

5 अरब डॉलर से ज्यादा का है एस-400 सौदा

व्लादिमीर पुतिन की इस यात्रा की मुख्य विशेषता एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति के लिए समझौते पर दस्तखत करना होगा और यह करार पांच अरब डॉलर की राशि से ज्यादा का होगा। पुतिन के शीर्ष विदेश नीति सलाहकार युरी उशाकोव ने कहा कि राष्ट्रपति 4 अक्टूबर को भारत रवाना हो रहे हैं और इस दौरान एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति के लिए समझौते पर जोर होगा। इस खरीद से अमेरिका के काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट (सीएएटीएसए) का उल्लंघन होगा। हालांकि इससे छूट मिलने की संभावना है।

अमेरिका की भारत को चेतावनी,रूस से हथियारों का सौदा करने पर लग सकते हैं प्रतिबंध

पुतिन के दौरे का असर अमेरिका और भारत के संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है। अमेरिका ने पुतिन के दौरे से पहले भारत को चेतावनी दी है। उसने कहा है कि मॉस्को के साथ किसी भी तरह का रक्षा सौदा करने पर भारत को अप्रत्यक्ष प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिकी प्रतिबंध कॉउंटरिंग अमेरिकास एडवर्सरीज़ थ्रू सैंक्शन एक्ट (CAATSA) कानून का हिस्सा हैं। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में रूसी हस्तक्षेप, सीरियाई विद्रोह में रूस की भूमिका और क्रीमिया पर कब्जा करने के लिए रूस को सजा देने के लिए इस कानून को लाया गया है। हम अपने सभी साथियों और साझेदारों से आग्रह करते हैं कि वह रूस के साथ ऐसा कोई लेन-देन नहीं करे, जिससे उसके खिलाफ CAATSA लगाना पड़े। अमेरिकी राष्ट्रपति इसमें छूट दे सकते हैं यदि यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए कोई खतरा नहीं हो।

मेडिसिन क्षेत्र में 2018 के नोबेल पुरस्कार से जेम्स पी.एलिसन और तासुकू होंजो होंगे सम्मानित

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नोबेल पुरस्कारों की सूची में पहली घोषणा मेडिसिन के क्षेत्र में हुई है। नेगेटिव इम्युन रेग्युलेशन के इनहिबिशन के जरिए कैंसर थेरेपी की खोज के लिए वर्ष 2018 का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से अमेरिका के जेम्स पी एलिसन और जापान के तासुकू होंजो को दिया गया है। इन दोनों वैज्ञानिकों को कैंसर थेरपी की खोज के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। कैंसर की दुर्लभ बीमारी की इलाज के लिए दोनों ने ऐसी थेरपी विकसित की है जिससे शरीर की कोशिकाओं (सेल्स) में इम्यून सिस्टम को कैंसर ट्यूमर से लड़ने के लिए मजबूत बनाया जा सकेगा।

दोनों वैज्ञानिकों को पुरस्कार राशि के तौर पर 1.01 मिलियन डॉलर (लगभग साढ़े 7 करोड़ रुपए) मिलेंगे। उन्हें 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में किंग कार्ल XVI गुस्ताफ के हाथों एक औपचारिक कार्यक्रम में यह इनाम मिलेगा।

नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत करने वाले एलफ्रेड नोबेल की बरसी के दिन इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।