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Stoners are the enemy of the society: CM Chouhan

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Chief minister Shivraj Singh Chouhan has made an announcement to bring a strict law against the stone pelting. Stoning is not a simple crime. It can even cost life of people, he further added. The order has been passed to form the strict law and soon the people will witness its postive outcome.

Actually, the stone pelting incident has come to light on the rally of Hindu organizations in MP. The police took an immediate action against the stone-pelters. Today Shivraj Singh Chauhan said that the stone-pelting people are enemies of the society, whatever it may be. It can kill someone and also led an atmosphere of fear, terror and even cause stampede.

CM Shivraj Singh Chauhan said that MP has always been state of proper Law and regulations. Earlier, there was only minor action, now we are going to make provision of severe punishment in it. These people not only throw stone, but also they damage government property. We will not leave such people, he added.

The CM said that our government has decided that we will not only take strong action against those who harm public property but also we will recover the amount from the accused. If his property is to be seized, we will do that too. With that we will make up for the loss. In the same way, if someone damages the property of any person, then that rowdy will compensate the damage.

कमज़ोर हुआ कांग्रेस का पंजा, 44 विधायकों के साथ CM पेमा खांडू ने दिया पार्टी से इस्तीफा

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NewBuzzIndia: लगातार चले राजनीतिक अस्थिरता के बाद मुश्किल से बानी सरकार के एक महीने बाद ही अरुणाचल प्रदेश में फिर से कांग्रेस की सरकार लड़खड़ा गई है। कांग्रेस के हाथ से फिर अरुणाचल प्रदेश निकलता हुआ नजर आ रहा है। सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि CM पेमा खांडू समेत 45 में से 44 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सभी बागी विधायकों ने क्षेत्रीय दल पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में शामिल हो गए हैं। खबर है कि पीपीए नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस का साथ दे सकता है। मई 2016 में भी पीपीए ने इस एलायंस का साथ दिया था जब राज्य में बीजेपी की सरकार बनी थी। 
इस पार्टी की स्थापना 1979 में एक क्षेत्रीय दल के रूप में हुई थी। भूतपूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल जो नबाम तुकी सरकार में मंत्री थे, फरवरी 2016 में पीपीए में शामिल हो गए थे। उस वक्त कांग्रेस के 24 विधायक उनके साथ पीपीए में शामिल हुए थे। शायद यही वजह है कि खांडू ने बीजेपी की जगह पीपीए को चुना है।

60 सदस्यीय अरुणाचल प्रदेश की विधानसभा में कांग्रेस के 46 विधायक हैं, जबकि बीजेपी के 11 विधायक हैं। कांग्रेस में पहली बगावत नवंबर, 2015 में हुई थी। तभी से वहां राजनीतिक उथल-पुथल का दौर जारी है। उस समय कांग्रेस की सरकार गिर गई थी और कालिखो पुल की अगुवाई में नई सरकार बनी थी, जिसे बीजेपी के 11 विधायकों ने समर्थन दिया था। 

अरुणाचल में मज़बूत हुआ “पंजा”, बनी कांग्रेस की सरकार

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NewBuzzIndia: लगातार कई महीनों से जिस तरह की राजनीतिक अस्थिरता अरुणाचल प्रदेश में पसरी हुई थी, आखिरकार अब सब कुछ सुलझा। पेमा खांडु राज्‍य के नए मुख्‍यमंत्री चुने गए हैं। कांग्रेस ने 44 विधायकों के समर्थन का दावा किया था जिसे राज्‍यपाल ने मान लिया। इसके चलते विश्‍वासमत नहीं कराया। इससे पहले कांग्रेस ने नबाम टुकी को सीएम पद से हटाकर खांडु को विधायक दल का नेता चुन लिया था। इसके चलते असंतुष्‍ट विधायक भी कांग्रेस के सााथ आ गए थे। 

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पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्‍ट्रपति शासन लगाने को गलत ठहराए जाने के बाद अरुणाचल प्रदेश में विश्‍वासमत किया जाना था। टुकी ने इसके लिए राज्‍यपाल से 10 दिन का समय मांगा था लेकिन गवर्नर ने शनिवार को ही विश्‍वासमत साबित करने को कहा।

पिता और चाचा पर भारी पड़ी अखिलेश यादव की राजनीति, रद्द हुआ कौमी एकता दल का सपा में विलय

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NewBuzzIndia:

  विगत कई दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए अंदाज़ों और अटकलों का दौर रहा। इस पसोपेश को किनारे करते हुए प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी  समाजवादी पार्टी में कौमी एकता दल के विलय की संभावनाओं पर विराम लगते हुए अंतिम निर्णय दे दिया गया है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हठ के आगे पार्टी के दिग्गजों को झुकना ही पड़ा। मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय रद्द कर दिया गया है। समाजवादी पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही कौमी एकता दल का सपा में विलय कराने के सूत्रधार रहे बलराम यादव की कैबिनेट में वापसी हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम में मुलायम सिंह यादव प्रत्यक्ष रूम से सामने नहीं आए लेकिन सूत्रों से ये खबर मिली की कहीं न कहीं सपा प्रमुख का मोह कौमी एकता दल से जुड़ा था।

संसदीय बोर्ड की बैठक में चार अहम फैसले लिए गए। पहला फैसला कौमी एकता दल के विलय को रद्द करने का रहा। 2 घंटे तक चली समाजवादी पार्टी की बैठक में ये फैसला लिया गया। इस फैसले से एक बात साफ हो गई कि अपने चाचा शिवपाल यादव पर सीएम अखिलेश यादव भारी पड़ गए हैं। दूसरा अहम फैसला बलराम यादव की अखिलेश मंत्रिमंडल में वापसी का है। कौमी एकता दल के एसपी में विलय से सीएम नाराज हो गए थे। इस विलय के सूत्रधार रहे बलराम यादव को अखिलेश ने फौरन अपने मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया था। लेकिन अब विलय रद्द होते ही बलराम यादव की वापसी हो गई।

इसके अलावा दो और अहम फैसले इस बैठक में लिए गए। अब सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह समाजवादी पार्टी का चुनाव से ऐन पहले पुनर्गठन करेंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पूरे सूबे का दौरा करेंगे। माना जा रहा कि वो चुनाव से पहले हवा का रुख भांपने के लिए हर जिले का दौरा करेंगे।