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Paytm ने शुरू किया वैक्सीन स्लॉट फाइंडर, कहा इससे अपना स्लॉट बुक करने में मिलेगी मदद

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देश भर में कोरोना से बचाव के लिए वैक्सिनेशन अभियान चल रहा है। केंद्र सरकार सभी वर्गों के लिए एक साथ वैक्सिनेशन शुरू कर देने से कई जगह वैक्सीन की किल्लत शुरू हो गई है।

बता दे कि पेटीएम ने कोविड वैक्सीन स्लॉट सर्च करने के लिए नया टूल (Paytm Vaccine Slot Finder) लॉन्च किया है। इसके जरिये यूजर्स को पता चल सकेगा कि उनके एरिया में वैक्सिनेशन के लिए कहाँ कितने स्लॉट उपलब्ध है। इसके द्वारा यूजर्स को उस वक्त अलर्ट मिल जाएगा जब स्लॉट खाली होंगे। यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है।

पेटीएम ने दावा किया है कि ये रियल-टाइम में देशभर में उपलब्ध वैक्सीन स्लॉट को ट्रैक कर रही है। इसके जरिए नए वैक्सीन स्लॉट ओपन होने पर स्लॉट बुक कर सकते हैं और इंस्टेंट अलर्ट पा सकते हैं।

Jab after three months of recovery says government

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The health ministry has introduced new guidelines of vaccination for those who have recovered from corona virus on Wednesday. According to the recent advisory of the central government, infected person can take their jab 3 months after their recovery.

The ministry said that they had accepted the recommendations of the National Expert Group on Vaccine Administration for COVID-19 (NEGVAC). “These recommendations have been based on the evolving situation of the COVID-19 pandemic and emerging global scientific evidence and experience,” the union health ministry added.

It has also been told that the second dose of Covid vaccine should be delayed by three months for anyone contracting the disease after their first dose. As there was no fixed gap for taking a vaccine in such situations. Individual physicians recommended a gap of two or four weeks depending on the condition of the patient.

Since the National Technical Advisory Group on Immunisation (NTAGI) had recommended that those who tested positive for Covid-19 should defer vaccination for six months after recovery, last week.

Nevertheless, the Centre has announced the changes that a jab can be taken 3 months after recovering from Covid-19 as well as it is recommended for all lactating women.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बड़ा फैसला, 1 जून से धीरे धीरे खोले जाएंगे जिले

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मध्य प्रदेश में कोरोना के कम होते मामलों के बाद अब 1 जून से जिलों को अनलॉक करने की प्रक्रिया शुरु कर दी जाएगी। दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका एलान किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब कोरोना पूरी तरह काबू में आ गया है और अब जून से प्रदेश को अनलॉक करने की प्रक्रिया शुरु की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले 31 मई तक कोरोना कर्फ्यू का सख्ती से पालन किया जाएगा और इसमें किसी भी प्रकार से छूट नहीं दी जाएगी। फिर 31 मई तक सख्ती से कोरोना कर्फ्यू  का पालन कर गांव से लेकर शहरों को कोरोना मुक्त बनाना है। 

उन्होंने कहा कि कोरोना कर्फ्यू  के चलते कोरोना अब काबू में है। अब हमें टारगेट कर 31 मई तक गांव और वार्ड को कोरोना मुक्त करने की मुहिम शुरु करना होगा।  दूसरी ओर प्रदेश में कोरोना संक्रमण में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इस परिस्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और जनता को कहा लापरवाह

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने शनिवार को कोरोना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर के बाद जनता के साथ सरकार और प्रशासन लापरवाह हो गए थे । इसी के चलते कोरोना की दूसरी लहर नुकसान की वजह बनी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने आगे कहा कि कोरोना महामारी मानवता के सामने चुनौती है । हमें गुण-दोष की चर्चा किए बिना एक टीम के रूप में काम करना चाहिए। हम एक टीम के रूप में काम करे और अपने काम को तेज करके इस चुनौती को दूर कर सकते है।

उन्होंने कहा कि हमें पॉजिटिव रहना होगा और मौजूदा परिस्थिति में खुद को कोरोना नेगेटिव रखने के लिए सावधानियां बरतनी होंगी। वर्तमान परिस्थितियों में बेफिजूल बयान देने से भी बचना चाहिए। यह परीक्षा का समय है लेकिन हमें एकजुट रहना होगा और एक टीम की तरह कार्य करना होगा।

कोविड के वर्तमान हालात पर आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि सफलता और विफलता अंतिम नही है जारी रखने का साहस मायने रखाता है। उन्होंने आगे कहा कि हम इस परिस्थिति का सामना कर रहे है क्योंकि सरकार,प्रशासन और जनता, सभी कोविड की पहली लहर के बाद लापरवाह हो गए थे।

जहां वैक्सीन की कमी पूरे देश मे हो रही है वहीं बीजेपी सांसद अपने घर बुलवाकर करवा रहें है वैक्सीनशन

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मध्य प्रदेश के उज्जैन में कोरोना संक्रमण के मामले हर दिन बढ़ते जा रहे है। पूरे देश में लोग वैक्सीन लगाने के लिए अपना समय स्लॉट बुक करवाने में लगे है। वहीं सांसद अनिल फिरोजिया अपने घर पर बने कार्यालय पर ही समर्थकों के साथ टीका लगवा रहे हैं। सांसद के इस रवैये पर विपक्ष हमलावर हो गया ।  

बता दे कि विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर अपना मोर्चा खोल दिया है। उज्जैन के कांग्रेस विधायक महेश परमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि शहर में जो वैक्सीनेशन सेंटर चल रहे है उसे सांसद आवास में खोल देना चाहिए। विधायक का आरोप है कि लोग वैक्सीन लगवाने के लिए इधर से उधर भटक रहे है और सांसद अपने अधिकार का दुरुपयोग कर रहे है।

वहीं जवाब देते हुए सांसद फिरोजिया ने कहा कि जिन लोगों को टीका लगाया गया है वह सभी समाजसेवी है और ये लोग लगातार लंगर चलाकर जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध करा रहे है। सांसद ने आगे कहा कि यहां पर वैक्सीन लगवाने वाले सभी लोगों ने अपना रिजस्ट्रेशन पहले ही करा लिया था। इस पर हंगामा खड़ा करने की जरूरत क्या है। 

स्पुतनिक V की पहली खुराक हैदराबाद में आज एक व्यक्ति को लगाई, मार्किट में आने पर होगी इसकी इतनी कीमत

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कोरोना से जूझ रहे भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है। देश में अब कोवैक्सीन और कोविशील्ड के अलावा अब स्पुतनिक V को लगाने की शुरूआत हो गई है। जानकरी के अनुसार हैदराबाद में आज को स्पुतनिक V की पहली खुराक एक व्यक्ति को लगाई गई है।

बता दें कि भारत में डॉ. रेड्डी लैब ने स्पुतनिक V वैक्सीन की आयात की है। भारत पहुंचने के बाद आज इसकी कीमत भी तय हो गई है। स्पुतनिक V की एक खुराक की कीमत 995.40 रुपये होगी। वहीं अगले सप्ताह से ये वैक्सीन बाजार में भी उपलब्ध होगी।

डॉ. रेड्डी लैब ने कहा कि स्पुतनिक V का निर्माण भारत में होगा और इसलिए उसकी कीमत इतनी रखी गई है। गौरतलब है कि इस साल फरवरी में इस वैक्सीन के ट्रायल परिणामों को दि लांसेट में छापा गया था जिसके बाद इसे सुरक्षित और प्रभावशाली बताया गया है।

मध्यप्रदेश में असली रेमडेसिविर इंजेक्शन से हो रहीं है मरीजो की मृत्यु : मंत्री उषा ठाकुर

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मध्य प्रदेश की कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर ने इस दफा एक बड़ा बयान दे दिया है। और रेमडेसिविर इंजेक्शन पर ही उन्होंने सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि नकली रेमडेसिविर लगने के बाद भी लोगों की जान बच रही है। ये सोचने वाली बात है कि कहीं असली रेमडेसिविर इंजेक्शन की डोज देने के कारण मौत हो रही है।

उन्होंने कहा कि कई बार हाईडोज बहुत ज्यादा तकलीफ दे रहा है। मैंने खुद कई ऐसी मृत्यु देखी है जो मुझे भी लगता है कि इंजेक्शन के हाईडोज की वजह से हुई है। उदाहरण देते हुए कहा कि किसान संघ का नेता मोहन पांडेय उसे 6 रेमडेसिविर लगे, टोसी लगे लेकिन उसे बचा नहीं पाए।

उन्होंने आगे कहा कि रेमडेसिविर और टोसी संजीवनी बूटी नहीं है और न ही प्रमाणिक इलाज। कोई भी इसके पीछे ना पड़ें। ये डॉक्टर तय करेगा कि इंजेक्शन देना है या नहीं।

वहीं मंत्री ने यज्ञ की आहुति देने वाले बयान पर टिकी रही और कहा कि तथ्यों के आधार पर मैं प्रमाण दे सकती हूं कि वैदिक पद्धति कितनी कारगर है। स्वस्थ्य रहने के लिए वैदिक जीवन पद्धति को अपनाना ज़रूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ये माना है कि भारतीय वैदिक जीवन पद्धति को अपनाना ज़रूरी है।

अब 12 से 16 हफ़्तों के बीच लगाई जाएगी कोविशील्ड की दूसरी खुराक : NTAGI

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कोरोना के चलते भारत में लोगों का टीकाकरण हो रहा है। लेकिन कहीं न कहीं टीकाकरण के लिए पर्याप्त वैक्सीन नहीं मिल पा रही है। जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि 12 लाख लोगों को वैक्सीन के दूसरे डोज का इंतजार है। 

बता दे कि सरकार के राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह(NTAGI) ने कोविशील्ड टीके की दो खुराकों के बीच अंतर बढ़ाकर 12-16 हफ्ते करने की सिफारिश की है और इसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इसके अनुसार अब कोविशील्ड वैक्सीन की दो खुराक के बीच गैप 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह किया गया है।

सरकारी परामर्श समिति ने ये भी कहा कि कोविड-19 से पीड़ित रह चुके लोगों को स्वस्थ होने के बाद 6 माह तक वैक्सीन नहीं लगवाना चाहिए।इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन का हर विकल्प दिया जा सकता है। साथ ही साथ स्तनपान करवाने वाली महिलाएं बच्चे को जन्म देने के बाद किसी भी समय टीका लगवा सकती हैं। 

वहीं दिल्ली सरकार ने बुधवार को कहा था कि उन्हें 100 सेंटर सिर्फ इसलिए बंद करने पड़े क्योंकि उनके पास पर्याप्त टीका नहीं है। इसके साथ ही सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कहा है कि अगस्त से लगभग 10 करोड़ टीके का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

मध्यप्रदेश में स्थगित हुआ वैक्सीनशन, ये हैं वजह

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मध्य प्रदेश में वैक्सीन की कमी के चलते सरकार ने 45 से ज्यादा उम्र वालों का टीकाकरण स्थगित कर दिया है। हालांकि पहला डोज ले चुके 45+ को ही टीके का दूसरा डोज लगाया जाएगा।

बता दे कि इंदौर प्रशासन ने आज और शनिवार को वैक्सीनेशन नहीं करने का फैसला लिया है। बता दे कि कोविशील्ड वैक्सीन की कमी को देखते हुए टीकाकरण नहीं होगा। सिर्फ कोवैक्सीन का दूसरा डोज ही लगेगा। वहीं शहर में 18+ को आज से 28 केंद्रों पर टिका लगेगा।

वहीं जिन लोगों ने कोविशील्ड वैक्सीन का पहला डोज लगवाया है उनको अब 42 दिन बाद ही वैक्सीन का दूसरा डोज लगाया जाएगा। दरअसल कोविशील्ड को लेकर यह फैसला ब्रिटेन की स्टडी के आधार पर लिया गया है। जानकरी के अनुसार वैक्सीन का दूसरा डोज 6 से 8 हफ्ते में लगाने पर उसकी प्रभावशीलता 90% तक हो जाती है जबकि कम समय अंतराल पर 60 से 70 फ़ीसदी ही रहता है। अभी वैक्सीन का दूसरा डोज 28 से 42 दिन के बीच लग रहा था।

भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर अब परिजनों के लिए रात में रुकने हेतु की जाएगी व्यवस्था

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कोरोना वायरस संक्रमण से अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने भदभदा विश्राम घाट पर आये लोगों के लिए रात में ठहरने, खाने-पीने एवं सोने का इंतजाम किया गया है, ताकि जरुरत होने पर वे इन सुविधाओं का लाभ ले सकें।

भदभदा विश्राम घाट प्रबंधन समिति के सचिव मम्तेश शर्मा ने शनिवार केा बताया कि शहर के अस्पतालों में महामारी से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। इस कारण विश्राम घाट में शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए लंबी कतारें लग रही है। ऐसे में परिजनों को दाह-संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में दूसरे जिलों से आए लोगों को अपने परिजन की अस्थियां ले जाने के लिए रात में भोपाल में रूकना पड़ रहा है लेकिन कोरोना कर्फ्यू के कारण उन्हें भोजन और रहने की समस्या आ रही है।

शर्मा ने कहा कि लोगों की इन परेशानियों को देखते हुए स्थानीय लोगों की मदद से विश्राम घाट पर रहने और भोजन की व्यवस्था की गयी है। कोविड से मरने वालों के परिजनों का दाह संस्कार करने वाले लोग आवश्यकता अनुसार इन सुविधाओं का लाभ ले सकते है।

उन्होंने बताया कि विश्राम घाट में आजकल रोजाना करीब छह से सात लोग अपने परिजन की अस्थियां ले जाने के लिए रात को ठहरते हैं। उन्होंने बताया कि रात को रुकने वालों के लिए कुछ बिस्तरों का भी इंतजाम किया गया है।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार को विश्राम घाट में 60 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इनमें से 54 कोविड-19 से मरे थे, जिनमें 38 भोपाल जिले के थे, जबकि 16 अन्य जिलों के थे।