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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इस परिस्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और जनता को कहा लापरवाह

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने शनिवार को कोरोना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर के बाद जनता के साथ सरकार और प्रशासन लापरवाह हो गए थे । इसी के चलते कोरोना की दूसरी लहर नुकसान की वजह बनी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने आगे कहा कि कोरोना महामारी मानवता के सामने चुनौती है । हमें गुण-दोष की चर्चा किए बिना एक टीम के रूप में काम करना चाहिए। हम एक टीम के रूप में काम करे और अपने काम को तेज करके इस चुनौती को दूर कर सकते है।

उन्होंने कहा कि हमें पॉजिटिव रहना होगा और मौजूदा परिस्थिति में खुद को कोरोना नेगेटिव रखने के लिए सावधानियां बरतनी होंगी। वर्तमान परिस्थितियों में बेफिजूल बयान देने से भी बचना चाहिए। यह परीक्षा का समय है लेकिन हमें एकजुट रहना होगा और एक टीम की तरह कार्य करना होगा।

कोविड के वर्तमान हालात पर आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि सफलता और विफलता अंतिम नही है जारी रखने का साहस मायने रखाता है। उन्होंने आगे कहा कि हम इस परिस्थिति का सामना कर रहे है क्योंकि सरकार,प्रशासन और जनता, सभी कोविड की पहली लहर के बाद लापरवाह हो गए थे।

मोबाइल खरीदने के लिए भाई और बहन में हुआ झगड़ा, गुस्से में बहन ने लगाई बड़े तालाब में छलांग

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राजधानी भोपाल के बड़े तालाब में शनिवार की सुबह लगभग 6:15 बजे एक युवती ने छलांग लगा दी। वहीं छलांग लगाने के बाद वाकिंग कर रहे लोगों ने जब युवती को देखा तो तुरंत वीडियो बनाने लगे और उसकी हौसला अफजाई करने लगे। बता दें कि युवती ने छलांग उसके भाई कारण लगाई थी। उसका उसके भाई से झगड़ा हो गया था और उससे गुस्सा होकर उसने बड़े तालाब में छलांग लगा दी। जिसके बाद युवती के भाई ने उसे बचाने के लिए छलांग लगा दी। उसी दौरान जीवन रक्षा के गोताखोर मौके पर पहुंच गए और युवक युवती को बाहर निकाला।

बता दे कि युवती के कूदने के बाद लोग वीडियो बनाकर कई देर तक युवती का हौसला अफजाई करते रहे और उसे तैरने का तरीका भी बताते रहे। जिसके चलते की युवती डूबे ना और उसी दौरान उसके भाई ने भी छलांग लगा दी और उसे बचाया। जब तक यह सूचना गोताखोरों को मिली तब जल जीवन रक्षक के गोताखोर मौके पर पहुंच गए और फिर युवती को बचा लिया गया। वहीं थोड़ी देर बाद तुरंत पुलिस मौके पर पहुंच गई और युवती को हिरासत में ले लिया और इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया जहां उसका इलाज जारी है।

बताया जा रहा है कि युवती एयरपोर्ट रोड की रहने वाली है और उसका उसी के भाई से झगड़ा हो गया था। जिसके बाद उसने आकर बड़े तलाव में करीब छलांग लगा दी। झगड़े का कारण मोबाइल बताया जा रहा है। युवती के पास कैमरे वाला मोबाइल नहीं था और वह युवती कैमरे वाले मोबाइल के लिए माता-पिता से बात कर रही थी। उसी दौरान भाई आ गया और कहा कि मैं तुझे मोबाइल दिला दूंगा। लेकिन लॉकडाउन तो खुल जाए उसके बाद मोबाइल की दुकान खुलेगी तो मैं कैमरे वाला मोबाइल दिला दूंगा। इसी बात को लेकर दोनों भाई बहन में झगड़ा हुआ और वह स्कूटी उठाकर सीधे वीआईपी रोड पहुंच गई और छलांग लगा दी। जिसके बाद उसका भाई भी पीछे-पीछे आया और उसने भी युवती को बचाने के लिए पानी में छलांग लगा दी।

कोरोना की दवा 2डीजी अगले हफ्ते से होगी उपलब्ध

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देश में कोरोना वायरस का कहर अभी भी जारी है और इस बीच वैक्सीनशन पर अधिक जोर दिया जा रहा है। देश में अभी कोवैक्‍सीन या कोविशील्‍ड वैक्सीन लगाई जा रही है। रूस में निर्मित स्पूतनिक V के टीके भी बाजार में जल्दी ही उपलब्ध हो जाएंगे। इसके अलावा कोरोना की एक और वैक्सीन बाजार में आने वाली है जिससे कोरोना से लोगों को काफी राहत मिल सकती है।

दरअसल रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के अधिकारियों के कहा कि कोरोना की दवा 2 डीजी की 10,000 खुराक का पहला खेप अगले सप्ताह से बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। ये दवा कोरोना के मरीजों को जल्द ठीक करती है और उसके साथ साथ उनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करती है।

बता दे कि डीआरडीओ के निर्माताओं ने कहा है कि दवा निर्माता अपने उत्पादन पर तेजी लाने पर काम कर रहे हैं जिससे भविष्य में कोई परेशानी ना हो। आपको बता दें कि इस दवा को डीआरडीओ की एक टीम ने विकसित किया है। संकट के इस समय में वरदान मानी जा रही इस दवा को तैयार करने के पीछे तीन वैज्ञानिकों की मेहनत रही है जिनमे डॉ. सुधीर चांदना, डॉ. अनंत नारायण भट्ट और डॉ. अनिल मिश्रा शामिल है।

2-डीजी (2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज) दवा को ऐसे समय मंजूरी मिली है जब भारत कोरोना वायरस की महामारी की दूसरी लहर से घिरा हुआ है और देश के स्वास्थ्य अवसंरचना पर भारी दबाव है। खास बात यह है कि यह दवा पाउडर के रूप में पैकेट में आती है, इसे पानी में घोलकर पीना होता है।

इस दवा को लेकर रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि कोविड-19 की चल रही दूसरी लहर की वजह से बड़ी संख्या में मरीजों को ऑक्सीजन और अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ रही है। इस दवा से अधिक लोगों के बचने की उम्मीद है क्योंकि यह दवा संक्रमित कोशिकाओं पर काम करती है। यह कोविड-19 मरीजों के अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम करती है।

मध्यप्रदेश में अब ये अस्पताल नहीं कर सकेंगे कोविड मरीजो का इलाज

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मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले 6 निजी अस्पतालों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। अब ये अस्पताल कोविड मरीजों का इलाज नहीं कर पाएंगे। बताया जा रहा है कि सरकार के आदेश के बाद भी आयुष्मान योजना के तहत कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज नहीं कर रहे थे।

बता दें कि शहर का मेडिसिटी अस्पताल, शिवसागर अस्पताल, आकंक्षा अस्पताल, ट्रू केयर अस्पताल, नर्मदा अस्पताल एवं शुभम अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान योजना के तहत कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया था।

जिसके बाद इन अस्पतालों पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को नोटिस थमाने हुए अस्पताल का कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने की अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर बोले सारंग, कहा बढ़ाये जाएंगे आईसीयू बेड

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भोपाल: प्रदेश में कोरोना महामारी से अब राहत की खबर आ रही है। भोपाल में कोरोना पाजिटिविटी रेट में कमी दर्ज की गई है। शुक्रवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भोपाल में 35% पोसिटीवी रेट पहुँचा था। मगर लगातार प्रयासों से अब वह रेट कम हुआ है। उन्होंने आगे यह भी बोला कि अब अस्पतालों में बेड भी उपलब्ध है।

मंत्री सारंग ने कोरोना महामारी के व्यवस्था को लेकर कहा कि हर ज़िले कि स्थिति का आँकलन करके निर्णय लिया जाएगा। क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप यह तय करेगा की कौन से ज़िले में कैसी स्थिति है। उसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा।

जानकारों के अनुसार जैसा कहा जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर का आना तय है, उसे रोका नही जा सकता। इस पर सारंग ने बताया कि तीसरी लहर को लेकर बच्चों के लिए बढ़ाएँ जाएँगे ICU वार्ड। अस्पतालों में बच्चों के ICU बढ़ाया जा रहे है। चाहे वो निजी अस्पताल हो या फिर सरकारी।

सारंग ने यह भी कहा कि सरकार हर वर्ग के लिए काम कर रही है। अंत में उन्होंने दवाइयों की हो रही कालाबाजारी पर सख्त होते हुए बोला कि नक़ली इंजेक्शन बनाने वालों पर कार्यवाही लगातार कि जा रही है।

मध्यप्रदेश में असली रेमडेसिविर इंजेक्शन से हो रहीं है मरीजो की मृत्यु : मंत्री उषा ठाकुर

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मध्य प्रदेश की कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर ने इस दफा एक बड़ा बयान दे दिया है। और रेमडेसिविर इंजेक्शन पर ही उन्होंने सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि नकली रेमडेसिविर लगने के बाद भी लोगों की जान बच रही है। ये सोचने वाली बात है कि कहीं असली रेमडेसिविर इंजेक्शन की डोज देने के कारण मौत हो रही है।

उन्होंने कहा कि कई बार हाईडोज बहुत ज्यादा तकलीफ दे रहा है। मैंने खुद कई ऐसी मृत्यु देखी है जो मुझे भी लगता है कि इंजेक्शन के हाईडोज की वजह से हुई है। उदाहरण देते हुए कहा कि किसान संघ का नेता मोहन पांडेय उसे 6 रेमडेसिविर लगे, टोसी लगे लेकिन उसे बचा नहीं पाए।

उन्होंने आगे कहा कि रेमडेसिविर और टोसी संजीवनी बूटी नहीं है और न ही प्रमाणिक इलाज। कोई भी इसके पीछे ना पड़ें। ये डॉक्टर तय करेगा कि इंजेक्शन देना है या नहीं।

वहीं मंत्री ने यज्ञ की आहुति देने वाले बयान पर टिकी रही और कहा कि तथ्यों के आधार पर मैं प्रमाण दे सकती हूं कि वैदिक पद्धति कितनी कारगर है। स्वस्थ्य रहने के लिए वैदिक जीवन पद्धति को अपनाना ज़रूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ये माना है कि भारतीय वैदिक जीवन पद्धति को अपनाना ज़रूरी है।

मंत्री विश्वास सारंग बोले जारी है किल कोरोना अभियान

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भोपाल: प्रदेश में कोरोना का कहर अभी जारी है। रोजाना लगभग 10 हज़ार के करीब सक्रिय मामले दर्ज किए जा रहे हैं। कोरोना के गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में कील कोरोना अभियान चल रहा है। इसके साथ साथ
प्रत्येक घर में जाकर देख रहे है कि कोई क़ोरोना के लक्षण वाले व्यक्ति की जांच की जा रही है।

सारंग ने आगे बताया कि यदि किसी व्यक्ति में कोरोना संबंधी लक्षण पाए जाते हैं तो उनका तत्काल टेस्ट किया जा रहा है। टेस्ट के रिपोर्ट के अनुसार उनका उपचार भी किया जा रहा है। कोरोना जांच की रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के बाद उनका इलाज कोरोना प्रोटोकॉल के हिसाब से किया जा रहा है ।

मंत्री सारंग ने यह भी बताया कि मरीज को क्वारंटाइन सेंटर में रख कर और उनके स्वस्थ का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि स्टडी ये कहती है की मेडिकल किट बाटना सही निर्णय रहा है।

आपको बता दे कि किल कोरोना अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड नियंत्रण, बचाव व उपचार के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग, पंचायत विभाग के फ्रंट लाइन वर्कर सर्वे कर रहे हैं। ग्रामों में थर्मल स्कैनिंग और आक्सीजन लेवल की जांच प्राथमिक दल आशा, आंगनवाडी कार्यकर्ता, रोजगार सहायक सर्वे कर रहे हैं। इनमें सर्दी, खांसी व बुखार जैसे लक्षण होने पर उनकी लाइन लिस्ट करके द्वितीयक पर्यवेक्षण दल को जानकारी दी जाती है।

भोपाल के सरकारी अस्पताल में वार्ड बॉय ने किया महिला मरीज के साथ रेप, अगले दिन हो गई मरीज की मौत

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राजधानी के भोपाल मेमोरियल अस्पताल में भर्ती एक महिला मरीज के साथ वार्ड बॉय ने रेप की घटना को अंजाम दिया है। जानकारी मिली है कि अगले दिन उस महिला मरीज की मौत हो गई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेकिन पीड़िता के परिवार को रेप की जानकारी नहीं दी है।

दरअसल पुलिस ने इस मामले में रेप का मामला दर्ज किया है। वहीं रेप की घटना के बारे में अस्पताल प्रबंधन और पुलिस ने परिवार को अब तक जानकारी नहीं दी है। साथ ही परिवार के लोगों से रेप की बात छिपाते हुए पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया है। ये भी बताया जा रहा है कि आरोपी वार्ड बॉय पर एक नर्सिंग के छात्रा ने भी रेप का आरोप लगाया था।

बता दे कि आरोपी ने चेक करने के बहाने के महिला के साथ जबरदस्ती की थी। वहीं अब सवाल उठ रहे है कि पुलिस और अस्पताल के लोगों ने इस घटना की जानकारी उसके परिवार के लोगों को क्यों नहीं दी।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के कई शहरों में वार्ड बॉय की करतूतों से शर्मसार होना पड़ रहा है। कुछ दिन पहले ग्वालियर में भी वॉर्ड बॉय ने रेप की कोशिश की थी। और इंदौर में भी एक वॉर्ड बॉय पर छेड़छाड़ का केस दर्ज हुआ है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेसहारा परिवारों और बच्चों को देंगे 5000 रुपयें पेंशन

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मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत देने की घोषणा की है। सरकार ने बेसहारा परिवारों और बच्चों को हर महीने 5000 रुपये पेंशन देगी। इसके साथ ही बच्चों के लिए फ्री पढ़ाई की व्यवस्था करेगी।

उन्होंने कहा कि बच्चों को जीवन यापन के लिए परेशान ना होना पड़े। ऐसे सभी बच्चों के शिक्षा का नि:शुल्क प्रबंध किया जाएगा ताकि वह अपनी पढ़ाई लिखाई पूरी कर सकें। और साथ ही साथ ऐसे परिवार को फ्री में राशन दिया जाएगा।

सीएम ने कहा कि हमारी बहन कोई ऐसी है जो काम या नौकरी करना चाहती है तो उनको सरकार की गारंटी पर बिना ब्याज का ऋण काम या नौकरी के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा। ताकि फिर से वह अपना काम जीवन यापन के लिए प्रारंभ कर सके।

उन्होंने कहा कि बच्चों को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है वे प्रदेश के बच्चे है और प्रदेश उनकी चिंता करेगा। दरअसल एमपी में कई ऐसे बच्चे है जिनके माता-पिता का निधन कोरोना की वजह से हो गया है।

मध्यप्रदेश के इस जिले में नदी में तैरती हुई मिली लाशें

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उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा नदी में तैरती हुई लाशों के बाद अब मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना (Panna) जिले में भी इसी तरह का मामला सामने आया है। पन्ना जिले की रुनज नदी में लाशें  मिले है। पन्ना जिले के नंदनपुर गांव के लोग इस घटना से भयभीत है। ग्रामीणों को ये शव कोरोना से मरे मरीजों के होने की आशंका है।

दरअसल बिहार के बक्सर में भी शव तैरते हुए मिले थे। बिहार सरकार ने मंगलवार को कहा कि बक्सर जिले में गंगा से अब तक कुल 73 शव निकाले गए है। जिनके कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों के शव होने की आशंका जताते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि उन लाशों का अंतिम संस्कार नहीं करके उन्हें गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया गया होगा।

जानकरी के अनुसार बताया जा रहा है कि शव उन कोरोना पीड़ितों के है जिनके परिवार के सदस्यों द्वारा गरीबी के कारण और संसाधन के अभाव में शव को छोड़ दिया गया या सरकारी कर्मी इस डर से कि वे कहीं स्वयं संक्रमण की चपेट में न आ जाएं, शवों को नदी में फेंक कर फरार हो गए।