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बड़ा खुलासा: RBI की सांठ-गांठ से नोटबंदी के एक साल बाद तक बदले जा रहे पुराने नोट !

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आप को सुनकर हैरानी होगी पर यह सच है। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लागू की गई नोटबंदी एक साल बाद तक सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम यानी काळा धन को सफेद करने की योजना बन कर रह गयी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि नोटबंदी के एक साल बाद तक पुराने नोट बदले जा रहे है।

इंडिया टुडे के ऑपरेशन डेमो माफिया में हुआ खुलासा

अंग्रेजी न्यूज़ चैनल इंडिया टुडे ने अपने एक्सक्लूसिव स्टिंग ऑपरेशन डेमो माफिया में एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो नोटबंदी के एक साल बाद अभी तक मोटी कमीशन पर पुराने नोट बदल रहा है। आप को बता दें कि इंडिया टुडे के पत्रकार नितिन जैन ने स्टिंग ऑपरेशन कर दिल्ली की एक ऐसे गैंग का खुलासा किया है जो आरबीआई में काम कर रहे अफसरों से सांठ गांठ करके पुराने नोट बदल रहे है।

इंडिया टुडे के इस स्टिंग ऑपरेशन में दिल्ली के सरिता विहार के रहवासी शिवानंद अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर पुराने नोट को बदलवाने का दावा कर रहा है। रिपोर्टर नितिन जैन ने जब शिवानंद से पूछा कि वह कितना पैसा बदलवा सकता है ? तो जवाब में शिवानंद कहता है कि आप 100 करोड़ ले आओ या 200 करोड़ ले आओ हम बदलवा देंगे।
नोटबंदी से सिर्फ भ्रष्टाचारियों के आए अच्छे दिन
नोटबंदी में जहां 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी, हजारों की संख्या में कारखाने बंद हो गए, लाखों लोगों की नौकरी चली गयी और सरकार जश्न मना रही है। कुछ भी कहा लेकिन नोटबंदी के बाद अच्छे दिन तो आए ही है फिर चाहे वो भ्रष्टाचारियों के ही क्यों नही हो।

देखें इंडिया टुडे का ऑपरेशन डेमो माफिया

https://twitter.com/IndiaToday/status/928953471230820352

कभी नही किया नोटबंदी के समर्थन, सरकार को बताया था महँगी पड़ सकती है नोटबंदी : रघुराम राजन

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए रविवार को कहा था कि देश के गरीबों पर नोटबंदी का असर बहुत बुरा हुआ है । राजन ने कहा कि इस हिसाब से नोटबंदी  को आर्थिक सफलता के रूप में नहीं माना जा सकता है ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी का असर देश की जीडीपी और गरीबों को भुगतना पड़ा । 

राजन का कहना है कि उन्होंने सरकार से बात की थी और कहा था कि नोटबंदी की बजाय में आपको कालेधन को बाहर निकलने का कोई दूसरा उपाय बताता हूं । 

राजन के अनुसार उन्होंने फरवरी 2016 को नोटबंदी को लेकर सरकार के सामने अपने विचार रखे थे । इसके साथ ही RBI ने सरकार को दी रिपोर्ट में नोटबंदी की दिशा और समय बताया था । 
राजन ने कहा कि हमने सरकार को बताया था कि अगर पूरी तैयारी नही की गई तो उससे क्या नुकसान हो सकते है । राजन का कहना है कि हालांकि नोटबंदी का उद्देश्य सही था पर उसकी कीमत बहुत महँगी थी । 

राजन का कहना है कि नोटबंदी को आर्थिक तौर पर सफल नही कहा जा सकता । 

रविश कुमार ने अपने ही अंदाज में खोली नोटबंदी की पोल !

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वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार ने एक बार फिर नोटबंदी को आड़े हांथो लेते हुए मोदी सरकार पर हमला बोला है . दरअसल हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अध्यक्षा ने कहा है कि नोटबंदी ने भारतीय अर्थव्यस्था को धीमा कर दिया है . जिसका रविश कुमार ने अपने ही अंदाज में जवाब दिया है . रविश कुमार ने कहा है कि –

नोटबंदी के दौरान स्टेट बैंक की अध्यक्षा बोलती रहीं कि सब ठीक है। सरकार के बचाव में बैंक का बचाव भूल गईं। फिर बैंक बचाने के लिए खाता धारकों पर तरह तरह की सुविधा शुल्क थोपने लगीं । नोटबंदी के छह महीने बाद अब बोल रही है कि नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था धीमी कर दी है।अब सब कुछ अनिश्चित लग रहा है।

मेरी माने तो भारत को इससे घबराने की जरूरत नहीं है।इसके लिए करना ये होगा कि टीवी पर गाय, सेना का सम्मान, तलाक़, राष्ट्रवाद , एंटी नेशनल जैसे रोज़गार परक मुद्दे की फ्रीक्वेंसी बढ़ानी होगी। इससे भारत के बेरोज़गार भी गर्व करेंगे कि नौकरी उनके लिए जरूरी नहीं है। टीवी पर एेसे मुद्दे देखने और सोशल मीडिया पर इन मुद्दों का विस्तार प्रचार करने वालों के बीच रहने से याद भी नहीं आएगा कि रोज़गार ज़रूरी है। वैसे नोटबंदी से काला धन, नक्सलवाद और आतंकवाद समाप्त हो ही गया है।

 

टीवी पर कोल्ड ड्रिंक का विज्ञापन देखकर पीएम मोदी ने लिया था नोटबंदी का फैसला !

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Newbuzzindia : संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दिए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नोटबंदी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि टीवी पर कोल्ड ड्रिंक का एक विज्ञापन दिखाई देता है जिसमें ऐड कर रहा हीरो कहता है- ‘आज कुछ तूफानी करते हैं।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसी ऐड से प्रेरित होकर नोटबंदी का फैसला किया है।

विख्‍यात अमेरिकी अर्थशास्‍त्री स्‍टीव एच हैंके ने भी पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले की कड़ी आलोचना की है। हैंके ने कहा है कि नोटबंदी ‘लूजर्स’ (हारने वालों) के लिए है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अंदाजा नहीं है कि देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। मेरीलैंड की जॉन्‍स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले हैंके ने ट्वीट कर कहा, ”नोटबंदी हारने वालों के लिए है और यह शुरुआत से ही गलत तरीके से लागू किया गया। कोई नहीं, यहां तक कि मोदी को भी नहीं पता है कि भारत किस दिशा में जा रहा है।” वाशिंगटन के केटो इंस्‍टीट्यूट में ट्रबल्‍ड करंसी प्रोजेक्‍ट के निदेशक और वरिष्‍ठ फेलो, हैंके ने पहले कहा था कि ”भारत में मोदी की नोटबंदी को अपनाने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा नहीं है… उन्‍हें यह बात पता होनी चाहिए थी।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को रात आठ बजे राष्‍ट्र के नाम संबोधन में 500 और 1000 रुपए के करेंसी नोटों तत्‍काल प्रभाव से बंद कर दिए थे। पीएम ने इस फैसले को काले धन, जाली मुद्रा और भ्रष्‍टाचार पर कड़ी चोट बताया था और लोगों से 50 दिन के अंदर हालात सामान्य हो जाने की बात कही थी लेकिन करीब 90 दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। अभी भी लोगों के कैश की किल्लत से दो-चार होना पड़ रहा है। एटीएम के बाहर अभी भी कतारें लग रही हैं। कई एटीएम नोटबंदी के बाद से ही बंद पड़े हैं।

RBI गवर्नर को नही पता नोटबंदी के बाद कितने पुराने नोट हुए बैंकों में जमा !

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Newbuzzindia :भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल को बैंकों में जमा पुराने नोटों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। ऐसा आज उन्होंने वित्तीय मामलों की संसदीय समिति के सामने पेश होकर बताया।

यह समिति कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली के नेतृत्व वाली है। जिसके सामने आज गर्वनर को पेश होना था। समिति के एक सवाल के जवाब में गवर्नर ने नोटबंदी के बाद बैंकों में पुराने नोट कितने फीसद जमा हुए यह बताने से इंकार कर दिया। इसकी जानकारी समाचार चैनल NDTV को मिली है।

गवर्नर का यह बयान समिति को पहले दिए गए उस लिखित बयान के उलट है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री द्वारा 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोटों को प्रचलन से हटाने की घोषणा से सिर्फ एक दिन पहले 7 नवंबर को सरकार ने आरबीआई को बड़े रद्द नोटों को रद्द करने की ‘सलाह’ दी थी।

पटेल ने समिति को यह नहीं बताया कि प्रतिबंधित नोटों में से कितने बैंकों में वापस आ चुके हैं। इसके अलावा गवर्नर ने समिति को बताया कि नई करेंसी में 9.2 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में डाले जा चुके हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह कहना संभव नहीं है कि बैंकिंग व्यवस्था कब तक सामान्य होंगे। इसके बाद गवर्नर 20 जनवरी को केवी थॉमस वाली लोक लेखा समिति के सामने भी पेश हो सकते हैं।

आपको बता दें कि, आरबीआई की इस बात के लिए आलोचना हो रही है नोटबंदी को लेकर उसने पहले से पर्याप्त तैयारियां नहीं की थीं और उसने अपनी स्वायत्तता से समझौता किया।

अमर्त्य सेन ने नोटेबंदी को बताया ‘निरंकुश कार्यवाही’, कहा ‘देश को नहीं होगा कोई फायदा।’

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Newbuzzindia:​ भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार के विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार के 500 और 1000 वाले नोट बैन को निरंकुश कार्रवाई जैसा बताया है। एक अखबार को दिए अपने इंटरव्यू में प्रोफेसर सेन ने कहा, “लोगों को अचानक यह कहना कि आपके पास जो करेंसी नोट हैं वो किसी काम का नहीं है, उसका आप कोई इस्तेमाल नहीं कर सकते, यह अधिनायकवाद की एक अधिक जटिल अभिव्यक्ति है, जिसे कथित तौर पर सरकार द्वारा जायज ठहराया जा रहा है क्योंकि ऐसे कुछ नोट कुछ कुटिल लोगों द्वारा काला धन के रूप में जमा किया गया है।” उन्होंने कहा, “सरकार की इस घोषणा से एक ही झटके में सभी भारतीयों को कुटिल करार दे दिया गया जो वास्तविकता में ऐसा नहीं हैं।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या नोटबंदी का कुछ सकारात्मक असर दिखेगा जैसा कि प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, “यह मुश्किल लगता है। यह ठीक वैसा ही लगता है जैसा कि सरकार ने विदेशों में पड़े काला धन भारत वापस लाने और सभी भारतीयों को एक गिफ्ट देने का वादा किया था और फिर सरकार उस वादे को पूरा करने में असफल रही।”

नोटबंदी पर जनता ने दिया जवाब, राजस्थान की सभी 17 सीटों पर भाजपा को मिली करारी हार

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Newbuzzindia:नोटबंदी को ले कर के जिस तरह का रोष लोगों के बीच है वो मौका मिलने पर सामने आने लगा है। इस घोषणा के बाद भाजपा को सबसे बड़ा झटका राजस्थान के निकाय चुनाव में लगा है। इस चुनाव में भाजपा को करारी हार का मुंह देखना पड़ा है।राजस्थान के झालावाड़ निकाय चुनावों में बीजेपी ने 17 सीटें गवां दी हैं। सारी सीटों पर कांग्रेस का कब्जा हुआ है। नोटबंदी के बाद बीजेपी की ये सबसे बड़ी हार है। इससे पता चल रहा है कि देश की जनता नोटबंदी के बाद कितनी परेशान है।

कांग्रेस ने खोला नरेंद्र मोदी का नया “जीएसपीसी घोटाला” । 20,000 करोड़ का है घोटाला !

राजस्थान के झालावाड़ जिले में मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वसुंधरा राजे के झालरापाटन सीट से चुनाव मैदान में होने से राजनीतिक दृष्टि से यह सीट काफी महत्वपूर्ण हो गया था।

1978 में मोदी की डिग्री कंप्यूटर से कैसे छपी? क्या बिल गेट्स ने कोई स्पेशल कंप्यूटर भेजा: आप

इससे कहीं अधिक इस जिले का राजनीतिक महत्व इस बात को लेकर है कि जिले के शेष तीन विधानसभा सीटों खानपुर, मनोहरथाना और डग में राजे की उपस्थिति के बावजूद भाजपा के अपनी ही पार्टी के बागियों से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा।

जिन भाषणों से दूसरों को हराया, उसी से हार रहे हैं मोदी : रविश कुमार

बाबा रामदेव ने बनाई देशद्रोह की नई परिभाषा, कहा ‘नोटेबंदी के विरोधी देशद्रोही हैं।’

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Newbuzzindia:​ नरेंद्र मोदी सरकार के नोटबंदी का समर्थन करते हुए इस फैसले की आड़ में बाबा रामदेव ने देश को देशद्रोह की एक नई परिभाषा दे दी है। बाबा का कहना है कि इस फैसले का विरोध करना राष्‍ट्रद्रोह जैसा है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वे राष्‍ट्रद्रोह कर रहे हैं। उन्‍होंने संत समाज के साथ प्रेस कांफ्रेंस करतेे हुए कहा कि इस फैसले से आतंकवाद की फंडिंग बंद हुई है। आतंकवादियों को सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। देश की आजादी के बाद से नक्‍सलवाद से सबसे ज्‍यादा नुकसान हुआ है। इस कदम से उन्‍हें भी नुकसान पहुंचा है। आतंकवाद और नक्‍सलियों की फंडिंग रूकेगी। पाकिस्‍तान से आने वाले जाली नोट भी बंद हुए हैंं।
रामदेव ने कहा कि नोटबंदी से बैंकों की ब्‍याज दर भी कम होगी। इससे लोगों के लिए घर बनाना आसान हो जाएगा। विदेशों में ब्‍याज दर 5 प्रतिशत के करीब रहती है। जबकि भारत में यह रेट 12-15 प्रतिशत के बीच रहती है। सरकार के फैसले से ब्‍याज दर सात प्रतिशत पर आ जाएगी। 

 रामदेव ने कहा कि करप्‍ट लोग नहीं बदले तो मोदी जी ने नोट बदल दिया। बड़े नोट बंद होने से भ्रष्‍टाचारियों के लिए रिश्‍वत लेना मुश्किल हो जाता है। रामदेव ने कहा कि करप्‍ट लोग नहीं बदले तो मोदी जी ने नोट बदल दिया।  इससे पहले बाबा रामदेव ने कहा था कि नोटबंदी के फैसले से नरेंद्र मोदी की जान पर खतरा बढ़ गया है।

भाजपा के पूर्व मंत्री का मोदी सरकार पर हमला, कहा ‘नोटेबंदी का फैसला सोचा समझा नहीं है।’

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Newbuzzindia:​  नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष के हमलों में घिरी नरेंद्र मोदी सरकरा को अब अपनों से भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने हाल में ही दिए अपने बयान में कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार का फैसला “अच्छी तरह सोचा-समझा” नहीं था। हालांकि शौरी साथ ही ये भी कहा कि इस फैसले की मंशाल भली हो सकती है। शौरी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय विनिवेश मंत्री रहे थे।
अरुण शौरी ने कहा, “जिन लोगों को पास कालाधन या काली संपत्ति है वो उसे नकद के तौर पर नहीं रखते। भारत के एक प्रतिशत लोगों के पास देश की 53 प्रतिशत संपत्ति है। 10 प्रतिशत लोगों के पास देश की 85 प्रतिशत संपत्ति है। अब इन अमीर लोगों के पास कालाधन और बढ़ जाएगा। वो गद्दों के नीचे कालाधन नहीं छिपाने जा रहे।”  शौरी के अनुसार नोटबंदी के फैसले से गरीब नागरिकों का जीवन प्रभावित हुआ था जिनका रोज का जीवन नकद लेन-देन पर टिका होता है। शौरी के अनुसार कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को टैक्स नीति में बदलाव जैसे कदम उठाने चाहिए थे।
निजी टीवी चैनल एनडीटीवी को दिए अपने इंटरव्यू में शौरी ने कहा, “इसका मकसद कालाधन खत्म करना बताया गया है तो इसलिए हर कोई कहेगा कि बहुत अच्छा। लेकिन मुझे नहीं लगता कि ये स्ट्राइक (हमला) अच्छी तरह सोच-समझकर की गई है। ये स्ट्राइक कालेधन पर नहीं है। ये स्ट्राइक भारत में नोटों के कानूनी चलन पर है। ये नकद लेन-देन पर स्ट्राइक है।”

नोटेबंदी पर भाजपा नेता का प्रधानमंत्री मोदी पर फूटा गुस्सा, कहा ‘देश को भिखारी बना दिया है।’

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Newbuzzindia: देश में बड़े नोटों पर प्रतिबंध लगाने के बाद बैंकों में आम जनता को हो रही परेशानियों पर भारतीय जनता पार्टी की एक वरिष्ठ नेत्री ने रविवार को कहा कि बिना तैयारी के ही सरकार ने यह घोषणा कर दी है और सरकार के इस फैसले ने आवाम को भिखारी बना दिया है। केंद्र की सत्ताधारी भाजपा पार्टी की पूर्व उपाध्यक्ष लक्ष्मीकांता चावला ने अपने बयान में कहा, ‘देश में काले धन के प्रवाह को बंद करने के लिए केंद्र सरकार ने एक हजार और पांच सौ रूपये के नोटों को रद्द कर एक अच्छा काम किया है लेकिन देश की मौजूदा हालात देख कर ऐसा लगता है कि सरकार अभी इस निर्णय के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थी। सरकार ने बिना तैयारी के ही इस आशय की घोषणा कर दी है । मुझे लगता है कि सरकार को पहले बैंकों में पर्याप्त नोटो की आपूर्ति करानी चाहिए थी और उसके बाद मौजूदा नोटों का प्रचलन समाप्त किया जाता।’
बैंकों में जनता के सहूलियत के लिए अतिरिक्त काउंटर की वकालत करते हुए लक्ष्मीकांता ने आगे कहा, ‘जिन लोगों का पैसा बैंकों में जमा है उन्हें उनके आवश्यकता अनुसार धन मिलने की व्यवस्था बैंकों में होनी चाहिए थी । एक दिन में चार हजार के निर्णय ने आवाम को भिखारी बना दिया है क्योंकि उन्हें रोज कतार में खड़ा होना पड़ता है। बैंकों में और अधिक संख्या में काउंटर होने चाहिए । पर्याप्त संख्या में नोट, खास कर छोटे नोट होने चाहिए ताकि कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़े । इसके अलावा प्रति दिन दी जाने वाली राशि भी कम से कम दस हजार होनी चाहिए।